रविवार, 26 अप्रैल 2020

कोरोना से बचाव, सुरक्षा के संसाधनों का है अभाव

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने फिर किया शिवराज सरकार पर हमला

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज फिर एक बार कोरोना संकट से निपटने के लिए बचाव और सुरक्षा के संसाधनों का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि संसाधनों का अभाव चिंता का विषय है.
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों की संख्या को लेकर चिंंता जताई है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में पिछले एक माह में कोरोना संक्रमितो की संख्या 2 हजार के पार पहुंच गई है. अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. जांच के लिए अब भी करीब 9 हजार से जयादा सैम्पल पैंडिंग है. यह आंकड़ा निरंतर बढ़ता ही जा रहा है, जो चिंता का कारण बन रहा है. उन्होंने कहा कि वहीं हमारे पर दूसरी तरफ इन सबके बीच कोरोना से बचाव व सुरक्षा के लिए आवश्यक संसाधनो का अभाव है. मेडिकल उपकरणों का अभाव है तो  टेस्टिंग किट की कमी है.  बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं की रोज तश्वीरें सामने आ रही है. राशन की कमीके चलते आमजन की परेशानी  दिखाई देने लगी है. इन सब मामलों पर भी स्थिति बेहद चिंताजनक होती जा रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान से मांग की है कि  इस दिशा में सरकार को कड़े कदम उठाए जाने की जरुरत है.
नहीं सौंपा चिकित्सा शिक्षा विभाग का दायित्व
राज्य के पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा. विजय लक्ष्मी साधौ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान को पत्र लिखा है. उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि आपने मंत्रिमंडल तो बनाया, किन्तु उसमें आपके द्वारा चिकित्सा शिक्षा विभाग का दायित्व  किसी भी मंत्री को नहीं सौंपा, जबकि इस विभाग के अंतर्गत ही संक्रमितों के टेस्ट हो रहे हैं और इलाज भी चल रहे हैं. उन्होंने कहा कि रेपिड टेस्ट किट भी नकली निकले हैं. अच्छी गुणवत्ता वाले टेस्ट किट उपलब्ध कराएं जाएं. उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान से मांग की कि आप दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश की जनता के लिए इस महामारी से लड़ने के लिए कुछ करिए.
पूर्व मंत्री ने मुख्यमंत्री को दिए सुझाव
पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा. साधौ ने पत्र में मुख्यमंत्री शिवराज  सिंह चौहान को सुझाव दिए हैं कि कोरोना संक्रमण मरीजों के संपर्क में जो लोग आते हैं, डाक्टर, नर्स, पैरामैडिकल स्टाफ, टैक्निशियन, सफाई कर्मचारी, आशा कार्यकर्ता, पुलिस विभाग और राजस्व विभाग के कर्मचारियों को पीपीई किट उपलब्ध कराए जाएं. उन्होंने कहा कि संक्रमण के इस दौर में निजी क्लीनिक बंद होने के कारण गंभीर बीमारी के मरीज घरों में हैं. इन क्लीनिकों की सेवाएं भी ली जाए. उन्होंने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया है कि सामान्य सर्दी, जुकाम, साधारण बुखार या अन्य छोटी बीमारी के लिए लोग सीधे दवा दुकानों पर जाकर दवाईयां ले रहे हैं, जिसके चलते कोरोना की जांच किया जाना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार की तरह दवा विक्रेताओं को निर्देश दें कि वे बिना डाक्टर के दवा लेने आता है तो उसका नाम, पता टेलीफोन नंबर लेकर क्षेत्र के अधिकारी को सूचित करे.
गूगल मैप पर टैग की संक्रमितों की जानकारी
स्वास्थ विभाग ने राजधानी भोपाल में कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद ठीक हुए मरीजों की निगरानी की तैयारी भी शुरू कर दी है. अस्पताल से छुट्टी होने के बाद घर पहुंचे सभी लोगों के आवास की गूगल मैप पर लोकेशन लेकर उनकी जियो टैगिंग कर ली गई है, ठीक होने वाले मरीजों को यूनिक आईडी देकर उनके नाम, आवास, उम्र की जानकारी भी मेप पर टैग कर दी गई है.  गूगल मेप पर ठीक होने वाले मरीजों की यूनिक आईडी डाल कर डिजिटल नेविगेशन के जरिए जल्द से जल्द उन तक पहुंचा जा सकेगा. भोपाल में अब तक ऐसे 106 लोगों की जियो टैगिंग कर ली गई है.

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