शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

शिवराज ने उमा, दिग्विजय और कमलनाथ से कोरोना से निपटने मांगे सुझाव



मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान ने राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों दिग्विजय सिंह, उमा भारती और कमलनाथ से फोन पर चर्चा कर कोरोना वायरस से निपटने को लेकर सुझाव मांगे.
प्रदेश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की चिंता और बढ़ गई है. राज्य में इसके संक्रमितों की संख्या अब 4 सौ से ज्यादा हो गई है, जिसमें इंदौर में सबसे ज्यादा और उसके बाद भोपाल में इसके संक्रमित मरीज मिल रहे हैं. राज्य में कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है. सरकार द्वारा किए जा रहे लगातार प्रयासों के बावजूद भी जब इस संक्रमण पर काबू नहीं पाया जा सकता तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान ने आज राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों दिग्विजय सिंह, उमा भारती और कमलनाथ से फोन पर संपर्क किया और उन्हें अब तक किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी और कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए किस तरह के प्रयास किए जाएं इसको लेकर सुझाव एवं सहयोग भी मांगा है. शिवराज ने कांग्रेस के दोनों मुख्यमंत्रियों दिग्विजय सिंह और कमलनाथ से राजनीति छोड़कर प्रदेश हित में यह सुझाव मांगा है. 
शिवराज ने जनता की जान खतरे में डाली
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि वन मेन आर्मी के नायक बनने के चक्कर में एक्सीडेंटल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता की जान खतरे में डाल दिया है. सिंह ने कहा कि कोरोना से बचाव के बदले में अपने प्रचार और पीआर करने में मुख्यमंत्री लगे हैं.  मध्यप्रदेश पूरे देश में ऐसा राज्य है जहां हालात निरंतर बदतर होते जा रहे हैं. पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि आज जनता की चिंता में दुबले हो रहे शिवराज सिंह जवाब दें कि जब पूरा विश्व और हमारा देश कोरोना के कहर से ग्रसित था तब वे मध्यप्रदेश में सरकार गिराने और मुख्यमंत्री बनने के सपने को साकार करने में लगे थे. पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भोपाल और इन्दौर में जिस तेजी से हालात बदतर हो रहे हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश का  दूर दराज इलाका कितनी खतरनाक स्थिति से गुजर रहा होगा. ग्रामीण क्षेत्रों की तो अभी तक कोई सुध नहीं ली गई है. अजय सिंह ने कहा कि अपने निजी स्वार्थों और खरीद फरोख्त की राजनीति के संकट से घिरे शिवराज मंत्रिमंडल का गठन नहीं कर पा रहे हैं. इससे निरंतर हालात खराब हो रहे हैं. 

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