शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

सरकार ने रद्द किया महेश्वर परियोजना समझौता

नर्मदा बचाओ आंदोलन और विस्थापित कर रहे थे 23 साल से संघर्ष

प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 26 सालों के बाद महेश्वर परियोजना समझौते को रद्द कर दिया गया है. सरकार ने माना है कि यहां से मिलने वाली बिजली काफी महंगी है. हालांकि इस परियोजना से अभी तक किसी भी प्रकार का उत्पादन नहीं हुआ है, लेकिन राज्य सरकार को सीधे तौर पर 42 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी, जो कंपनी को अनुबंध के तहत दी जानी थी.
राज्य सरकार के उपक्रम मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा 18 अप्रैल को प्रयोजनाकर्ता  महेश्वर हायडल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को भेजे गए आदेश में कहा गया है कि परियोजनाकर्ता ने विद्युत क्रय समझौते के तमाम प्रावधानों का उल्लंघन किया है, परियोजना में वित्तीय धोखाधड़ी हुई है और साथ ही परियोजना से बनने वाली बिजली की कीमत 18 प्रति यूनिट से अधिक होगी. अत: यह परियोजना सार्वजनिक हित में नहीं है. इसलिए इसके विद्युत क्रय समझौते सन 1994 एवं संशोधित समझौते 1996 को रद्द किया जाता है. इसके बाद दिनांक  20 अप्रैल के आदेश के द्वारा इस परियोजना के संबंध में किए गए पुनर्वास समझौते और  21 अप्रैल के आदेश के द्वारा इस परियोजना के संबंध में दी गई एस्क्रो गारंटी को भी रद्द कर दिया गया है.
400 मेगावाट क्षमता की महेश्वर जल विद्युत परियोजना से मात्र 80 करोड़ यूनिट बिजली पैदा होना प्रस्तावित है. जारी आदेश में स्वीकार किया गया है कि इसकी बिजली की कीमत 18 रुपए प्रति यूनिट से अधिक होगी. मध्य प्रदेश में वर्तमान में बिजली प्रदेश की समूची मांग पूरी करने के बाद भी 3 हजार करोड़ यूनिट अतिरिक्त है और वर्त्तमान में बिजली 2.5 रुपए यूनिट की दर पर उपलब्ध है. अत: महेश्वर की बिजली बनती भी तो खरीदी नहीं जा सकती थी. परन्तु महेश्वर परियोजनाकर्ता से हुए विद्युत क्रय समझौते के अनुसार बिजली न खरीदने पर भी सरकार को निजी परियोजनाकर्ता को लगभग 1200 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष, 35 वर्ष तक देना पड़ता. 
23 साल किया विस्थापितों ने संघर्ष
महेश्वर परियोजना के खिलाफ नर्मदा बचाओ आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ता आलोक अग्रवाल, चित्तरूपा पालित व महेश्वर बांध प्रभावितों के नेतृत्व में गत 23 वर्षों से अनवरत संघर्ष किया जाता रहा है. नर्मदा आंदोलन ने आंकड़ों और दस्तावेजों के आधार पर प्रारंभ से ही यह दर्शाया था कि इस परियोजना से कम बिजली बनेगी और वह बहुत महंगी होगी. साथ ही परियोजनाकर्ता एस कुमार्स के साथ हुए जन विरोधी विद्युत क्रय समझौते के कारण, मध्य प्रदेश सरकार को यह बिजली 35 साल तक खरीदनी ही पड़ेगी और यदि नहीं भी खरीद पाए तो भी हर साल भारी भरकम भुगतान करना होगा. 
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