शनिवार, 27 अप्रैल 2024

ग्वालियर-चंबल में बागी बिगाड़ रहे समीकरण

सियासी पकड़ वाले नेताओं के गढ़ में बसपा की सेंधमारी


भोपाल। ग्वालियर-चंबल अंचल की चार में से तीन सीटों ग्वालियर, मुरैना और भिंड में कांग्रेस के बागियों ने भाजपा और कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। तीनों ही स्थानों पर कांग्रेस के बागी बसपा के प्रत्याशी बनकर मैदान में है। इसके चलते सियासी पकड़ वाले नेताओं के गढ़ में राजनीतिक समीकरण भी बिगड़ रहे हैं। दोनों ही दलों के नेताओं की नाराजगी के बीच मतदाता मौन है।
लोकसभा और विधानसभा दोनों ही चुनाव में ग्वालियर-चंबल अंचल की अहम भूमिका रही है। इस अंचल की चार सीटों गुना, मुरैना, भिंड और ग्वालियर में 7 मई को मतदान होना है। इनमें गुना को छोड़कर सभी तीनों सीटों पर करीब-करीब त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन गए हैं। तीनों ही लोकसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के बागियों ने बसपा के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरकर भाजपा और कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। ग्वालियर में कांग्रेस के कल्याण सिंह कंसाना टिकट के दावेदार थे, कांग्रेस ने उनके स्थान पर विधानसभा चुनाव हारे प्रवीण पाठक को चुनाव मैदान में उतारा तो कंसाना कांग्रेस का साथ छोड़ा और हाथी की सवारी कर ली। वे ग्वालियर सीट से मैदान में उतरे हैं। इसके चलते ग्रामीण अंचल में गुर्जर वोटों में कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा के समीकरण भी बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
ग्वालियर की ही तरह भिंड संसदीय सीट पर भी कांग्रेस से टिकट की दावेदारी कर रहे देवाशीश जरारिया ने कांग्रेस छोड़कर बसपा का दामन थामा और चुनाव मैदान में उतर गए हैं। यहां पर कांग्रेस के विधायक फूलसिंह बरैया मैदान में हैं। जरारिया के मैदान में उतरने से बरैया की चिंता बढ़ गई है। वैसे भाजपा ने भी यहां वर्तमान सांसद संध्या राय को मैदान में उतारा है, जिसके चलते स्थानीय नेताओं के अलावा मतदाता की भी नाराजगी सामने आई है। यहां बसपा प्रत्याशी के मैदान में उतरने से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए चुनौती खड़ी हो गई है।
मुरैना में हुआ कड़ा और रोचक मुकाबला
मुरैना संसदीय सीट पर कांग्रेस ने सत्यपाल सिकरवार को चुनाव मैदान में उतारा है। इससे नाराज उद्योगपति रमेशचंद्र गर्ग ने कांग्रेस छोड़कर बसपा का दामन थामा और वे भी चुनाव मैदान में उतरे हैं। सिकरवार को टिकट देने से कांग्रेस के दूसरे नेता भी नाराज नजर आ रहे हैं। इसके कारण यहां समीकरण बिगड़े हैं। हालांकि इस सीट पर बसपा के पूर्व विधायक बलवीर दंडोतिया को भाजपा ने अपने पाले में लाकर अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास जरूर किया है, मगर फिलहाल तो दोनों ही दलों के लिए बसपा ने परेशानी खड़ी कर दी है। यहां मुकाबला कड़ा और रोचक हो गया है। 

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