बुधवार, 3 अप्रैल 2024

खजुराहो में बिखरे कांग्रेसी, एकजुट कैसे करेगी सपा

सपा को कितना फायदा पहुंचाएगा बाहरी का मुद्दा

भोपाल। खजुराहो संसदीय सीट पर गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी ने प्रत्याषी तो मैदान में उतार दिया, मगर गठबंधन की साथी पार्टी कांग्रेस के नेताओं को अपने पक्ष में लाना उसके लिए आसान नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस द्वारा सीट छोड़ने के लिए कुछ नेता तो पाला बदलकर पहले ही भाजपा का दामन थाम चुके हैं, जो बचे हैं वे घर बैठे हैं। कांग्रेस संगठन इन नेताओं पर फिलहाल तो मैदान में सक्रियता दिखाने के लिए दबाव भी नहीं बना पा रहा है। बिखरे और घर बैठे कांग्रेस नेताओं को एकजुट करना और अपने पक्ष में लाकर प्रचार में सक्रिय करना समाजवादी पार्टी के लिए भी चुनौती बना हुआ है। 

खजुराहो संसदीय सीट सपा ने कांग्रेस से ले तो ली, मगर प्रत्याषी की घोशणा के बाद भी यहां मैदानी सक्रियता नजर नहीं आ रही है। इसके पीछे बड़ा कारण है कि प्रदेष में ना तो सपा का संगठन है और ना ही खजुराहो संसदीय सीट पर सपा की जिला इकाई के नेताओं की सक्रियता है। वहीं दूसरी और गठबंधन के तहत कांग्रेस द्वारा इस सीट को सपा को देने से इस क्षेत्र के नेता पहले से खफा नजर आ रहे हैं। खुलकर तो किसी ने इसका विरोध नहीं किया, मगर विरोध के चलते कई नेता कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा में पहले ही चले गए हैं। जो कांग्रेसी हैं, वे फिलहाल तो घर बैठे हैं। इन नेताओं को घरों से निकालकर मैदान में लाना कांग्रेस ही नहीं समाजवादी पार्टी के लिए भी बड़ी चुनौती है। नेताआें के घर बैठने से इस संसदीय सीट पर कार्यकर्ता का अभाव जरूर महसूस होने लगा है। 

सपा ने बाहरी का मुद्दा बनाया 

चुनाव प्रचार में अभी तेजी आई नहीं है, मगर समाजवादी पार्टी ने भाजपा प्रत्याषी को बाहरी बताना षुरू कर दिया है। बाहरी का मुद्दा एक बार फिर यहां उछला है। वैसे 2019 के लोकसभा चुनाव में भी यह मुद्दा भाजपा के ही नेताओं ने उठाया था, मगर संगठन की कसावट के चलते यह मुद्दा जोर पकड़ता उसके पहले नेताओं को भाजपा ने अनुषासित रहकर प्रत्याषी के लिए काम करने के कड़े संदेष दिए थे। इसके चलते लगता नहीं कि सपा का यह मुद्दा यहां कारगर साबित होगा। 

पूर्व विधायक बनाम वर्तमान सांसद के बीच मुकाबला

सपा की प्रत्याषी मीरा यादव सपा की पूर्व विधायक रही है। 2008 के विधानसभा चुनाव में मीरा यादव निवाड़ी से विधानसभा चुनाव जीती थी। वहीं भाजपा के प्रदेष अध्यक्ष वीडी षर्मा इस सीट पर वर्तमान में सांसद हैं। उनका मुकाबला भले ही बाहुबली की पत्नी से हो, मगर संगठन के तौर पर भाजपा इस सीट पर पहले से मजबूत है। कांग्रेस के बिखरे नेताओं और समाजवादी पार्टी का संगठन ना होना इस सीट पर भाजपा को फायदा दिलाता नजर आ रहा है। 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें