शुक्रवार, 12 अप्रैल 2024

ग्वालियर-चंबल में बसपा को बागियों को भी नहीं मिल रहा साथ

भाजपा-कांग्रेस के नाराज नेता चुनाव लड़ने की नहीं जुटा रहे हिम्मत


भोपाल। प्रदेश में बसपा ने सभी 29 सीटों पर प्रत्याशी खड़े करने का दावा तो किया, मगर उसे ग्वालियर-चंबल अंचल की चार सीटों पर दमदार प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं। मुरैना, भिंड जहां बसपा का खासा वोट बैंक है, वहां पर बसपा को भाजपा और कांग्रेस के नाराज नेताओं से पाला बदलने की उम्मीद थी, मगर अब तक किसी भी नेता ने बसपा से संपर्क नहीं किया है। इन दलों के नाराज नेता इस बार चुनाव मैदान में उतरने को उत्सुक नजर नहीं आ रहे हैं।
ग्वालियर-चंबल अंचल की ग्वालियर, गुना, भिंड और मुरैना लोकसभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी अब तक प्रत्याशी तलाश नहीं पाई है। इन चारों संसदीय क्षेत्रों में से दो सीटों मुरैना और भिंड में बसपा का खासा वोट बैंक है। बसपा नेताओं को उम्मीद थी कि भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद उनके नाराज नेता पार्टी का दामन थामेंगे, मगर अब तक ऐसा हो नहीं पाया है। इसके चलते बसपा अभी तक प्रत्याशी चयन भी नहीं कर पाई है।
नाराज भाजपा-कांग्रेस नेताओं ने बनाई दूरी
ग्वालियर-चंबल अंचल में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी घोशित होने के बाद दोनों दलों में नाराजगी तो नजर आई, मगर इन दलों के नेताओं ने पिछले चुनाव की तरह इस बार अब तक बगावत करते हुए दलबदल का काम नहीं किया है। नाराज नेता मौन है, मगर दूसरे दल में जाकर चुनाव मैदान में उतरने से दूरी बना रहे हैं। जबकि बसपा को हमेशा की तरह इस बार भी उम्मीद थी कि इन दलों के नाराज नेताओं का साथ उसे मिलेगा और वह खासकर मुरैना और भिंड में प्रत्याशी मैदान में उतारकर भाजपा, कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ेगी। मगर ऐसा अब तक हुआ नहीं है।
पकड़ मजबूत, मगर जीते कभी नहीं
मुरैना और भिंड संसदीय सीट पर बसपा को अच्छा खासा वोट बैंक है। पिछले चुनाव 2019 में मुरैना में बसपा प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे थे और करीब सवा लाख से ज्यादा वोट पा गए थे। जबकि 2014 में बसपा प्रत्याशी इस सीट पर दूसरे स्थान पर रहा था। इस चुनाव में दो लाख से ज्यादा वोट बसपा को मिले थे। इसके अलावा हर चुनाव में इस सीट पर बसपा प्रत्याशी को एक लाख से ज्यादा वोट हासिल होते रहे हैं। वहीं भिंड संसदीय क्षेत्र में बसपा को हर चुनाव में पचास हजार से ज्यादा वोट हासिल होते रहे हैं। दोनों ही संसदीय सीटों पर बसपा का खासा प्रभाव भी रहा है। दोनों सीटों पर बसपा को अब तक जीत हासिल नहीं हुई है।

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