पहले चरण में कम हुआ मतदान, तो मामा को फिर किया सक्रिय
भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर बुधवार को हरदा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए बयान के बाद अब चर्चा तेज हो गई है कि मध्यप्रदेश कभी ना छोड़ने की बात कहने वाले मामा की प्रदेश की सियासत से विदाई लगभग तय है। लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री की केन्द्र में सक्रियता ज्यादा नजर आती दिखाई देगी।
प्रदेश में भाजपा की तीन बार सरकार बनाकर मामा और भैया की छवि बनाने वाले नेता पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर अब भाजपा का प्रदेश ही नहीं, बल्कि केन्द्रीय नेत्त्व भी यह मानने लगा है कि प्रदेश में अगर जनता के बीच चेहरा है तो वे शिवराज ही है। इसका उदाहरण देखने को मिला जब बुधवार को हरदा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर बड़ी बात मतदाताओं से कही। हरदा में मोदी ने सभा मंच से कहा कि मैं शिवराज को दिल्ली ले जाना चाहता हूं। इस दौरान मंच पर शिवराज सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने भी खड़े होकर मतदाता का अभिवादन किया। मोदी के इस बयान के बाद अब यह तय हो गया कि शिवराज सिंह की केन्द्र में भूमिका तय हो गई है। उनकी भूमिका क्या होगी यह तो लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद ही पता चलेगा, मगर उनकी प्रदेश की सियासत से विदाई तय मानी जा रही है।
पहले चरण के मतदान के बाद बढ़ी थी सक्रियता
पहले चरण में कम मतदान होने के बाद भाजपा का राष्टीय और प्रदेश संगठन यह बात को समझ गया था कि प्रदेश में अब भी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही ऐसे नेता हैं, जो मतदाता से सीधे जुड़े हैं। विधानसभा चुनाव में लाड़ली बहना का असर दिखा, मगर पहले चरण के मतदान वाले क्षेत्रों में महिलाओं के मतदान करने की संख्या कम नजर आई। इसके बाद संगठन ने उन्हें सक्रिय किया। पहले चरण के मतदान के दौरान शिवराज सिंह चौहान केवल होशंगाबाद और छिंदवाड़ा पहुंचे थे। मगर अब दूसरे चरण के मतदान में वे नौ स्थानों पर सभाएं कर चुके हैं।
अलग-थलक पड़े पर जनता से जुड़ाव को रखा बरकरार
विधानसभा चुनाव के बाद जब प्रदेश में मुख्यमंत्री बदला गया तो इसके बाद शिवराज सिंह चौहान करीब-करीब अकेले पड़ते से नजर आ रहे थे। उनके नामांकन भरने में भी नेताओं का वह लाव लश्कर नजर नहीं आया था, जिसके लिए वे कभी जाने जाते थे। मगर शिवराज अपनी लकीर को कैसे बढ़ाएं इस बात को अच्छी तरह जानते थे। वे मौन रहकर सबकुछ करते रहे, मगर अनुशासन में रहकर उन्होंने अपने काम की शैली और जनता से जुड़ाव को बनाए रखा। इसका असर पहले चरण के मतदान के बाद दिखाई दिया। संगठन में फिर उनकी पूछ परख पहले जैसे बढ़ती नजर आई।
प्रदेश में भाजपा की तीन बार सरकार बनाकर मामा और भैया की छवि बनाने वाले नेता पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर अब भाजपा का प्रदेश ही नहीं, बल्कि केन्द्रीय नेत्त्व भी यह मानने लगा है कि प्रदेश में अगर जनता के बीच चेहरा है तो वे शिवराज ही है। इसका उदाहरण देखने को मिला जब बुधवार को हरदा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर बड़ी बात मतदाताओं से कही। हरदा में मोदी ने सभा मंच से कहा कि मैं शिवराज को दिल्ली ले जाना चाहता हूं। इस दौरान मंच पर शिवराज सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने भी खड़े होकर मतदाता का अभिवादन किया। मोदी के इस बयान के बाद अब यह तय हो गया कि शिवराज सिंह की केन्द्र में भूमिका तय हो गई है। उनकी भूमिका क्या होगी यह तो लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद ही पता चलेगा, मगर उनकी प्रदेश की सियासत से विदाई तय मानी जा रही है।
पहले चरण के मतदान के बाद बढ़ी थी सक्रियता
पहले चरण में कम मतदान होने के बाद भाजपा का राष्टीय और प्रदेश संगठन यह बात को समझ गया था कि प्रदेश में अब भी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही ऐसे नेता हैं, जो मतदाता से सीधे जुड़े हैं। विधानसभा चुनाव में लाड़ली बहना का असर दिखा, मगर पहले चरण के मतदान वाले क्षेत्रों में महिलाओं के मतदान करने की संख्या कम नजर आई। इसके बाद संगठन ने उन्हें सक्रिय किया। पहले चरण के मतदान के दौरान शिवराज सिंह चौहान केवल होशंगाबाद और छिंदवाड़ा पहुंचे थे। मगर अब दूसरे चरण के मतदान में वे नौ स्थानों पर सभाएं कर चुके हैं।
अलग-थलक पड़े पर जनता से जुड़ाव को रखा बरकरार
विधानसभा चुनाव के बाद जब प्रदेश में मुख्यमंत्री बदला गया तो इसके बाद शिवराज सिंह चौहान करीब-करीब अकेले पड़ते से नजर आ रहे थे। उनके नामांकन भरने में भी नेताओं का वह लाव लश्कर नजर नहीं आया था, जिसके लिए वे कभी जाने जाते थे। मगर शिवराज अपनी लकीर को कैसे बढ़ाएं इस बात को अच्छी तरह जानते थे। वे मौन रहकर सबकुछ करते रहे, मगर अनुशासन में रहकर उन्होंने अपने काम की शैली और जनता से जुड़ाव को बनाए रखा। इसका असर पहले चरण के मतदान के बाद दिखाई दिया। संगठन में फिर उनकी पूछ परख पहले जैसे बढ़ती नजर आई।

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