गुरुवार, 11 अप्रैल 2024

छह विधायकों, दो राज्यसभा सदस्यों की सीटों पर टिकी नजरें

दिग्विजय, ज्योतिरादित्य और शिवराज सहित छह विधायक लड़ रहे लोस चुनाव


भोपाल। प्रदेश में दो राज्यसभा सदस्यों और छह विधायकों को भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतारा है। इनके निर्वाचन क्षेत्रों पर दोनों ही दलों के नेताओं की नजरें टिकी हुई है। अगर ये चुनाव जीते तो उनके स्थान पर उपचुनाव होना तय है, इसके चलते दोनों ही दलों के नेताओं की सक्रियता भी नजर आ रही है। 

प्रदेश में 29 लोकसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव में दोनों ही दलों भाजपा और कांग्रेस ने दो राज्यसभा सदस्यों दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव मैदान में उतारा है। इसके अलावा आधा दर्जन स्थानों पर विधायकों को भी लोकसभा चुनाव का टिकट दिया गया है। जिन विधायकों को टिकट दिया है। उनमें बुधनी से विधायक पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उज्जैन से महेश परमार ष्शामिल हैं। इसी तरह कांग्रेस की ओर से


भिंड में फूलसिंह बरैया, सतना में सिद्धार्थ कुशवाह, मंडला में ओमकार सिंह मरकाम और ष्शहडोल में फूंदेलाल मार्को को चुनाव मैदान में उतारा है। चारों 2023 का विधानसभा चुनाव जीते हैं।  इन सभी की सीटों पर दोनों ही दलों के दिग्गजों की नजरें टिकी है। अगर इनमें से कोई चुनाव जीतता है तो उनके विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होना तय माना जा रहा है। 

वैसे विदिशा से चुनाव मैदान में उतरे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गुना से चुनाव लड़ रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया की जीत को लेकर भाजपा नेता आश्वस्त हैं। इसे लेकर भाजपा नेताओं में राज्यसभा और बुधनी से उम्मीदवारी जताने के लिए जमावट भी तेज हुई है। वैसे माना जा रहा है कि बुधनी में शिवराज सिंह चौहान अपने बेटे कार्तिकेय चौहान को इस सीट पर मैदान में उतारने का प्रयास करेंगे। शिवराज सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए ही बुधनी में उनकी पत्नी साधना सिंह और पुत्र कार्तिकेय सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनके बाद पार्टी इस सीट की जिम्मेदारी उनके परिवार में से किसी को देगी या किसी और पर दांव लगाएगी, यह बड़ा सवाल है। दूसरी और कांग्रेस नेताओं को विधायकों से ज्यादा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के क्षेत्र राजगढ़ में जीत की उम्मीद नजर आ रही है। इसके चलते राज्यसभा जाने के लिए कुछ नेताओं की सक्रियता बढ़ी है। 

अरूण यादव की दूर की सोच, छोड़ी खंडवा सीट 

पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरूण यादव ने इस बार खंडवा संसदीय सीट पर दावेदारी को लेकर ज्यादा दबाव नहीं बनाया। बल्कि उन्होंने गुना में सिंधिया को खिलाफ चुनाव लड़ने की बात कहकर केन्द्रीय नेताओं के सामने अपने नंबर बढ़वा लिए हैं। इसके बाद खंडवा सीट भी आसानी सी छोड़ दी थी। सूत्रों की माने तो अरूण यादव ने पहले ही तय कर लिया था कि अगर दिग्विजय सिंह को पार्टी ने मैदान में उतारा तो उनके स्थान पर राज्यसभा के लिए उनका नंबर लग सकता है। फिलहाल तो वे दिग्विजय सिंह जीत की प्रतिक्षा कर रहे हैं। 


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