मंगलवार, 9 अप्रैल 2024

कांग्रेस के 84 के रिकार्ड को तोड़ना चाहती है भाजपा

प्रदेश की सभी सीटों पर जीत हासिल कर तोड़ना चाहती है रिकार्ड


भोपाल। प्रदेश में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के 1984 के रिकार्ड को तोड़कर प्रदेश की सभी 29 सीटों पर भाजपा जीत का परचम लहराने की तैयारी कर रही है। पिछले दो चुनाव से पार्टी इस रिकार्ड को तोड़ने के लिए जमावट तो करती रही, लेकिन उसके नजदीक जाकर दूर रह जाती है। इसके चलते इस बार चुनाव में कांग्रेस के कब्जे वाली इकलौटी सीट छिंदवाड़ा पर भाजपा पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरी है। 

प्रदेश में 1984 में अविभाजित मध्यप्रदेश में 40 सीटें हुआ करती थी। इस साल तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इन सभी चालीस सीटों पर जीत का परचम फहराकर भाजपा को करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद से भाजपा 2014 के लोकसभा चुनाव में विभाजित मध्यप्रदेश की सभी 29 सीटों पर जीत के लिए प्रयास कर रहती रही, मगर भाजपा ऐसा नहीं कर पाई। 2014 के चुनाव में 29 सीटों में से 27 सीटों पर जीत हासिल की थी, मगर दो सीटें फिर भी उसके हाथ से फिसल गई थी। इसी तरह 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को 28 सीटों पर जीत हासिल हुई, मगर छिंदवाड़ा पर वह जीत हासिल नहीं कर पाई। सत्ताधारी भाजपा 2019 में हारी एकमात्र सीट छिंदवाड़ा में अपनी पूरी ताकत लगा रही है, ताकि वह मध्यप्रदेश की सभी सीटें जीतने का रिकॉर्ड भी बना सके। 

प्रदेश विभाजन के बाद इस तरह रहे परिणाम

छत्तीसगढ़ विभाजन के बाद प्रदेश में 29 लोकसभा सीटें ष्शेश रह गई थी। इन सीटों पर 2004 में पहली बार विभाजन के बाद चुनाव हुए थे। इस चुनाव में भाजपा ने 25 सीटों पर जीत दर्ज की। उल्लेखनीय है कि इसके पहले 2003 के चुनाव में उमा भारती के नेतृत्व में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को हटाकर भाजपा में लंबे समय बाद सरकार बनाई थी। इसके बाद 2009 में प्रदेश में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा का ग्राफ फिर गिरा और उसे 16 सीटों पर जीत हासिल हुई। इस चुनाव में कांग्रेस ने 28 सीटों पर चुनाव लड़ा था। एक सीट विदिशा में उसके प्रत्याशी राजकुमार पटेल ने नामांकन फार्म के साथ बी फार्म नहीं भरा था इसके चलते उनका नामांकन निरस्त हो गया था। इस चुनाव में कांग्रेस को 12 और बसपा को 1 सीट पर जीत हासिल हुई थी। इसके बाद 2014 में भाजपा ने प्रदेश की 29 में से 27 और 2019 में 29 में से 29 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा इन चुनावों में चाहकर भी पूरी 29 सीटों पर जीत हासिल नहीं कर पाई थी। 


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