सोमवार, 29 अप्रैल 2024

चुनाव आयोग के लिए चुनौती बना मतदान प्रतिशत बढ़ाना

भोपाल। प्रदेश में तीसरे चरण के मतदान ने एक बार फिर चुनाव आयोग की चिंता को बढ़ा दिया है। आयोग इस बार ग्वालियर-चंबल अंचल की चारों लोकसभा सीटों पर मतदान प्रतिशत बढ़ाने को लेकर चिंतित है। यहां मतदान का प्रतिशत बढ़ाना उसके लिए चुनौती भी बना हुआ है। पिछले तीन सालों का मतदान प्रतिशत देखा जाए तो केवल गुना ही ऐसा संसदीय क्षेत्र हैं, जहां सम्मानजनक मतदान हुआ है। बाकि मुरैना, भिंड और ग्वालियर में आयोग चाहकर भी मतदान का प्रतिशत नहीं बढ़वा पाया है।

लोकसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण के बाद अब कम मतदान को लेकर चुनाव आयोग की चिंता भी बढ़ी है। तीसरे चरण के लिए होने वाले ग्वालियर-चंबल अंचल में पिछले तीन सालों के मतदान प्रतिशत को देखते हुए आयोग की िंचता ज्यादा बढ़ रही है। इस अंचल की चार लोकसभा सीटों में से गुना में ही मतदान का प्रतिशत अच्छा रहा है, बाकि तीन सीटों पर मतदान का प्रतिशत हमेशा कम रहा है। चुनाव आयोग मतदान फीसदी बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। चुनाव आयोग के साथ सियासी दल भी मतदान बढ़ाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। फिर भी ग्वालियर-चंबल अंचल की इन चार लोकसभा सीटों पर मतदान का प्रतिशत बढ़ाना आयोग के लिए फिलहाल तो चुनौती बना हुआ है। बीते तीन लोकसभा चुनाव में हुए मतदान को देखते हुए चुनाव आयोग इन सीटों पर विशेष फोकस कर रहा है।
पिछले तीन साल में कहां कितना हुआ था मतदान
साल 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में भिंड संसदीय सीट पर महज 38.45 फीसदी मतदान हुआ था।  जबकि ग्वालियर में 41.16, मुरैना में 53.11, और गुना संसदीय सीट पर 54.05 फीसदी मतदान हुआ था। इसी तरह 2014 के चुनाव में भिंड संसदीय सीट में 45.22 फीसदी, ग्वालियर में 52.57, मुरैना में 49.90 और गुना संसदीय सीट पर 60.05 फीसदी मतदान हुआ था। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भिंड संसदीय सीट पर 54.53 फीसदी, ग्वालियर में 59.52, मुरैना में 61.77, और गुना संसदीय सीट पर 69.58 फीसदी मतदान हुआ था।  इन सीटों में सबसे बेहतर गुना सीट पर ही मतदान हुआ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें