कैबिनेट की मंजूरी के बाद जारी किए विधिवत आदेश
भोपाल। प्रदेश में अब आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को लाखों की सौगातें मिलेंगी। सरेंडर करने वाले नक्सली को जमीन खरीदने के लिए 20 लाख रूपए का अनुदान मिलेगा। इसके साथ ही आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को प्रोफेशनल ट्रेनिंग के लिए 1 लाख 50 हजार रूपए दो किस्तों में दिए जाएंगे। नक्सलवादियों को सरेंडर कराकर मुख्य धारा में वापस लाने के लिए तैयार की गई इस पॉलिसी को कैबिनेट ने पहले ही मंजूरी दे दी थी।
कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब मध्य प्रदेश नक्सली आत्मसमर्पण, पुनर्वास सह राहत नीति,2023 को लागू करने के विधिवत आदेश जारी कर दिए गए। नक्सल नीति में 26 साल के बाद बदलाव हुआ है। पुरानी पॉलिसी 1997 में लागू हुई थी, जो आज के दौर में प्रासंगिक नहीं थीं। ऐसे में 2014 के केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों के साथ ही छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र और आन्ध्रप्रदेश की नीतियों का अध्ययन किया गया है। इस नीति में सभी राज्यों के ऐसे बिंदुओं को शामिल किया गया है, जो नक्सली हिंसा को कम करने में कारगर साबित होंगे।
आरक्षक पद पर भी मिलेगी नियुक्ति
नई नीति के अनुसार जिले के पुलिस अधीक्षक किसी भी सरेंडर किए हुए नक्सली को गोपनीय सैनिक के पद पर नियुक्त कर सकेंगे। इसके साथ ही यदि सरेंडर करने वाले नक्सली की मदद से किसी नक्सल ऑपरेशन में खास सफलता मिलेगी तो पुलिस अधीक्षक की अनुशंसा पर आईजी एवं डीजीपी नक्सली को जिला पुलिस बल में आरक्षक के पद पर नियुक्ति भी दे सकेंगे। इसके साथ ही यदि पुलिस भर्ती के लिए किसी जरूरी मापदंड में कोई छूट देनी होगी तो संबंधित जोन के आईजी इसे दे सकेंगे।
पदाधिकारी या प्रकरण दर्ज होने पर ही मिलेगा लाभ
नई पॉलिसी केवल सरेंडर करने वाले उन्हीं नक्सलियों पर लागू होगी, जिनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं या जो प्रतिबंधित माओवादी संगठनों के अहम पदाधिकारी या कैडर मेंबर हैं। इन सभी को इस पॉलिसी का लाभ लेने के लिए सरकार द्वारा नामांकित अधिकारी के सामने हथियार डालने होंगे और अपने संगठन के बाकी कार्यकर्ताओं की पहचान बताने के साथ दूसरी जानकारियां भी देनी होंगी।

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