जातिगत गणना को कानूनी पेंच में उलझाकर बंद कराना चाहती है भाजपा
भोपाल। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जातिगत गणना को लेकर भाजपा पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा जातिगत गणना को कानूनी पंच में उलझाकर बंद कराना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा सामाजिक हकमारी का प्रतीक है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा कि भाजपा ‘जातिगत सर्वेक्षण’ को क़ानूनी तर्कों में उलझाकर बंद करवाना चाहती थी लेकिन पटना उच्च न्यायालय ने इस पर लगी रोक को हटाकर हर वंचित, शोषित के लिए ‘सामाजिक न्याय’ ही नहीं बल्कि आने वाले समय में ‘आर्थिक न्याय’ का भी रास्ता खोल दिया है। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोग जब अपने अधिकारों के लिए मिलकर एक साथ खड़े हो जाएँगे तो ये प्रभुत्ववादी सोच के गिनती के लोग सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने वाली इस गिनती-गणना के आगे कहीं नहीं टिकेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जातीय जनगणना सबके हक़ की आनुपातिक हिस्सेदारी की राह खोलेगी और सच में लोकतंत्र की दिशा नीचे-से-ऊपर की ओर जाएगी। भाजपा की सामंती सोच ग़ैर-बराबरी और दमन की रही है, इसीलिए वो ग़रीब-कमज़ोर के हक़ को मारने के लिए जातीय जनगणना की विरोधी है। उन्होंने कहा कि जनता जातीय जनगणना को रोकनेवाली भाजपा को अगले चुनाव में इस तरह बहिष्कृत करेगी कि मतगणना के दिन न तो उनके नेता दिखाई देंगे और न ही उनके प्रत्याशी। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सामाजिक हक़मारी का प्रतीक है।
जनता पर डबल अटैक की चल रही सरकार
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में डबल इंजन की नहीं, बल्कि जनता पर डबल अटैक की सरकार चल रही है। जनता की गाढ़ी कमाई की लूट और अपने कमीशन एजेंटों को छूट, डबल अटैक की रणनीति है। शिवराज सरकार जनता का शोषण करने की योजनाएं लाती है और केंद्र में बैठी सरकार उस पर मुहर लगाती है। ठेका और कमीशन के इस डबल गेम ने मध्य प्रदेश की जनता को डबल गड़बड़ में फंसा दिया है।

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