बुधवार, 31 जुलाई 2019

मुख्यमंत्री की राज्यपाल से मुलाकात, मंत्रिमंडल विस्तार की तेज हुई अटकलें



मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की आज राज्यपाल लालजी टंडन से हुई मुलाकात के बाद राज्य मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज हो गई है. हालांकि मुख्यमंत्री की ओर से इस मुलाकात को सौजन्य भेंट बताया गया है. 
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज राज्यपाल लालजी टंडन से राजभवन पहुंचकर मुलाकात की. 45 मिनट तक दोनों के बीच हुई राजभवन में चर्चा के बाद राज्य में एक बार फिर से मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों ने जोर पकड़ा है.हालांकि मुख्यमंत्री ने इस तरह की अटकलों को खारिज किया और मुलाकात को सौजन्य मुलाकात बताया. उन्होंने कहा कि राज्यपाल से उनकी सरकार के कामकाज को लेकर चर्चा हुई है. उन्होंने प्रदेश की चुनौतियों के बारे में राज्यपाल से चर्चा की है.दरअसल लोकसभा चुनाव के बाद से ही राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं. पहले माना जा रहा था कि लोकसभा चुनाव के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार होगा, फिर राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के बाद विस्तार की बातें कही गई थी. इसके चलते आज हुई मुख्यमंत्री की राज्यपाल से मुलाकात के बाद फिर से मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों ने जोर पकड़ा है. चर्चा इस बात को लेकर है कि आगामी कुछ दिनों में मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल विस्तार कर सकते हैं. इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि आधा दर्जन विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है. 
लोकसभा चुनाव के बाद से ही बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों के अलावा अलग-अलग गुटों के कांग्रेस विधायक भी मंत्री बनने के लिए लगातार दबाव बनाते रहे हैं. बसपा और निर्दलीय विधायक तो मंत्री न बनाए जाने को लेकर नाराजगी दिखाते हुए मुख्यमंत्री को चेतावनी तक दे चुके हैं.  सूत्रों की माने तो अगर विस्तार होता है तो कांग्रेस विधायक के.पी.सिंह, बिसाहूलाल, एंदल सिंह कंसाना के अलावा राजवर्धन सिंह दत्तीगांव को मंत्री बनाया जा सकता है. इसके अलावा बसपा की रामबाई और निर्दलीय सुरेन्द्र सिंह ठाकुर, सपा के संजीव सिंह और निर्दलीय केदार सिंह डाबर के मंत्री बनाए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं.
नियुक्ति से पहले लेनी होगी अनुमति
मंत्रिमंडल विस्तार के अलावा राज्य में राजनीतिक नियुक्तियां भी अटकी हुई हैं. कुछ नियुक्तियां तो हुई, मगर विवाद भी तेजी से हुआ. इस विवाद को देखते हुए अब आलाकमान से निर्देश दिए हैं कि उनकी जानकारी में लाकर ही नियुक्तियां की जाएं.आलाकमान के इस निर्देश के बाद फिलहाल निगम-मंडलों में नियुक्ति का मामला अटक गया है. अब तक हुई नियुक्तियों में से माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति, मैपकास्ट में चेयरमैन और अपेक्स बैंक में प्रशासक की नियुक्ति की शिकायतें कांग्रेस आलाकमान तक पहुंची हैं.  हाल ही में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग में सदस्य की नियुक्ति से भी राष्ट्रीय नेतृत्व नाखुश नहीं है. इसके अलावा मंत्रियों द्वारा कार्यकर्ताओं से ठीक से बात नहीं करने की शिकायतें भी दिल्ली पहुंची हैं.

कश्मीर से जल्द हटेगी धारा 370

 तीन तलाक बिल, मुस्लिम महिलाओं को मिलेगी बुरी प्रथा से मिलेगी मुक्ति

संघ प्रचारक इंद्रेश कुमार नेक हा कि तीन तलाक बिल पास होने से संघ खुश है. इस बिल से मुस्लिम महिलाओं को एक बुरी प्रथा से मुक्ति मिलेगी. उन्होंने कहा कि कहा कि ये काम संघ ने शुरू किया था.  कश्मीर को लेकर उन्होंने कहा कि कश्मीर में धारा 370 और 35 अ को जल्द हटाया जाएगा, ये अंतिम सांसे गिन रही हैं.
आरएसएस के प्रचारक इन्द्रेश कुमार ने कश्मीर मुद्दे पर राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच द्वारा राजधानी में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान यह बात कही. उन्होंने कश्मीर मुद्दे को लेकर कहा कि कश्मीर में धारा 370 और 35 अ को हटाने का मन केंद्र सरकार ने बना लिया है, बस घाटी का तापमान नियंत्रण रखना है, जिसकी कोशिश हो रही है. वहीं 370 और 35 अ अपनी अंतिम सांसे गिन रही है. उन्होंने कहा कि ये धाराएं हटना तय है इसका प्रतीक्षा करिए, जल्द हो जाएगा.  उन्होंने कहा कि जब हर कश्मीरी के लिए पूरा हिंदुस्तान खुला है तो फिर हर भारतीय के लिए कश्मीर क्यों नहीं खुला है.
इंद्रेश कुमार ने कहा है कि मंगलवार की शिवरात्रि करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के लिए खुश खबर लेकर आई. इस दिन मुस्लिम महिलाओं के लिए चली आ रही बुरी प्रथा तीन तलाक से महिलाओं को मुक्ति मिल सकेगी. राज्यसभा से तीन तलाक विधेयक पास होने पर उन्होंने कहा कि हमने 6 साल पहले इस अभियान को छेड़ा था. उन्होंने कहा कि इस्लाम में 4 शादी मंजूर नहीं. पहली पत्नी के सिवा कोई दूसरी पत्नी से शादी नहीं कर सकता. ज्यादा शादी और ज्यादा संतान नहीं करना, क्योंकि इसके करने से खुदा का नाम नहीं ले पाएंगे. ये खुदा कहते हैं. इंद्रेश कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच का पांचवा सम्मेलन मसूरी में होने जा रहा है. सम्मेलन में पिछले वर्षो के कार्यों की समीक्षा की जाएगी साथ ही कुछ प्रस्ताव भी पारित किए जाएंगे. भोपाल की सांसद प्रज्ञा ठाकुर को लेकर पूछे सवाल पर इंद्रेश कुमार ने कहा कि मैं उनका सम्मान करता हूं, और उन्होंने माफी मांग ली है.  अब इस मामले को तूल देने का कोई मतलब नहीं है.
सभी प्रकार की लिंचिंग के लिए बनना चाहिए कानून
देश में बढ़ती माब लिंचिंग की घटनाओं पर उन्होंने कहा कि कश्मीर में अल्लाह और खुदा के नाम लाखों लोगों को निकाला गया है. पाकिस्तान का झंडा उठाना इसका उदाहरण. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में देश विरोधी नारे लगाना लिंचिंग ही है. गाय को लेकर देश में एक भावना है, एक अलग भाव है. उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति गाय की चर्बी से बने कारतूस के विरोध में हुई. गाय को मारकर लोग क्रांतिकारियों का अपमान कर रहे हैं और जितने भी प्रकार की लिंचिंग है, उसे लेकर कानून बनना चाहिए.

शाह से मुलाकात की खबरें शरारती तत्वों की साजिश: अजय सिंह

अजय सिंह

विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने सोशल मीडिया में उनके और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात को लेकर चल रहीं खबरों को शरारती तत्वों की साजिश बताया है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय यह वक्त कांग्रेस को मजबूत करने का है.
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि मैंने अमित शाह को टीवी में जरूर देखा है आमने सामने मैंने उनकी कभी शक्ल तक नहीं देखी उनसे मिलने की तो दूर की बात है. उन्होंने कहा मैंने अपने राजनैतिक सफर में भाजपा के खिलाफ हमेशा आमने सामने की लड़ाई लड़ी है इस वजह से मैं हमेशा भाजपा नेताओं के निशाने पर रहा.  सिंह ने कहा कांग्रेस के जांबाज और बहादुर साथियों के साथ प्रदेश सरकार के खिलाफ लगातार 15 वर्षों तक मैंने और मेरी पार्टी के नेताओं ने जो लड़ाई लड़ी उसी का यह परिणाम है कि प्रदेश में जनविरोधी भाजपा सरकार का अंत हुआ और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी. पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राजनीति में मैंने किसी पद की लालसा के उद्देश्य से कभी काम नही किया और ना ही आगे कभी करूंगा. मुझे यह अच्छी तरह से पता है कि अपने सिद्धांतों में चलने वाले लोगों को कदम-कदम पर संघर्ष करना पड़ता है लेकिन संघर्ष के डर से मैं घबराने वालों में से नहीं हूं. प्रदेश में पार्टी के लाखों लाख कार्यकर्ता मेरी ताकत हैं और उसी ताकत के दम पर मेरा संघर्ष जारी रहेगा. सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि यह समय अफवाहों में ध्यान देने की बजाय कांग्रेस को मजबूत करने का समय है. 
यहां उल्लेखनीय है कि  हाल ही में मैहर के विधायक नारायण त्रिपाठी के कांग्रेस में वापसी की बातों को लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह खासे नाराज हैं. उनकी प्रतिक्रिया भी इस दौरान आई थी, जिसमें उन्होंने निष्ठावान कार्यकर्ताओं का पक्ष रखते हुए त्रिपाठी का विरोध किया था. इसके बाद से सोशल मीडिया पर उनके और अमित शाह की मुलाकात की अटकलें लगाई जा रही थी. जब यह जानकारी अजय सिंह को मिली तो उन्होंने इसका खंडन किया. 

मंत्री, विधायक के दावों से तेज हुई राज्य की सियासत

लाखन सिंह 
 भाजपा विधायक ने कहा क्रास वोटिंग के लिए दिया था मंत्री पद और रुपयों का लालच

मध्य प्रदेश में सत्ताधारी कांग्रेस के भारतीय जनता पार्टी में सेंधमारी की कोशिशें थम नहीं रही हैं. कांग्रेस की ओर से कई बीजेपी विधायकों के संपर्क में होना का दावा किया जा रहा है. वहीं भाजपा द्वारा कांग्रेस पर हमले भी किए जाने लगे हैं. अब भाजपा के एक विधायक ने इस बात का दावा किया है कि विधानसभा में क्रास वोटिंग करने के लिए उन्हें मंत्रिपद और रुपए देने का लालच दिया गया था.
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में दंड संशोधन विधेयक के दौरान हुई क्रास वोटिंग के बाद भाजपा विधायकों का कांग्रेस नेताओं और सरकार के संपर्क में होने का दावा अब तक आधा दर्जन मंत्री और पदाधिकारी कर चुके हैं. इस तरह के दावों का सिलसिला थमने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है. अब मंत्रिमंडल के एक और मंत्री लाखन सिंह ने यह दावा किया है कि उनके संपर्क में आधा दर्जन याने 6 भाजपा के विधायक हैं. उनका कहना है कि भाजपा नेताओं द्वारा राज्य की कमलनाथ सरकार को गिराए जाने का दावा उल्टा पड़ गया. राज्य में भाजपा के विधायकों में अब भगदौड़ होती नजर आ रही है. उन्होंने दावे के साथ कहा कि उनके संपर्क में भाजपा के 6 विधायक हैं.
 मंत्री लाखन सिंह के अलावा राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने भी इंदौर में भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा के भाई साहब कहते थे कि 15 दिन में सरकार गिरा देंगे, यह सरकार लगंड़ी सरकार है. बोस का निर्देश हो जाए उस दिन सरकार गिरा देंगे. उन्होंने कहा कि बुधनी और विदिशा वाले इन भाई साहब ने बयानबाजी बंद नहीं की तो अभी तो दो आए हैं, आगे 4-5 और आएंगे. पटवारी का इशारा साफ था कि कांग्रेस के संपर्क में भाजपा के 4-5 विधायक अब भी हैं.
भाजपा विधायक ने कहा मंत्री पद और रुपयों का दिया था लालच
भाजपा के एक विधायक ने कांग्रेस पर खरीद फरोख्त करने की कोशिश के आरोप  लगाया है. विधायक सीताराम आदिवासी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस की ओर से उन्हें खरीदने के लिए करोड़ों रुपए का आफर दिया जा रहा है. इतना ही नहीं सीताराम ने कहा कि कांग्रेस मंत्री बनाने का भी प्रलोभन दे रही है. सीताराम आदिवासी  मध्य प्रदेश की श्योपुर विधानसभा से भाजपा विधायक हैं.सीताराम ने दावा किया कांग्रेस के कई मंत्री उनके साथ संपर्क कर रहे हैं और होटल में बुलाकर बात करना चाह रहे हैं. सीताराम आदिवासी ने कहा कि वो भाजपा नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने कहा कि  मैंने पार्टी को धोखा नहीं दिया है. मेरी पार्टी से कोई नाराजगी नहीं है. भाजपा सरकार ने आदिवासियों को बहुत सम्मान दिया है. मुझे 3 बार विधायक बना दिया तो मैं क्यों भाजपा को छोड़ूंगा. बागी विधायकों को लेकर सीताराम ने कहा कि जो बीजेपी को छोड़कर कांग्रेस में जा रहे हैं, वो कद्दार हैं. पार्टी को कभी धोखा नहीं देना चाहिए. उन्होंने कहा कि बीजेपी बहुत ही दमदार पार्टी है और वो मरते दम तक पार्टी को नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने झूठ बोलकर सरकार बनाई है. तमाम झूठे वादे किए गए हैं, क्योंकि इनको झूठने बोलने की आदत है. 


मंगलवार, 30 जुलाई 2019

राज्यपाल के बदलते ही भाजपा चुनौती देने हुई सक्रिय

संविधान विशेषज्ञों से राय ले रही भाजपा, राज्यपाल से करेगी मुलाकात

मध्यप्रदेश में राज्यपाल के बदलते ही विधानसभा में हुए मत विभाजन को लेकर सियासत गर्मा गई है. भाजपा अब इसे लेकर कांगे्रेस को चुनौती देने की रणनीति बनाने लगी है. इसके तहत  भाजपा संविधान विशेषज्ञों से भी राय ले रही है. इसके बाद राज्यपाल से मुलाकात कर भाजपा विधानसभा में दंड संशोधन विधेयक पर हुए मत विभाजन को चुनौती देगी.
विधानसभा में दंड संशोधन विधेयक के दौरान दो भाजपा विधायकों नारायण त्रिपाठी और शरद कोल द्वारा विधेयक के पक्ष में मतदान कर किए मत विभाजन को लेकर भाजपा ने कांग्रेस को जवाब देने की रणनीति पर काम करना शुरु कर दिया है. अब भाजपा नेता इस मामले में बयानबाजी से ज्यादा संविधान विशेषज्ञों से राय लेकर काम करते नजर आ रहे हैं. भाजपा इस मामले में पहले तो संवैधानिक तरीके से राज्यपाल से मुलाकात कर सारे घटनाक्रम को लेकर शिकायत करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए संविधान विशेषज्ञों से भी राय ली जा रही है. भाजपा इस मामले में  भाजपा विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डा. सीताशरण शर्मा से चर्चा करेगी. इसके बाद राज्यपाल लालजी टंडन से चर्चा की जाएगी. राज्यपाल को विधानसभा में घटे पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी जाएगी. इसे लेकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डा. शर्मा ने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर संविधान विशेषज्ञों से राय-मशविरा कर रहे हैं. इस मामले में अध्ययन करने के बाद उचित फोरम पर चर्चा करने की जवाबदारी सौंपी जाएगी. 
यहां उल्लेखनीय है कि विधानसभा में दंड संशोधन विधेयक के दौरान हुए मतदान में विधेयक के पक्ष में 122 मत पड़े थे, जिसमें भाजपा के दो विधायकों ने मतदान किया था. कांग्रेस के कुल 114 विधायक है जिसमें से विधानसभा अध्यक्ष को छोड़कर 113 विधायकों ने और बसपा के 2, सपा के 1 एवं निर्दलीय 4 विधायकों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया था.  
राज्यपाल से करेंगे शिकायत
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि दंड संशोधन विधेयक पर मत विभाजन के दौरान सदन में कांग्रेस के करीब एक दर्जन विधायक सदन में मौजूद नहीं थे, लेकिन उन्होंने भी मतदान में भाग लिया है. उन्होंने संदेह है कि कांगे्रस के इन विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर है, इसके अलावा मत विभाजन की प्रक्रिया का वीडियो भी नहीं बनाया गया है. भार्गव ने कहा कि अभी हम संविधान द्वारा प्रदत्त राज्यपाल की शक्तियों का अध्ययन कर रहे हैं और इसके बाद राज्यपाल से शिकायत कर अनुरोध करेंगे कि कांग्रेस उन विधायकों के हस्ताक्षरों को सत्यापित करवाएं, जिन्होंने सदन में बिना मौजूदगी के मत विभाजन में हस्ताक्षर किए हैं. 

हर जिले में हाईटेक कार्यालय बनाएगी कांग्रेस



मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने भी अब भाजपा की राह पकड़ी है. भाजपा की तरह कांग्रेस ने अपने सभी जिला अध्यक्षों और पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में कार्यालय के लिए जमीन तलाशें. इसके पूर्व भाजपा ने भी अपने शासनकाल में सभी जिला मुख्यालयों पर कार्यालय बनाए हैं. कांग्रेस छिंदवाड़ा को छोड़ सभी जिलोें ये कार्यालय बना रही है.
राज्य में 15 साल बाद सत्ता में आई कांग्रेस ने 7 महीने में अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है. कभी तंगहाली का सामना करने वाली कांग्रेस ने अब सरकार में आने के बाद राज्य  के सभी जिला मुख्यालयों पर कार्यालय खोलने का फैसला लिया है. इस फैसले के चलते कांग्रेस ने अपने सभी जिला अध्यक्षों और जिला पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जिलों में कांग्रेस कार्यालय के लिए जमीन तलाशें. कार्यालय खोलने के मामले में कांग्रेस भाजपा से पीछे नहीं रहना चाहती है.  छिंदवाड़ा को छोड़कर राज्य में कांग्रेस का  किसी भी जिले में अपना कार्यालय भवन नहीं है. भाजपा ने भी अपने 15 साल के कार्यकाल में जिलों में जिला कार्यालय खोले हैं. इसके अलावा कुछ स्थानों पर तो संघ कार्यालय भी खुले हैं. 
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से जारी किए इस तरह के निर्देश के बाद अब राज्य के छिंदवाड़ा को छोड़ सभी जिलों में कांग्रेस पदाधिकारी और जिला अध्यक्ष जमीन की तलाश में जुट गए हैं. जिला कार्यालय खोलने के पीछे तर्क यह दिया जा रह है कि प्रदेश या फिर राष्ट्रीय नेतृत्व अगर जिलों में वीडियो कांफ्रेसिंंग कर पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा करना चाहे तो इसके लिए यह जरुरी है कि जिला स्तर पर कांग्रेस के खुद के कार्यालय हों और वहां पर ऐसे संशाधन उपलब्ध कराए जाएं ताकि वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए कार्याकर्ताओं और पदाधिकारियों से सीधी चर्चा की जा सके. कांग्रेस ने इस कार्य में विधायकों के अलावा जिला के प्रभारी मंत्रियों को भी जिम्मेदारी दी है कि वे जिला कार्यालय के निर्माण देखरेख करें और जल्द ही जिलों में कार्यालयों का निर्माण हो.
अब चंदा वसूलेगी सरकार
भाजपा ने कांग्रेस के इस कदम को चंदा वसूली बताया है. भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस सरकार में आने के साथ ही तबादला उद्योग में जुटी थी और अब चंदा वसूली करेगी. भाजपा के वरिष्ठ नेता डा. हितेश वाजपेयी का कहना है कि कांग्रेस जिला कार्यालय खोलने के नाम पर अब चंदा वसूली का अभियान चलाएगी. इस अभियान के तहत अलग-अलग इलाकों से कार्यालयों के लिए चंदा वसूला जाएगा.

अश्लील वीडियो मामले में फंसे आईएएस को विभाग से हटाया


अश्लील वीडियो मामले में फंसे एसीएस स्तर के अधिकारी को मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर हुई जांच के बाद विभाग से हटा दिया गया.
सामान्य प्रशासन विभाग में पदस्थ एसीएस पी.सी.मीना का एक  अश्लील वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया था. इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ तक शिकायत पहुंचे थी. इसके बाद उन्होंने इसकी जांच के निर्देश दिए थे. मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य के मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती ने इसकी पड़ताल कराई और अधिाकरी को सामान्य प्रशासन विभाग से हटा दिया गया. मीना के स्थान पर सामान्य प्रशासन विभाग का प्रभार कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभांशु कमल को सौंपा गया है. मीना को संचालक आदिम जाति अनुसंधान संस्थान का संचालक बनाया गया है. यह पहला मौका है जब वायरल वीडियो की वजह से किसी एसीएस स्तर के अधिकारी के खिलाफ सरकार ने कड़ा कदम उठाया है.
सूत्रों के मुताबिक 1984 बैच के आईएएस अफसर अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन पीसी मीना ने तबादला होने के पहले सोमवार को अचानक अपनी छुट्टी की अवधि तीन अगस्त तक के लिए बढ़ाने का आवेदन दे दिया था. माना जा रहा था कि उन्हें फोर्स लीव पर भेजा गया है लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ के सख्त रुख के चलते देर शाम मीना को सामान्य प्रशासन विभाग से उनकी छुट्टी करने का आदेश जारी हो गया.

रविवार, 28 जुलाई 2019

नारायण त्रिपाठी भाजपा में नहीं जाएंगे वापस, लड़ेंगे उपचुनाव


विधानसभा में भाजपा के विधायक नारायण त्रिपाठी और शरद कौल द्वारा क्रास वोटिंग करने के बाद  भाजपा में तेज हुई सियासी उठापटक थम नहीं रही है. भाजपा के दो पूर्व मंत्रियों द्वारा दोनों विधायकों को मनाने के सारे प्रयास असफल होते नजर आ रहे हैं. नारायण त्रिपाठी ने तो साफ कह दिया कि वे भाजपा में वापस नहीं जाएंगे. उन्होंने इस बात के संकेत दिए हैं कि वे मैहर से ही उपचुनाव लड़कर वापस सदन पहुंचेंगे. यही स्थिति शरद कोल को लेकर है, जिसके कारण भाजपा नेतृत्व और भी चिंता में पड़ गया है.
भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी और शरद कोल द्वारा दंड संशोधन विधेयक के दौरान क्रास वोटिंग कर पाला बदलने को लेकर  भाजपा हासिए पर होती नजर आ रही है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह द्वारा लगातार यह कहा जा रहा है कि सबकुछ ठीक है, मगर भाजपा में अब कलह सड़क पर दिखाई देने लगी है. प्रदेश संगठन ने दोनों विधायकों से चर्चा करने के लिए दो पूर्व मंत्रियों राजेन्द्र शुक्ल और भूपेन्द्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी थी, जो दोनों ही विधायकों को मनाने में असफल रहे हैं. इसके बाद साफ हो गया है कि दोनों विधायक भाजपा से जल्द ही नाता तोड़ लेंगे.
वैसे मैहर के विधायक नारायण त्रिपाठी ने तो साफ संकेत दिए हैं कि वे भाजपा में शामिल नहीं होंगे. उन्होंने तय किया कि अगर विधानसभा में दलबदल कानून के तहत या फिर भाजपा उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करती है तो वे विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे और उपचुनाव लड़ेंगे. सूत्रों की माने तो कांग्रेस की रणनीति भी यही है कि दोनों विधायकों पर भाजपा क्या कदम उठाती है. अगर भाजपा विधायकों को निलंबित करती है या फिर कोई कार्रवाई करती है तो इस्तीफा दिलाकर उपचुनाव में दोनों को प्रत्याशी बनाया जाए.
केन्द्रीय नेतृत्व करेगा विधायकों से चर्चा
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच गुटबाजी की बात जब सामने आई तो अब भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने पूरा मामला अपने हाथों में ले लिया है. बताया जा रहा है कि अब केन्द्रीय नेतृत्व ही यह तय करेगा कि उसे मध्यप्रदेश में किस रणनीति पर काम करना है. सूत्रों की माने तो 1 अगस्त को कार्यकारी अध्यक्ष जे.पी.नड्डा भोपाल आ सकते हैं. वे सभी विधायकों से अलग-अलग बात करेंगे. इस बैठक में भाजपा ने अपने सभी 108 विधायकों को बुलाने की बात कही है. भाजपा की ओर से नारायण त्रिपाठी और शरद कोल को भी बैठक में बुलाया जाएगा. 

व्यापमं के बाद डंपर घोटाले की खुलेगी फाईल

बढ़ सकती है शिवराज सिंह चौहान की मुश्किल

ई-टेंडर और व्यापमं के बाद राज्य सरकार डंपर घोटाले की फाइल भी खोलने जा रही है. प्रदेश सरकार के दो मंत्रियों गोविंद सिंह और पीसी शर्मा ने इस बात के संकेत दिए हैं. दोनों ने कहा कि भाजपा शासन के समय का यह डंपर घोटाला व्यापमं से भी बड़ा है. इसकी जांच जल्द शुरू करवाई जा सकती है. कमलनाथ सरकार अगर यह कार्रवाई करती है तो एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान की मुश्किलें बढ़ जाएगी.
2006 में डंपर घोटाले में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्नी साधना सिंह चौहान पर गंभीर आरोप लगे थे.  इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने डंपर घोटाले से जुड़े दस्तावेज कमलनाथ को सौंपे हैं. सरकार उन दस्तावेजों के परीक्षण के साथ ही विधि विशेषज्ञों से यह राय ले रही है कि इस मामले में क्या हो सकता है. हालांकि मिश्रा की याचिका 2018 में सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है.
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह कमलनाथ सरकार ने व्यापमं घोटाले की जांच नए सिरे से करने के आदेश दिए हैं. 23 जुलाई को कानून मंत्री पीसी शर्मा ने कहा था कि व्यापमं घोटाला राज्य के माथे पर धब्बा है. ऐसे में सरकार ने फैसला किया है कि इसकी जांच शुरू से आखिर तक होगी. उन्होंने कहा कि हर चीज की जांच की जाएगी और जो कोई भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा. उधर, ई-टेंडरिंग घोटाले में भी पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर शिकंजा कसता जा रहा है. ईओडल्ब्यू ने पूर्व मंत्री के निजी सचिव वीरेंद्र पांडे और निर्मल अवस्थी को गिरफ्तार कर लिया है. शनिवार को वीरेंद्र पांडे के घर पर ईओडल्ब्यू ने छापेमारी भी की थी, जहां से कई अहम दस्तावेज मिलने की बात कही जा रही है. ई-टेंडरिंग में लगभग 3000 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की आंशका है.
उल्लेखनीय है कि डंपर घोटाले को कांग्रेस के तत्कालीन मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने उठाया था और इसे लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ी. लेकिन घोटाले में लोकायुक्त अपनी जांच कर चुकी है और हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक से मिश्रा की याचिका खारिज हो चुकी है.
निर्दोष को नहीं दी जाएगी सजा
सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह ने व्यापमं घोटाले की डंपर घोटाले से तुलना करते हुए कहा है कि डंपर घोटाले की भी जांच होना चाहिए. उन्होंने व्यापमं के बाद आर्थिक रूप से सबसे बड़ा घोटाला ई-टेंडरिंग को बताया है. उनका कहना है कि जांच की जा रही है इसे अधिकारियों ने पकड़ा है. इसमें किसी निर्दोष को सजा नहीं दी जाएगी. सिंह का कहना है कि व्यापमं घोटाले ने कई लोगों की जान ली है. कई निर्दोष बच्चों को जेल में डाला गया है. उन्होंने कहा कि जहां भ्रष्टाचार की गंगोत्री बही उनका कुछ नहीं हुआ और छोटे- छोटे लोगों को निशाना बनाया गया है. मंत्री ने इस पूरे मामले की अच्छे से जांच की मांग की है.

नरोत्तम आश्वस्त रहें, जांच एजेंसियां बड़ी मछलियों तक भी पहुंचेंगी: शोभा



मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने  जारी अपने वक्तव्य में कहा कि ई-टेंडरिंग घोटाला, मध्यप्रदेश के इतिहास में हुए, अब तक के सबसे बड़े घोटालों में से एक है. 
ओझा ने कहा कि  इस घोटाले की समूची प्रक्रिया में, तत्कालीन भाजपा सरकार के संरक्षण के चलते अधिकारियों ने मंत्रियों और भाजपा नेताओं के चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए तरह-तरह की छेड़छाड़ की. इस मामले में हुई एक पूर्व मंत्री के निज-सहायकों निर्मल अवस्थी और वीरेन्द्र पांडे की गिरफ्तारी से यह तय हो गया है कि कांग्रेस पार्टी की कमलनाथ सरकार, अपने वचन-पत्र में ई-टेंडरिंग घोटाले के दोषियों को सजा दिलाने के अपने वचन के प्रति प्रतिज्ञाबद्ध है और वह प्रदेश की जनता को यह विश्वास दिलाती है कि इस घोटाले के द्वारा, जनता की गाढ़ी कमाई के पैसों से भ्रष्टाचार के महल खडे करने वाले रसूखदारों और बड़ी मछलियों को भी किसी हाल में बख्शा नहीं जायेगा.
भाजपा की पिछली प्रदेश सरकार की कार्यशैली और मंशा पर उक्त गंभीर आरोप लगाते हुए  ओझा ने कहा कि आर्थिक अपराध शाखा ने बेहद लचर रवैया अपनाते हुए प्रारंभिक जांच में ढीलाई बरती गई और पूरे घोटाले को मैनेज करने के लिए इस जांच में चहेते अधिकारियों की नियुक्तियां भी की गईं. इस घोटाले की विशालता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी सहित, सभी विपक्षी दलों और मीडिया द्वारा पूरे घोटाले को लगभग 30 हजार करोड़ रुपए का होने का अनुमान जाहिर किया गया था.
ओझा ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर अनुमानित इस घोटाले से साफ है कि यह घोटाला निचले स्तर के अधिकारियों के बूते की बात नहीं थी. इस मामले में निश्चित ही सत्ता के शीर्ष लोग भागीदार रहे होंगे, अपने दो निजी सहायकों की गिरफ्तारी से बौखलाए पूर्व मंत्री और भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा की इस मामले में व्यक्त की गई प्रतिक्रिया बिल्कुल चोर की दाढ़ी में तिनका जैसी है, फिर भी उनका यह कहना बिल्कुल ठीक है कि इस मामले में अभी छोटी मछलियों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन वे आश्वस्त रहें कि प्रदेश में अब कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की ईमानदार सरकार है और उसकी जांच एजेंसिया पूर्ण निष्पक्षता से काम करते हुए, इस गंभीर घोटाले में शामिल बड़ी से बड़ी मछलियों को भी बख्शने वाली नहीं हैं.

शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

शिवराज, राकेश और नरोत्तम को विधायकों को संभालने सौंपी कमान

 नेता प्रतिपक्ष गोपाल से नाराज है भाजपा हाईकमान

मध्यप्रदेश में दो भाजपा विधायकों के कांग्रेस के साथ चले जाने के झटके से उबरने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह के अलावा पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर भरोसा जताया है. शाह ने तीनों को विधायकों से बातचीत कर एकजुटता बनाए रखने और कांग्रेस के साथ गए दोनों विधायकों की वापसी के लिए कहा है.
शाह की नाराजगी के चलते पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह तो बुधवार को ही दिल्ली पहुंच गए थे, मगर जोड़-तोड़ में माहिर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को आज शाह ने दिल्ली तलब किया है. तीनों नेताओं से शाह ने कहा कि किसी भी तरह से नारायण त्रिपाठी और शरद कोल से चर्चा कर उनकी वापसी कराएं. साथ ही सारे विधायकों को एकजुट रखने का काम करें. शाह ने शिवराज और राकेश सिंह को लगातार विधायकों के संपर्क में रहने को कहा है. सूत्रों की माने तो नरोत्तम मिश्रा पर शाह ने भरोसा जताते हुए कांग्रेस से अंसुष्ट चल रहे विधायकों पर नजर रखते हुए उन्हें भाजपा के पक्ष में लाने की कवायद करने को कहा है. वहीं शाह नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव से नाराज चल रहे हैं. बताया जाता है कि बुधवार की शाम को जरुर गोपाल भार्गव और शाह की बातचीत हुई थी, मगर इसके बाद भार्गव से शाह ने संपर्क नहीं किया है.  शाह की भार्गव से नाराजगी को लेकर यह चर्चा भी तेज हो चली है कि भाजपा संगठन के साथ-साथ नेता प्रतिपक्ष पद के लिए भी बदलाव का मन बना चुकी है.
इन पर है कांग्रेस की निगाह
मध्य प्रदेश में  कांग्रेस लगातार दावे कर रही है कि उनकी पार्टी के संपर्क में भाजपा के कई विधायक हैं. सबसे ज्यादा निगाहें सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन और कटनी विजयराघवगढ़ के विधायक संजय पाठक पर हैं. स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने भी दोनों विधायकों के नाम लेकर दावा किया वह पार्टी संपर्क में हैं. संजय पाठक का नाम आने से विवाद गरमा गया.  पाठक को लेकर कहा गया कि वे मंत्रालय पहुंचे और मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिले भी. मगर बाद में पाठक ने इस बात को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के कामों के लिए मंत्रालय गए थे, मगर अधिकारियों से मिले, मुख्यमंत्री से नहीं मिले. उन्होंने कहा कि कमलनाथ मेरे पिता समान है, मेरे पिता के अच्छे मित्र भी रहे हैं, लेकिन मेरे पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने की बात अफवाह है.
कमलनाथ के निशाने पर नरोत्तम
राज्य में चल रही राजनीतिक उठापठक के बीच जब नरोत्तम मिश्रा पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भरोसा जताया तो वे मुख्यमंत्री कमलनाथ के निशाने पर आ गए. ईओडब्ल्यू (राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो) में चल रहे उनके पूर्व निज सहायकों के मामले में अब ईओडब्ल्यू ने शिकंजा कस दिया है. उनके एक निज सहायक वीरेन्द्र पांडे को तो गिरफ्तार भी कर लिया है. वहीं दूसरे निज सहायक निर्मल अवस्थी की गिरफ्तारी भी जल्द होने की संभावना है.  उल्लेखनीय है कि ईओडब्ल्यू ने हैदराबाद की एक कंपनी मैक्स मेटेंना लिमिटेड से सांठ-गांठ के आरोप में एक माह पहले नरोत्तम मिश्रा के निज सहायक रहे वीरेन्द्र पांडे और निर्मल अवस्थी से पूछताछ की थी. बाद में ईओडब्ल्यू ने रणनीति के तहत इन दोनों को छोड़ दिया था. इसके बाद  दोनों की रैकी की गई. यह दोनों अधिकारी मैक्स मेटेंना लिमिटेड के कर्ताधर्ताओं के संपर्क में थे.  
विधानसभा में चले घटनाक्रम के दौरान ईओडब्ल्यू अचानक सक्रिय हुआ और नरोत्तम मिश्रा के निज सहायक निर्मल अवस्थी को उनके निवास से गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद अब दूसरे निज सहायक वीरेन्द्र पांडे की तलाश की जा रही है. यह भी अटकलें शुरू हो गई हैं कि इन दोनों गिरफ्तारियों के बाद इसकी आंच नरोत्तम मिश्रा तक पहुंच सकती है. दरअसल नरोत्तम मिश्रा के जल संसाधन मंत्री रहते हुए हैदराबाद की इस कंपनी को टेंडर में हेरफेर कर ठेका दिया गया था. इस हेरफेर में नरोत्तम के दोनों निज सचिव की भूमिका संदिग्ध रही है. 

कांग्रेस के वचन पत्र की अर्थी निकालेगा युवा मोर्चा


कांग्रेस सरकार द्वारा प्रदेश के युवाओं के साथ की गई वादाखिलाफी और अपने वचन-पत्र में किए गए वादों को पूरा न किए जाने के विरोध में भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रदेश भर में जिला मुख्यालय पर 27 जुलाई को कांग्रेस के वचन-पत्र की अर्थी निकालेगा.
भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पांडेय ने बताया कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के पहले जारी किए गए अपने वचन-पत्र में बेरोजगार युवाओं को 4 हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता दिए जाने का वादा किया था, लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ अब इस वादे से पूरी तरह मुकर गए हैं. कांग्रेस सरकार द्वारा प्रदेश के युवाओं के साथ की गई इस धोखाधड़ी और वादाखिलाफी के विरोध में भारतीय जनता युवा मोर्चा कांग्रेस के वचन-पत्र की अर्थी निकालकर विरोध प्रदर्शन करेगा. पांडेय ने बताया कि 27 जुलाई को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भाजयुमो के कार्यकर्ता कांग्रेस के वचन-पत्र की अर्थी एक जुलूस के रूप में निकालेंगे. 

त्रिपाठी के आने से कांग्रेस नेताओं में बढ़ने लगी नाराजगी


अजय सिंह 
भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी को अपने पाले में लाकर भाजपा को झटका देने वाली कांग्रेस के लिए अब त्रिपाठी परेशानी का कारण भी बनते नजर आने लगे हैं. उनके विरोधी अजय सिंह के अलावा सतना जिले के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में यह नाराजगी दिखाई भी देने लगी है.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भले ही नारायण त्रिपाठी को अपने पाले में लाकर भाजपा को करारा झटका दिया हो, मगर उनके लिए त्रिपाठी परेशानी का कारण भी बनते नजर आ रहे हैं. पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंंह नारायण त्रिपाठी के पक्ष में कभी नहीं रहे. त्रिपाठी ही उनकी सतना से वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में हार के कारण बने थे, जब अजय सिंंह 10 से भी कम मतों से यह चुनाव हारे थे. कांग्रेस विधायक रहते हुए त्रिपाठी ने अचानक मतदान के चंद घंटों पर पहले पाला बदला और अजय सिंह की हार का कारण बन गए थे. इसके बाद और पहले से ही नारायण त्रिपाठी और अजय सिंंह के बीच तनातनी होती रही. हाल ही में जब त्रिपाठी की कांग्रेस में वापसी हुई तो अजय सिंह ने खुलकर मीडिया में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि मेरी राय जगजाहिर है. आज इन दोनों नेताओं के आने के बाद पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्ता क्या सोच रहा होगा यह बात सोचनी चाहिए. पार्टी के इस वरिष्ठ नेता के सार्वजनिक तौर पर इस तरह नाराजगी जताने के बाद अब पार्टी के बड़े नेता भी सकते में है. वैसे विंध्य की सियासत में अजय सिंह और नारायण त्रिपाठी की सियासी अदावत कोई नई बात नहीं है. अजय सिंह के अलावा सतना जिला इकाई में भी अब त्रिपाठी को लेकर विरोध नजर आ रहा है. फिलहाल तो कार्यकर्ता और स्थानीय पदाधिकारी मौन हैं, मगर वे सब अजय सिंह के रुख का इंतजार कर रहे हैं.
राजनीतिक विश्लेषक भी यह मानते हैं कि नारायण त्रिपाठी के कांग्रेस के साथ आने पर भले ही पार्टी ने सदन में विरोधी दल भाजपा को अपनी ताकत दिखा दी हो, लेकिन इसका कोई बड़ा जमीनी लाभ पार्टी को नहीं मिलने जा रहा है. पहले विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव में जिस तरह कांग्रेस को विंध्य में एक बड़ी हार का सामना करना पड़ा है उससे इस क्षेत्र में मौजूदा पूरे सियासी समीकरण अब भी पार्टी के विरोध में ही दिखाई दे रहे हैं.

पोस्टर के जरिए सरकार पांच साल चलने का दावा


भाजपा के दो विधायकों की सेंधमारी से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह इनता बढ़ा है कि अब वे पोस्टर के जरिए कमलनाथ सरकार पांच साल चलने का दावा करने लगे हैं. 
राजधानी में आज प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर लगाया गया एक पोस्टर चर्चा का विषय रहा है. यह पोस्टर कांग्रेस के प्रवक्ता शहरयार खान और उनके मित्रों ने लगाया है. इस पोस्टर पर  लिखा है, 'मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सदन में फ्लोर टेस्ट में दो भाजपा के विधायक का समर्थन प्राप्त कर ये साबित कर दिया की मध्य प्रदेश में जन हितैशी कमलनाथ सरकार चलेगी. प्रदेश कांग्रेस के बाहर लगाए गए इस पोस्टर से सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. हालांकि कांग्रेस की ओर से किसी वरिष्ठ नेता ने न तो इस पोस्टर पर आपत्ति जताई है और न ही पोस्टर को लेकर नाराजगी जताई. खास बात यह है कि पोस्टर पर मुख्यमंत्री कमलनाथ के अलावा सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित राष्ट्रीय और प्रदेश के नेताओं के चित्र भी लगे हैं. प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर लगे इस पोस्टर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेता तो खुश हैं, मगर भाजपा में खलबली मच गई है.

कमजोर कड़ियों की निगरानी में जुटी भाजपा-कांग्रेस

कांग्रेस ने मंत्रियों और भाजपा ने बड़े नेताओं को लगाया विधायकों की निगरानी में

भाजपा के दो विधायकों के टूटने के बाद राज्य में चल रही उठा-पटक को देखते हुए कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल सजग हो गए हैं. दोनों ही दलों विधायकों की निगरानी भी बढ़ी है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंत्रियों को यह जिम्मेदारी दी है तो भाजपा की ओर से सभी संभागों में वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों को इस कार्य में लगा दिया है.
मध्यप्रदेश विधानसभा में दंड संशोधन विधेयक के दौरान हुए मतदान में भाजपा के दो विधायकों नारायण त्रिपाठी और शरद कोल द्वारा विधेयक के पक्ष में मतदान करने के बाद गर्माए माहौल को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल सजग हो गए हैं. विशेषकर कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा के बयान (शुरुआत कांग्रेस ने की है, अंत हम करेंगे) को गंभीरता से लिया है. कमलनाथ ने अपने सारे मंत्रियों को इस काम में लगा दिया है कि वे अपने-अपने प्रभार वाले और गृह जिलों के कांग्रेस विधायकों पर नजर रखें. इसके अलावा सपा और बसपा एवं निर्दलीय विधायकों पर वे खुद और उनके सहयोगी नेता नजर गढ़ाए हुए हैं. मुख्यमंत्री को इस बात अहसास है कि इस घटना के बाद दिल्ली नेतृत्व के इशारे पर भाजपा द्वारा कांग्रेस के अलावा सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों में सेंधमारी की जाएगी. 
वहीं भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व की नाराजगी के बाद प्रदेश संगठन ने भी अपने विधायकों पर निगरानी बढ़ा दी है. विशेषकर वे विधायक जो कांग्रेस से आकर भाजपा मेंं शामिल हुए थे. इन विधायकों को लेकर भाजपा कुछ ज्यादा गंभीर है. भाजपा संगठन ने राज्य के दसों संभागों में वरिष्ठ नेताओं एवं पूर्व मंत्रियों को यह जिम्मेदारी दी है. सूत्रों की माने तो रीवा संभाग में राजेन्द्र शुक्ल, सागर संभाग में भूपेन्द्र सिंह, ग्वालियर-चंबल संभाग में नरोत्तम मिश्रा और अरविंद भदौरिया, जबलपुर संभाग में अजय विश्नोई, उज्जैन संभाग में पारस जैन, इंदौर संभाग में जगदीश देवड़ा के अलावा इन संभागों के वरिष्ठ नेताओं को यह जिम्मेदारी दी है कि वे भाजपा विधायकों के अलावा वे विधायक जो मूलत: कांग्रेस के हैं एवं भाजपा में आकर शामिल हुए हैं. इन विधायकों पर नजरें रखी जाए. भाजपा के विधायकों के संपर्क में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह को रहने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है. ये दोनों नेता सभी विधायकों से लगातार संपर्क में रहेंगे.
कांग्रेस नेता मान रहे चुप नहीं रहेगी भाजपा
दो विधायकों के टूटने के बाद जब भाजपा हाईकमान नाराज हुआ तो कांग्रेस नेता इस बात को मानने लगे हैं कि अब भाजपा इस मामले को गंभीरता से लेगी और जल्द ही वह कुछ कदम उठा सकती है.वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता  नरोत्तम मिश्रा ने भी एलान किया था कि खेल कांग्रेस ने शुरू किया खत्म हम करेंगे. कांग्रेस की घबराहट का कारण दरअसल नरोत्तम मिश्रा का यह बयान भी है. पार्टी नेता मान कर चल रहे हैं कि भाजपा चुप नहीं बैठेगी. कुछ न कुछ जरूर करेगी. इस घटनाक्रम के बाद से कांगे्रस नेताओं द्वारा नरोत्तम मिश्रा के अलावा राज्य के पूर्व मंत्री कैलाश विजवर्गीय पर भी नजरें टिकी हुई हैं.यही वजह है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पार्टी के असंतुष्ट विधायकों को साधने का काम भी शुरु कर दिया है. उन्होंने मंत्रियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि असंतुष्ट विधायकों और सपा एवं बसपा के अलावा निर्दलीय विधायकों के काम प्राथमिकता के आधार पर करें.  

गुरुवार, 25 जुलाई 2019

जवाब देने भाजपा करती रही मंथन

 संघ ने भी मांगी जानकारी, शिवराज मिले संघ पदाधिकारियों से और गए दिल्ली

कर्नाटक के बाद मध्यप्रदेश में उठा सियासी तूफान अब तेज हो गया है. कांग्रेस द्वारा दो विधायकों को अपने पाले में लाने के बाद भाजपा इसका जवाब देने के लिए लगातार मंथन बैठकेंं कर  करती रही. बैठकों का दौर प्रदेश भाजपा कार्यालय में चला. इसके अलावा संघ कार्यालय में संघ पदाधिकारी भी सक्रिय नजर आए. उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी भी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से ली. चौहान अपरान्ह में दिल्ली रबाना हो गए. चौहान की दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष से बात होगी.
राज्य विधानसभा में दंड संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए हुए मतदान में भाजपा के दो विधायकों नारायण त्रिपाठी और शरद कोल ने कमलनाथ सरकार पर विश्वास जताया और विधेयक के पक्ष में मतदान किया. भाजपा के दो विधायकों के कांग्रेस के पाले में जाने से भाजपा को जो करारा झटका लगा, उसके बाद से बुधवार की रात से लेकर आज दिनभर भाजपा कार्यालय में बैठकों का दौर जारी रहा. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने सुबह पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के साथ अलग-अलग बैठकें की. इसके बाद तीनों नेताओं ने एक साथ बैठक कर विधायकों को एकजुट रखने पर बल दिया. भाजपा की इन बैठकों में फिलहाल यह प्रयास किया गया कि दोनों विधायकों को अपने पक्ष में रखा जाए, मगर दोनों विधायक भाजपा के किसी नेता से आज नहीं मिले. प्रदेश कार्यालय में हुई बैठकों में पूर्व मंत्री और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामल हुए संजय पाठक भी पहुंचे थे. पाठक के अलावा भाजपा अब उन विधायकों पर नजरें रखे हुए हैं जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे और चुनाव लड़कर विधायक बने हैं. 
संघ और राष्ट्रीय नेतृत्व के सक्रिय होने के बाद पूरी  भाजपा अब इस रणनीति पर काम कर रही है कि कांग्रेस को किस तरह और कब करारा जवाब दिया जाए.यही वजह है कि आज भाजपा के वरिष्ठ नेता बयानबाजी से बचते रहे. बैठकों में शामिल  होने वाले    नेता ,  मीडिया से दूरी ही बनाते नजर आए.
संघ हुआ सक्रिय
भाजपा पदाधिकारियों के अलावा संघ ने भी आज सक्रियता दिखाई. संघ ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा की और रिपोर्ट मांगी. बीती रात को ही संघ पदाधिकारियों ने शिवराज सिंह चौहान को संघ कार्यालय बुला लिया था. संघ पदाधिकारियों ने भी विधायकों की एकजुटता पर जोर दिया है. साथ ही कांग्रेस से भाजपा में शामिल होकर चुनाव लड़े और जीते विधायकों की जानकारी भी संघ ने संगठन से तलब की है. इसके अलावा विधायकों को तोड़-फोड़ को कैसे रोका जाए, इसकी जानकारी भी संगठन से मांगी है.
भाजपा में  वापस जाने का सवाल ही नहीं: त्रिपाठी
 विधायक नारायण त्रिपाठी ने आज साफ कर दिया कि भाजपा में अब उनकी वापसी का सवाल ही नहीं है. त्रिपाठी ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि वे शिवराज सिंह चौहान की कार्यशैली से नाराज है. उनके अलावा और भी विधायक हैं जो चौहान की कार्यशैली से नाराज हैं. त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि कई विधायक शिवराज से नाराज हैं. भाजपा में वापसी को लेकर त्रिपाठी ने साफ कहा कि इसका अब सवाल ही नहीं उठता है. त्रिपाठी ने कहा कि मैहर के विकास के लिए कमलनाथ सरकार के साथ में हूं. मैहर के लिए जो करना पड़े करूंगा. उन्होंने कहा कि  अपनी पीड़ा को लेकर बीजेपी के हर फोरम पर बात रखी  मगर कहीं सुनवाई नहीं हुई है. इसलिए मजबूरन ये कदम उठाना पड़ा.
चौहान गए दिल्ली
प्रदेश संगठन और संघ के नेताओं से चर्चा करने के बाद अपरान्ह में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दिल्ली रबाना हो गए. वे औपचारिक रुप से भाजपा के संसदीय दल की बैठक में भाग लेने गए हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि मध्यप्रदेश के घटनाक्रम के संदर्भ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष से आमने-सामने की बातचीत भी होगी.

62 साल की विमला का दिल भेजा मुंबई

 12 साल के बच्चे को लगेगा, आंखे हमीदिया अस्पताल में की दान

राजधानी भोपाल की महिला स्वर्गीय विमला अरोरा का दिल मुंबई के हार्ट डिसीज से जूझ रहे एक 12 साल के बालक को लगेगा, जबकि उनकी आंखे हमीदिया अस्पताल में दान कर दी गई. 
स्वर्गीय विमला अजमेरा माह मई में एक हादसे के बाद वो सिद्धांता रेडक्रॉस अस्पताल में भर्ती थीं. बुधवार सुबह डाक्टरों ने उन्हें ब्रेन डैड घोषित कर दिया था. उसके बाद परिवार ने उनके अंगदान करने का फैसला किया. परिवार के फैसले के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मुंबई के फोर्टिस अस्पताल से संपर्क किया. खबर मिलते ही रात 12.30 बजे विशेषज्ञ डाक्टरों का दल मुंबई से यहां पहुंच गया. तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सुबह साढ़े पांच बजे विमला के शरीर  से हार्ट को निकालने का काम शुरू हुआ और सुबह लगभग सवा आठ बजे आपरेशन थियेटर से हार्ट बाहर लाया गया. भोपाल कलेक्टर तरूण पिथोडेÞ के आदेश पर सिद्धांता अस्पताल से लेकर एयरपोर्ट तक ग्रीन कारिडोर बनाया गया था, ताकि आर्गन जल्द से जल्द सही वक्त पर मुंबई पहुंचाया जा सके. ग्रीन कारिडोर बनने की वजह से एंबुलेंस महज 17 मिनट में एयरपोर्ट पहुंच गई और विमला अजमेरा का दिल मुंबई के लिए रवाना कर दिया गया.
भोपाल आर्गन डोनेशन सोसाइटी की चेयरपर्सन अमिता चांद और सुनील राय सहित स्वर्गीय विमला के परिवार वालों की मौजूदगी में उनके बाकी आर्गन निकाले गए. उनकी आंखें हमीदिया अस्पताल को डोनेट कर दी गई. समय रहते दूसरे शहर के लिए आसान कनेक्टिविटी ना होने के कारण स्वर्गीय अजमेरा की लंग्स डोनेट नहीं की जा सकीं. भोपाल से मुंबई और चेन्नई के लिए आसान एयर कनेक्टिविटी न होने के कारण दूसरी बार ऐसा हुआ कि लंग्स डोनेट करने के लिए परिवार तैयार था लेकिन लंग्स दान नहीं की जा सकीं. उनका लीवर भी सिद्धांता में ही डोनेट किया जाना था, लेकिन लीवर सही तरीके से काम नहीं कर रहा था इस वजह से डाक्टर्स ने उसे शरीर से नहीं निकाला.

हाईकमान हुआ नाराज, रिपोर्ट की तलब

 प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह दिल्ली में अमित शाह को देंगे घटनाक्रम की पूरी जानकारी

भाजपा के दो विधायकों के कांग्रेस के पाले में जाने की घटना को लेकर भाजपा हाईकमान प्रदेश संगठन से खफा है. हाईकमान ने बुधवार की शाम से ही प्रदेश के नेताओं से लगातार संपर्क कर पहले जानकारी एकत्रित की और फिर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह को भोपाल भेजकर घटनाक्रम की पूरी रिपोर्ट तलब की है. प्रदेश संगठन बागी हुए विधायकों पर कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा था कि हाईकमान ने इस पर आपत्ति जताई है, जिससे इन पर होने वाली कार्रवाई भी अब भाजपा नहीं करना चाहती है. 
राज्य विधानसभा में दंड विधेयक के दौरान भाजपा के दो विधायकों नारायण त्रिपाठी और शरद कोल द्वारा सरकार के पक्ष में मतदान किए जाने की घटना के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह प्रदेश संगठन से खफा हैं. शाह ने पहले इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा की और इस पर नाराजगी भी जताई. इसके बाद उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और प्रदेश संगठन मंत्री सुहास भगत से अलग-अलग चर्चा की. राकेश सिंह इस चर्चा के बाद तुरंत रात को ही भोपाल पहुंचे और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान से अलग-अलग चर्चा की. इसके बाद अन्य नेताओं से भी राकेश सिंह ने चर्चा की है. राकेश सिंह ने पूरे घटना  क्रम की जानकारी ली और वे अब इसकी पूरी रिपोर्ट अमित शाह को दिल्ली में देंगे. माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के बाद संगठन में काफी कुछ बदलाव नजर आ सकता है.
अमित शाह की नाराजगी के चलते फिलहाल दोनों विधायकों पर संगठन द्वारा लगाम लगाने के लिए की जाने वाली कार्रवाई को लेकर प्रदेश संगठन मौन हो गया है. पहले यह माना जा रहा था कि दोनों विधायकों पर संगठन कार्यवाही करेगा, मगर अब यह प्रयास किए जा रहे हैं कि दोनों विधायकों से बातचीत की जाए और उनकी नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया जाए. हालांकि आज संगठन नेताओं का यह प्रयास असफल रहा, दोनों विधायक भाजपा  नेताओं से दूरी बनाए रहे.
नेता प्रतिपक्ष की बढ़ सकती है मुश्किलें
पार्टी हाईकमान की नाराजगी को देखते हुए प्रदेश पदाधिकारी इस बात के संकेत देने लगे हैं कि संगठन में बदलाव हो सकता है, साथ ही नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव की मुसिबत भी बढ़ सकती है. भार्गव के उस बयान से भी हाईकमान खफा है जिसमें उन्होंने कहा था कि हमारे नंबर 1 और नंबर 2 नेता जिस दिन कहेंगे उसके 24 घंटे में कांग्रेस सरकार गिरा दी जाएगी. इस बयान से हाईकमान जहां नाराज है, वहीं पार्टी ने किनारा कर लिया है. वहीं विधेयक जब पारित किया गया, उस वक्त सदन में भाजपा के करीब 2 दर्जन विधायक अनुपस्थित थे. इस बात की जानकारी को भी संगठन ने गंभीरता से लिया है. 
रघुनंदन शर्मा ने कहा पार्टी को आत्मावलोकन की जरुरत
भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा एक बार फिर पार्टी के नेताओं से नाराज हैं. उनकी नाराजगी किस नेता को लेकर है, यह तो उन्होंने स्पष्ट नहीं किया, मगर इशारा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर जा रहा है. शर्मा का मीडिया में यह बयान आया कि स्वयं को एकात्म मानवतावाद का ज्ञाता समझने वाले लोगों ने अपने हितों और प्रतिष्ठा के लिए जिन सिद्धांतों के तहत इन लोगों का पार्टी में जमावड़ा किया उसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ रहा है. पार्टी को अब आत्मावलोकन की जरुरत है. उन्होंने कहा कि पार्टी को उन नेताओं के बारे में भी सोचने की जरुरत है, जिन्होंने अपने अहम की संतुष्टि के लिए पार्टी की कितनी बड़ी क्षति की है. हालांकि यह पहला मौका नहीं है, जब शर्मा ने इस तरह का बयान दिया हो, वे विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव के बाद भी लगातार इस तरह के बयान देते रहे हैं. उनका निशाना सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री चौहान पर ही होता है. शर्मा के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है.
डरी हुई है कांग्रेस
विधानसभा के घटनाक्रम को लेकर आज नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि  कांग्रेस की सरकार डरी हुई है. कांग्रेस को प्रजातांत्रिक संस्था का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए.  नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान कांग्रेस ने अकेले दौड़कर दस्तखत कर लिए. उन्होंने कहा कि ये फ्लोर टेस्ट नहीं था, इसकी प्रमाणिकता तब होती जब विश्वास मत लाया जाता. भार्गव ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को खुश होने की जरूरत नहीं है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अभी दोनों विधायकों से चर्चा नहीं हुई है. दोनों विधायकों को लेकर बात करेंगे. हम सब एक हैं, वक़्त आएगा तो बात देंगे. भार्गव ने ये भी कहा कि हम लोग विश्वास की राजनीति करते हैं, विधायकों की जासूसी नहीं करते हैं.

मंत्री ने कहा घुटन महसूस करने वाले भाजपा विधायक आ जाएं कांग्रेस में

पूर्व मंत्री ने कांग्रेस पर लगाया हार्स ट्रेडिंग की कोशिश का आरोप, राकेश सिंह ने कहा नियंत्रण में है पार्टी

विधानसभा में दंड विधेयक संशोधन के दौरान भाजपा के दो विधायकों द्वारा सरकार के पक्ष में मतदान करने के बाद राजनीतिक सरगर्मी कम नहीं हो रही है. कांग्रेस के मंत्रियों ने मैदानी मोर्चा संभाल रखा है और वे भाजपा के और भी विधायक कांग्रेस के संपर्क में होने का दावा कर रहे हैं. सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह ने तो खुले तौर पर कहा कि भाजपा के विधायक जो भाजपा में घुटन महसूस कर रहे हैं वे कांग्रेस में आ जाएं. वहीं भाजपा की ओर से खुद प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि पार्टी में सब कुछ ठीक है और नियंत्रण में हैं, जबकि पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कांग्रेस पर हार्स ट्रेडिंग की कोशिश का आरोप लगाया है.
राज्य विधानसभा में बुधवार को दंड संशोधन विधेयक के दौरान हुए मतदान में भाजपा के दो विधायकों नारायण त्रिपाठी और शरद कोल द्वारा सरकार के पक्ष में मतदान किए जाने के बाद से भाजपा में बैठकों का दौर तेज हो गया है. वहीं कांग्रेस के मंत्रियों ने भाजपा के खिलाफ मैदानी मोर्चा संभाला है और लगातार इस बात के दावे किए जा रहे हैं कि भाजपा के और भी विधायक मुख्यमंत्री के संपर्क में है. वहीं भाजपा की ओर से कांग्रेस को इस घटना के बाद करारा जवाब देने की रणनीति भी बनने लगी है. पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने तो साफ कह दिया कि शुरुआत कांग्रेस ने की है, खत्म हम करेंगे.
राकेश सिंह ने कहा सब कुछ नियंत्रण में
मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भााजपा) के दो विधायकों के विधानसभा में कांग्रेस के पाले में दिखाई देने के बाद पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राकेश सिंह ने आज दावा किया कि पार्टी में सब कुछ अनुकूल और नियंत्रण में है.   सिंह ने मीडिया से चर्चा के दौरान दावा किया कि पार्टी में सब कुछ अनुकूल और नियंत्रण में है. उन्होंने पार्टी में गुटबाजी की खबरों को भी नकारते हुए कहा कि पूरी पार्टी एक है.
घुटन महसूस करने वाले विधायकों के लिए खुले हैं कांग्रेस के दरवाजे
मध्यप्रदेश के सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह ने आज भाजपा के सभी विधायकों से अपील की है कि जो विधायक भाजपा में घुटन महसूस कर रहे हैं उनके लिए कांग्रेस पार्टी के दरवाजे खुले हैं. इसके साथ ही उन्होने यह भी कहा कि भाजपा में हिम्मत है तो सरकार गिरा कर दिखाएं. उन्होंने कहा कि भाजपा वाले साम्प्रदायिकता और झगड़े को बढ़ावा देते हैं. हमारे पुराने साथी भाजपा के बहकावे में आकर भाजपा में चले गए थे. भाजपा, आरएसएस और मोदी की प्रजातंत्र विरोधी नीतियां हैं. सभी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर और खत्म किया जा रहा है. जब हमारे पुराने साथियों को ये समझ आया तो वो हमारे साथ आ गए. मंत्री ने कहा कि भाजपा अपना घर नहीं संभाल पा रही वो सरकार क्या गिराएगी. जितनी भाजपा की ताकत है वो लगा ले. भाजपा में हिम्मत है तो सरकार तोड़कर दिखाए. 
और भी भाजपा विधायक हमारे संपर्क में
विधि मंत्री पीसी शर्मा ने कहा है कि भाजपा के और भी विधायक उनके संपर्क में हूं. शर्मा ने कहा कि आगे भी फ्लोर टेस्ट हुआ तो वो भी हमारे पक्ष में दिखेंगे. उन्होंने कहा कि भाजपा बैठकें करती रहेगी, और विधायक हमारे पास आते रहेंगे. भाजपा नेतृत्वहीन है, भाजपा में अभी नेताओं की लड़ाई चल रही है. बैठकें लेकर सब खुद को नेता साबित करने में लगे हुए हैं. उन्होंने दावा किया कि भाजपा के एक दर्जन विधायक मुख्यमंत्री के संपर्क में हैं, वे कांग्रेस में शामिल होना चाहते हैं. 
कम्प्यूटर बाबा का दावा, भाजपा के चार विधायक उनके संपर्क में
कम्प्यूटर बाबा ने भी अब भाजपा और कांग्रेस के दंगल में कूद गए हैं. बाबा ने आज इंदौर में एक बयान देकर इस बात का दावा किया कि भाजपा के चार विधायक उनके संपर्क में हैं. कंप्यूटर बाबा ने कहा कि जिस दिन मुख्यमंत्री कमलनाथ निर्देश देंगे उन्हें कांग्रेस में शामिल करा दिया जाएगा. कंप्यूटर बाबा का कहना है कि चारों विधायक भाजपा से बेहद नाराज है और किसी भी दिन कांग्रेस में शामिल हो सकते है. हालांकि, बाबा ने इस बात का खुलासा नहीं किया हैं, कि ये विधायक कौन है और किस क्षेत्र से आते हैं. बाबा ने कहा कि यह जरुर है कि किसी भी वक्त वो भाजपा में शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा कंप्यूटर बाबा ने कहा कि उन्हें जल्द ही हेलिकाप्टर मिलने वाला है. फिलहाल, मौसम की दिक्कत है इस वजह से हेलिकाप्टर नहीं मिला है.
कांग्रेस ने की हार्स ट्रेडिंग की कोशिश
पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कांग्रेस पर हार्स ट्रेडिंग की कोशिश का आरोप लगाया है. सिंह ने कहा कि  फ्लोर टेस्ट में भाजपा लाइन के खिलाफ वोट कर विधायक नारायण त्रिपाठी और शरद कोल ने पार्टी से छल किया है.्र सिंह ने कहा ऐसी तो कोई बात नहीं है. पार्टी इस विधेयक का समर्थन कर रही थी, लेकिन डिविजन मांगना पहले से तय था. वहीं पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि खेल तो कांग्रेस ने शुरु किया है, खत्म हम करेंगे.

मुख्यमंत्री ने विपक्ष से मांगा सहयोग


मध्यप्रदेश में गर्माए सियासी माहौल को ठंडा करने की कोशिश आज मुख्यमंत्री कमलनाथ ने की है. उन्होंने ट्वीट के जरिए विपक्ष से सरकार का सहायोग करने की अपेक्षा की है और सकारात्मक राजनीति करने की बात कही है.
राजनीतिक उठापटक के बीच मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा है कि हम प्रदेश को विकास की दृष्टि से देश में शीर्ष पर ले जाना चाहते है. हम प्रदेश के विकास का एक नया नक़्शा बनाना चाहते हैं प्रदेश हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम प्रदेश को दलगत राजनीति में बांटना नहीं चाहते हैं. हम विपक्ष से भी शुरू से यही अपेक्षा कर रहे हैं कि वो सकारात्मक राजनीति करें. सकारात्मक राजनीति करते हुए प्रदेश के विकास में हमें सहयोग करें. हमें जनादेश मिला है, विपक्ष उसका सम्मान करे. हम अभी भी विपक्ष से प्रदेश हित में, प्रदेश के विकास के लिए सहयोग की उम्मीद और अपेक्षा करते हैं. मुख्यमंत्री की इस कोशिश  को राज्य में गर्माए राजनीतिक माहौल को ठंडा करने की कोशिश के रुप में देखा जा रहा है.
अधिकारी संवैधानिक कर्तव्य का करें पालन
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.के. मिश्रा ने आज अधिकारियों से अपील की है. उन्होंने अपील में कहा कि बुधवार को अपने कथित राजनैतिक दंभ से अभिभूत भाजपा को हमारे राष्ट्रीय नेता, प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने राजनैतिक कौशल से जिस तरह धूल-धूसरित किया है, उसके बाद प्रदेश के उन अधिकारियों से प्रदेश की जनता के हित में मेरी विनम्र गुजारिश है कि वे उन भाजपा नेताओं, जो सत्ताच्युत होने के असहनीय दर्द से तड़फड़ा रहे हैं, की भक्ति त्याग अपने संवैधानिक कर्तव्य का पालन करें. मिश्रा ने कहा कि अधिकारी मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार के प्रगति-विकास व समृद्धि के सपनों को साकार करने हेतु पूरे अंतर्मन से जुट जाएं, भाजपाई कबीलों की तड़फड़ाहट के बाद भी कमलनाथ की लोकोपयोगी सरकार पूरे 5 सालों तक चलकर प्रदेश का वास्तविक कल्याण करेगी.

बुधवार, 24 जुलाई 2019

दो विधायकों ने छोड़ा भाजपा का साथ

दंड विधि संशोधन विधेयक के जरिए कमलनाथ ने किया शक्ति परीक्षण

कर्नाटक की सरकार गिरने के बाद मध्यप्रदेश सरकार को गिराने का दावा कर रही भाजपा को आज बुधवार की शाम को करारा झटका लगा है. विधानसभा में दंड विधि संशोधन विधेयक के लिए हुए मतदान में सरकार के पक्ष में 122 विधायकों ने मतदान किया और विधेयक पारित कर दिया. 122 विधायकों में सरकार के पक्ष में भाजपा के दो विधायकों ने भी मतदान किया. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने भाजपा विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर होने का दावा किया है.
राज्य विधानसभा में आज सरकार की ओर से दंड विधि संशोधन विधेयक पेश किया गया. इस विधेयक पर चर्चा के बाद बसपा के संजीव सिंह संजू ने मतदान कराने की बात कही. इसके पहले भाजपा यह चाह रही थी कि विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो जाए. बसपा विधायक द्वारा जब मतदान की बात कही तो विधेयक के लिए मतदान कराया गया. मतदान  में सरकार के पक्ष में 122 विधायकों  ने मतदान किया और विधेयक पारित करा दिया. इस विधेयक के पक्ष में मतदान करने वाले दो भाजपा विधायकों के नाम नारायण प्रसाद त्रिपाठी मैहर और शरद कौल ब्यौहारी बताए गए हैं. कमलनाथ सरकार में मंत्री औंकार सिंह मरकाम ने यह जानकारी देते हुए संवाददातों को बताया कि हम इन दोनों विधायकों को धन्यवाद देना चाहते हैं कि दोनों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया. कांग्रेस के तुर्क विधायक कुणाल चौधरी ने भी कांग्रेस के पक्ष में दोनों विधायकों द्वारा विधेयक के पक्ष में मतदान करने की बात कही. इसी बीच नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि विधेयक के पक्ष में भाजपा के दोनों विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं. विंध्य क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपा विधायक केदार शुक्ल ने भी यही आरोप लगाए हैं. विधेयक के पक्ष में मतदान के करने वाले दोनों भाजपा विधायक भाजपा में आने से पूर्व कांग्रेस के साथ रहे हैं. 
यहां उल्लेखनीय है कि विधानसभा में कांग्रेस के 114 विधायक हैं. इसके अलावा बसपा के 2, सपा के 1 और निर्दलीय 4 विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन दिया है. इस तरह 121 विधायक कांग्रेस के पक्ष में हैं. वहीं भाजपा के 109 विधायक हैं. मतदान में कांग्रेस की ओर से विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने हिस्सा नहीं लिया था. इस तरह से कांग्रेस की ओर से 120 विधायकों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया है, जबकि विधेयक के पक्ष में 122 मत मिले हैं.
मुझे यह साबित करना था हमारी सरकार अल्पमत की नहीं
वोटिंग के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि कई दिनों से ये बात चल रही थी कि ये सरकार अल्पमत में है, लेकिन आज दंड संशोधन विधेयक के दौरान हुई वोटिंग में भाजपा के दो विधायकों ने हमारे पक्ष में वोट किया. इसमें मैहर से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी और ब्यौहारी के विधायक शरद कोल हैं. उन्होंने कहा कि मुझे ये बात साबित करनी थी कि ये सरकार अल्पमत में नहीं थी और आज विधेयक के पक्ष में हुई वोटिंग से ये साफ हो गया है. इतना ही नहीं बसपा, सपा और निर्दलीय विधायक भी हमारे साथ हैं. 
सुबह से चलता रहा चुनौती का दौर
कर्नाटक सरकार के बाद मध्यप्रदेश सरकार को गिराने को लेकर सुबह से ही भाजपा और कांग्रेस दोनों ओर से एक-दूसरे को चुनौती दिए जाने का सिलसिला चल रहा था. सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने ट्वीट और फिर सदन में सरकार को गिराने की बात कहते हुए अल्पमत वाली सरकार बताया था. इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इसी तरह की बात कहते रहे. वहीं भाजपा पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सीधा हमला भी किया. उन्होंने भाजपा नेताओं को सदन के अंदर यह चुनौती दे डाली कि वे चाहें तो फ्लोर टेस्ट करा लें. इसी तरह कमलनाथ मंत्रिमंडल के सदस्य भी कमलनाथ सरकार को मजबूत सरकार बताते हुए 5 साल तक चलने वाली सरकार बताते रहे. वहीं भाजपा की ओर से कमलनाथ सरकार को अल्पमत की सरकार बताया जा रहा था.
कांग्रेस मेरा पुराना घर
कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने वाले दो विधायकों में से एक विधायक नारायण प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि वे भाजपा में अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहे थे. शिवराज सिंह चौहान ने उपचुनाव के समय मेरे क्षेत्र में बहुत सारी घोषणाएं कर डाली थी, मगर काम नहीं हुआ. इस कारण क्षेत्र जनता के सामने जवाब  नहीं दे पा रहा था. कांग्रेस मेरा पुराना घर है, मैं अपने घर वापस आया हूं.
विधानसभा का सत्र समाप्त
राज्य विधानसभा का मानसून सत्र आज दो दिन पहले ही समाप्त हो गया. समय से पहले समाप्त हुए सत्र में सरकार ने बजट पारित कराया इसके अलावा सत्र के अंतिम दिन आज बुधवार को सरकार ने विधेयक भी पारित कराए. 8 जुलाई से शुरु हुआ यह सत्र 26 जुलाई तक चलना था, मगर दो दिन पहले आज ही सत्र को समाप्त कर दिया गया.




1 और 2 नंबर का आदेश हुआ तो 24 घंटे भी नहीं रहेगी सरकार : भार्गव

कर्नाटक के बाद मध्यप्रदेश में पक्ष-विपक्ष में बढ़ी तकरार

कर्नाटक के बाद अब मध्यप्रदेश में पक्ष-विपक्ष के नेताओं के बीच तकरार बढ़ने लगी है.विधानसभा में सदन के अंदर नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि अगर हमारे ऊपर वाले 1 और 2 नंबर का आदेश हुआ तो 24 घंटे भी  सरकार नहीं चलेगी.कर्नाटक में चली हवा मध्यप्रदेश में कहीं आंधी न बन जाएं, प्रदेश में फिर से लोकप्रिय सरकार बनेगी. इसके बाद सदन में जमकर हंगामा हुआ.
 नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव  के इतना कहते ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सदन में कहा कि  आपके 1 और 2 नंबर वाले समझदार हैं, इसलिए आदेश नहीं दे रहे हैं. मध्यप्रदेश में उनकी सरकार पूरे पांच साल चलेगी. उन्होंने  कहा कि यदि वे  चाहें हैं तो आज ही अविश्वास प्रस्ताव ले आएं. साबित हो जाएगा कि सरकार अल्पमत में नहीं है.
 नेता प्रतिपक्ष भार्गव ने सदन में ये टिप्पणी उस समय की जब कांग्रेस सदस्यों की ओर से लाए गए ध्यानाकर्षण सूचना पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन में उनके ऊपर कोई दाग नहीं है. इस पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी व्यथा बता रहे हैं.  इसी दौरान सदन में सत्तारूढ दल कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया. सदस्यों ने खरीद फरोख्त का आरोप लगाया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने भी कहा कि यहां बैठे विधायक बिकाऊ नहीं हैं. इस हंगामे के चलते अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी.
 वहीं नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ कमलनाथ मंत्रिमंडल के मंत्रियों ने मोर्चा खोल दिया और उनके  बयान को मुंगेरीलाल के सपने जैसे बताया है. नेता प्रतिपक्ष के अलावा भाजपा के अन्य नेताआें के बयानों और ट्वीट ने सरकार की स्थिरता पर सवाल उठा दिए हैं.  उधर नेता प्रतिपक्ष के बयान पर खेल मंत्री जीतू पटवारी ने पलटवार करते हुए कहा है कि कमलनाथ सरकार को गिराने के लिए सात जन्म लेने पड़ेंगे. उन्होंने कहा कि कर्नाटक में कुमार स्वामी की सरकार थी, लेकिन यहां कमलनाथ की सरकार है. 'ऐसी गीदड़ भपकी से कमलनाथ सरकार का कुछ नहीं होगा, जो भी सरकार गिराने की बातें कर रहे हैं वो सब भ्रष्टाचार में लिप्त हैं. वहीं  लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे ने कहा है कि इनके मुंगेरीलाल के हसीन सपने हैं. ये सरकार पांच साल नहीं, बल्कि पूरे 10 साल चलने वाली सरकार है. पांसे ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में चलने वाली इस सरकार को कोई नहीं हिला सकता है. उन्होंने कहा कि 6 महीनों में कई ऐतिहासिक काम किये गए हैं जिससे आम जनता को फायदा पहुंचा है.
बहुमत देने वाले बांहें चढ़ाकर रोज चेतावनी देते हैं आपको
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान  ने हंगामें के बीच कहा कि मुख्यमंत्री क्यों घबरा रहे हैं, सरकार चलनी होगी तो चलेगी, नहीं तो गिर जाएगी, वैसे भी तो अल्पमत में है. उन्होंने कहा कि यह सरकार अल्पमत में है तो कहा जाएगा कि अल्पमत की सरकार.इससे व्यथित होने की जरुरत नहीं है, आप तो काम करो. शिवराज ने कहा कि बहुमत देने वाले बांहें चढ़ाकर रोज चेतावनी देते हैं आपको. वहीं सदन से बाहर मीडिया से चर्चा करते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि हमारी सरकार को गिराने में रुचि नहीं है, लेकिन कमलनाथ सरकार चलती का नाम गाड़ी है, जब तक चलेगी, तब तक चलेगी. हमेशा गाड़ी का चालक बनने की होड़ सी लगी रहती है. कोई मध्यप्रदेश की जनता को यह बताए कि गाड़ी असली चालक कौन है. अब या तो गाड़ी के चालक आपस में लड़कर एक्सिडेंट करवा देंगे, या फिर गाड़ी के कलपूर्जे टूट-टूट कर बिखर जाएंगे. 
हम पैसा भी खा जाएंगे और साथ भी नहीं देंगे
बसपा विधायक रामबाई ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार अंगद का पैर है. अगर किसी ने हमें खरीदने की कोशिश भी की तो हम पैसा भी खा जाएंगे और साथ भी नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि कमलनाथ की सरकार 5 साल चलेगी. वहीं निर्दलीय विधायक सुरेन्द्र सिंह शेरा ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि कर्नाटक वायरस मध्यप्रदेश तक नहीं आएगा. उनका पूरा समर्थन कमलनाथ सरकार को है. उन्होंने भी यह दावा किया कि कमलनाथ सरकार पूरे 5 साल तक चलेगी. 
शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिये समिति गठित होगी
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि मध्यप्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता उत्कृष्टता के लिए राज्य सरकार एक उच्च स्तरीय समिति गठित करेगी. यह समिति उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत शासकीय तथा अर्द्धशासकीय संस्थाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थी शिक्षा के मापदण्डों पर उत्कृष्ट हो यह सुनिश्चित करेगी. 
नाथ आज प्रश्नोत्तर काल में विधायक  विनय सक्सेना के प्रश्न पर चल रही चर्चा के दौरान बोल रहे थे. मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि उनका व्यक्तिगत अनुभव है कि मध्यप्रदेश शिक्षण के क्षेत्र में गुणवत्ता का बेहद अभाव है. इसके कारण हमारे बच्चे विभिन्न संस्थानों में नौकरी पाने से वंचित रह जाते हैं. उन्होंने कहा कि गांव का बेटा-बेटी शहरों में पढ़ने आते हैं लेकिन शिक्षा का स्तर अच्छा न होने से उन्हें अवसर नहीं मिल पाता. इस कारण वे न शहर के रह पाते हैं न गांव के. मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता के लिए बनाई जाने वाली समिति इन सब बिन्दुओं को ध्यान में रखेगी. उन्होंने इस संबंध में प्रतिपक्ष के सुझावों को भी आमंत्रित किया.

गौ रक्षकों को टारगेट कर माब लिंचिंग कानून ला रही सरकार



मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश  की सरकार बजरंग दल के गौ रक्षकों को टारगेट कर मॉब लिंचिंग कानून ला रही है. हम इसका विरोध करेंगे. 
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने  मीडिया से चर्चा करते हुए  यह बात कही. उन्होंने कहा कि  प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद अवैध रेत खनन व्यापक तौर पर हो रहा है. बारिश में रेत के पहाड़ खड़े कर दिए गए हैं. इन सबके विरोध में 11 अगस्त के बाद आंदोलन करेंगे. चौहान ने कहा कि हमने रेत खनन के अधिकार पंचायतों को दिए थे लेकिन अब बाहर के गुंडे बदमाशों ने नर्मदा तट पर डेरा डाल लिया है और गुंडागर्दी करके रेत खनन कर रहे हैं. 
उन्होंने कांग्रेस सरकार द्वारा  माब लिंचिंग के प्रस्तावित कानून का विरोध करते हुए कहा कि प्रदेश में अब तक माब लिंचिंग की कोई घटना गाय को लेकर नहीं घटी है. नीमच, भोपाल और रायसेन में हुई घटनाएं अलग-अलग कारणों से हुई हैं. कमलनाथ सरकार सिर्फ गौरक्षकों को निशाना बनाकर यह कानून ला रही है. प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सिंगरौली, सतना में जिंदा जलाने की घटनाएं बदहाल व्यवस्था उजागर कर रही हैं. बेटी बचाओ आंदोलन के लिए टेलीफोन और मिसकाल नंबर जारी करने के साथ शिवराज ने कहा कि इसके लिए भोपाल के अलावा दूसरे जिलों से भी प्रस्ताव आ रहे हैं. साथ ही लोगों की दिक्कतें भी सामने आ रही हैं, जिसका खुलासा जल्द किया जाएगा.

विभाग की स्वीकृति के बाद छिंदवाड़ा बनेगा संभाग

बैतूल में मेडिकल कालेज का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं

मध्यप्रदेश का छिंदवाड़ा जिला अब संभाग बनेगा. इसके लिए कलेक्टर छिंदवाड़ा द्वारा प्रतिवेदन शासन को भेजा गया है. विभाग की अनुमति के बाद संभाग बनाने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी.
यह जानकारी आज राज्य विधानसभा में विधायक सोहनलाल बाल्मीक के प्रश्न के लिखित जवाब ें राजस्व मंत्री गोविंद राजपूत ने दी. उन्होंने बताया कि विभाग के पत्र 5 मार्च 2019 द्वारा प्रतिवेदन चाहा गया था. इस पत्र के बाद कलेक्टर छिंदवाड़ा द्वारा प्रतिवेदन विभाग को भेजा गया है, इसके बाद यह प्रक्रिया चल रही है. एक प्रश्न के जवाब में मंत्री ने बताया कि यह संभव नहीं है कि जिले को संभाग कब तक बना दिया जाएगा.
प्रस्ताव विचाराधीन नहीं
विधायक डा. योगेश पंडाग्रे के प्रश्न के लिखित जवाब में चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा. विजय लक्ष्मी साधौ ने बताया कि एमसीआई द्वारा बैतूल जिला मुख्यालय पर चिकित्सा महाविद्यालय स्वीकृत किए जाने के लिए मापदंड न्यूनतम 200 बिस्तरीय अस्पताल में एवं 20 एकड़ भूमि जिला अस्पताल के 10 किलोमीटर परिधि में होना आवश्यक है. इसके अलावा 3 संसदीय क्षेत्रों में चिकित्सा महाविद्यालय न होने का मापदंड है. मंत्री ने बताया कि शासन के पास बैतूल जिला मुख्यालय पर मेडिकल महाविद्यालय की स्वीकृति का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.
कलेक्टर के अनुमोदन से संस्थाओं का निर्धारण
विधायक रामकिशोर कावरे के प्रश्न के लिखित जवाब में खाद्य मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने बताया कि बालाघाट जिले में 126 सेवा सहकारी समतियां है. खरीफ विपणन वर्ष 2016-17 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु संस्थाओं का निर्धारण कलेक्टर के अनुमोदन से किए जाने का प्रावधान है. उन्होंने बताया कि 15 जनवरी 2017 के बाद से किसी भी समिति द्वारा धान का उपार्जन नहीं किया गया.
नहीं दिए महिलाओं को स्मार्ट फोन
विधायक रमेश मेंदोला के प्रश्न के लिखित जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने बताया कि कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओं को स्मार्ट फोन देने व महिलाओं के नि:शुल्क उपचार की व्यवस्था करने का वचन दिया था. इसके तहत जनवरी 2019 से जून 2019 तक किसी भी महिला को स्मार्ट फोन वितरित नहीं किया गया है. उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 25 फरवरी 2019 से 30 अप्रैल 2019 के तक आयोजित महिला स्वास्थ्य शिविर में 12.42 लाख गर्भवती एवं अन्य महिलाओं को निशुल्क उपचार दिया गया.

45 साल के राजनीतिक जीवन में मुझ पर कोई आरोप नहीं: कमलनाथ



मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि प्रदेश के विकास का एक ऐसा नक्शा बनेगा जो हर वर्ग की खुशहाली का होगा. नाथ ने कहा कि मैंने अपने राजनीतिक जीवन में स्वच्छता को सर्वोच्चता में रखा है और इसका उदाहरण पेश किया. नाथ ने कहा कि 45 साल के राजनीतिक जीवन में उन पर आज तक कोई उंगली नहीं उठा पाया न ही कोई आरोप लगा पाया.
 मुख्यमंत्री विधानसभा में विधायक राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, कुणाल चौधरी और विनय सक्सेना द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर हुई चर्चा के दौरान बोल रहे थे. मुख्यमंत्री   ने कहा कि मैं 40 साल सांसद रहा और केंद्र में कई विभागों का मंत्री रहा. मेरा हमेशा प्रयास रहा कि मेरा राजनीतिक जीवन स्वच्छता का एक उदाहरण बने. मंत्री के रूप में लोगों के हितों और मध्यप्रदेश के हितों का सदैव मैंने संरक्षण किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि वाणिज्य कर मंत्री के रूप में उन्होंने डब्ल्यूटीओ में किसानों के हितों का ध्यान रखा और समझौता नहीं किया, इसके लिए मुझे शैतान मंत्री कहा गया. नाथ ने कहा कि मैंने डब्ल्यूटीओ में स्पष्ट रूप से अमेरिका को कहा था कि मैं अपने देश का नेतृत्व करता हूं और सबसे पहले अपने देश के किसानों का नेतृत्व करता हूं. शहरी विकास मंत्री रहते हुए नगरों के विकास के लिए मध्यप्रदेश को सबसे ज्यादा पैसा दिया यह रिकार्ड है. जब मैं पर्यावरण मंत्री था, तो भोपाल के तालाब के विकास के लिए राशि उपलब्ध कराई और परिवहन मंत्री रहने के दौरान परिवहन नियमों में परिवर्तन कर प्रदेश को लाभान्वित किया. इसकी सराहना तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी की थी. मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे बड़ी वेदना और दु:ख हुआ जब प्रदेश सरकार के हवाई जहाज बेचने के निर्णय को लेकर मुझ पर सवाल उठाए गए. नाथ ने कहा कि हवाई जहाज हैलीकाप्टर बेचने का फैसला मेरा नहीं था. यह पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की सरकार का था. उनकी केबिनेट ने इसका निर्णय लिया था.
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं स्वच्छता की राजनीति करता हूं. मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को आदत होगी आरोपों की लेकिन मुझे अपने राजनीतिक जीवन में आरोपों का कोई अनुभव नहीं है. क्योंकि मैंने कोई भी ऐसा काम नहीं किया जिससे कि लोग मुझसे सवाल करें. इसलिए कोई मुझ पर आरोप लगाता है तो तकलीफ होना स्वाभाविक है.
मुझे चेहरा दिखाने का शौक नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं टेलीविजन मीडिया की राजनीति नहीं करता. मुझे चेहरा दिखाने और फोटो छपवाने का शौक नहीं है. अगर प्रदेश का कोई वर्ग संकट में है, तो मैं उस आपदा का तत्काल समाधान कर उसे राहत पहुंचाने का प्रयास करता हूं, और यही प्रभावितों के प्रति सच्ची संवेदना और राहत होगी. मुख्यमंत्री कमल नाथ ने विपक्ष को चुनौती दी कि कांग्रेस सरकार पूरे पांच चलेगी. उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहे तो वह कभी भी सरकार के बहुमत का टेस्ट कर ले हम आज ही इसके लिए तैयार हैं.

मंगलवार, 23 जुलाई 2019

शिवराज के शासनकाल में 15 अधिकारी, कर्मचारी से संविदा पर नियुक्त

 विधानसभा में उठा मुख्यमंत्री सचिवालय में संविदा नियुक्ति का मामला
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में वर्ष 2013 से 2018 के बीच मुख्यमंत्री सचिवालय में 15 अधिकारी और कर्मचारी संविदा नियुक्ति पर पदस्थ थे. 
यह जानकारी आज राज्य विधानसभा में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के प्रश्न के लिखित जवाब में सामान्य प्रशासन मंत्री डा. गोविंद सिंह ने दी. उन्होंने बताया कि  वर्ष 2013 से वर्ष 2018 अक्तूबर तक मुख्यमंत्री सचिवालय में मुख्यमंत्री के निजी स्टाफ में संविदा आधार पर अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी. उन्होंने बताया कि संविदा पर नियुक्त किए अधिकारियों और कर्मचारियों में कोमलसिंह (स्वर्गवास) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, अजय कुमार पाण्डेय (अशासकीय) सलाहकार, राजेन्द्र कानूनगों (सेवानिवृत्त अन्य सेवा) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, अशोक जनवदे (सेवानिवृत्त) उप सचिव, अरुण कुमार भट्ट (सेवानिवृत्त आईएएस) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, अजीत कुमार श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त  अधिकारी) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, बनवारी लाल सक्सेना (सेवानिवृत्त  अधिकारी) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, आर.के.माथुर (सेवानिवृत्त आईएएएस) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, एस.के.मिश्रा (सेवानिवृत्त  आईएएस), प्रमुख सचिव, एस.एन.रुपला (सेवानिवृत्त  आईएएस) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, अजातशत्रु श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त  आईएएस) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, हरिशचंद्र सिंह (अशासकीय)विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, प्रशांत सक्सेना (अशासकीय) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, सुधीर कुमार श्रीवास (सेवानिवृत्त मंत्रालय) अनुभाग अधिकारी, झंगलदास बझेल (सेवानिवृत्त मंत्रालय सेवा) सहायक ग्रेड-1 पदस्थ थे.
 योग्य चिकित्सकों के अभाव में नहीं हुए आपरेशन
विधायक डा. योगेश पंडाग्रे के प्रश्न के लिखित जवाब्ब में लोक स्वाथ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि जिला चिकित्सालय बैतूल में हार्निया, अपेंडिक्स, बच्चेदानी के आपरेशन योग्य चिकित्सकों के न होने के कारण नहीं हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ, सर्जरी योग्यता के चिकित्सक उपलब्ध नहीं है. एक सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि जिला चिकित्सालय में पूर्व में निजी क्षेत्र के सर्जनों के सहयोग से पी.पी.पी.मोड में आपरेशन कराए गए हैं. 
दो बच्चों पर नसबंदी कराने पर वेतन वृद्धि नहीं
विधायक डा. सीताशरण शर्मा के प्रश्न के लिखित जवाब में स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि राजय में 9 फरवरी 2017 से दो बच्चों पर नसबंदी आपरेशन कराने पर वेतनवृद्धि की सुविधा बंद कर दी गई है. एक बच्चे पर नसबंदी आपरेशन कराने पर दो वेतन वृद्धि प्रदाय की जाती है. आम नागरिकों को दो बच्चों पर नसबंदी आपरेशन कराने पर ग्रीन कार्ड की सुविधा दी जाती है. मंत्री ने बताया कि इसके पहले 29 जनवरी 1979 से दो जीवित बच्चों के बाद नसबंदी आपरेशन कराने पर दो अग्रिम वेतन वृद्धिया और तीन जीवित बच्चों के बाद एक वेतन वृद्धि का प्रावधान था. जिसे 7 अगस्त 2001 से एक जीवित बच्चे के बाद नसबंदी कराने पर दो अग्रिम वेतन वृद्धियां तथा दो जीवित बच्चों के बाद एक वेतन वृद्धि प्रदाय किए जाने का प्रावधान किया है.

जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त



प्रदेश में लगातार सामने आ रहे सिन्थेटिक दूध व मावा की कार्रवाई पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट किया हैं. मुख्यमंत्री ने कहा है कि जनता के स्वास्थ्य के साथ धोखा व खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सिन्थेटिक दूध व मावा के अवैध व्यापार से जुड़े लोगों पर कड़ी कार्यवाही करें. किसी को भी बख़्शा नहीं जाए. ऐसे लोग समाज व मानवता के दुश्मन हैं. इन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलना चाहिए.
उल्लेखनीय है कि  प्रदेश में इन दिनों नकली दूध, घी, मावा की तमाम शिकायतें आ रही है. इसके लिए सरकार सख्त हो गई है. सभी संभाग के कमिश्नर को मंत्री तुलसीराम सिलावट ने रासुका के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. इसके पहले नकली दूध, मावा को लेकर सीएम कमलनाथ और स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट के बीच चर्चा हुई है. जानकारी के अनुसार प्रदेश के 51 जिलों में स्वास्थ्य विभाग ने छापेमार कार्रवाई की है. वहीं ग्वालियर-चंबल संभाग में कार्रवाई को लेकर सरकार ने 8 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है. वहीं जबलपुर में अमानक खाद्य समाग्री मिलने पर बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन बड़े व्यापारियों घनश्याम साहू, संतोष साहू, कमल खरे के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं. इसके साथ ही  मुरैना में दूध सेंटर ओर सिंथेटिक दूध फैक्ट्री पर कार्रवाई की गई. कई चिलर सेंटरों के सेंपल लिए गए. जहां भारी मात्रा में केमिकल, 35 टीन रिफाइंड तेल, दूध बनाने वाली मशीन जब्त की गई है. एसटीएफ की कार्रवाई के बाद खाद्य विभाग की टीम भी एक्शन में आयी है. वहीं  बीते दिन जबलपुर विजय नगर स्थित मथुरा बिहार कालोनी में भी नकली घी की फैक्ट्री में छापेमार कार्रवाई की गई. जिसमें 200 लीटर नकली घी बरामद हुआ था. एक घर में वनस्पति से घी बनाया जा रहा था.

व्यापमं घोटाले के दस्तावेज गायब किए शिवराज और उनके सहयोगियों ने


मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.के. मिश्रा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से आग्रह किया है कि वे व्यापमं घोटाले की फिर से जांच कराएं. उन्होंने कहा कि मैंने जो शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगाए थे, जिसके चलते मुझे सजा सुनाई गई, मैं उन आरोपों पर अब भी कायम हूं. उन्होंने कहा कि मैं फिर से दोहरा रहा हूं कि व्यापमं घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज शिवराज सिंह, उनके षड्यंत्रकारी सहयोगियों ने ही गायब करवाएं हैं.
मध्यप्रदेश के चर्चित व्यापमं महाघोटाले को लेकर रिकार्ड में गुमनाम पत्र पर मौजूदा कमलनाथ व पूर्ववर्ती शिवराजसिंह सरकार के दो अलग-अलग जवाबों ने एक बार फिर जांच एजेंसियों के चरित्र को तार-तार कर दिया है. व्यापमं महाघोटाले की दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर आवाज उठाने से तिलमिलाए पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा मेरे विरुद्ध लगाए गए मानहानि प्रकरण में दस्तावेजी सबूतों को नष्ट कर,राजनैतिक रसूख का उपयोग कर हालांकि मुझे 2 साल की सजा दिलाई गई.  विवेक तन्खा, अजय गुप्ताजी, रवि पाटीदार  व अन्य लब्ध प्रतिष्ठित अभिभाषकों की कृपा से मैं सुप्रीम कोर्ट से बरी हुआ. शिवराज सिंह चौहान व उनके षड्यंत्रकारी मित्रों को मुंह की खानी पड़ी.
मिश्रा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से कहा कि  आज मैं पुन: दोहरा रहा हूं कि व्यापमं महाघोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज शिवराज सिंह, उनके षड्यंत्रकारी मित्रों ने ही गायब करवाएं हैं. हार्डडिस्क में छेड़छाड़ हुई हैं. तत्कालीन जांच एजेंसियों ने ही मुख्यमंत्री निवास से आरोपी अधिकारियों को किए गए 194 काल डिटेल की रिपोर्ट गायब की है,जिसमें उस वक्त के मौजूदा पुलिस महानिदेशक की भूमिका संदिग्ध है. परिवहन विभाग के ग्वालियर स्थित दफ्तर में आग क्यों-कैसे लगी ऐसे कई अनुत्तरित सवाल आज भी मौजूद हैं. मिश्रा ने कहा कि हमारे वचन-पत्र में उल्लेखित वायदों के अनुरूप जांच करवा दीजिए ताकि ऐसे सफेदपोश राजनैतिक चेहरों का वास्तविक चरित्र सामने आ सके. 

सिंहस्थ में हुए 100 करोड़ अतिरिक्त व्यय, कराई जाएगी जांच

 विधानसभा में जनसंपर्क मंत्री ने दिया आश्वासन

राज्य विधानसभा में आज जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने कहा कि सिंहस्थ में 100 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च किए गए. इस मामले की सरकार जांच कराएगी. उन्होंने कहा कि सिंहस्थ कि  लिए 327 करोड़ रुपए का बजट था, मगर आयोजन में तत्कालीन सरकार ने 100 करोड़ अतिरक्त खर्च किए हैं.
सिंहस्थ को लेकर प्रश्नकाल के दौरान विधायक विनय सक्सेना ने सिंहस्थ में हुए खर्चो को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश माध्यम वित्तीय अनियमितताओं का शिकार है. उन्होंने कहा कि सिंहस्थ में 327 करोड़ का बजट था, लेकिन 100 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च किया गया.  सक्सेना ने सिंहस्थ के दौरान भारी गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की. 
 जवाब में मंत्री पी.सी.शर्मा ने माना कि सिंहस्थ के प्रचार-प्रसार के लिए तत्कालीन राज्य सरकार ने द्वारा स्वीकृत की गई राशि से सौ करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च कर दिए गए. इतना ही नहीं, एक माह के अंदर इसकी आडिट भी करा लिया गया. मंत्री ने विधायक को आश्वस्त किया कि वे इस पूरे मामले की जांच कराएंगे, इसके साथ ही जांच पूरी होने पवर दो माह में रिपोर्ट सरकार को सौंप देंगे. सिंहस्थ के खर्च के अलावा माध्यम द्वारा ङ्कसिंहस्थ के दौरान निनोरा गांव में विश्व धर्म सम्मेलन का आयोजन करने की भी जांच की जाएगी. 
सक्सेना ने आरोप लगाया कि यहां केवल भोपाल व इंदौर की सरकारी काम करने वाली बड़ी फर्म को ही पैनल में शामिल किया जाता है. एक ही फर्म को काम दिया जाता है. अन्य जिलों की प्रायवेट काम करने वाली संस्थाओं को माध्यम की पैनल में शामिल क्यों नहीं किया जाता.  इस पर मंत्री शर्मा ने कहा कि पूरी पैनल नए सिरे से बनाई जा रही हैं. अब प्रदेश भर छोटे शहरों की प्रायवेट काम करने वाली संस्थाओं को भी यहां के कार्य आवंटित किए जा सकेंगे. इस दिशा में काम तेजी से चल रहा है.
निराश नहीं होने दिया जाएगा विधायकों को
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज राज्य विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधायकों द्वारा उठाए गए विधायक बढ़ाने के मुद्दे को लेकर कहा कि विधायकों को वे निराश नहीं होने देंगे. प्रश्नकाल के दौरान विधायक सुदेश राय के प्रश्न के दौरान पूरक प्रश्न करते हुए भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने यह मुद्दा उठाया था. उन्होंने अनुरोध  किया था कि मुख्यमंत्री विधायकों की विधायक निधि पर कोई फैसला लें. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि विधायकों पर विकास कार्यों का दबाव रहता है, जिसमें उन्हें समस्याएं  आती है. इस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि विधायकों द्वारा निधि बढ़ाए जाने का दिया गया सुझाव अच्छा है. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष उनके चर्चा कर लें, विधायकों को वे निराश नहीं होने देंगे.  उन्होंने कहा कि यह सभी विधायकों का सवाल है, सरकार को खाली तिजोरी मिली थी. इसके बाद भी जितना हो सकता है, उतना किया जा रहा है.
चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण पर वैज्ञानिकों को दी बधाई
राज्य विधानसभा में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा के सदस्यों ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) द्वारा सोमवार दोपहर को चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपम पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे देश के लिए बड़ी उपलब्धि बताया. विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने इस सफल प्रक्षेपण में योगदान के लिए  मंदसौर के हिमांशु शुक्ला और कटनी की मेघा भट्ट का उल्लेख करते हुए दोनों को प्रदेश की ओर से बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. कांग्रेस विधायक दल के नेता एवं मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि चंद्रयान-2 की सफलता में मध्यप्रदेश के दो युवाओं के जुड़ने से प्रदेश का गौरव बढ़ा है. मुख्यमंत्री ने इसरो के सभी विज्ञानिकों और विशेषकर हिमांशु शुक्ला और मेघा भट्ट को बधाई एवं शुभकामनाएं दी. नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा के वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने कहा कि हम सभी एवं समस्त देश गौरवान्वित हैं. हमारे प्रदेश के दो वैज्ञानिक इसमें शामिल हैं. उन्होंने कहा कि देश के सभी नेतृत्वकर्ताओं का इसके लिए सम्मान करता हूं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित सभी राजनीतिक नेतृत्व बधाई के पात्र हैं. इससे विश्व में भारत का सम्मान बढ़ रहा है. पक्ष-विपक्ष के अन्य सदस्यों ने भी इस पर अपने विचार व्यक्त करते हुए चन्द्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण पर इस अभियान से जुड़े देश के वैज्ञानिकों को बधाई दी.
नये विश्वविद्यालय स्थापित करना समय की मांग
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में भविष्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नये विश्वविद्यालय स्थापित करना समय की मांग है. उन्होंने विपक्ष द्वारा मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2019 का समर्थन करने और सर्वसम्मति से पारित करने पर सदन को धन्यवाद दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि सागर में नया विश्वविद्यालय खोलने पर सरकार विचार करेगी. मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि प्रदेश के पिछड़े क्षेत्र में जहां नई पीढ़ी में जागरूकता आ रही है और उनमें चेतना जागृत हुई है, उसके लिए जरूरी है कि वहां शिक्षा के नये केन्द्र स्थापित हों. उन्होंने छिन्दवाड़ा में विश्वविद्यालय स्थापित करने का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर हमने समय रहते हुए इस पर चिंता नहीं की तो आने वाले समय में हमें कठिनाई हो सकती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्तर पर पहल होने से निजी क्षेत्र में जो यूनिवर्सिटी स्थापित होती हैं, वह हतोत्साहित होंगी, क्योंकि उनका उद्देश्य नफा-नुकसान होता है, जबकिइ सरकार जनहित में शिक्षा केन्द्रों को स्थापित कर उन्हें विकसित करती है. मुख्यमंत्री ने सागर में नया विश्वविद्यालय स्थापित करने के सुझाव पर विचार करने का आश्वासन दिया.
27 प्रतिशत आरक्षण संबंधी विधेयक पारित
राज्य विधानसभा में आज सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का प्रावधान 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने संबंधी मध्यप्रदेश लोक सेवा ( अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण) संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. इसके पहले विधयक पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए सामान्य प्रशासन मंत्री डा. गोविंद सिंह ने कहा कि पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया है. उन्होंने स्वीकार किया कि अब विभिन्न जातियों के लिए आरक्षण का प्रतिशत बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो गया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने यह प्रावधान करने के पहले उन राज्यों जैसे तमिलनाडू और कर्नाटक की तरफ भी देखा, जहां आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक है.

गुमनाम चिट्टी को भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने



मध्यप्रदेश में एक बार फिर व्यापमं मुद्दा गर्मा गया है. इस मुद्दे को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल आमने-सामने आ गए हैं और गुमनाम पत्र पर सियासत करने लगे हैं. 
दरअसल राज्य विधानसभा में सोमवार को गृह मंत्री बाला बच्चन ने यह जानकारी दी कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा बताया गया गुमनाम पत्र नहीं है. इसके बाद इस पत्र को लेकर सियासत गर्माई है. कांग्रेस सरकार के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने इस मामले को लेकर कहा कि व्यापमं घोटाले की जांच के बाद अब कई राजनेता और अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे होंगे. वहीं भाजपा ने इस पर पलटवार किया है. भाजपा की ओर से पूर्व गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि उन्हें चिट्ठी के बारे में कुछ नहीं मालूम. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर सालों से राजनीति करती आई है, उसे कुछ हासिल नहीं हुआ.  पूर्व गृहमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की सरकार है उसके पास सब कुछ है. हालांकि कांग्रेस के नेता पूर्व में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, सीबीआई सब जगह जा चुके हैं,  लेकिन किसी की जांच में कहीं कुछ नहीं निकला. लेकिन कांग्रेस जिस भी तरह की जांच करवाना चाहती है हम उसका स्वागत करेंगे. 
वहीं गुमनाम चिट्ठी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने बयान पर कायम हैं. उनका कहना है कि चिट्ठी के आधार पर ही व्यापमं मामले की जांच कराई गई थी. जैसे ही पत्र के जरिए जानकारी मिली उसी के आधार पर हमने जांच कराई थी. कई बार चिट्ठी को लेकर जानकारी दी जा चुकी है. वहीं परिवार पर लगे आरोप पर उन्होंने कहा कि जो करना है करे सरकार, खुली छूट है. चिट्ठी में न उलझे, बल्कि जांच करे. 
प्रियंका सिंगरौली, सतना भी आए
पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने सोनभद्र जाने को लेकर प्रियंका गांधी द्वारा धरने पर बैठने को लेकर तंज कसा कि उन्हें उत्तरप्रदेश के सोनभद्र के अलावा दूसरे राज्यों में भी जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भी हुई घटनाओं को लेकर प्रियंका को गंभीर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सिंगरौली और सतना में महिला के साथ हुए अपराधों को लेकर कहा कि प्रियंका गांधी को सोनभद्र की तरह यहां भी पीड़ित के घर जाना चाहिए. 

सोमवार, 22 जुलाई 2019

पूर्व सपा विधायक को धमकी देने वाले 5 गिरफ्तार



चलती ट्रेन में पूर्व समाजवादी पार्टी के विधायक डा. सुनीलम को धमकी देने के आरोप में जीआरपी ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है.
पूर्व विधायक डा. सुनीलम बीती 15 जुलार्ई को मुलताई के लिए गोंडवाना एक्सप्रेस से जा रहे थे. तभी रास्ते में रात को  बीना से एक युवती के साथ बोगी में चढ़े युवक ने उनके साथ गाली-गलौज करना शुरू कर दिया और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी. युवक ने डा सुनीलम को सबक सिखाने के लिए कुछ लोगों को भोपाल स्टेशन पर भी बुला लिया था. इस दौरान सुनीलम ने बोगी के टायलेट में घुस कर जान बचाई थी. इस मामले में पूर्व विधायक ने रेल मंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी शिकायत की थी. जिसके बाद संसद में भी यह मामला गुंजा था.
 डा. सुनीलम से अभद्रता करने के मामले में 5 आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं. जीआरपी ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से इन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपी भोपाल के रहने वाले है. गिरफ्तार हुए आरोपियों में दानेश पिता रोशन अली, अमन खान पिता मुश्ताक अहमद खान, फैजल पिता मोहम्मद वसीम, अमित पिता राजकुमार राजपूत और मो. शहनवाज पिता मोहम्मद अख्तर शामिल हैं. सभी आरोपियों की उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच की है.



आप केप्रदेश पदाधिकारियों ने दिए सामूहिक इस्तीफे


मध्यप्रदेश में आम आदमी पार्टी (आप) के संगठन को खत्म करने प्रयास के विरोध में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों ने सामूहिक रुप से इस्तीफा दे दिया है.
पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों की राजधानी भोपाल के मानस भवन में इस संबंध में एक बैठक हुई, जिसमें पार्टी के प्रदेश प्रभारी गोपाल राय पर पार्टी के प्रदेश संगठन को कमजोर करने के प्रयास का आरोप लगाया गया. बैठक में चर्चा उपरांत इस कार्रवाई के विरोध में आप की राज्य कार्यकारिणी के लगभग सभी पदाधिकारियों ने पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक पत्र लिखकर अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया.
इस्तीफा देने वालों में प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल, प्रदेश संगठन सचिव भोपाल जोन प्रभारी अमित भटनागर, प्रदेश उपाध्यक्ष रानी अग्रवाल, संगठन सचिव इंदौर जोन प्रभारी युवराज सिंह, संगठन सचिव बुंदेलखंड जोन प्रभारी इन्द्र विक्रम सिंह, संगठन सचिव-उज्जैन जोन प्रभारी इफ्तिखार अहमद खान, संगठन सचिव-ग्वालियर जोन प्रभारी सोमिल शर्मा, प्रदेश सचिव जीतेन्द्र चौरसिया, प्रदेश कोषाध्यक्ष प्रकाश डीकोस्टा शामिल हैं. इसके अलावा प्रदेश के अधिकांश संगठन मंत्रियों ने भी इस्तीफा दे दिया है.

शीला दीक्षित को सदन ने दी श्रद्धांजलि


मध्यप्रदेश विधानसभा में आज वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और सदन के पूर्व सदस्य नेमीचंद जैन को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद दिवंगतों के सम्मान में कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई. 
विधानसभा में आज सोमवार की कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद  प्रजापति ने  दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और पूर्व विधायक नेमीचंद जैन के निधन का उल्लेख करते हुए सदन की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की. मुख्यमंत्री कमलनाथ और अन्य सदस्यों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके बाद सदन में दो मिनट का मौन रखा गया और कार्यवाही कल मंगलवार की सुबह ग्यारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. 
दीक्षित को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री  कमलनाथ ने कहा कि देश की राजनीति में  दीक्षित उन बिरले लोगों में शुमार रहीं, जिन्होंने केंद्र में मंत्री, किसी राज्य की राज्यपाल और मुख्यमंत्री के तौर पर लंबे समय तक काम किया हो. उन्होंने कहा कि शीला दीक्षित ने दिल्ली के विकास का नक्शा बनाया. उन्हीं की बदौलत दिल्ली की सूरत बदल गई. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि दीक्षित ने देश की राजधानी को नई सूरत दी. उन्होंने कहा कि जब से दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री पद से हटीं, तब से एक रिक्तता आ गई.
श्रद्धांजलि को लेकर हुई थी सियासत
यहां उल्लेखनीय है कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि देने को लेकर रविवार को सदन में जमकर हंगामा हुआ था. पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक नरोत्तम मिश्रा ने दीक्षित के निधन का उल्लेख करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि देने की मांग की थी. इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा था कि यह अब कार्य सूची में नहीं है, इसलिए ऐसा नहीं हो पाएगा. इस पर मिश्रा ने कहा कि क्या शीला दीक्षित का दोष सिर्फ यह है कि वे गांधी-नेहरु परिवार की नहीं थी और खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ यहां बैठे हुए हैं. इतनी वरिष्ठ नेता को श्रद्धांजलि देना क्या उचित नहीं. इस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि सुबह यह तय हो गया था कि श्रद्धांजलि सोमवार को दी जाएगी, मगर मिश्रा नहीं माने. उन्होंने इसका विरोध करते हुए कहा कि श्रद्धांजलि आज ही देनी चाहिए और केवल 5 मिनट के लिए सदन स्थगित कर शीला दीक्षित के सम्मान में कार्यवाही रुकना चाहिए.  मिश्रा ने गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर परिकर के निधन का उल्लेख किया और बताया कि किस तरह  विधानसभा पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई थी, लेकिन स्पीकर नहीं माने और इसके बाद भाजपा सदस्यों ने सदन का बर्हिगमन कर विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने श्रद्धांजलि दी थी.