मंगलवार, 9 जुलाई 2019

निजी क्षेत्र में प्रदेश के युवाओं को नौकरी दिलाने बनाएंगे कानून


मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि मध्यप्रदेश में बेरोजगारी खत्म करने और प्रदेश के युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी में प्राथमिकता देने के लिए सरकार शीघ्र ही कानून बनाएगी.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह आश्वासन आज राज्य विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान दिया. उन्होंने कहा कि सरकार विपक्षी सदस्यों की भावना से सहमत है और यह हमारे लिए चिंता का विषय भी है कि कैसे प्रदेश के बच्चों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिल सके. उन्होंने स्मरण कराया कि प्रदेश में हमारी सरकार बनते ही सबसे पहले हमने इसी मुददे पर बात की थी, जिसको लेकर उत्तरप्रदेश और बिहार के लोग नाराज हो गए थे और हमारे इस निर्णय की आलोचना भी हुई थी. उन्होंने कहा कि सभी प्रदेशों में स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने में प्राथमिकता दी जाती है तो फिर हमारे यहां ऐसा क्यों नहीं हो सकता. उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि बहुत जल्द ही ऐसा कानून लाया जाएगा. 
विधानसभा में यह प्रश्न  भाजपा विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने उठाया था. उन्होंने एमपीपीएससी की परीक्षा में बैठने वाले बाहरी उम्मीदवारों की उम्र बढ़ाने का विरोध किया और प्रदेश के बेरोजगारों के साथ अन्याय होने की बात कही. उन्होंने कहा कि कतिपय आला अधिकारियों द्वारा षडयंत्रपूर्वक अपने करीबियों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार को गुमराह कर बाहरी उम्मीदवारों की उम्र 27 से बढ़ाकर 40 साल कर दी गई है. उन्होंने इस निर्णय का विरोध किया.
प्रश्न के उत्तर में सामान्य प्रशासन मंत्री गोविंद सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार एवं हमारे संविधान के अनुसार देश के नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के बेरोजगारों के हित संरक्षण के लिए सरकार ने एक अलग से नियम जोडा है. इसके तक मध्यप्रदेश के निवासी को ही पंजीयन का अधिकार दिया गया है, इस नियम से प्रदेश के बेरोजगारों को नौकरी में ज्यादा लाभ मिलेगा. इसके साथ ही सिंह ने विपक्ष से भी इस मामले में राय देने को कहा ताकि प्रदेश के बेरोजगारों को ज्यादा लाभ मिल सके. उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि आरक्षण मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी रखेंगे. 
जवाब दें, पाखंड नहीं चलेगा
सामान्य प्रशासन मंत्री डा. गोविंद सिंह ने विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया द्वारा उठाए गए उम्र के सवाल का जवाब दिया तो उससे नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव असंतुष्ट नजर आए. पूरक प्रश्न के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आपकी मंशा से जाहिर नहीं हो रहा है कि आप राज्य के हितों की रक्षा करेंगे.उन्होंने सवाल किया सात महीने की सरकार ने सात लोगों को भी अगर रोजगार दिया हो तो नाम बताएं. उन्होंने कहा कि जवाब दे पाखंड नहीं चलेगा. प्रतिउत्तर में सिंह बताया कि आपकी सरकार ने जो सहकारिता विभाग से छह सौ से ज्यादा कंप्यूटर आपरेटरों को नौकरी से निकाल दिया था, हमने उन लोगों को फिर से नौकरी पर रखा है. इसी बीच सदन में शोरशराबा शुरू हो गया तो विपक्ष के नेता ने कहा कि आप इस तरह से हमारी आवाज को दबा नहीं सकते. मंत्रीगण पद की गरिमा का पालन नहीं कर रहे हैं.

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