आसंदी पर लगाया पक्षपात करने का आरोप
राज्य विधानसभा में आज भाजपा ने किसान कर्ज माफी का मुद्दा उठाया और स्थगन पर चर्चा कराने की मांग की. इस पर विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने बाद में चर्चा कराने की बात कही, जिसे लेकर भाजपा विधायक नाराज हो गए और आज ही चर्चा कराने की मांग को लेकर हंगामा करने लगे. विपक्ष ने आसंदी पर पहले तो पक्षपात का आरोप लगाया और फिर कार्यवाही से बहिगर्मन कर दिया.
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन की हंगामेदार शुरूआत हुई. शून्यकाल में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्ज माफी का मुद्दा उठाते हुए नियम 139 के तहत स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि किसानों को खाद बीज नहीं मिल रहा है, कर्जमाफी के लिए 48 हजार करोड़ चाहिए, केवल 5 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है. औने-पौने दाम मे फसल खरीदी जा रही है, निराशा के चलते किसान आत्महत्या कर रहे हैं. इस पर विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने उनसे अलग से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा करने की बात कहते हुए कार्यवाही को आगे बढ़ाने को कहा.
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने आसंदी से मुद्दे को महत्वपूर्ण बताते हुए इस पर बहस करने का समय देने की मांग करते हुए कहा कि बुधवार को बजट पेश होना है, जिसके बाद बजट पर चर्चा होगी. इसलिए गुरुवार को इस पर चर्चा का समय निश्चित किया जाए. इस पर अध्यक्ष ने कहा कि आसंदी ने एक बार व्यवस्था दे दी है, इसलिए इस पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं है. अध्यक्ष की बात सुनकर विपक्ष ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया. आसंदी पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने कार्यवाही से बहिर्गमन कर दिया.
गृह मंत्री ने कहा किसान आत्महत्या का प्रतिशत कम हुआ
किसान कर्ज माफी पर जब विपक्ष स्थगन पर चर्चा की मांग करते हुए हंगामा कर रहा था, तभी नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि आज प्रदेश में किसान आत्महत्या करने पर उतारु है. सरकार खाद-बीज तक उसे नहीं दिला पा रही है. इस पर गृह मंत्री बाला बच्चन ने कहा कि हमारी सरकार के दौरान किसान आत्म हत्या का प्रतिशत गिरा है. उन्होंने कहा कि पहले आपकी सरकार के दौरान एक दिन में 6 से 8 किसान आत्म हत्याएं होती थी. उन्होंने कहा कि कल ही प्रश्न के दौरान यह बताया कि हमारी सरकार के दौरान 200 दिन में 71 किसानों द्वारा आत्म हत्या किए जाने की बात सामने आई है. इतनी समयावधि में आपकी सरकार के कार्यकाल में तो 1500-1600 सौ किसान आत्महत्याएं होती थी.
राज्य विधानसभा में आज भाजपा ने किसान कर्ज माफी का मुद्दा उठाया और स्थगन पर चर्चा कराने की मांग की. इस पर विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने बाद में चर्चा कराने की बात कही, जिसे लेकर भाजपा विधायक नाराज हो गए और आज ही चर्चा कराने की मांग को लेकर हंगामा करने लगे. विपक्ष ने आसंदी पर पहले तो पक्षपात का आरोप लगाया और फिर कार्यवाही से बहिगर्मन कर दिया.
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन की हंगामेदार शुरूआत हुई. शून्यकाल में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्ज माफी का मुद्दा उठाते हुए नियम 139 के तहत स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि किसानों को खाद बीज नहीं मिल रहा है, कर्जमाफी के लिए 48 हजार करोड़ चाहिए, केवल 5 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है. औने-पौने दाम मे फसल खरीदी जा रही है, निराशा के चलते किसान आत्महत्या कर रहे हैं. इस पर विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने उनसे अलग से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा करने की बात कहते हुए कार्यवाही को आगे बढ़ाने को कहा.
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने आसंदी से मुद्दे को महत्वपूर्ण बताते हुए इस पर बहस करने का समय देने की मांग करते हुए कहा कि बुधवार को बजट पेश होना है, जिसके बाद बजट पर चर्चा होगी. इसलिए गुरुवार को इस पर चर्चा का समय निश्चित किया जाए. इस पर अध्यक्ष ने कहा कि आसंदी ने एक बार व्यवस्था दे दी है, इसलिए इस पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं है. अध्यक्ष की बात सुनकर विपक्ष ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया. आसंदी पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने कार्यवाही से बहिर्गमन कर दिया.
गृह मंत्री ने कहा किसान आत्महत्या का प्रतिशत कम हुआ
किसान कर्ज माफी पर जब विपक्ष स्थगन पर चर्चा की मांग करते हुए हंगामा कर रहा था, तभी नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि आज प्रदेश में किसान आत्महत्या करने पर उतारु है. सरकार खाद-बीज तक उसे नहीं दिला पा रही है. इस पर गृह मंत्री बाला बच्चन ने कहा कि हमारी सरकार के दौरान किसान आत्म हत्या का प्रतिशत गिरा है. उन्होंने कहा कि पहले आपकी सरकार के दौरान एक दिन में 6 से 8 किसान आत्म हत्याएं होती थी. उन्होंने कहा कि कल ही प्रश्न के दौरान यह बताया कि हमारी सरकार के दौरान 200 दिन में 71 किसानों द्वारा आत्म हत्या किए जाने की बात सामने आई है. इतनी समयावधि में आपकी सरकार के कार्यकाल में तो 1500-1600 सौ किसान आत्महत्याएं होती थी.
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