विधानसभा में उठा मुख्यमंत्री सचिवालय में संविदा नियुक्ति का मामलामध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में वर्ष 2013 से 2018 के बीच मुख्यमंत्री सचिवालय में 15 अधिकारी और कर्मचारी संविदा नियुक्ति पर पदस्थ थे.
यह जानकारी आज राज्य विधानसभा में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के प्रश्न के लिखित जवाब में सामान्य प्रशासन मंत्री डा. गोविंद सिंह ने दी. उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 से वर्ष 2018 अक्तूबर तक मुख्यमंत्री सचिवालय में मुख्यमंत्री के निजी स्टाफ में संविदा आधार पर अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी. उन्होंने बताया कि संविदा पर नियुक्त किए अधिकारियों और कर्मचारियों में कोमलसिंह (स्वर्गवास) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, अजय कुमार पाण्डेय (अशासकीय) सलाहकार, राजेन्द्र कानूनगों (सेवानिवृत्त अन्य सेवा) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, अशोक जनवदे (सेवानिवृत्त) उप सचिव, अरुण कुमार भट्ट (सेवानिवृत्त आईएएस) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, अजीत कुमार श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त अधिकारी) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, बनवारी लाल सक्सेना (सेवानिवृत्त अधिकारी) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, आर.के.माथुर (सेवानिवृत्त आईएएएस) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, एस.के.मिश्रा (सेवानिवृत्त आईएएस), प्रमुख सचिव, एस.एन.रुपला (सेवानिवृत्त आईएएस) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, अजातशत्रु श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त आईएएस) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, हरिशचंद्र सिंह (अशासकीय)विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, प्रशांत सक्सेना (अशासकीय) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, सुधीर कुमार श्रीवास (सेवानिवृत्त मंत्रालय) अनुभाग अधिकारी, झंगलदास बझेल (सेवानिवृत्त मंत्रालय सेवा) सहायक ग्रेड-1 पदस्थ थे.
योग्य चिकित्सकों के अभाव में नहीं हुए आपरेशन
विधायक डा. योगेश पंडाग्रे के प्रश्न के लिखित जवाब्ब में लोक स्वाथ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि जिला चिकित्सालय बैतूल में हार्निया, अपेंडिक्स, बच्चेदानी के आपरेशन योग्य चिकित्सकों के न होने के कारण नहीं हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ, सर्जरी योग्यता के चिकित्सक उपलब्ध नहीं है. एक सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि जिला चिकित्सालय में पूर्व में निजी क्षेत्र के सर्जनों के सहयोग से पी.पी.पी.मोड में आपरेशन कराए गए हैं.
दो बच्चों पर नसबंदी कराने पर वेतन वृद्धि नहीं
विधायक डा. सीताशरण शर्मा के प्रश्न के लिखित जवाब में स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि राजय में 9 फरवरी 2017 से दो बच्चों पर नसबंदी आपरेशन कराने पर वेतनवृद्धि की सुविधा बंद कर दी गई है. एक बच्चे पर नसबंदी आपरेशन कराने पर दो वेतन वृद्धि प्रदाय की जाती है. आम नागरिकों को दो बच्चों पर नसबंदी आपरेशन कराने पर ग्रीन कार्ड की सुविधा दी जाती है. मंत्री ने बताया कि इसके पहले 29 जनवरी 1979 से दो जीवित बच्चों के बाद नसबंदी आपरेशन कराने पर दो अग्रिम वेतन वृद्धिया और तीन जीवित बच्चों के बाद एक वेतन वृद्धि का प्रावधान था. जिसे 7 अगस्त 2001 से एक जीवित बच्चे के बाद नसबंदी कराने पर दो अग्रिम वेतन वृद्धियां तथा दो जीवित बच्चों के बाद एक वेतन वृद्धि प्रदाय किए जाने का प्रावधान किया है.
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