गुरुवार, 11 जुलाई 2019

सरकार को टैक्स लगाने का अधिकार ही नहीं: नरोत्तम



कमल नाथ सरकार के पहले बजट पर विधानसभा में चर्चा करते हुए भाजपा के विधायक नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि सरकार ढिंढोरा पीट रही है कि हमने कोई नया टैक्स नहीं लगाया, जबकि सत्य यह है कि जीएसटी आने के बाद सरकार कोई टैक्स लगा ही नहीं सकती. उस पर सितम यह है कि शराब और पेट्रोल पर सदन के बाहर टैक्स लगा दिया गया, जबकि सदन की अधिसूचना जारी हो गई थी.
कमलनाथ सरकार द्वारा बुधवार को पेश किए गए बजट पर आज गुरुवार को राज्य विधानसभा में चर्चा शुरु हुई. चर्चा की शुरुआत करते हुए पूर्व मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि   सरकार के 28 मंत्रियों के बंगलों पर 50-50 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे है और वहीं गरीबों के भोजन के लिए 5 रुपए नहीं दिए जा रहे, यह कहकर की खजाना खाली है. सरकार के मुखिया कमल नाथ तो अभी मुख्यमंत्री निवास में पहुंचे ही नहीं है. 7 महिनों से मुख्यमंत्री निवास की मरम्मत चल रही है. उन्होंने कहा कि कमल नाथ सरकार ने खजाना खाली होने की बात कहकर नया टैक्स लगाया है. भाजपा सरकार के कार्यकाल में एक भी शराब की नई दुकान नहीं खोली गई थी, लेकिन अब होम डिलेवरी करने की बात सरकार कर रही है. कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में टैक्स कम करने की बात कही थी, लेकिन पेट्रोल पर 2 रुपए टैक्स बढ़ा दिया गया है. 
 उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का बजट जनता को ठगने वाला है. यह गरीबों का विरोधी बजट है, गरीब कल्याण की योजनाओं के लिए इसमें धनराशि का प्रावधान नहीं किया गया है. यह किसानों को, प्रदेश के नौजवानों को ठगने वाला बजट है. मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस ने प्रदेश के किसानों को सपने दिखाए थे कि उनका कर्ज माफ कर दिया जाएगा. पहले कहा कि सभी किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा, बाद में कहने लगे अल्पकालीन फसली ऋण ही माफ करेंगे. कर्ज माफ करने के लिए 48 हजार करोड़ रूपए चाहिए, लेकिन सरकार ने बजट में केवल 8 हजार करोड़ का ही प्रावधान किया है. इस बजट में प्रदेश के नौजवानों, छात्र-छात्राओं को भी ठगा गया है. उनके लिए जो भी योजनाएं चलाई थीं, उनके लिए प्रावधान नहीं किया है. 
गठबंधन नहीं ठगबंधन की चल रही सरकार
मिश्रा ने सदन में चर्चा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में गठबंधन नहीं, ठगबंधन की सरकार है. इसने मध्यप्रदेश को पाताल में पहुंचा दिया. उन्होंने कहा कि इनका बजट भी ठगने वाला है. इस सरकार ने दीनदयाल रसोई जैसी योजना को बंद कर दिया, जो गरीबों को सस्ता भोजन देती थी. किसानों को गेहूं पर, मक्के पर, सोयाबीन पर बोनस देना था, वह नहीं दिया. विद्यार्थी परेशान हैं. उन्हें लेपटॉप से लेकर स्मार्टफोन तक नहीं दिया. मेधावी विद्यार्थियों की फीस भरनी थी, वह नहीं भरी. कमलनाथ सरकार के बजट से यह स्पष्ट हो गया है कि यह सरकार सिर्फ शगूफा छोड़ती है, काम नहीं करती है.

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