रविवार, 30 जून 2019

प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कांग्रेस में हलचल, दिल्ली पहुंचे कमलनाथ

राहुल गांधी से आज होगी चर्चा, जल्द बदला जाएगा अध्यक्ष

मध्यप्रदेश में कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिल्ली पहुंचे हैं. कल सोमवार को उनकी राहुल गांधी से इस संबंध में चर्चा होनी है. इस बीच  मुख्यमंत्री कमलनाथ और  पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समर्थकों ने पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम इस पद के लिए आगे बढ़ाकर सबको चौंका दिया है. हालांकि वन मंत्री उमंग सिंघार को आज अचानक दिल्ली बुलाए जाने से सरगर्मी और तेज हो चली है, लेकिन सिंघार ने खुद को इस पद की दौड़ से दूर बताया है.
लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद प्रदेश में जिस तरह से इस्तीफों का दौर शुरु हुआ वह तो जारी है. इसके साथ ही आज मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के दिल्ली पहुंचते ही नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर हलचल भी तेज हो गई है. इधर मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समर्थकों द्वारा पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम को इस पद के लिए आगे बढ़ाने से कांग्रेस के नेता खुद अंचभित हैं. दिग्विजय सिंह समर्थक और सिंधिया के घोर विरोधी सहकारिता मंत्री डा. गोविंद सिंह ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की कमान सिंधिया को सौंपने की बात कही है. वहीं कमलनाथ गुट के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भी गोविंद सिंह का समर्थन कर दिया है. सिंधिया समर्थक डा. प्रभुराम चौधरी भी इसी तरह की मांग कर चुके हैं. गोविंद सिंह ने सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की वकालत की. उन्होंने कहा सिंधिया युवा और ऊर्जावान हैं. उनके नेतृत्व में पार्टी अच्छा काम करेगी. वहीं, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहिए. इससे प्रदेश में कांग्रेस को मजबूती मिलेगी. चौधरी को सिंधिया समर्थक माना जाता है.
उमंग सिंघार को बुलाया दिल्ली
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर को लेकर चल रही हलचलों के बीच आज रविवार को वन मंत्री उमंग सिंघार को अचानक दिल्ली बुलाया गया है. सिंघार दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं.  सिंघार को दिल्ली क्यों बुलाया है, ये तो साफ नहीं है. दिल्ली से आए बुलावे को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी उसे निभाएंगे लेकिन वो प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में शामिल नहीं हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी में अब तक उन्हें जो भी पद मिला है, वह पद उन्होंने कभी मांगा नहीं है. पार्टी ने खुद दिया है.
डूबते जहाज से कूद गए पीसीसी अध्यक्ष: शिवराज
कांग्रेस में चल रहे इस्तीफों और प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए तेज हुई हलचल को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस खासकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कोई अध्यक्ष ही नहीं दिख रहा है. उन्होंने कहा कि जब जहाज डूबता है तो कैप्टन आखिर तक जहां पर खड़ा रहता है,कांग्रेस में तो अध्यक्ष ने ही इस्तीफा दे दिया है. पीसीसी चीफ (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष) खुद ही डूबते जहाज से कूद गए हैं.

एलपीजी से नहीं चलेंगे स्कूल वाहन


स्कूल बसों को लेकर परिवहन विभाग सख्त हो गया है. परिवहन विभाग ने स्कूल संचालकों को साफ कह दिया है कि बस या स्कूल वाहन जिनमें बच्चे स्कूल जाते हैं, वे एलपीजी से नहीं चलाए जाएं. इसकी निगरानी स्कूल प्रबंधन को करनी है. अगर ऐसे किसी वाहन से बच्चा स्कूल आता है तो उसकी जिम्मेदारी स्कूल की होगी.
 ये निर्देश परिवहन आयुक्त डा. शैलेंद्र श्रीवास्तव ने जारी किए हैं. जारी निर्देश में परिवहन आयुक्त ने कहा कि स्कलों में बच्चों को लाने के लिए चलनी वाले वाहन एलपीजी से न चलाएं.  कोई भी बच्चा ऐसे वाहनों से स्कूल न आए, इसकी निगरानी स्कूल प्रबंधन को ही करनी होगी. अगर इस तरह के किसी भी वाहन से बच्चा स्कूल आता है तो प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी कि वे पुलिस और आरटीओ को तत्काल सूचना दें. अगर ऐसे किसी भी वाहन से दुर्घटना होती है तो जबावदेही स्कूल प्रबंधन की ही होगी. सीट की संख्या से ज्यादा बच्चे वाहन में नहीं होने चाहिए. इसके साथ ही ट्रस्ट और समिति के नाम पर शैक्षणिक संस्थानों में चलने वाले वाहन अब प्राचार्य के नाम पर अनुबंधित होंगे. बच्चों को लाने ले जाने वाले सभी वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस, पुलिस वेरिफिकेशन, रजिस्ट्रेशन, फिटनेस, परमिट, बीमा और पीयूसी प्रमाण पत्र प्रबंधन के पास होना अनिवार्य.
परिवहन विभाग ने स्कूल बसों की जांच के लिए 3 टीमें बनाई हैं. राजधानी भोपाल में एक सप्ताह से  चल रही कार्रवाई के दौरान आरटीओ और यातायात पुलिस अब तक 2 हजार से अधिक शैक्षणिक संस्थानों की बसों की जांच कर चुकी है. करीब 15 प्रतिशत वाहनों में सुरक्षा मापदंड नहीं पाए जाने पर नोटिस दिए गए.
साफ अक्षरों में लिखना होगा स्कूल बस
परिवहन आयुक्त ने सख्त निर्देश दिए हैं कि स्कूलों में चलने वाली बसों का पीले रंग का होना अनिवार्य है. स्कूल बस में साफ अक्षरों में स्कूल बस लिखा जाना अनिवार्य किया जाए. साथ ही स्कूल बस यदि किराए की हो तो उसे उसमें भी स्कूल बस एवं स्कूल ड्यूटी बड़े शब्द बड़े एवं स्वच्छ अक्षरों में लिखा जाना अनिवार्य किया जाए. स्कूल बस की सीटों में यह ध्यान रखा जाए कि आवश्यकता से अधिक बच्चों को उसमें ना बैठाया जाए. परिवहन आयुक्त ने सभी परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह समय-समय पर सघन चेकिंग अभियान चलाकर स्कूल बसों की जांच करें एवं बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखें परिवहन अधिकारियों के अलावा यह निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से सभी स्कूलों को भी भिजवाए गए हैं.

जिन्हें संगठन दुरस्त करना था वो सो गए

हमारा नेतृत्व यह मानता है सर्वोच्च अभी बाकी है: शिवराज

भारतीय जनता पार्टी और अन्य दलों के बीच गहरा फर्क है. लोकसभा चुनाव के बाद जिन दलों को अपने संगठन को दुरुस्त करना था, वो गहरी नींद में सो गए हैं, लेकिन अपार सफलता के बावजूद भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व संतुष्ट नहीं है और हमारा नेतृत्व यह महसूस करता है कि पार्टी का सर्वोच्च अभी बाकी है. सर्वोच्च का अर्थ है पार्टी का उन राज्यों तक विस्तार जहां अभी हमारी उपस्थिति कमजोर है.
यह बात प्रदेश कार्यालय में आयोजित सदस्यता अभियान की जिला स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री पार्टी के उपाध्यक्ष एवं सदस्यता अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी  शिवराजसिंह चौहान ने कही. बैठक को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और अन्य दलों के बीच गहरा फर्क है. लोकसभा चुनाव के बाद जिन दलों को अपने संगठन को दुरुस्त करना था, वो गहरी नींद में सो गए हैं. लेकिन अपार सफलता के बावजूद भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व संतुष्ट नहीं है और हमारा नेतृत्व यह महसूस करता है कि पार्टी का सर्वोच्च अभी बाकी है. सर्वोच्च का अर्थ है पार्टी का उन राज्यों तक विस्तार जहां अभी हमारी उपस्थिति कमजोर है. हमारा सर्वोच्च तब हासिल होगा तेलंगाना, केरल, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल सहित उन राज्यों में हमारी सरकारें बनेंगी, जहां अभी हम सत्ता में नहीं हैं. सर्वोच्च का मतलब है पूरे देश में भाजपा का ध्वज लहराना. इसके लिए संगठन का विस्तार जरूरी है.
चौहान ने कहा कि मेरी इच्छा है कि सदस्यता अभियान में भोपाल में पूरे देश का रिकॉर्ड दे और यह तभी संभव है जब आप लोग व्यवस्थित तैयारी के साथ अभियान को चलाएं.  चौहान ने उपस्थित पार्टीजनों को भोपाल में सदस्यता का नया रिकॉर्ड बनाने का संकल्प भी दिलाया. 
हर क्षेत्र, हर बूथ पर करेंगे काम
 चौहान ने कहा कि संगठन के विस्तार का आधार सदस्यता है. उन्होंने कहा कि जिस तरह हमारी सरकार का लक्ष्य सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास है, उसी तरह पार्टी का मूलमंत्र सर्वव्यापी भाजपा, सर्वस्पर्शी भाजपा है. सर्वस्पर्शी का मतलब है कि हम किसी वर्ग को नहीं छोड़ेंगे, सभी को भाजपा से जोड़ेंगे.  चौहान ने कहा कि भाजपा सबकी पार्टी है. हम अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक आदि हर वर्ग के लोगों से मिलेंगे और अपनी बात रखकर उन्हें पार्टी से जोड़ेंगे. सर्वव्यापी का अर्थ है कि हम किसी क्षेत्र को नहीं छोड़ेंगे. सदस्यता अभियान में हर क्षेत्र को कवर करेंगे, हर बूथ पर काम करेंगे. 

पूर्व कुलपति कुठियाला को फरार घोषित किया


माखनलाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बी.के. कुठियाला को ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो) ने फरार घोषित कर दिया है. कुठियाला पर नियम विरुद्ध नियुक्तियों और आर्थिक अनियमितताओं के आरोप है. 
पूर्व कुलपति की गिरफ्तारी के लिए ईओडब्ल्यू की टीम ने हरियाणा के पंचकुला स्थित उनके दफ्तर और घर पर दबिश दी, लेकिन कुठियाला नहीं मिले, जिसके बाद जांच एजेंसी ने उन्हें फरार घोषित कर दिया है. संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है. ईओडब्ल्यू के मुताबिक कुठियाला की तलाश में टीम गुरुवार रात पंचकुला के लिए रवाना हुई थी. शनिवार को सबसे पहले सेक्टर 12 स्थित कुठियाला के घर पर दबिश दी गई, जब वे नहीं मिले तब उनके पीए और अन्य स्टाफ से फरारी पंचनामा पर ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने हस्ताक्षर कराए.  कुठियाला हिमाचल प्रदेश के रहने वाले है और उनका दिल्ली में भी आवास होने की जानकारी ईओडब्ल्यू को मिली है. पता चला है कि प्रो. कुठियाला ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना बंद कर दिया है. 25 जून को हरियाणा के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा को लेकर हुई बैठक में भी कुठियाला उपस्थित नहीं थे.
उल्लेखनीय है कि कुठियाला सहित 20 कर्मचारियों के खिलाफ माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में हुई वित्तीय अनियमितताएं और नियम विरुद्ध नियुक्तियों को लेकर एफआईआर दर्ज हुई है. 

कंडक्टर ने आंटी कहा, छात्र हंसा, छात्राओं ने की पिटाई


राजधानी भोपाल में बस में सफर कर रही कालेज की दो छात्राओं से बस कंडक्टर ने आंटी कहकर किराए की मांग की. इस पर पीछे खड़े छात्र को हंसी आ गई. छात्र को इस तरह हंसना तब महंगा पड़ गया, जब छात्राओं ने उसे बस से नीचे उतारा और जमकर उसकी पिटाई कर डाली. मामला थाने तक पहुंचा, तो पुलिसकर्मी भी पिटाई का कारण जानकर दंग रह गए. बाद में दोनों पक्षों को समझा-बुझा कर वापस भेज दिया.
दरअसल शनिवार की रात को घटी इस घटना का वीडियो आज जमकर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसके बाद लोगों में वीडियो चर्चा का विषय बन गया. बाद में पता चला कि राजधानी के रोशनपुरा चौराहे पर यह घटना बीती रात को घटी थी. पुलिस के अनुसार शनिवार की रात करीब 9 बजे बस में सफर कर रही दो लड़कियों से बस के कंडक्टर ने आंटी संबोधित करके किराए की मांग की. कंडक्टर के इतना कहते ही छात्राओं के पीछे खड़े एक छात्र को हंसी आ गई. छात्राओं को कंडक्टर के कथन का बुरा नहीं लगा, मगर छात्र के हंसने पर वे ज्यादा क्रोधित हो गई. इसके बाद दोनों छात्राओं ने रोशनपुरा चौराहे पर बस रुकवाई और छात्र को नीचे उतारा. छात्र के बस से नीचे उतरते ही छात्राओं ने उसके पिटाई करनी शुरु कर दी. छात्र को पिटता देख वहां तैनात यातायात पुलिस के जवान पहुंचे और बीच-बचाव किया. पुलिस और वहां जमा हुई भीड़ तब तक यह नहीं जान पाई की छात्र की पिटाई किस कारण से हो रही है. छात्राएं भी पुलिस की बात नहीं मान ही थी. बाद में छात्राओं और छात्र को टीटी नगर पुलिस थाने ले आई. थाने लाने पर पता चला कि असल पिटाई का कारण क्या है.
टीटी नगर थाना प्रभारी वीरेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि जब तीनों को थाने लाए  तब यह लग रहा था कि मामला छेड़छाड़ का होगा, मगर थाने में छात्राओं ने घटना बताई तब यह पता चला कि असली कारण छात्र का कंडक्टर द्वारा  आंटी कहकर संबोधित करने पर हंसना था. थाना प्रभारी ने बताया कि आधे घंटे की मशक्कत के बाद छात्राओं और छात्र के बीच समझौता कराया और फिर तीनों को छोड़ दिया.

शनिवार, 29 जून 2019

अधिकारी की बैट से पिटाई मामले में विधायक आकाश को मिली जमानत


मध्यप्रदेश के इंदौर में नगर निगम अधिकारी की क्रिकेट के बल्ले से पिटाई के मामले में भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय को  आज विशेष न्यायालय ने जमानत दे दी.  आकाश को न्यायालय ने 20 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत दी है.
आकाश के वकील पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि न्यायाधीश सुरेश सिंह की अदालत में जमानत याचिका दायर की गई थी. अदालत के न्यायाधीश सुरेशसिंह  ने इंदौर के संबंधित थाने और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया था कि वे केस डायरी कोर्ट में पेश करें. विशेष अदालत में आज दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायाधीश सुरेश सिंह ने विधायक आकाश को 20 हजार के मुचलके पर उनको जमानत दी. इसके अलावा बिना इजाजात प्रदर्शन करने के मामले मे भी आकाश को जमानत मिल गई है.  इसके पहले, गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश वी.के. द्विवेदी की कोर्ट ने आकाश विजयवर्गीय का मामला सुनने से इंकार कर दिया. कोर्ट ने इस मामले को भोपाल में जनप्रतिनिधियों के लिए बनी विशेष अदालत में ट्रांसफर कर दिया था. 
इंदौर से मामला जनप्रतिनिधियों की विशेष अदालत में भेजा था
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव  कैलाश विजयवर्गीय के विधायक बेटे आकाश को बुधवार को नगर निगम के अधिकारी की पिटाई करने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. गुरुवार को आकाश की जमानत याचिका पर अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इसे खारिज कर भोपाल की जनप्रतिनिधियों की अदालत में सुनवाई के लिए कहा था. बाद में शुक्रवार को  भोपाल की विशेष अदालत जमानत के लिए  याचिका लगाई गई थी. शुक्रवार को विशेष अदालत ने कोर्ट डायरी न होने पर सुनवाई नहीं की थी. आज दोपहर को कोर्ट डायरी आने के बाद लंच के पहले इस मामले पर सुनवाई हो गई थी.अदालत ने अपना फैसला शाम को सुनाया और विधायक आकाश विजयवर्गीय को जमानत दे दी. 

भाजपा के जनप्रतिनिधियों की हो रही अवहेलना


भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद राकेश सिंह ने कहा है कि कमलनाथ सरकार को इस बात का जवाब देना पड़ेगा कि अधिकारी सोच समझकर भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधियों की अवहेलना क्यों कर रहे हैं? यद्यपि भाजपा हाल ही में जो घटनाएं हुई है उन्हें कतई उचित नहीं मानती, लेकिन इस प्रकार की परिस्थितियां पैदा होने के कारण को समझती है.
सिंह ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने अधिकारियों का कांग्रेसीकरण कर दिया है, जो अधिकारी कांग्रेस के एजेंडे पर काम करने में नानुकूर करते है, उन्हें तबादलों का भय दिखाया जाता है. सब जानते है कि इंदौर के विधायक का स्वभाव कभी उग्र नहीं रहा. लेकिन वहां की नगर निगम के अधिकारियों ने विधायक की जायज बात को न मानते हुए आम नागरिकों और विशेषकर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया. जनप्रतिनिधि होने के नाते विधायक का वहां पहुंचना लाजमी था, लेकिन अधिकारियों ने विधायक की एक नहीं सुनी और अपने अनुचित कार्य को करने की चेष्टा करने लगे. परिस्थितिवश तनाव हुआ और ऐसी घटना हुई जिनका हम समर्थन नहीं करते.
जनप्रनिधियों की हो रही अवमानना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हाल ही में अन्य दो जिन घटनाओं का उल्लेख आ रहा है वहां भी कांग्रेस के इशारे पर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और अवमानना की कोशिश हुई. सरकार अधिकारी, कर्मचारियों के कांग्रेसीकरण को रोके, वरना भारतीय जनता पार्टी को सड़कों पर आकर जनहित के मुद्दों पर सरकार को झुकने पर मजबूर करना पड़ेगा.

अब जिलेवार की जाएगी किसान कर्ज माफी


किसान कर्ज माफी योजना में सरकार ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है. सरकार द्वारा अब जिले वार कर्ज माफी की जाएगी. सरकार की इस योजना के तहत एक जिले के किसानों का कर्ज माफ करने के बाद ही दूसरे जिले के किसानों का कर्ज माफी का कार्य शुरु होगा.
किसान कर्ज माफी को लेकर उठ रहे सवालों से बचने के लिए अब सरकार ने कर्ज माफी योजना में रणनीति बदली है. सरकार ने यह तय किया है कि अब किसानों की कर्ज माफी के मामले जिलेवार निपटाए जाएं. याने एक जिले के सभी किसानों कर्ज माफ करने के बाद ही दूसरे जिले में इस योजना के तहत कर्ज माफी का काम शुरु किया जाए. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने झाबुआ जिले से इसकी शुरुआत भी कर दी है. कर्ज माफी योजना में पहले चरण में पचास हजार रुपए तक के नियमित कर्ज और दो लाख रुपए तक कालातीत कर्ज को शामिल किया गया है. दूसरे चरण में एक लाख रुपए तक नियमित कर्ज माफ किया जाएगा. इसके साथ ही उन कालातीत कर्ज की भी माफी होगी, जिनमें विवाद थे.
कर्ज वितरण में न लगाएं अडंÞगा
जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि जिन किसानों की कर्ज माफी अभी नहीं हो पाई है, उन्हें भी पात्रता के हिसाब से कर्ज मुहैया कराया जाए. बैंकों से यह भी कहा गया है कि नो-ड्यूज प्रमाणपत्र को लेकर कर्ज वितरित करने में कोई अड़ंगा न लगाया जाए.

कम्प्यूटर बाबा ने अब मांगा न्यास के लिए बजट



मध्यप्रदेश की सियासत में सुर्खियों में रहने वाले कम्प्यूटर बाबा आज फिर चर्चा में आ गए. बाबा ने मंत्रालय पहुंचकर आध्यात्म विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव से मुलाकात की और न्यास के लिए बजट देने की मांग भी कर डाली.
कम्प्यूटर बाबा आज मंत्रालय पहुंचे. उन्होंने यहां पर आध्यात्म विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव से नदी संरक्षण को लेकर चर्चा की. बाबा ने चर्चा के दौरान प्रमुख सचिव से कहा कि वैसे तो जनसहयोग के द्वारा न्यास अपना काम कर रहा है, मगर न्यास का अपना बजट भी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि जनसहयोग के अलावा न्यास को बहुत कुछ काम खुद को करने होंगे. इसके लिए राशि की जरुरत तो पड़ेगी. बाबा ने प्रमुख सचिव से नर्मदा, क्षिप्रा और खान नदियों के संरक्षण को लेकर चर्चा हुई. बाबा सरकार से पहले भी हेलीकाप्टर की मांग कर चुके है, जिसे सरकार ने पूरा नहीं किया. इसके बाद मंत्रालय में कक्ष और ड्रोन कैमरे की मांग भी वे कर चुके हैं.
पौधरोपण की जांच होनी चाहिए
कम्प्यूटर बाबा ने जुलाई 2017 में शिवराज सरकार के कार्यकाल में हुए पौधारोपण के मामले को लेकर कहा कि इस मामले की जांच की जानी चाहिए. यह बहुत गंभीर मामला है, वे इसके लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र भी लिखकर पूरे मामले की जांच की मांग करने वाले हैं.

सिंधिया माने तो अजय बन सकते हैं अध्यक्ष

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिए चर्चा में आधा दर्जन नाम, सक्रिय हुए दावेदार

मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए आधा दर्जन दावेदारों के नामों की चर्चा है और ये दावेदार भोपाल से दिल्ली तक सक्रिय भी हैं. कमलनाथ के इस्तीफा देने के संकेत के साथ दावेदारों ने सक्रियता ज्यादा बढ़ा दी है. वैसे इस पद के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह. अजय सिंह के नाम पर सहमत हैं, मगर अजय सिंह के नाम पर पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को मनाना आसान नहीं है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चल रहे नामों में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया का खुद का नाम भी सिंधिया समर्थक आगे बढ़ा रहे हैं. सिंधिया समर्थकों का मानना है कि वे अब प्रदेश की कमान संभालें और संगठन को मजबूत करें. वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह चाहते हैं कि यह पद पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह को मिले. अजय सिंह को लेकर  दोनों नेता सहमत हैं, मगर सिंधिया समर्थक इस नाम पर सहमत नहीं हैं. इसके चलते अजय सिंह की राह में सबसे बड़ा रोड़ा खुद सिंधिया के अलावा सिंधिया समर्थक नेता और मंत्री हैं. इनके अलावा आदिवासी कार्र्ड खेलते हुए कमलनाथ अपने समर्थक बाला बच्चन का नाम आगे बढ़ा रह हैं, मगर बच्चन की राह में वन मंत्री उमंग सिंघार रोड़ा बन सकते हैं. सिंघार, सीधे तौर पर राहुल गांधी से जुड़े हुए हैं और युवा नेता के रुप में राहुल की पसंद भी वे हैं. वहीं सिंधिया समर्थक रामनिवास रावत का नाम भी इस पद के लिए सामने आ रहा है. इसके अलावा मंत्र जीतू पटवारी भी इसके लिए सक्रिय हैं.

मिलेगी युवा चेहरे को कमान 
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए इस बार युवा चेहरे को सामने लाने का प्रयास कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता कर रहे हैं. इसके चलते उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी और उमंग सिंघार का नाम लिया जा रहा है. अगर आदिवासी वर्ग से अध्यक्ष बनने की बात आती हैं तो उमंग और पिछड़े वर्ग से अध्यक्ष बनाने की बात आती है तो जीतू पटवारी के नाम पर राहुल गांधी अपनी सहमति दे सकते हैं. दोनों ही के संबंध मुख्यमंत्री कमलनाथ के अलावा पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी अच्छे हैं. वहीं ये दोनों राहुल की पसंद भी है. दोनों ही नेताओं को मंत्री भी राहुल गांधी के कहने पर ही बनाया गया था.

शुक्रवार, 28 जून 2019

राहुल के मलाल के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस में मची खलबली

कमलनाथ देंगे अध्यक्ष पद से इस्तीफा, बने रहेंगे मुख्यमंत्री

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार और राहुल गांधी के मलाल के बाद अब मध्यप्रदेश कांग्रेस में खलबली मच गई है. मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने प्रदेश में कांग्रेस की हार की जिम्मेदारी लेने की बात कही और प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने को कहा है. मुख्यमंत्री द्वारा की गई इस पेशकश के बाद उनके निवास पर सुबह से मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों के पहुंचने का सिलसिला तेज रहा. माना जा रहा है कि कमलनाथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देंगे और मुख्यमंत्री बने रहेंगे.
लोकसभा चुनाव में करारी हार को लेकर कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, प्रदेश अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों द्वारा हार की जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा न दिए जाने पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा  दुख व्यक्त करने के बाद आज मध्यप्रदेश कांग्रेस में खलबली मची रही. सबसे पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि वो इस हार के लिए जिम्मेदार है. कमलनाथ ने कहा कि राहुल गांधी सही हैं, वो नहीं जानते कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है, लेकिन मैंने पहले इस्तीफे की पेशकश की थी और हार के लिए जिम्मेदार हूं. मुझे दूसरे नेताओं के बारे में नहीं पता. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस्तीफा देने पर अड़े रहने के सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए राहुल गांधी सही व्यक्ति हैं. 
मुख्यमंत्री द्वारा की गई इस्तीफे की पेशकश के बाद आज शुक्रवार को अचानक राजनीतिक घटनाक्रम बदला. मुख्यमंत्री ने सुबह सभी वरिष्ठ मंत्रियों को तलब किया. मंत्रियों के अलावा मुख्यमंत्री निवास पर पार्टी के कुछ पदाधिकारियों को भी   बुलाया था और बातचीत की. मुख्यमंत्री निवास पर पहुंचने वाले मंत्रियों में  सज्जन सिंह वर्मा, पी.सी. शर्मा, आरिफ अकील, बाला बच्चन, कमलेश्वर पटेल शामिल हैं. मंत्रियों ने मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत का उल्लेख तो नहीं किया, मगर  जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने इस बात का संकेत जरुर दिया कि मुख्यमंत्री प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देंगे.
उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने  यूथ कांग्रेस की बैठक में नेताओं से कहा था कि वो इस्तीफा वापस नहीं लेंगे, लेकिन कार्यकर्ता चिंता न करें. वो कहीं जाने वाले नहीं हैं यहीं रहेंगे और लोगों की लड़ाई मजबूती से लड़ेंगे.
मंत्री ने कहा हाईकमान कहेगा तो मैं दूंगा इस्तीफा
राहुल गांधी के मलाल के बाद राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री डा. प्रभुराम चौधरी ने कहा कि पार्टी हाईकमान जो चाहेगा, वे वहीं करेंगे. अगर उनसे इस्तीफा देने की मांग की गई, तो वे इस्तीफा देंगे. उन्होंने कहा कि कमलनाथ हमारे मुख्यमंत्री है, हमारे नेता है और वे जो भी कहेंगे वह उचित ही होगा.
तन्खा दे चुके हैं इस्तीफा
प्रदेश के वरिष्ठ कांगे्रसी नेता एवं सांसद विवेक तन्खा द्वारा राहुल गांधी के समर्थन में दिए गए इस्तीफे से इसकी शुरूआत हो चुकी है. उन्होंने विधि प्रकोष्ठ एवं सूचना के अधिकार विभाग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. तन्खा ने इस्तीफे के साथ ही राहुल गांधी से अपील की है कि वे अपने मन मुताबिक टीम  का चयन करें. साथ ही तन्खा ने अन्य पार्टी पदाधिकारियों से भी इस्तीफा ेदेन की अपील की है.

मंत्री ने कहा जनता का अपमान कर रही भाजपा


मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने विधायक आकाश विजयवर्गीय के समर्थन में लगे पोस्टरों को लेकर कहा कि भाजपा किस तरह की संस्कृति दिखाना चाहती है, समझ से परे है. उन्होंने कहा कि भाजपा जनता का अपमान कर रही है.
राजधानी में मीडिया से चर्चा करते हुए पटवारी ने कहा कि गोडसे की संस्कृति को प्रतिपादित कर रही है. अधिकारियों को डरा कर भाजपा क्या साबित करना चाह रही है, समझ से परे है. उन्होंने भाजपा पर सवाल उठाए और कहा कि भाजपा इस तरह की संस्कृति अपनाकर जनता का अपमान कर रही है. पटवारी ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और विधायक आकाश विजयवर्गीय के पिता कैलाश विजयवर्गीय से जानना चाहा कि उनके या फिर आकाश के खिलाफ कौन षडयंत्र कर रहा है. उन्हें बताना चाहिए. उन्होंने कहा कि इंदौर नगर निगम में महापौर भाजपा की, परिषद भाजपा की और आरोप कांग्रेस पर लगाया जा रहा है. मंत्री ने कैलाश विजयवर्गीय को सलाह दी कि वे भाजपा के लोगों के बच्चों को संस्कार दें. आपने जैसा बीज बोया वैसा ही फल मिला है. 
लक्ष्मण ने कहा आकाश को क्षमा करना चाहिए
कमलनाथ सरकार को ट्वीट के जरिए लगातार घेरते आ रहे कांग्रेस विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह ने ट्वीट कर कहा है कि आकाश को क्षमा किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ भाजपा नेता का अधिकारियों को लेकर दिया बयान गाड़ी में आओग, घटिया पर जाओगे, अगर यही हमारी बात नहीं मानी तो.  इन्हीं नेताओं से प्रेरणा आकाश विजयवर्गीय भी लेता रहा है. दोष वरिष्ठ नेताओं का है, आकाश का नहीं. इसलिए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को इस पूरे प्रकरण के लिए माफी मांगनी चाहिए.
शिवराज ने दिया था नारा, आवेदन, निवेदन फिर दे दनादन
इंदौर के विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा आवेदन, निवेदन और फिर दे दनादन की बात कहे जाने को लेकर भाजपा पर कई तरह के सवाल उठाए गए. दरअसल यह नाराज आकाश का नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा दिया है. पार्टी सूत्रों की माने तो दिग्विजय के शासनकाल में जब शिवराज सिंह चौहान भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे, उस वक्त वे कार्यकर्ताओं की बैठकों और सभाओं में इस नारे का खूब उपयोग करते और कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते थे. इसके बाद जब राज्य में दिग्विजय शासनकाल की समाप्ति हुई और भाजपा की सरकार बनी तो भाजयुमो ने इस नारे को भुला दिया था, मगर अब फिर आकाश विजयवर्गीय ने शिवराज के इस नारे की याद दिला दी है.

बल्ले को प्रजातंत्र की हार का प्रतीक न बनाएं

 मुख्यमंत्री कमलनाथ ने युवा जन प्रतिनिधियों से किया आह्वान

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि हिंदुस्तान की दो बड़ी खूबियां हैं, एक तो यह विश्व का सबसे बड़ा प्रजातंत्र है और दूसरा विश्व में सर्वाधिक युवा देश. ऐसे में स्वाभाविक है कि चुने हुए युवा जन प्रतिनिधियों से देश को अपेक्षाएं भी अधिक होंगी, और हों भी क्यों न, हमारे पास अपने प्रजातंत्र की गौरवशाली विरासत जो है. भारतीय प्रजातंत्र का जो छायादार वटवृक्ष आज हमें दिखाई देता है, इसके त्याग और बलिदान का बीज बहुत गहरा बोया गया है और आज समूचे विश्व के लिए यह प्रेरणादायी है.
प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज युवा जनप्रतिनिधियों को एक पत्र लिखकर यह बात कही. उन्होंने पत्र में युवा जन प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि पंडित नेहरू कहते थे, संस्कारवान युवा ही देश का भविष्य संवारना चाहिए. आज हमारे चुने हुए युवा जनप्रतिनिधियों को आत्ममंथन-आत्मचिंतन करना चाहिए कि वो किस रास्ते पर भारत के भविष्य को ले जाना चाहते हैं. एक रास्ता प्रजातंत्र की गौरवशाली विरासत की उम्मीदों को पूरा करने वाला है, और दूसरा उन्मादी. दोस्तों, उन्मादी व्यवहार सस्ता प्रचार तो दे सकता है, प्रजातंत्र को परिपक्वता नहीं दे सकता. 
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा जनप्रतिनिधियों, आप पर दायित्व है सदन में कानून बनाने का, सड़कों पर कानून हाथ में लेने का नहीं. आप अपनी बात दृढ़ता और मुखरता से रखें, मयार्दा को लांघ कर नहीं.  आज समूचे विश्व को हमारे बल्ले की चमक देखने को मिल रही है. हमारी क्रिकेट टीम लगातार जीत हासिल कर रही है और हमें पूरी उम्मीद है कि हम विश्व कप में अपना परचम लहराएंगे. मगर बल्ले की यह जीत बगैर मेहनत के हासिल नहीं की जा सकती. खिलाड़ियों को मर्यादित मेहनत करनी होती है. मर्यादा धैर्य सिखाती है, धैर्य से सहनशीलता आती है, सहनशीलता से वे परिपक्व होते हैं और परिपक्वता जीत की बुनियाद बनती है. अर्थात खेल का मैदान हो या प्रजातंत्र, मूल मंत्र एक ही है. यह बात मैं सीमित और संकुचित दायरे में रह कर नहीं कह रहा हूँ. सभी दल के युवा साथियों से मेरा यह अनुरोध है. 
युवा साथियों से विमर्श करना मेरा दायित्व
युवा जनप्रतिनिधियों को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री होने के नाते मेरा दायित्व भी है कि मैं अपने नौजवान और होनहार साथियों के साथ विमर्श करता रहूं. युवा जनप्रतिनिधि साथियों, बल्ले को मैदान में भारत की जीत का प्रतीक बनाइए, सड़कों पर प्रजातंत्र की हार का नहीं.

गुरुवार, 27 जून 2019

बैट से पिटाई पर घिरी भाजपा, वरिष्ठ नेताओं ने साधा मौन

 सदस्यता अभियान की बैठक की स्थगित, प्रदेश अध्यक्ष गए दिल्ली

मध्यप्रदेश में भाजपा के विधायक और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विजयवर्गीय द्वारा नगर निगम अधिकारी की बैट से की गई पिटाई के बाद भाजपा घिरती नजर आ रही है. बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस को कोसने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने मौन साध लिया है. वहीं इंदौर में सदस्यता अभियान को लेकर होने वाली बैठक को भाजपा ने स्थगित कर दिया और प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं. इसके पहले उन्होंने अपना इंदौर दौरा रद्द कर दिया था. 
इंदौर में विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा नगर निगम अधिकारी के साथ बैट से की मारपीट मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी से भाजपा घिर गई है. लोकसभा चुनाव के बाद से भाजपा जहां कमलनाथ सरकार को राज्य में बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर घेरने की रणनीति पर काम कर रही थी, उसकी इस रणनीति को इस घटना ने असफल कर दिया है. कांग्रेस नेता अब लगातार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं द्वारा धमकी देने, मारपीट करने जैसी घटनाओं को लेकर भाजपा को घेर रहे हैं. वहीं भाजपा नेताओं ने मौन साध रखा है, कुछ नेता जरुर आकाश के बचाव में आए, मगर घटना को भी गलत बता रहे हैं. अधिकांश वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम पर मौन साध रखा है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान ने भी इस मुद्दे पर अपनी कोई टिप्पणी नहीं की है.
उम्मीद नहीं थी आकाश ऐसा करेंगे
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पर तंज करते हुए कहा कि उम्मीद नहीं थी कि आकाश विजयवर्गीय ऐसा करेंगे. उन्होंने कहा कि लगते तो बहुत भोले और सुसंस्कृत हैं. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह भाजपा के कार्यकर्ताओं ने देश के अंदर ऐसी ही संस्कृति बना दी है. उनके लिए कानून कोई चीज नहीं है. खुद ही अदालत, खुद की पुलिस की मानसिकता से ग्रस्त हैं.  सिंह ने कहा कि आकाश पहली बार चुनाव जीते हैं और अनुभव भी नहीं है. मैं नही जानता उन्होंने ऐसा क्यों किया? भाजपा के लिए सरकार कुछ नहीं है, ये लोग सिर्फ अहंकार में डूबे हुए हैं. यह संस्कार नरेंद्र मोदी और अमित शाह से मिले हैं. पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि आकाश विजयवर्गीय हमें भाजपा में सिखाया जाता है. पहले आवेदन, फिर निवेदन और फिर दनादन, क्या इससे स्पष्ट नहीं होता कि भाजपा को न नियम पर, न कानून पर, न संविधान पर विश्वास है?
 भाजपा नहीं सुधरी तो जाएगी गर्त में
 सरताज सिंह भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा का इंदौर में अधिकारी के साथ विधायक आकाश द्वारा की गई मारपीट का आचरण खतरे की घंटी है और अगर भाजपा नहीं सुधरेगी तो गर्त में जाएगी. सिंह ने कहा कि यह बहुत ही निंदनीय घटना है, और जनप्रतिनिधि से ऐसी अपेक्षा नहीं की जा सकती है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में कमलनाथ सरकार को अगर 5 साल का समय मिल गया तो, अगली बार भी प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनेगी. सरताज सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ की दूरदर्शी सोच है. मध्यप्रदेश में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव के रिजल्ट को लेकर कहा कि विधानसभा के रिजल्ट की नगरीय निकाय के परिणाम आएंगे.
आकाश विजयवर्गीय अब हो गए पटेल
कांग्रेस ने आकाश विजयवर्गीय के बहाने सरकार ने भाजपा के बड़े नेताओं के पुत्रों को लेकर हमला बोला है. विधि मंत्री पीसी शर्मा ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल, पूर्व मंत्री जालमसिंह पटेल और कमल पटेल के बेटों पर दर्ज आपराधिक मामले जगजाहिर हैं.  इसके साथ ही अब इस लिस्ट में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय का नाम भी जुड़ गया है. जनसंपर्क मंत्री ने कहा कि आकाश विजयवर्गीय अब पटेल हो गए हैं भाजपा नेताओं के बेटों की इस तरह की पूरी लाइन है. इस संबंध में अब जनता को भी संज्ञान लेना चाहिए.
प्रोविजन पीरियड पर हैं आकाश
पूर्व कैबिनेट मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने आकाश विजयवर्गीय का बचाव करते हुए कहा है कि तरीके पर आपत्ति हो सकती है, लेकिन आकाश की नियत पर संदेह नहीं किया जा सकता है. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि वो खुद या परिवार के लिए नहीं बल्कि जनता के लिए लड़ा है. उन्होंने कहा कि अभी प्रोविजन पीरियड पर है, आकाश सीख जाएगा.

मुख्यमंत्री ने आईएएस को सौंपी जिलों की कमान

 समस्याओं का करेंगे निराकरण, विकास पर देना होगा ध्यान

कमलनाथ सरकार ने मध्य प्रदेश में अब जिलों की कमान सीनियर आईएएस अफसरों को सौंप दी है. ये सभी सचिव, प्रमुख सचिव और एडिशनल चीफ सेक्रेट्री स्तर के अधिकारी हैं. जिलों में विकास की जिम्मेदारी अब इन अफसरों की होगी. इन्हें जनता की समस्याओं का निपटारा और सरकार की योजनाओं पर अमल कराना होगा. सभी अफसरों को 2 महीने में कम से कम एक बार अपने प्रभार वाले जिÞले का दौरा करना होगा.
प्रदेश में जन-समस्याओं के निराकरण एवं शासन की योजनाओं सुव्यवस्थित संचालन के लिए जिलों में प्रभारी सचिव व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है. मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती ने अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव एवं सक्षम अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि प्रभार वाले जिले का कम से कम 2 माह में एक बार अवश्य भ्रमण करें. उन्होंने कहा है कि भ्रमण के दौरान आम जनता को प्रभावित करने वाले विषयों पर सर्वाधिक ध्यान दिया जाए तथा जन-समस्याओं का निराकरण पहली प्राथमिकता होना चाहिए.
किस अधिकारी को दिया कौन सा जिला
मनोज श्रीवास्तव को भोपाल,  गौरी सिंह  को इंदौर,  आईसीपी केसरी को जबलपुर, वीरा राणा को राजगढ़, मोहम्मद सुलेमान को होशंगाबाद. जेएन कंसोटिया को विदिशा, विनोद कुमार को टीकमगढ़, राजेश कुमार राजौरा  को ग्वालियर, एस एन मिश्रा को रीवा, अश्विनी कुमार राय को मंदसौर, मलय श्रीवास्तव को बैतूल, अजीत केसरी को उज्जैन, पंकज राग को  बड़वानी, अशोक शाह  को शहडोल, मनोज गोविल को छिंदवाड़ा, अशोक वर्णवाल  को सागर, प्रमोद अग्रवाल  को मुरैना, मनु श्रीवास्तव को शाजापुर,पंकज अग्रवाल  को खरगोन,  के सी गुप्ता  को श्योपुर, नीलम शमी राव  को शिवपुरी, संजय दुबे  को भिंड, नीरज मंडलोई  को देवास, अनुपम राजन  को गुना, अनिरुद्ध मुखर्जी  को रतलाम, रमेश एस थेटे  को निवाड़ी, संजय कुमार शुक्ला  को नीमच, रश्मि अरुण शमी  को सीहोर, हरी रंजन राव को खंडवा, मनीष रस्तोगी को रायसेन, दीपाली रस्तोगी को झाबुआ, पल्लवी जैन गोविल को सतना, शिव शेखर शुक्ला को अनूपपुर, नितेश कुमार व्यास को सिंगरौली, उमाकांत उमराव को उमरिया, खेनगवार देशमुख को नरसिंहपुर, सुखवीर सिंह को पन्ना, गुलशन बामरा को धार, मुकेश चंद्र गुप्ता को डिंडोरी, विवेक कुमार पोरवाल को बालाघाट, कविंद्र कियावत को कटनी, एम के अग्रवाल को अलीराजपुर,  जयश्री कियावत को दतिया, एम बी ओझा  को आगर मालवा, चंद्रशेखर बोरकर को  सिवनी, राजीव चंद्र दुबे को अशोकनगर, नरेश पाल कुमार को सीधी, निशांत बरबड़े को छतरपुर, ज्ञानेश्वर बी पाटिल को बुरहानपुर की जिम्मेदारी दी गयी है.

मॉब लिंचिंग को लेकर प्रदेश में बनेगा कानून


देश में कई स्थानों पर मॉब लिंचिंग के मामले सामने आने के बाद अब प्रदेश में सरकार इसे लेकर कानून बनाने जा रही है.
प्रदेश के विधि एवं विधायी मंत्री पी.सी.शर्मा ने यह जानकारी आज पत्रकारों से चर्चा करते हुए दी. शर्मा ने बताया कि प्रदेश में मॉब लिंचिंग जैसे मामलों को लेकर कानून बनाया जाएगा. विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार इसका विधेयक लेकर आएगी. उन्होंने बताया कि इस कानून के तहत खुद को गोरक्षक बताकर हिंसा करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि इस विधेयक के पारित होते है तो मध्य प्रदेश में इस तरह के मामलों के लिए अलग से कानून बन जाएगा. शर्मा ने बताया कि प्रदेश में अभी जो कानून लागू है, उसके तहत गोवंश की हत्या, गोमांस रखने और उसके परिवहन पर पूरी तरह रोक है. इसमें गोवंश के नाम पर हिंसा या मॉब लिंचिंग का जिक्र नहीं है. संशोधन के बाद अब कोई व्यक्ति गोवंश का वध, गोमांस और गोवंश का परिवहन, मांस रखना या सहयोग करना या इसके अंतर्गत कोई हिंसा या क्षति नहीं करने पर पांच साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान होगा. उल्लेखनीय है कि इसे लेकर कल बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में भी चर्चा हुई है. इसके बाद बैठक में  संशोधन करने की मंजूरी दी गई है. 
प्रदेश के पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव ने इसकी पुष्टि की है.  सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार 8 जुलाई से होने वाले आगामी विधानसभा सत्र में इस अधिनियम के संशोधन बिल को अमलीजामा पहनाने के लिए पेश करेगी. उल्लेखनीय है कि इस  संशोधन के विधानसभा में पारित होकर कानून बनने के बाद यदि कोई शख्स अकेला गोरक्षा के नाम पर हिंसा करेगा तो उसे छह महीने से लेकर तीन साल की सजा और जुर्माना देना पड़ेगा.  गाय के नाम पर भीड़ द्वारा हिंसा या हत्या की जाती है, तो उनकी सजा को बढ़ाकर न्यूनतम एक साल और अधिकतम पांच साल की जा सकेगी, यदि अपराधी दोबारा अपराध करता है तो उसकी सजा दोगुनी कर दी जाएगी.

बुधवार, 26 जून 2019

कांग्रेस ने शिवराज से पूछा कब बैठेंगे धरने पर



भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय द्वारा नगर निगम कर्मचारियों, अधिकारियों की बैट से की पिटाई की कांग्रेस ने निंदा की है.  प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने कहा कि विधायक शांत मध्यप्रदेश को पश्चिम बंगाल बनाना चाहते हैं. वहीं उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह किया है कि वे जिस तरह से भोपाल में घटित घटनाओं को लेकर धरने पर बैठे थे, उसी तरह अब केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के पुत्र और विजयवर्गीय के पुत्र द्वारा की गई मारपीट के विरोध में धरने पर बैठे.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने बताया कि आज इंदौर में निगम मुख्यालय के पास गंजी कंपाउंड क्षेत्र में एक जर्जर मकान को तोड़ने गई निगम अधिकारियों की टीम पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विधायक पुत्र आकाश विजयवर्गीय और उनके समर्थकों द्वारा जिस प्रकार से खुलेआम जानलेवा हमला किया गया. उनकी सार्वजनिक रुप से बेट से पिटाई की गई, वह बेहद आपत्तिजनक व निंदनीय है. ऐसा लग रहा है कि शांत मध्यप्रदेश को यह लोग पश्चिम बंगाल बनाना चाहते हैं.
सलूजा ने कहा कि विधायक व उनके समर्थकों द्वारा जिस प्रकार से कानून हाथ में लेने का प्रयास किया गया है, निश्चित तौर पर वह बेहद आपत्तिजनक है.  उन्होंने कहा कि भोपाल के बैरागढ़ की घटना पर व कानून व्यवस्था को लेकर मुखर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान व भाजपा को इंदौर आकर निगम अधिकारियों व कर्मचारियों की जानमाल की रक्षा के लिए व कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली इस घटना के लिए तत्काल धरना देना चाहिए. 
सलूजा ने कहा कि देखना होगा शिवराज सिंह व भाजपा, गोटेगांव के भाजपा के केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल व पूर्व मंत्री जालम पटेल के पुत्रों की गुंडागर्दी की घटना व हरदा के भाजपा विधायक कमल पटेल के पुत्र की गुंडागर्दी की घटना की तरह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के पुत्र की इस गुंडागर्दी की घटना पर भी मौन रहती है या सड़कों पर आकर नैतिकता का परिचय देते हुए इस शर्मनाक घटना का विरोध करती है.
जनहित की नहीं वर्चस्व की है लड़ाई
मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा एवं उपाध्यक्ष अभय दुबे ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि इंदौर में आज विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा निगमकर्मियों की पिटाई करना बेहद निंदनीय है. उन्होंने कहा कि भाजपा महापौर मालिनी गौड़ और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की लंबे समय से चली आ रही राजनैतिक मतभिन्नता अब चरम पर है और हिंसक हो चली है. कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और विधायक आकाश विजयवर्गीय ने भाजपा महापौर मालिनी गौड़ को सीधी चुनौती देते हुए आज सरे राह निगमकर्मियों की पिटाई की. उन्होंने कहा कि बुनियादी रूप से यह जनहित की नहीं, राजनैतिक वर्चस्व की लड़ाई है.  

भाजपा के तीन पूर्व सांसदों के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने शुरु की जांच


मध्यप्रदेश अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने भाजपा के तीन पूर्व सांसदों और एक नामित विधायक के खिलाफ आर्थिक गड़बड़ी मामले में जांच शुरु कर दी है. तीनों पूर्व सांसदों के खिलाफ लीड्य योजना में गड़बड़ी के आरोप लगे थे. इसके अलावा प्रदूषण बोर्ड में भी इन पर गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे. वहीं पूर्व नामित विधायक पर विधायक निधि के दुरुपयोग का आरोप लगा था.
ईओडब्ल्यू ने राज्य के भाजपा के तीन पूर्व सांसदों मनोहर ऊंटवाल, चिंतामणि मालवीय और नारायण केसरी के खिलाफ आर्थिक गड़बड़ी  मामले में जांच शुरु कर दी है. तीनों पर लीड्स योजना में गड़बड़ी के आरोप लगे थे. तीनों ने शिक्षण संस्थानों में एमपी लीड्स योजना के तहत कम्प्यूटर शिक्षण परियोजना में सांसद निधि से कम्प्यूटर लगवाए और उसका प्रशिक्षण का काम कराया था. इसके लिए जो कम्प्यूटर खरीदे गए वे घटियास्तर के पाए गए थे. पूर्व सांसद मनोहर ऊंटवाल द्वारा शाजापुर कलेक्टर को 60 लाख के काम के लिए संबल की अनुशंसा की, जिसमें दस शिक्षण संस्थाओं में काम कराया गया था. इसके लिए पूर्व सांसद चिंतामणि मालवीय ने संबल के तहत  8 स्कूलों में कम्प्यूटर उपलब्ध कराए इस मामले में 48 लाख रुपए की राशि की अनुशंसा कलेक्टर उज्जैन द्वारा की गई. वहीं नारायण केसरी ने भी रतलाम कलेक्टर की अनुशंसा पर 4 स्कूलों में कम्प्यूटर उपलब्ध कराए थे.  पूर्व सांसदों के अलावा पूर्व नामित विधायक लारेन बी लोबो पर भी विधायक निधि के दुरुपयोग का मामला था. उन्होंने सनराइज फुटबाल क्लब, स्आर क्रिकेट क्लब और सरगम संगीत सेंटर को जो पैसे दिए उसमें गड़बड़ी के आरोप लगे थे. 
पूर्व सांसदों और पूर्व नामित विधयाक के अलावा प्रदूषण बोर्ड के सदस्य रहे हैं एन मिश्रा, विधि अधिकारी सुधीर श्रीवास्तव और पूर्व महाधिवक्ता पुरूषेंद्र कौरव के खिलाफ भी जांच की जा रही है. इन पर अवैध पारिश्रमिक लेने का भी आरोप है.बताया जाता है कि इन अधिकारियों पर 54 लाख से ज्यादा का अवैध पारिश्रमिक लिए जाने का आरोप लगा था. ईओडब्ल्यू द्वारा इन सभी मामलों को लेकर जांच की जा रही है. जांच में जो साक्ष्य सामने आएंगे उसके आधार पर ईओडब्ल्यू कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है.

डायस पर बैठकर मंत्री ने तहसीलदार को किया निलंबित

 राजस्व अधिकारी संघ हुआ खफा, हड़ताल की दी चेतावनी

मध्यप्रदेश के राजस्व मंत्री डायस पर पहुंचे और तहसीलदार की कुर्सी पर बैठ गए. मामले को लेकर राजस्व अधिकारी संघ खफा हो गया और मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. संघ ने मंत्री के इस व्यवहार को अदालत का अपमान बताया और हड़ताल तक की चेतावनी दे दी. बाद में मामले ने जब तूल पकड़ा तो मंत्री ने सफाई दी और कहा कि वे तहसीलदार की कुर्सी पर नहीं बैठे, बल्कि कम्प्यूटर वाले की कुर्सी पर बैठे थे. वे किसी से मिलने भी जाते हैं, तो उसकी कुर्सी पर कभी नहीं बैठते. 
दरअसल राज्य के राजस्व मंत्री गोविंद राजपूत ने राजधानी भोपाल से सटे जिले सीहोर मुख्यालय पहुंचकर तहसील कार्यालय का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान वे तहसीलदार के डायस पर पहुंचे और कुर्सी पर बैठ गए. मंत्री ने राजस्व मामलों से संबंधित फाईलें भी देखी और उनका स्पाट मूल्यांकन  भी किया. काम में लापरवाही को देखते हुए उन्होंने तहसीलदार विनोद कुशवाह को निलंबित कर दिया.
जांच के दौरान मंत्री तहसील कार्यालय में संधारित की जा रही पंजियों, सूचना का अधिकार, लोक सेवा गारंटी, दायरा पंजी एवं शिकायत पंजी का निरीक्षण किया. इस दौरान नामांतरण के 595 प्रकरणों में से 224 प्रकरण लंबित पाए गए. मात्र 371 प्रकरणों का ही निपटारा किया गया. शिकायत पंजी भी संधारित नहीं पाई गई. सूचना के अधिकार के तहत वर्ष 2018 में कोई शिकायत दर्ज नहीं पाई गई. जांच में आरआरसी (शासकीय राशि की वसूली) पंजी बी-4 का संधारण नहीं किया गया. भूमि संबंधी प्रकरणों की पंजी बी-4 पर कलेक्टर का अनुमोदन नहीं मिला. सीमांकन के 191 प्रकरण लंबित पाए गए. अतिक्रमण के 17 प्रकरणों में से मात्र 4 प्रकरणों का ही निपटारा किया गया. शेष 13 प्रकरणों पर कोई कार्यवाही की गई. एक साल से अधिक समय से नामांकन के 6 प्रकरण लंबित पाए गए. इन सब को कार्य में लापरवाही पाते हुए मंत्री ने तहसीलदार के निलंबन के निर्देश दिए. 
मंत्री के द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद राजस्व अधिकारी संघ खफा हो गया है. संघ ने हड़ताल की चेतावनी दी है. राजस्व अधिकारी संघ ने निलंबन की कार्रवाई को एक तरफा बताया है. संघ का यह भी कहना है कि मंत्री राजपूत डायस पर पहुंच कुर्सी पर बैठे थे. तहसील आफिस न्यायालय व्यवस्था का हिस्सा होता है. मंत्री के आचरण से न्यायालय के काम में बाधा पहुंची.
विवाद बढ़ा तो मंत्री ने दी सफाई
राजस्व अधिकारी संघ द्वारा जब मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोला और हड़ताल की चेतावनी दी गई, तो मंत्री गोविंद राजपूत ने इस मामले को लेकर सफाई दी. उन्होंने कहा कि वे तहसीलदार की कुर्सी पर नहीं बैठे थे, बल्कि कम्प्यूटर वाले की कुर्सी पर बैठे थे. उन्होंने कहा कि मैं अगर किसी से मिलने भी जाता हूं तो इस बात का ध्यान रखता हूं, कभी भी उसकी कुर्सी पर नहीं बैठता. मंत्री ने कहा कि तहसील कार्यालय में किसानों के काम न होने की शिकायतें मिल रही थी, इसे देखते हुए वे औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे.
कलेक्टर ने कहा मैं नहीं दे सकता निलंबन के आदेश
राजस्व मंत्री गोविंद राजपूत ने सीहोर कलेक्टर अजय गुप्ता को तहसीलदार के निलंबन के आदेश दिए थे, मगर कलेक्टर ने साफ मना कर दिया कि वे तहसीलदार के निलंबन के आदेश नहीं दे सकते. उन्होंने कहा कि तहसीलदार को निलंबित करने अधिकार शासन को है. अगर राजस्व मंत्री को तहसीलदार को निलंबित करना है तो वे प्रमुख सचिव को राजस्व को कार्यवाही के लिए लिख सकते हैं.
प्रभारी मंत्री को सौंपा ज्ञापन
राजधानी में सीहोर जिले के प्रभारी मंत्री आरिफ अकील को ज्ञापन सौंंंपा. ज्ञापन में कहा गया कि  25 जून को राजस्व मंत्री द्वारा अपने सहयोगियों के साथ तहसील सीहोर में तहसीलदार न्यायालय का औचक निरक्षण किया. निरीक्षण के दौरान मंत्री राजपूत न्यायालय की गरिमा के विपरीत तहसीलदार न्यायालय के डायस पर स्वत: बैठ गए एवं अन्य अनाधिकृत, गैर न्यायायिक अधिकारी एवं अन्य व्यक्ति भी न्यायालय के डायस पर बैठकर राजस्व न्यायालय की गरिमा को आहत किया है. सार्वजनिक तौर पर राजस्व मंत्री ने तहसीलदार पद को भ्रष्ट कहा. यह तहसीलदार संस्था के सम्मान, स्वाभिमान और गरिमा पर गंभीर आघात है. 

मध्यप्रदेश को बंगाल बना देना चाहते हैं कमलनाथ


प्रदेश में एक तरफ अराजकता की स्थिति है. कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. दूसरी तरफ कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार पुलिस बेलगाम और बर्बर होती जा रही है. प्रदेश की पुलिस जिस तरह से निर्दोष लोगों पर अत्याचार कर रही है, उनकी हत्या तक करने से बाज नहीं आ रही है, उससे लगता है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ शांत मध्यप्रदेश को पश्चिम बंगाल बना देना चाहते हैं.
 यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद राकेश सिंह ने रतलाम में एबीवीपी कार्यकर्ताओं की पुलिस द्वारा बर्बर पिटाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश की पुलिस के निशाने पर भाजपा और उसके समवैचारिक संगठनों के कार्यकर्ता हैं. उन्होंने कहा कि बीते एक माह में यह चौथी घटना है, जब पुलिस ने भाजपा या उसके जैसे संगठन के निर्दोष, निहत्थे कार्यकर्ताओं पर बर्बर बलप्रयोग किया है, लाठियां बरसाई हैं. उन्होंने कहा कि हमारे कार्यकर्ता जब भारत के मैच जीतने पर जुलूस निकालकर खुशी का इजहार करते हैं, तो यह बात पुलिस को रास नहीं आती. कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करते हैं, तो पुलिस बेरहमी से उनकी पिटाई करती है. उन्होंने प्रदेश सरकार और पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश है, पश्चिम बंगाल नहीं है. यहां अगर हमारे कार्यकर्ताओं को बल प्रयोग से दबाने या कुचलने की कोशिश की गई, तो भाजपा करारा जवाब देगी.
पुलिस बेकाबू या मुख्यमंत्री के इशारे पर कर रही काम
प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि प्रदेश की पुलिस आम जनता और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रति जिस तरह का दमन चक्र चला रही है, उससे दो बातें उभरकर आती है. या तो प्रदेश की पुलिस बेकाबू हो गई है और सरकार के नियंत्रण में नहीं है, या फिर प्रदेश की पुलिस मुख्यमंत्री और कांग्रेस सरकार के इशारे पर यह काम कर रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस का बेकाबू होना शर्मनाक स्थिति है और अगर ऐसा है, तो कांग्रेस सरकार पद पर बने रहने का अधिकार खो चुकी है. अगर पुलिस सरकार की सहमति से और उसके इशारे पर यह सब कर रही है, तो यह निंदनीय और लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता अपनी जान देकर भी सरकार के इस प्रयास को सफल नहीं होने देंगे.

प्रोफेशनल तरीके से काम करे पुलिस


पुलिस अमला प्रोफेशनल तरीका (व्यवसायिक दृष्टिकोण) अपनाकर अपने काम-काज को अंजाम दे. इससे बेहतर ढंग से कानून का पालन होगा. साथ ही पुलिस के प्रति समाज में सम्मान एवं विश्वास भी बढ़ेगा.
 इस आशय के निर्देश पुलिस महानिदेशक  विजय कुमार सिंह ने पुलिस के मैदानी अमले को दिए.  सिंह ने  पुलिस मुख्यालय से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश भर के पुलिस महानिरीक्षक, उप महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, अनुविभागीय पुलिस अधिकारी एवं थाना प्रभारियों से सीधा संवाद किया. उन्होंने कहा पुलिस अमला पूरी निडरता के साथ काम करे, पर ऐसा करना तभी संभव होगा जब पुलिसिंग का काम व्यवसायिक दृष्टिकोण के साथ किया जाएगा. 
पुलिस महानिदेशक ने निर्देश दिए की प्रदेश के हर पुलिस थानें में प्रतिदिन शाम को अनिवार्यत: गणना की जाए. साथ ही पुलिस मुख्यालय द्वारा बेसिक पुलिसिंग के संबंध में जारी किए गए निर्देश पढ़कर सुनाए जाएं. उन्होंने सभी पुलिस अधीक्षको व थाना प्रभारियों को हिदायत दी कि प्रत्येक आरक्षक सहित अपने अधीनस्थ अमले से जीवंत संवाद रखें. दिनभर की गतिविधियों की जानकारी लेकर उसे पुलिस मुख्यालय से साझा करें. सिंह ने थाने में अनुशासन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया. साथ ही कहा कि पुलिस थाने में फरियाद लेकर आने वाला व्यक्ति साधारणत: सामान्य मानसिक स्थिति में नहीं होता, इसलिए पुलिस अमला संवेदनशीलीता, विनम्रता और धैर्यपूर्वक उसकी बात सुने. इसी तरह आरोपी के साथ भी व्यवसायिक दृष्टिकोण अपनाकर पूछताछ करें. उन्होंने कहा कि पुलिस शब्दावली सदैव अच्छी रहना चाहिए. 
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पुलिसिंग के संबंध में जारी गाइड लाइन का पुलिस थानों में कड़ाई से पालन करने पर पुलिस महानिदेशक ने विशेष बल दिया. उन्होंने पुलिस महानिरीक्षकों को व पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि वे थानों का नियमित निरीक्षण करें और उसका फीड बैक भी दें. साथ ही यह भी निर्देश दिए कि पुलिस अमले की समस्याओं का समाधान भी पूरी संवेदनशीलता के साथ किया जाए . उन्होंने पुलिस थानों में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करने के भी निर्देश दिए. 

मंगलवार, 25 जून 2019

विधान परिषद के गठन की तैयारी तेज, मसौदा भेजा विधि विभाग को



मध्यप्रदेश में विधानसभा परिषद के गठन की कवायद तेज हो गई है. वचनपत्र में किए वादे को पूरा करने के लिए कमलनाथ सरकार ने इसका मसौदा बनाकर विधि विभाग को परीक्षण के लिए भेज दिया है. परीक्षण के बाद राज्यपाल की अधिसूचना से इस परिषद का गठन किया जा सकेगा.
मध्यप्रदेश में कांग्रेस द्वारा सरकार बनने पर राज्य में विधान परिषद के गठन का वादा किया था. इस वादे को पूरा करने के लिए अब सरकार ने सक्रियता दिखानी तेज कर दी है. सरकार ने इसके गठन के लिए एक मसौदा तैयार किया है और उसे विधि विभाग को भेज दिया है. जानकारों का मानना है कि विधान परिषद के गठन का प्रावधान प्रदेश में है, इसलिए इसमें केन्द्र सरकार के अनुमादन की जरुरत नहीं पड़ेगी. इसका गठन कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद राज्यपाल की अधिसूचना जारी किए जाने के साथ हो जाएगा. बताया जाता है कि संसदीय कार्य विभाग ने विधान परिषद के गठन का मसौदा तैयार किया है और उसे विधि विभाग को परीक्षण के लिए भेजा है. 
वैसे प्रदेश में विधान परिषद के गठन का प्रावधान पहले से ही है. विधानसभा परिसर में परिषद की बैठक की अलग से व्यवस्था है और अन्य इंतजाम भी है. इसके गठन के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरुरी है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधेयक पारित करके राज्यपाल को भेजा जाएगा. इसके बाद राज्यपाल द्वारा विधान परिषद के गठन की अधिसूचना जारी की जा सकती है. इस मामले को लेकर संसदीय कार्यमंत्री डा. गोविंद सिंह का कहना है कि विधान परिषद के गठन को लेकर कानूनी पहलुओं पर हम परीक्षण करा रहे हैं. इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. वैसे विधान परिषद गठन को लेकर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम साहित कुछ कानून में संशोधन करना होगा, जो केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा. 
यहां उल्लेखनीय है कि संसदीय कार्य विभाग द्वारा यह मसौदा विधि विभाग को पहले भी भेजा गया था. मगर तब विधि विभाग ने इसे यह कहकर वापस लौटा दिया था कि इसके लिए केन्द्र सरकार की अनुमति लगेगी. इसके बाद संसदीय कार्यविभाग ने मसौदे पर विधि विशेषज्ञों की राय ली, इसके बाद फिर दोबारा यह मसौदा विधि विभाग को भेजा है. विभाग ने इस बात का उल्लेख किया है कि मध्यप्रदेश में इसका प्रावधान पहले से ही है. 

करेंसी व्यापार की आड़ में ठगी करने वाले गिरफ्तार


एसटीएफ ने क्रिस्टो करेंसी की आड़ में हजारों लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया है. एसटीएफ ने गिरोह के सरगना और उसकी पत्नी को जबलपुर से गिरफ्तार किया है. 
एसटीएफ के एडीजी पुरषोत्तम शर्मा ने यह जानकारी आज राजधानी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए दी. शर्मा ने बताया कि गिरोह के सरगना की पहचान ब्रजेश रैकवार पिता डोरीलाल रैकवार के रुप में हुई है. यह जबलपुर के शक्तिनगर में रहता है. उसकी पत्नी सीमा भी उसके साथ इस ठगी के धंधे में लिप्त है. उन्होंने बताया कि ब्रजेश के गिरोह के सदस्यों का नेटवर्क भारत से लेकर हांगकांग, चीन, दुबई, मलेशिया तक फैला हुआ है. आरोपियों द्वारा सिल्वर, गोल्ड, प्लेटिनम आदि नामों से आईडी एवं मेंबरशिप ली जाती थी. इस गिरोह के भारतीय नेटवर्क को डिप्लोमाधारी युवक एवं एसी टेक्निशियन संचालित कर रहे थे. आरोपियों से की पूछताछ में अब तक करीब 100 लोगों से 10 करोड़ रुपए की ठगी करने की बात सामने आई है. उन्होंने बताया कि आरोपियों द्वारा अवैध रुप से बिट काइन, गोल्ड यूनियन काइन जैसी क्रिप्टो करेंसी से करोड़ों रुपए कमाए जाते थे. इस राशि को वे जमीन, मकान, दुकान, मुजरा-नाइट, बालीवुउ हाईट्स, गोवा के कसीनों, हांगकांग, दुबई, थाईलैंड, मलेशिया, चीन, सिंगापुर आदि देशों में मौज मस्ती पर खर्च किया करते थे. गिराह ने एपी-3 मोशन पिक्चर्स प्रोडक्शन में महफिल  उमरावजान नामक मूवी में भी निवेश किया है.शर्मा ने बताया कि जांच में अब तक जबलपुर, भोपाल, छत्तीसगढ़ में निवेश करने की जानकारी मिली है. इस गिरोह में हांगकांग में रहने वाला केविन एवं मलेशिया में रहने वाला डेनियल फ्रांसिस भी जुड़ा होने बताया जा रहा है. आरोपियों ने क्रिप्टो, करेंसी के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए मुंबई, दिल्ली, चंडीगढ़, भोपाल, रायपुर, जालंधर, अमृतसर में भी मीडिया के माध्यम से लोगों से संपर्क किया है. ठगी के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भारतीय स्वरुप देने के लिए प्लस गोल्ड, यूनियन काइन की वेबसाइट बनवाने के लिए बैंगलोर व जयपुर की फर्माें से करार किया गया था. मुख्य आरोपी ब्रजेश व रुपेश ने बैंगलौर आईअी कंपनी व डिजाइनर से दुबई में मुलाकात की थी. एसटीएफ का मानना है कि पूछताछ में अभी कई और खुलासे हो सकते हैं.

अब कम्प्यूटर बाबा ने मांगा मंत्रालय में कक्ष


कम्प्यूटर बाबा ने सरकार से अब मंत्रालय में कक्ष देने की मांग की है. इसके अलावा एक ड्रोन कैमरा भी मांगा ताकि वे नदी की निगरानी कर सकें. बाबा ने अध्यात्म विभाग के मंत्री पी.सी.शर्मा को पत्र लिखकर यह मांग की है. शर्मा ने इस पत्र को सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया है.
नर्मदा, क्षिप्रा और मंदागिनी नदी न्यास के अध्यक्ष बनने के बाद से कम्प्यूटर बाबा सक्रिय हो गए हैं. बाबा ने न्यास अध्यक्ष की कुर्सी संभालते ही यह मांग की थी कि उन्हें हेलिकाप्टर दिया जाए, मगर सरकार ने उनकी इस मांग को पूरा नहीं किया. इसके बाद अब ने चार पहिया वाहन से ही अपना काम शुरु किया और नदी की परिक्रमा करने के लिए निकल पड़े. कई स्थानों पर उन्होंने अवैध उत्खनन के वाहन भी पकड़वाए. बाबा की इस कार्यशैली से अवैध उत्खनन करने वालों और अधिकारियों हड़कंप भी मचा. 
अब बाबा ने सरकार के सामने एक नई मांग रख दी है. बाबा ने अध्यात्म विभाग के मंत्री पी.सी.शर्मा को पत्र लिखकर मंत्रालय में एक कक्ष आवंटित करने की मांग की है. साथ ही उन्होंने एक  ड्रोन कैमरा भी मांगा है. इसके पीछे उनका यह कहना है कि इससे अवैध उत्खनन पर नजर रख सकेंगे. बाबा द्वारा लिखे पत्र को मंत्री शर्मा ने सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया. मंत्री ने भी उदारता दिखाई है और नोटशीट लिखकर बाबा को कक्ष उपलब्ध कराने की बात कही है. बताया जा रहा है कि बाबा को मंत्रालय में कक्ष मिल जाएगा साथ ही सरकार उन्हें ड्रोन कैमरा भी उपलब्ध करा सकती है. इस मामले को लेकर मंत्री शर्मा का कहना है  कि नर्मदा में अवैध उत्खनन को रोकने के लिए बाबा ने जिन संसाधनों की मांग की है, उन्हें पूरा करने पर विचार किया जाएगा.
रेत माफिया पर करें कार्रवाई
समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रवक्ता यश भारतीय ने भोपाल कलेक्टर तरुण पिथोड़े का ज्ञापन सौंपकर रेत माफिया पर कार्रवाई की मांग की है.  उन्होंने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि राजधानी और उसके आस-पास के क्षेत्रों में रेत माफिया ने बड़ी मात्रा में रेत एकत्रित कर रखी है. इस रेत की बारिश में जब नदियों के घाट बंद होंगे तब बाजार में कालाबाजारी की जाएगी. उन्होंने ज्ञापन में कहा कि राजधानी में अस्थायी लीज लेकर जमकर रायल्टी की चोरी की जा रही है और शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है. 

पेंशन न मिलने से नाराज हो रहे मिसाबंदी


मध्यप्रदेश में 34 जिलों के मीसाबंदियों को 6 माह से पेंशन नहीं  मिल रही है. इससे मीसाबंदियों की नाराजगी बढ़ती जा रही है. लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक ने कहा कि सरकार को जल्द ही मीसाबंदियों की पेंशन शुरु करना चाहिए.
राज्य में सरकार बदलने के साथ ही मीसाबंदियों की पेंशन बंद करने की बात सामने आई थी, जब मीसाबंदियों ने इसका विरोध किया तो सरकार ने तर्क दिया था कि मीसा बंदी पेंशन को बंद नहीं किया गया है, बल्कि इस योजना के तहत कई अपात्रों को भी पेंशन का लाभ मिल रहा है, जिनका सत्यापन किए जाने के बाद पेंशन देना शुरु कर दी जाएगी. सरकार की इस बात के बाद राज्य के 18 जिलों में तो मीसाबंदियों का सत्यापन किया गया, मगर 34 जिलों में अब भी सत्यापन नहीं हो पाया. राज्य के जिन 18 जिलों में मीसाबंदियों का सत्यापन हुआ है, वहां पर पेंशन शुरु कर दी गई है, मगर शेष जिलों के मीसाबंदियों को अब भी पेंशन का इंतजार है. 
लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक ने बताया कि सरकार ने बदले नियमों के तहत 18 जिलों में तो मीसाबंदियों का सत्यापन कर लिया, मगर अब भी 34 जिलों के मीसाबंदियों का सत्यापन नहीं हुआ है, जिसके चलते वहां के मीसाबंदियों को पेंशन नहीं मिल पा रही है. भौमिक का कहना है कि  होशंगाबाद, सीहोर, हरदा, सिवनी,  उज्जैन, रतलाम सहित 34 जिलों में मीसाबंदियों का अब तक सत्यापन नहीं हुआ है, जिसके कारण उन्हें पेंशन नहीं मिल पा रही है. सरकार को जल्द ही शेष जिलों में सत्यापन कराकर पेंशन शुरु करना चाहिए.
यहां उल्लेखनीय है कि शिवराज सरकार के कार्यकाल में मीसाबंदी योजना की शुरुआत हुई थी. इस योजना के तहत 2 हजार से ज्यादा लोगों को 25 हजार रुपए मासिक पेंशन दी जाती थी. योजना के शुरुआती दौर में यह पेंशन 3 हजार रुपए प्रतिमाह दी जा रही थी, मगर 2017 में इस बढ़ाकर 25 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया था.

सरकार को अस्थिर करने का षडयंत्र कर रही है केन्द्र सरकार


पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा है कि भाजपा के नेता रामलाल का मध्यप्रदेश की चुनी हुई सरकार के बारे में मीडिया में प्रकाशित बयान से जाहिर है कि केंद्र सरकार, प्रदेश सरकार को अस्थिर करने का षडयंत्र रच रही है.
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि भाजपा तोड़-फोड़ की राजनीति और षडयंत्र करने में विश्वास रखती है. प्रजातंत्र में भाजपा का विश्वास नही है. उन्होंने कहा कि पंद्रह साल तक भाजपा की सरकार ने मध्यप्रदेश को खोखला कर दिया. सरकारी धन का जितना दुरूपयोग भाजपा ने किया है उसे अब पूरा देश जान गया है कि कैसे भाजपा ने अपने संगठनों को लाभ पहुंचाया. उन्होंने कहा कि अब जनता का फैसला बर्दाश्त नहीं कर पा रही है और सरकार को अस्थिर करने के गैर संवैधानिक तरीके अपनाने पर उतारू हो गई है. सिंह ने भाजपा नेता रामलाल के बयान पर भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह से पार्टी का महत्व स्पष्ट करने की माँग की है. उन्होंने कहा कि अनैतिक हथकंडों से सत्ता पाने में माहिर भाजपा के आंखों की किरकिरी कांग्रेस शासित राज्य बने हुए हैं. सिंह ने कहा कि जनता के बीच अब भाजपा के हथकंडे जाहिर हो गए हैं. जनता को भी भाजपा के हथकंडों और झूठ फैलाने की मशीनरी से सावधान रहना होगा.

रविवार, 23 जून 2019

महंत नरेन्द्र गिरी की हो सकती है गिरफ्तार

 मिर्ची बाबा द्वारा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी के लिए एफआईआर दर्ज कराने के बाद पुलिस अब उनकी गिरफ्तारी के लिए सक्रिय हो गई है. पुलिस का एक दल जल्द ही प्रयागराज लाकर उनकी गिरफ्तार करेगा.
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की लोकसभा चुनाव में हार पर समाधि लेने की घोषणा करने वाले वैराग्यानंद उर्फ मिर्ची बाबा की शिकायत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. मिर्ची बाबा की शिकायत पर भोपाल के अयोध्या नगर थाने में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी के खिलाफ वैराग्यानंद को धमकाने के आरोप में एफआईआर हो गई है और अब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने प्रयागराज जा सकती है.
अयोध्या नगर पुलिस के अनुसार मीनाल रेसीडेंसी में रहने वाले वैराग्यानंद उर्फ मिर्ची बाबा ने पुलिस में शिकायत की थी कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के लोकसभा चुनाव में जीत के लिए कांग्रेस का प्रचार किया था. वह चुनाव हार गए, जिसके बाद 9 मई को उन्हें मोबाइल पर धमकी दी जा रही है और आत्महत्या के उकसाया जा रहा है. जिस पर पुलिस ने संत नरेंद्र गिरी पर धमकाने का मामला दर्ज किया है.  इस मामले को लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय साहू का कहना है कि पुलिस की एक टीम को प्रयागराज भेजा जा रहा है.
 वैराग्यानंद के वकील सैयद माजिद अली ने कहा कि महंत नरेंद्र गिरी ने तीन हजार काल  करवाकर वैराग्यानंद को आत्महत्या करने के लिए उकसाया और प्रताड़ित किया. इस मामले में पुलिस ने धारा 507 के तहत मामला दर्ज किया है, जबकि हमने साइबर क्राइम और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करने की मांग की थी. उन्होंने कहा कि महंत गिरी द्वारा यह आपराधिक क्रत्य किया गया है, जिस पर पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई करने जा रही है.
मिर्ची बाबा को शिवराज ने बताया फर्जी
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की लोकसभा चुनाव में जीत का दावा करने वाले स्वामी वैराग्यनंद मिर्ची बाबा को लेकर आज पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मोर्चा खोला है. उन्होंने मिर्ची बाबा को फर्जी बाबा बताया और कहा कि मिर्ची बाबा द्वारा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी के खिलाफ जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसे रद्द किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि महंत नरेन्द्र गिरी पर दर्ज की गई एफआईआर गलत है.

मध्यप्रदेश में चमकी बुखार की दस्तक


छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्यप्रदेश में चमकी बुखार ने दस्तक दी है.  देवास के कन्नौद में बुखार आने से एक बच्चे की मौत होने की बात सामने आ रही है. बच्चे की मौत की वजह चमकी बुखार की आशंका जताई जा रही है. हाालंकि चिकित्सकों ने अभी बच्चे की मौत चमकी बुखार से होने की पुष्टि नहीं की है.वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने स्वास्थ्य विभाग सहित सभी शासकीय अस्पतालों को अलट रहने के निर्देश दिए हैं.
 मामला देवास के खाते गांव के जामनेर के रहने वाले एक 8 साल के बच्चे असलम पिता इब्राहिम को इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती किया था.लेकिन एमवाय से डिस्चार्ज के बाद घर जाते वक्त बच्चे की मौत हुई है. डाक्टरों को बच्चे की जांच रिपोर्ट का इंतजार हैं. फिलहाल डाक्टरों ने चमकी बुखार की पुष्टि नहीं की है. चिकित्सकों का कहना है कि बच्चे में चमकी बुखार जैसे लक्षण तो नजर आए, लेकिन जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि बच्चे की मौत का कारण क्या था. 
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने मामले को गंभीरता से लिया है और स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं. मंत्री ने सभी शासकीय अस्तपालों को भी अलर्ट किया है उन्होंने इंदौर सहित राज्य के सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा है कि इस बीमारी के प्रति गंभीर रहें और उपचार में किसी तरह की कोई देरी न की जाए.

जहां हम कमजोर हैं वहां करना है मेहनत

संगठन का आधार है सदस्यता: शिवराज

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के सदस्यता अभियान के प्रभारी  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहां पर हम कमजोर हैं, वहां पर हमें मेहनत करना है, ताकि संगठन को और मजबूती मिले. उन्होंने कहा कि संगठन का आधार सदस्यता होती है, इसलिए हमें ज्यादा से ज्यादा नए सदस्यों को बनाना है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने ये बात आज राजधानी में हुई सदस्यता अभियान को लेकर हुई बैठक में कही. उन्होंने कहा कि हमें संगठन का विस्तार करना है और संगठन का आधार है सदस्यता. पार्टी ने तय किया है कि नए सदस्य बनाना है. सदस्यता अभियान का मूलमंत्र है 'सर्वस्पर्शी भाजपा, सर्वव्यापी भाजपा'. अलग-अलग वर्ग, जहां हम कमजोर हैं, वहां मेहनत की जरूरत है. चौहान ने कहा कि प्रदेश में ऐसे कई बूथ हैं जहां पार्टी को अपेक्षा के अनुरूप वोट नहीं मिले हैं. उन्होंने कहा कि हमें इसके पीछे का कारण खोजकर माइक्रो लेवल पर प्लानिंग करके सभी को अपने साथ लेना होगा, यही है 'सर्वव्यापी भाजपा'. बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैं चुनाव के दौरान जब जनता के बीच जाता था, तो लोग कहते थे कि मामा चिंता मत करो, मय ब्याज के बदला लेंगे. प्रदेश में भाजपा ने 28 सीटें जीती और जीत का मार्जिन भी 5-5 लाख वोटों का है. 
सदस्यता अभियान की बैठक खत्म होने के बाद संगठन महामंत्री सुहास भगत ने कहा कि सदस्यता अभियान केवल खाना पूर्ति नहीं होनी चाहिए. मंडल स्तर पर रजिस्टर में हर सदस्य का फोन नंबर एड्रेस की जानकारी होनी चाहिए. प्रदेश संगठन कभी भी रजिस्टर बुलवाकर क्रास चेक कर सकता है. उन्होंने कहा कि आज की बैठक में अधिक से अधिक भाजपा के नए सदस्य बनाने पर जोर दिया गया.
बैठक में कोर ग्रुप, प्रदेश पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष, सांसद, संगठन मंत्री, सदस्यता के जिला प्रभारी, सह प्रभारी, मोर्चा अध्यक्ष, प्रकोष्ठ, विभाग एवं प्रकल्पों के प्रदेश संयोजकों के साथ सदस्यता अभियान के संदर्भ में चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.
मुखर्जी को दी श्रद्धांजलि
प्रदेश भाजपा कार्यालय में सदस्यता अभियान को लेकर हुई बैठक के पहले पूर्व मुख्यमंत्री सहित अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने स्वर्गीय श्यामाप्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. इस अवसर पर चौहान ने कहा कि हम स्वर्गीय मुखर्जी के बताए मार्ग पर चलते हुए संगठन को और मजबूत करने का काम करेंगे.

नशे, बलात्कार के फरार हो रहे आरोपी, सो रही है सरकार

 शिवराज ने कहा है प्रहलाद पटेल का बेटा घटना स्थल पर नहीं था मौजूद

मध्यप्रदेश की नीमच जेल से भागे चार कैदियों को लेकर सियासत गर्मा गई है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस सरकार पर हमला बोला और कहा कि नशे और बलात्कार के आरोपी जेल से फरार हो रहे हैं. सरकार से अपराधी तो पकड़े नहीं जा रहे हैं, वह सो रही है. केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के बेटे प्रबल पटेल का शिवराज ने बचाव करते हुए कहा कि मेरे पास इस बात के पूरे प्रमाण हैं कि घटना स्थल पर प्रबल मौजूद नहीं था.
राजधानी में आज मीडिया से चर्चा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह बात कही. उन्होंने नीमच जेल से भागे कैदियों को लेकर कहा कि नशे और बलात्कार के आरोपी फरार हो रहे हैं. वैसे भी प्रदेश में अपराधी तो पकड़े नहीं जा रहे हैं और जो अपराधी पकड़े गए हैं, वे जेल से भाग रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कानून व्यवस्था संभाल नहीं पा रही है. जेलों से कैदी भाग रहे हैं और सरकार सो रही है. पूर्व मुख्यमंत्री ने अवैध उत्खनन के दौरान 5 मजदूरों की मौत को लेकर कहा कि नेता अफसर सब मिलकर अवैध उत्खनन में लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि मैं जब मुख्यमंत्री था, तब कार्रवाई करता था, और लोग पकड़े जाते थे, लेकिन अब तो गठजोड़ कर अवैध उत्खनन हो रहा है और ये व्यापार खूब फल-फूल रहा है. मुख्यमंत्री कमलनाथ की हमीदिया अस्पताल में हुई सर्जरी को लेकर शिवराज सिंह ने अपने ट्वीट पर कहा है कि मैं हर मामले में राजनीति नहीं करता हूं, मगर मैं यही कहूंगा कि मुख्यमंत्री के साथ-साथ सभी लोगों को समान रूप से वही सुविधाएं मिले जो मुख्यमंत्री को हमीदिया चिकित्सालय में इलाज के दौरान मिली हैं. 
प्रहलाद पटेल के बेटे का किया बचाव
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के बेटे प्रबल पटेल का भी बचाव किया. उन्होंने कहा कि नरसिंहपुर जिले में जिस घटना में प्रबल का नाम आया है, वह उस घटना स्थल पर उस दिन मौजूद ही नहीं था. शिवराज सिंह ने इस बात का दावा किया और कहा कि मेरे पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं, उनके आधार पर मैं यह बात कह रहा हूं. उन्होंने  प्रबल पटेल की गिरफ्तारी पर आपत्ति जताई है. उन्होंने  पुलिस ने प्रबल को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार किया है, क्योंकि वह केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल का बेटा है. उसकी गिरफ्तारी गलत है.
लोगों में है दहशत का माहौल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कैदियों के जेल से भागने की घटना पर कांग्रेस सरकार पर हमला बोला है. राकेश सिंह के मुताबिक कांग्रेस सरकार आने के बाद राज्य की कानून व्यवस्था चरमरा गई है. लोगों में दहशत का माहौल है. उन्हें लगने लगा है कि प्रदेश में कुछ भी हो सकता है. राकेश सिंह के मुताबिक चार कैदियों में 3 नशे के कारोबार से जुड़े हैं, लेकिन सरकार को इससे कोई लेना देना नहीं है. सिंह ने मुख्यमंत्री कमलनाथ पर तंज कसते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल में मुख्यमंत्री ने इलाज क्या करा लिया, पूरी कांग्रेस उसे प्रेरणादायक बताने में जुटी है. 
दिग्विजय के भाई ने सरकार पर उठाए सवाल
नीमच जेल से भागे कैदियों को लेकर भाजपा के अलावा कांग्रेस के विधायक और दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह ने भी अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. लक्ष्मण सिंह ने ट्वीट कर कहा कि नीमच जेल से कैदी भागे तो 4.30 बजे हैं, पुलिस को इस मामले की जानकारी सुबह 6.30 बजे लगी. इसमें पुलिस की मिलीभगत साफ झलकती है. यहां उल्लेखनीय है कि लक्ष्मण सिंह और उनकी पत्नी द्वारा कई बार सरकार के लोकर पहले भी ट्वीट किए गए हैं, जिससे सरकार की किरकिरी हुई है. सूत्रों की माने तो लक्ष्मण सिंह भी मंत्री न बनाए जाने को लेकर नाराज चल रहे हैं. 

शनिवार, 22 जून 2019

कानून के रक्षक ही बने भक्षक: भार्गव


 नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा है कि प्रदेश में कानून के रक्षक ही अब भक्षक बन गए हैं. पुलिस द्वारा की जा रही बर्बरता की घटनाएंलगातार सामने आना चिंताजनक बात है. प्रशासनिक बर्बरता की ऐसी घटनाएं निंदनीय हैं. 
नेता प्रतिपक्ष ने कहा की बीते 6 माह में ऐसे अनेक मामले संज्ञान में आये हैं, जिनमे झूठे केस दर्ज किए जा रहे हैं तो कही फरियादी को ही आरोपी बना दिया जाता है. उन्होंने कहा कि अकेले राजधानी में ही बीते 12 दिनों में यह छठवीं घटना है, जिसमें खाकी पर ही दाग लगा है. 6 जून को कोलार पुलिस ने मामूली एक्सीडेंट को लेकर व्यापारी के साथ जमकर मारपीट की थी. पुलिस पर ही चोरी का आरोप भी लगा. 6 जून को ही र्इंटखेड़ी पुलिस ने युवक से मारपीट और जबरन वसूली को अंजाम दिया. 9 जून को माण्डवा बस्ती में नाबालिग के साथ हुई दुष्कृत्य की घटना में पुलिस की लापरवाही सामने आई. 16 जून को कोतवाली पुलिस द्वारा एक युवक को झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर 25 हजार रुपए मांगने की घटना भी सबके सामने आई है. उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में शिवम मिश्रा की मौत यह सोचने पर मजबूर करने वाली घटना है कि जहां मुख्यमंत्री और उनकी पूरी सरकार बैठी है, वहीं अगर ये हाल हैं तो प्रदेश में कितनी भयावह स्थिति होगी.
सरकार को कटघरे में खड़ा करेंगे
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश भर में पुलिस की तानाशाही और बर्बरता देखने को मिल रही है. जहां पुलिस ने अपनी वर्दी का रौब दिखाते हुए मारपीट के आरोप में न केवल एक पक्षीय कार्रवाई की, बल्कि बेकसूर व्यक्ति को बंधक बनाकर बेरहमी से पीट-पीटकर मरणासन्न हालात में पहुँचा दिया. विधानसभा सत्र में हम इसे लेकर प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा करेंगे.

मिर्ची बाबा को धमकाने पर दर्ज कराई एफआईआर


राजधानी पुलिस ने मिर्ची बाबा को धमकाने के मामले में एफआईआर दर्ज की है. यह एफआईआर बाबा की ओर से अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरी के खिलाफ दर्ज की है. 
लोकसभा चुनाव में  कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की जीत के लिए  मिर्ची का हवन कर जलसमाधी लेने की बात कहने वाले स्वामी वैराग्यनंद मिर्चीबाबा एक बार फिर चर्चाओं में आए हैं. बीते सप्ताह ही बाबा राजधानी पहुंचकर जल समाधी लेने के लिए भोपाल कलेक्टर को पत्र लिख चुके थे, इसके बाद जैसे-तैसे प्रशासन ने यह मामला शांत कराया था. अब बाबा ने राजधानी के अयोध्यानगर थाने में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है.  उन्होंने नरेन्द्र गिरी के खिलाफ डरा धमकाकर खुदकुशी करने के लिए दबाव बनाने का भी आरोप लगाया है. बाबा वैराग्यानंद की शिकायत पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है. उन्होंने शिकायत में यह कहा है कि नरेन्द्र गिरी उन्हें अलग-अलग नंबरों मोबाइल नंबरों से उन्हें धमका रहे थे. पुलिस ने इस मामले में जांच शुरु कर दी है.

ऊंगली की सर्जरी शिवराज का तंज

आमजन को भी मिले ऐसी सुविधा
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के सरकारी अस्पताल में जाकर इलाज कराने को लेकर भी राजनीति होती रही. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके  स्वस्थ होने की कामना के साथ कटाक्ष भी किया कि वे जल्द ही स्वस्थ हों. वहीं इसका जवाब मुख्यमंत्री कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने आमजन को इलाज के लिए भटकना न पड़े इसके लिए मुख्यमंत्री भी आमजन की तरह ही अपना इलाज शासकीय अस्पताल में करा रहे हैं.
दरअसल मुख्यमंत्री कमलनाथ शुक्रवार की शाम को व्हीआईपी कल्चर को छोड़कर आम आदमी की तरह अपना इलाज कराने राजधानी के शासकीय अस्पताल पहुंचे. यहां उन्हें हाथ की ऊंगली में समस्या के चलते डाक्टरों ने अस्पताल में भर्ती रहकर इलाज कराने की सलाह दी. साथ ही आज शनिवार की सुबह ऊंगली की सर्जरी करने की बात कही. इसी बीच उनके इस तरह के इलाज कराने पर भी राजनीति शुरु हो गई. दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जब इस बात का पता चला कि मुख्यमंत्री इलाज कराने हमीदिया चिकित्सालय गए हैं, तो उन्होंने पहले तो उनके स्वस्थ होने की कामना करते हुए ट्वीटर पर लिखा कि  आपका, हमीदिया में इलाज कराने का फैसला प्रशंसनीय और स्वागतयोग्य है.साथ ही मैं यह चाहता हूं कि आमजन को भी इसी तरह का इलाज मिले, ताकि उन्हें इधर-उधर भटकना न पड़े.
शिवराज सिंह के इस ट्वीट के बाद भला कांग्रेस नेता कैसे जवाब देने से चूक जाते.इस मामले में खुद मुख्यमंत्री की मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा आगे और उन्होंने भी ट्वीट कर कहा कि आप भी (शिवराज सिंह चौहान)  13 साल मुख्यमंत्री रहे हैं. कांग्रेस सरकार आमजन को शासकीय अस्पतालों में भी बेहतर चिकित्सा सुविधा मिले, इसको लेकर वचनबद्ध है. मुख्यमंत्री ने इसीलिए आमजन की तरह ही सामान्य तरीके से भर्ती होकर इलाज कराने का निर्णय लिया है.
सर्जरी में लगे 20 मिनट
मुख्यमंत्री कमलनाथ के दाएं हाथ की अंगुली (अनामिका) में दर्द और जकड़न (ट्रिगर फिंगर) की समस्या के बाद भोपाल के हमीदिया शासकीय अस्पताल में उनका सफल आपरेशन हुआ. मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने बताया सीएम कमलनाथ आज सुबह 8.45 पर भोपाल के हमीदिया शासकीय अस्पताल में अपने दाहिने हाथ की ऊंगली की सर्जरी के लिए भर्ती हुए.  सारी जांचों के बाद सुबह 10 बजे उनका आपरेशन प्रारंभ हुआ, जो करीब 20 मिनट चला. उनका आपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. वे स्वस्थ और ठीक हैं. उनका आपरेशन भोपाल के हमीदिया अस्पताल के डा. संजीव गौर व आदित्य अग्रवाल की टीम ने किया.

हारे बूथों पर ज्यादा सदस्य बनाएगी भाजपा

संगठन मंत्रियों और बड़े नेताओं को मिलेगी जिम्मेदारी


मध्यप्रदेश में भाजपा अब सदस्यता अभियान में ज्यादा से ज्यादा नई पीढ़ी के अलावा समाज के बौद्धिक वर्ग के लोगों को सदस्य बनाने पर जोर देगी. 6 अगस्त से शुरु होने वाले इस अभियान की तैयारियों में प्रदेश संगठन जुट गया है. संगठन ने लोकसभा चुनाव में जिन बूथों पर भाजपा को हार मिली थी, उन बूथों पर अधिक सदस्य बनाने का लक्ष्य तय किया है.
भाजपा द्वारा सदस्यता अभियान की तैयारियां तेज कर दी गई है. इस अभियान में इस बार भाजपा उस वर्ग को टारगेट करेगी जो उसके लिए नए सदस्य कहलाएंगे. इसके चलते नई पीढ़ी याने विद्यार्थियों के अलावा बौद्धिक वर्ग के लोगों को अधिक से अधिक संख्या में पार्टी से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा. बौद्धिक वर्ग में साहित्यकार, कालाकर, पत्रकार, सेवानिवृत्त कर्मचारी-अधिकारी हैं. वहीं नई पीढ़ी को भाजपा से जोड़ने के लिए पार्टी ने तय किया है कि कोचिंग संस्थानों, हास्टलों विशेषकर अजा, अजजा वर्ग के हास्टलों में ज्यादा से ज्यादा संपर्क कर युवाओं को भाजपा का सदस्य बनाया जाए.भाजपा ने शिविर लगाकर सदस्यता अभियान चलाने की तैयारी की है. भाजपा ने तय किया है कि लोकसभा चुनाव में जिन बूथों पर उसे हार का सामना करना पड़ा वहां पर ज्यादा सदस्य बनाए. भाजपा इन बूथों पर 25 नए सदस्य बनाने की लक्ष्य तय करेगी. इन बूथों की जिम्मेदारी भी भाजपा द्वारा संगठन मंत्रियों के अलावा वरिष्ठ पदाधिकारियों को दी जाएगी. इसके अलावा बूथ स्तर पर स्थानीय पदाधिकारियों को सक्रिय किया जाएगा.
 गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में मिली जीत के बाद मध्यप्रदेश भाजपा प्रदेशभर में सदस्यता अभियान की तैयारी कर रही है. इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों और मंडलों से लोगों को भाजपा की सदस्यता दिलाई जाएगी. 
हर वर्ग-हर बूथ पर पहुंचने की तैयारी
भाजपा सदस्यता अभियान के प्रदेश प्रभारी अरविंद भदोरिया ने बताया कि भाजपा इस अभियान के तहत प्रदेश के हर वर्ग और हर बूथ पर पहुंचेगी और नए सदस्यों को भाजपा से जोड़ेगी. उन्होंने बताया कि कल  23 जून को इस संबंध में राजधानी भोपाल में बैठक होगी. भाजपा कार्यालय दीनदयाल परिसर में होने वाली बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, शिवराज सिंह चौहान, राकेश सिंह, कोर ग्रुप,प्रदेश पदाधिकारी, सांसद, जिलाध्यक्ष सहित तमाम भाजपा के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे.

शुक्रवार, 21 जून 2019

शिवम की मौत, पुलिस अधिकारियों को राजभवन बुलाया राज्यपाल ने


राज्यपाल आंनदीबेन पटेल ने पुलिस पिटाई में हुई शिवम की मौत मामले में पुलिस अधिकारियों को राजभवन बुलाया है. राज्यपाल को आज पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ शिवम के माता-पिता ने राजभवन पहुंचकर घटना की सीबीआई जांच की मांग की थी. 
राजधानी में आज भारत माता चौराहे पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शिवम के परिजनों के साथ धरना दिया. धरने के बाद  शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित परिवार के साथ राजभवन पहुंचकर  राज्यपाल  आनंदीबेन पटेल से मिले. राज्यपाल ने शिवम के परिजनों से पूरी घटना की जानकारी ली. परिवारजनों ने घटना से जुड़े फोटो और वीडियो राज्यपाल को दिखाए. मृतक शिवम के मित्र गोविन्द ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पूरा घटनाक्रम बताया. शिवम के पिता ने राज्यपाल को सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा, जिस पर राज्यपाल ने घटना का संज्ञान लेते हुए संबंधी पुलिस अधिकारियों को शनिवार को राजभवन बुलाने के निर्देश दिए. उन्होंने परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया. 
राजनीति कर रहे शिवराज
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शिवम मिश्रा की मौत पर सीबीआई जांच की मांग किए जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगाया कि वे शिवम की मौत पर राजनीति कर रहे हैं. उन्होंने इसे शर्मनाक बताया. उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भी 284 कस्टोडिएल डेथ हुई थी, तब उन्होंने इतनी संवेदनशीलता क्यो नहीं दिखाई. वे अब केवल सियासत की रोटी सेंक रहे हैं.

कमलनाथ ने संकीर्ण मानसिकता का दिया परिचय


अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कमलनाथ के हिस्सा न लेने पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन पर तंज कसा है. बाद में कमलनाथ ने अपने निवास पर योग करते हुए फोटो मीडिया में जारी किया.
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंहचौहान ने कहा कि कमलनाथ ने संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया है.  शिवराज ने कहा कि कमलनाथ योग को हिंदुत्व या संकीर्ण न मानें. इसके माध्यम से वह प्रदेश के बच्चों और राज्य की जनता को स्वस्थ रहने की प्रेरणा दे सकते थे. प्रदेश के मुखिया का काम केवल शासन-प्रशासन का संचालन करना नहीं, दिशा देना भी है. उन्होंने योग नहीं करके संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया.  
राज्यपाल ने कहा योग करने का अपना-अपना तरीका
 राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि योग करने का सबका अपना-अपना तरीका है. मुख्यमंत्री योग करें ना करें जनता तो कर रही है. जनता योग से जुड़ रही है और जब जनता जुड़ती है तो सबको जुड़ना पड़ता है. राज्यपाल  ने अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों का भी उदाहरण दिया था. उन्होंने कहा था, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फणनवीस, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबने योग किया. मैंने भी गुजरात की मुख्यमंत्री रहते हमेशा योग किया. उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में सबके सामने योग करते नजर आते हैं.
कमलनाथ ने घर में किया योग, जारी की तस्वीर

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ के शासकीय कार्यक्रम में नहीं जाने को लेकर जब विवाद उठा और भाजपा ने इसे लेकर बयानबाजी तेज की तो मुख्यमंत्री निवास से मुख्यमंत्री का योग करते हुए एक फोटो जारी किया गया. मुख्यमंत्री निवास से मुख्यमंत्री कमलनाथ की तस्वीर जारी हुई जिसमें वो योगासन में बैठे दिखाए दे रहे हैं. बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने सरकारी घर मुख्यमंत्री निवास में ही योग किया. मुख्यमंत्री कमलनाथ कार्यक्रम में भले ही नहीं पहुंचे, मगर उन्होंने ट्वीट के जरिए लोगों को योग करने की सलाह जरुर दी. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि अंरराष्ट्रीय योग दिवस पर सभी को शुभाकामनाएं. योग करें-स्वस्थ रहें. योग प्रतिदिन की दिनचर्या में शामिल करें.

मोदी का चित्र न लगाने से उनका नहीं राज्य का बिगड़ेगा


राजधानी में अंतरराष्ट्रीय दिवस पर आयोजित शासकीय योग शिविर में प्रधानमंत्री की तस्वीर न लगी देख भोपाल नगर निगम के महापौर नाराज हो गए. उन्होंने इस पर आपत्ति जताई.
राजधानी के लाल परेड मैदान पर आयोजित योग कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का फोटो न लगाए जाने को लेकर महापौर आलोक शर्मा खफा हो गए. उन्होंने इस पर आपत्ति जताई. शर्मा ने कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री कार्यक्रम में नहीं आए, लेकिन उनकी बड़ी-बड़ी तस्वीर पोस्टर में थी, पर प्रधानमंत्री की तस्वीर नहीं लगाई गई. जब निगम के कार्यक्रम में आप प्रोटोकाल का हवाला देकर मुख्यमंत्री की फोटो छपवाते हो तो मैं मानता हूं. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की फोटो न होना प्रोटोकाल का उल्लंघन है.  मामले को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभूराम चौधरी ने कहा कि हम फोटो की राजनीति नहीं करते. कभी फोटो लगती है कभी छूट जाती है, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है.
मोदी का नहीं राज्य का बिगड़ेगा
राजधानी में लाल परेड मैदान पर आयोजित शासकीय कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के न पहुंचने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि योग में किसी राजनीतिक दल को स्थान देना ठीक नहीं है. विपक्ष को यह समझना चाहिए कि प्रधानमंत्री किसी दल के नहीं, देश के होते हैं. मोदीजी का चित्र न लगाने से उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा, बिगड़ेगा तो राज्य का.  

शिवम को न्याय दिलाने धरने पर बैठे शिवराज

राजधानी के बैरागढ़ में पुलिस की पिटाई और हिरासत में हुई मौत के बाद उनके परिजन को न्याय की मांग को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह धरने पर बैठ गए.  धरने पर उनके साथ उनकी पत्नी साधना सिंह भी मौजूद हैं. शिवम के पिता सुरेश मिश्रा और उनके परिवार के लोग भी धरने में शामिल हुए हैं.
राजधानी के भारत माता चौराहे पर यह धरना दिया गया. धरने को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि भाजपा की मांग है कि शिवम की मौत मामले में सीबीआई जांच होनी चहिए. इसके साथ ही परिवार के सदस्य को नौकरी की मांग की है, और आरोपी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग है.  उन्होंने कहा कि शिवम के परिजनों को न्याय नहीं मिला तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे. उन्होंने कहा कि हमने एक सप्ताह की मोहलत सरकार को दी है. उन्होंने कहा कि हमने कहा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ पीड़ित परिवार से मिले और उन्हें न्याय दें. 
धरने पर शिवम की बहन और शिवम का घायल दोस्त गोविंद शर्मा भी बैठा था. वहीं छोला क्षेत्र  में एक दिन पहले पुलिस पिटाई से घायल हुए शिवराज सिंह राजपूत भी बैठा था. वह भी घायल है. शिवम के पजिरनों ने कहा कि जब तक सरकार सीबीआई जांच की घोषणा नहीं करती है, तब तक वे शिवम का अस्थि विसर्जन नहीं करेंगे. धरने पर बैठी शिवम की बहन अचानक बेहोश हो गई थी, जिसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अस्पताल पहुंचाया. 
न्यायिक जांच  की प्रक्रिया शुरु
 बैरागढ़ थाना अंतर्गत कथित रूप से पुलिस की पिटाई से हुई युवक की मौत की परिस्थितियों और सम्पूर्ण घटनाक्रम की न्यायिक जांच की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है. डाक्टर्स द्वारा मृतक  शिवम मिश्रा के परिजनों की मौजूदगी में किए गए पोस्टमार्टम में 18-19 जून की दरम्यानी रात शिवम की मृत्यु हार्ट अटैक से होने की प्रारंभिक रिपोर्ट आई है.  मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस घटना को गंभीरता से लिया है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्काल 5 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर प्रकरण की न्यायिक जांच के आदेश जारी किए गए.  

पराजित योद्धा जैसा व्यवहार न करें मंत्री

मध्यप्रदेश में तमाशा बन गई कैबिनेट: शिवराज
मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार के मंत्रियों के टकराव के बाद भाजपा ने जहां सरकार पर कटाक्ष किया है. वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब मोर्चा संभालकर मंत्रियों को सीख दे रहे हैं. पूर्व सांसद ने तो मंत्रियों को सलाह दी कि वे पराजित योद्धा जैसा व्यवहार न करें. वहीं  पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में कैबिनेट तमाशा बन गई है. 
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार पर हमला बोला और कहा कि कमलनाथ सरकार में बेकसूर लोगों की पिटाई की जा रही है और लोगों से पैसा वसूली की जा रही है. इसके साथ ही कहा कि रेत का अवैध खनन हो रहा है. सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के सामने मंत्री लड़ रहे हैं, अफसर घबरा जाते हैं. अलग अलग गुटों के मंत्री अलग अलग बैठकें कर रहे हैं. वहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि  मध्यप्रदेश में कबीलाई संस्कृति स्थापित हो गयी है. सरकार में ढ़ाई लोगों का कबीला बन गई है. कांग्रेस के छत्रप अपने-अपने कोटे से मंत्री बना कर अब सरकार में अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे है.  भार्गव ने कहा कि मैं शुरू से ही यह कहता आया हूं कि यह सरकार लंगड़ी सरकार है. जनसमर्थन के बजाय यह सरकार गुटों के गठजोड़ से बनी सरकार है. जो ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है. 
पराजित योद्धा जैसा व्यवहार न करें मंत्री
मंत्रियों के इस विवाद से पार्टी और सरकार की छवि बिगड़ती देख वरिष्ठ नेता भी सक्रिय हो गए हैं.  मंत्रियों के विवाद पर प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया पूरी तरह से नजर रखे हुए हैं. बावरिया मीडिया में तो कुछ नहीं कह रहे हैं, मगर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में वे लगातार बने हुए हैं. वहीं पूर्व सांसद प्रभातभानु शर्मा ने भी इस मामले में मंत्रियों को समझाइश दी है. उन्होंने मंत्रियों से कहा कि आप युद्ध में जीते योद्धा हैं, पराजित योद्धा जैसा व्यववहार ना करें. मुख्यमंत्री कमलनाथ के व्यक्तित्व और अनुकूल आचरण को देखते हुए यह न भूलें कि आप सरकार में हैं और हमें आमजन व कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाओं का आदर करना होगा.
15 साल संघर्ष को आघात न पहुंचाएं
मंत्रियों के विवाद को लेकर  नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मंत्रियों को सलाह दी है कि वे यह न भूलें कि सरकार हमारी है. अपने आचरण से आमजन के विश्वास और कार्यकर्ताओं के संघर्ष को आघात न पहुंचाएं. पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 15 साल संघर्ष कर के पार्टी के झंडे को ऊंचा रखा. हमारी बातों, आचरण, व्यवहार से अगर पार्टी कमजोर होती है और हमारा जनाधार कम होता है तो हम सच्चे कांग्रेसजन नहीं हैं. इस तरह के विवाद से निश्चित तौर पर कार्यकर्ताओं और जिस जनता ने उन्हें जनादेश दिया है उसे कष्ट पहुंचा है.

गुरुवार, 20 जून 2019

फिर राजपूत के यहां जुटे सिंधिया समर्थक मंत्री

 कैबिनेट में मुख्यमंत्री से बहस के बाद विभाग बदले जाने की अटकलें

प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ केबिनेट बैठक में खाद्य मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर की हुई बहस के बाद आज फिर सिंधिया समर्थक मंत्री परिवहन मंत्री गोविंद राजपूत के निवास पर एकत्रित हुए. गोविंद राजपूत ने इस सामान्य मुलाकात बताया है. वैसे माना जा रहा है कि केबिनेट बैठक में हुई बहस के बाद मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जा सकता है.
मुख्यमंत्री कलमनाथ और खाद्य मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर के बीच बुधवार को केबिनेट बैठक में हुआ विवाद गहराता जा रहा है. सूत्रों की माने तो कमलनाथ अब सिंधिया समर्थक मंत्रियों के विभागों में परिवर्तन कर सकते हैं. इस बात की जानकारी मिलते ही परिवहन मंत्री गोविंद राजपूत के निवास पर स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट और स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी सुबह-सुबह पहुंचे. वैसे पांच मंत्रियों के राजपूत के निवास पर पहुंचने की बात कही जा रही है. इस मुलाकात को गोविंद राजपूत ने सामान्य शिष्टाचार मुलाकात बताया है. हालांकि केबिनेट में हुई बहस से इसे जोड़कर देखा जा रहा है.
यहां उल्लेखनीय है कि मंत्रिमंडल विस्तार की जब अटकलें तेज हुई तो 13 जून को सिंधिया समर्थक मंत्रियों ने दिल्ली में बैठक की थी. इसके बाद चार दिन पहले राजधानी भोपाल में ये सभी मंत्री श्रम मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया के निवास पर एकत्रित हुए थे. इसके बाद बुधवार को कैबिनेट में खाद्य मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने अपनी नाराजगी दिखा दी थी. 
हम मंत्री आपस में मिलते रहे हैं : चौधरी
स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी ने राजस्व मंत्री गोविंद राजपूत के निवास पर हुई मुलाकात को लेकर कहा कि इसे केबिनेट में हुई बहस से नहीं जोड़ना चाहिए. हम मंत्री आपस में मिलते रहते हैं. बहस को लेकर उन्होंने कहा कि मंत्री अपनी बात मुख्यमंत्री के सामने रखते हैं, इसमें कोई विवाद की बात नहीं है.

पोस्टर, होर्डिंग और बैनरों पर नहीं लगेंगे अधिकारियों के फोटो


मुख्यमंत्री कन्यादान योजना सहित अन्य शासकीय कार्यक्रमों के लिए जारी किए जाने वाले विज्ञापनों में अब शासकीय अधिकारियों के फोटो नहीं लगाए जाएंगे. इस आशय के निर्देश नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने जारी किए हैं. जनप्रतिनिधियों की शिकायत के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है.
नगरीय निकाय विभाग द्वारा सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषदों के अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए है. राज्य शासन की जानकारी में आया था कि सरकारी योजनाओं, कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार के लिए जो पोस्टर, बैनर और होर्डिंग लगाए जाते है, उनमें अधिकारियों द्वारा स्वयं की फोटो लगाई जाती है. नगरीय प्रशासन विभाग ने इसे अनुचित माना है. निकायों में चुनकर आए नेताओं ने भी इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी कि अधिकारी किसी भी योजना के क्रियांवयन का श्रेय स्वयं ले लेते है.
उल्लेखनीय है कि कई बार तो जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर अधिकारियों के फोटो लगाए जाते है, इसलिए जनप्रतिनिधियों की आपत्ति के बाद अब राज्य शासन ने सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में सरकारी अधिकारियों के फोटो लगाए जाने पर रोक लगा दी है. इससे अब जनप्रतिनिधियों के फोटो नजर आएंगे तो उन्हें योजनाओं को शुरू करने का श्रेय मिलेगा और आने वाले चुनावों में उन्हें इसका लाभ भी मिलेगा.

शिवराज ने जल्लाद और नरपिशाचों से की पुलिसकर्मियों की तुलना

 शिवम के परिजनों से की मुलाकात, कहा सरकार कराए सीबीआई जांच
राजधानी के उपनगर बैरागढ़ में युवक शिवम मिश्रा की पुलिस पिटाई से हुई मौत के मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज पुलिस और राज्य की कमलनाथ सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने पुलिस की तुलना जल्लाद और नरपिशाच से कर दी और कहा कि कमलनाथ सरकार को इस मामले की जांच सीबीआई से करानी चाहिए. इसके अलावा उन्होंने शिवम की बहन को नौकरी देने की भी मांग की.
राजधानी के बैरागढ़ में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को बीआरटीएस कारिडोर में कार टकराने के बाद शिवम मिश्रा और गोविंद शर्मा नामक युवकों की पुलिस पिटाई मामले में शिवम की मौत होने का मामला गर्मा गया है. इस मामले मेंं भोपाल आईजी पांच पुलिस कर्मियों को निलंबित कर चुके हैं. वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ भी आश्वस्त कर चुके हैं कि जांच निष्पक्ष कराई जाएगी. जबकि गृह मंत्री बाला बच्चन ने न्यायायिक जांच के आदेश दे दिए हैं. वहीं आज पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता एवं भाजपा नेताओं के साथ शिवम के परिजनों से मुलाकात करने उनके घर पहुंचे. उन्होंने परिजनों को आश्वस्त किया कि वे उनके साथ हैं और शिवम मामले में न्याय दिलाकर रहेंगे. उन्होंने इस घटना को लेकर पुलिस के कामकाज पर सवाल भी उठाए और सरकार ने पूरी घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की. पूर्व मुख्यमंत्री ने शिवम की बहन सृष्टि को नौकरी देने की मांग भी कमलनाथ सरकार से की. 
 इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने घटना में शामिल होने वाले पुलिस कर्मियों की तुलना जल्लाद और नरपिशाच से की. उन्होंने कहा कि आज मैं शिवम के दिव्यांग माता-पिता से मिला. दिव्यांग माता-पिता के इकलौते बेटे को नरपिशाचों ने मार डाला यह कोई साधारण घटना नहीं है, यह असाधारण अपराध है. दोषियों को सजा मिलनी चाहिए.
ये शिवराज के भर्ती किए पुलिसकर्मी हैं: शर्मा

शिवम की मौत मामले को लेकर  पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा आज राज्य के जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा भी शिवम के परिजनों से मिलने पहुंचे. उन्होंने शिवम के परिजनों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया साथ ही यह आश्वस्त किया कि सरकार दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएगी. शर्मा ने इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर राजनीति करने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों पर इस घटना में आरोप लग रहे हैं, वे शिवराज सरकार के भर्ती किए हुए पुलिसकर्मी हैं.
अब पुलिस पहले ले जाएगी अस्पताल
बीआरटीएस में शिवम मिश्रा की कार के हादसे व बाद में थाने में  पिटाई की घटना से सबक लेते हुए पुलिस ने अब इस तरह के मामलों में नई गाइड लाइन जारी कर दी है. जारी की गाइड लाइन के तहत अब अब अगर कोई व्यक्ति नशे की हालत में सड़क हादसे का शिकार होता है तो उसे डायल-100 के बजाए 108 एंबुलेंस की जरिए अस्पताल पहुंचाया जाएगा. उसे थाने ले जाने के बजाए सीधे इलाज के लिए ले जाया जाएगा. अस्पताल में ही पुलिस अपनी कार्रवाई करेगी. इसके पहले पुलिस घायल के परिजनों को तुरंत ही सूचना देगी. परिजनों के आने पर जरूरी कार्रवाई की जाएगी. जो भी घायल नशे की हालत में पाया जाएगा उसे थाने नहीं लाया जाएगा. बैरागढ़ कारिडोर में घटित इस घटना के बाद यह बात सामने आई थी कि अगर पुलिस शिवम व उसके दोस्त को थाने ले जाने के बजाए सीधे अस्पताल में भर्ती करा देती तो शिवम की जान को बचाया जा सकता था. पुलिस चार घंटे तक शिवम को अस्पताल व थाने के बीच घुमाती रही जिसके कारण शिवम की तबीयत बिगड़ी और उसने दम तोड़ दिया.
हट सकता है बीआरटीएस कारिडोर
राज्य सरकार जल्द ही बीआरटीएस कारिडोर को हटा सकती है. इस आशय के संकेत आज नगरीय प्रशासन विभाग के मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने दिए है. सिंह पहले भी इस कारिडोर को हटाने की मांग कर चुके थे. उन्होंने बैरागढ़ के व्यापारियों की मांग पर अपनी सहमति जताई थी. कारिडोर को हटाने के लिए दिल्ली से सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीटयूट की टीम निरीक्षण करने के लिए 25 जून को भोपाल आएगी. यह टीम अपनी रिपोर्ट जुलाई माह में देगी. इसके बाद सरकार इस पर फैसला लेगी. दिल्ली का कारिडोर भी इस सेंटर द्वारा कराई जांच के बाद तोड़ा गया था. राजधानी में बने इस 23 किलोमीटर लंबे कारिडोर के बनने के बाद से अब तक सौ से ज्यादा जाने जा चुकी हैं. इसे लेकर बैरागढ़ के व्यापारियों ने भी मांग की थी. व्यापारियों की इस  मांग पर मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि वे यह कारिडोर हटवाने का प्रयास करेंगे. 
कारिडोर में नहीं लगे हैं गेट
राजधानी में बस रैपिट ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) रुट पर लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं. दुर्घटना की वजह बीआरटीएस रुट के कट प्वाइंट पर सभी जगह गेट नहीं लगाए जाने को बताया जा रहा है. सीहोर नाका से मिसरोद तक 24 किलोमीटर लंबे बीआरटीएस कारीडोर में 54 कट प्वाइंट हैं. गेट नहीं होने के कारण वाहन चालक अनजाने में कारीडोर के अंदर घुस जाते हैं, यहां वाहन की रफ्तार ज्यादा होने से वाहन चालक वाहन पर नियंत्रण खोकर दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं. यही नहीं यदि दूसरी तरह से अचानक वाहन आ जाए तो दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है. मंगलवार-बुधवार रात 12.15 बजे बैरागढ़ में कारीडोर में कार घुस गई और दुर्घटना का शिकार हो गई. बताया जा रहा है कि यहां पर गेट नहीं लगाए गए थे.
नरसिंहपुर भी जाना चाहिए शिवराज को
मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर कटाक्ष किया कि उन्हें नरसिंहपुर भी जाना चाहिए. सलूजा ने ट्वीट करते हुए कहा कि चौहान शिवम मिश्रा के यहां संवेदना व्यक्त करने गए, ठीक है. इस मामले में सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन आपको नरसिंहपुर भी जाना चाहिए, जहां आपकी पार्टी के केन्द्रीय मंत्री के पुत्र और भतीजे ने खुलआम गोलियां चलाकर लोगों की जान लेने का प्रयास किया है.