खुद की जमीन पर लगे पेड़ काटने की परेशानी को दूर करने की कर रहे कोशिशराजस्व मंत्री गोविंद राजपूत ने कहा कि प्रदेश में राजस्व प्रकरण निपटने में तेजी लाने के लिए जल्द ही पटवारियों की भर्ती की जाएगी. उन्होंने बताया कि पटवारियों को ई-बस्ता के रुप में लैपटाप भी दिया जाएगा.
राजस्व विभाग के फैसलों की जानकारी देते हुए मंत्री राजपूत ने कहा कि प्रत्येक हलके पर हमारा पटवारी हो ये हमारी कोशिश है. पहले मध्यप्रदेश में 8400 पटवारियों की भर्ती हुई थी अब हम आगे और पटवारियों की भर्ती करेंगे. मंत्री ने लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में बताया कि अब प्रदेश में बिना खसरे के भी एंट्री होगी. निजी एजेंसियों की मदद से सीमाकंन किया जाएगा. डायवर्सन का काम फ्री में किया जाएगा. एक ही आवदेन में रजिस्ट्री के बाद नामांतरण और बंटवारा हो जाएगा. खुद की जमीन पर लगे पेड़ को काटने में हो रही असुविधा को कम करने की कोशिश हमने की है.
मंत्री ने यह भी बताया कि अब प्राकृतिक आपदा से होने वाली हानि का न्यूनतम मुआवजा 5 हजार मिलेगा. प्रदेश भर में पटवारियों को ई-बस्ता के रूप में लैपटाप दिया जाएगा. इसके लिए 2 जिलों को चिन्हित किया जाएगा. सागर और छिंदवाड़ा से इसकी शुरूआत हो सकती है. समीक्षा बैठक हर जिले की होगी, जो संभाग स्तर पर होगी. साथ ही पटवारियों को लैपटाप चलाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.
मंत्री राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश में पटवारियों के लिए नए नियम भी बनाए जाएंगे. पटवारियों को अपने हल्के में बैठना होगा. पटवारी यदि अपने हल्के में सप्ताह में दो दिन नहीं बैंठेंगे तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि राजस्व कोर्ट के आदेश के क्रियांवयन के बिना प्रकरण रिकॉर्ड दाखिल नहीं होंगे. सीमांकन सीमा चिन्हों को निर्मित करने के लिए अब निजी एजेंसी को सेवा ली जाएगी. भू स्वामी धारा 59 की कार्यवाही के बाद डायवर्सन की आवश्यकता नहीं होगी. आरबीसी 6-4 मे मुआवजा राशि में संशोधन कर न्यूनतम राशि 5 हजार से कम नहीं दिया जाएगा. राजस्व मंत्री ने बताया कि भोपाल में भेल की 1 हजार एकड़ जमीन को वापस लेकर उसका उपयोग किया जाएगा. इस मामले में भारी उद्योग मंत्रालय को पत्र लिखकर संबंधित विभाग के मंत्री से मुलाकात भी की जाएगी. परिवहन विभाग की लाइसेंस प्रक्रिया को सरलीकरण किया जा रहा है.
25 हजार छात्राओंं को देंगे फ्री लायसेंस
मंत्री ने बताया कि 25 हजार छात्राओं को फ्री लाइसेंस दिया है. ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रेक पीपीपी माडल के आधार पर संभाग वाइस तैयार करने जा रहे हैं. प्रदेश के लोक परिवहन के लिए जीपीएस आधारित कंट्रोल कम कमांड सेंटर तैयार किए जाएंगे. प्रदेश में प्रदूषण जांच की व्यवस्था को आनलाइन किया जाएगा. उन्होंने बताया कि सभी जिला मुख्यालय से राजधानी और पर्यटन के शहरों तक एसी बसों का संचालन होगा.
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