मंगलवार, 18 जून 2019

सरपंचों को पत्र, मोदी का राजनीतिक हथकंडा


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जल संरक्षण को लेकर सरपंचों को लिखे पत्र को प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने महज एक राजनीतिक हथकंडा बताया है. सिंह का कहना है कि मोदी 12 साल गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और वहां आज भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां लोगों को पीने के लिए पानी उपलब्ध नहीं हैं.
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हाल ही में एक रिर्पोट सामने आई है जिसमें अमीरगढ़, पालनपुर सहित कई हिस्से ऐसे है, जहां  पीने के लिए पानी नहीं है सिंचाई तो दूर की बात है. यह हालात सिर्फ इस वर्ष नहीं बल्कि पिछले कई वर्षों  से गुजरात के अनेक हिस्सों में बने हुए है.  सिंह ने कहा कि गुजरात के पालनपुर जिले में पिछले वर्ष और इस वर्ष कोई फसल नहीं हुई. वहां न तो सिंचाई के साथ-साथ मनुष्य और जानवरों के लिए पीने का पानी भी नहीं है. गुजरात में ग्रामीण क्षेत्रों में लोग खुद ही कुंआ खोद रहे हैं, क्योंकि उन्हें सरकार पर भरोसा नहीं है. 
 सिंह ने कहा कि गुजरात में लंबे समय से भाजपा सरकार है, फिर भी प्रधानमंत्री मोदी आज तक वहां जल संरक्षण और पानी की उपलब्धता की दिशा में कुछ नहीं कर पाए. देश के लोगों को गुजरात माडल के नाम पर झूठ परोसा है.  सिंह ने कहा कि सरपंचों को जल संरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा लिखे गए पत्र का इसलिए भी कोई मतलब नहीं है क्योंकि वे अपने पत्र में जून माह में जल संरक्षण के लिए खेतों की मेड़ बंधी, नदियों और धाराओं में चेक डेम का निर्माण, तट बंदी, तालाबों की खुदाई एवं सफाई की जो बात कह रहे हैं वास्तव में यह काम तो वर्षा ऋतु के डेढ़ दो महीने पहले किए जाते हैं. अब जब देश के कई हिस्सों में मानसून आ गया है तब प्रधानमंत्री की इस नसीहत का कोई मायने नहीं रह जाता है.

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