राजस्व अधिकारी संघ हुआ खफा, हड़ताल की दी चेतावनी
मध्यप्रदेश के राजस्व मंत्री डायस पर पहुंचे और तहसीलदार की कुर्सी पर बैठ गए. मामले को लेकर राजस्व अधिकारी संघ खफा हो गया और मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. संघ ने मंत्री के इस व्यवहार को अदालत का अपमान बताया और हड़ताल तक की चेतावनी दे दी. बाद में मामले ने जब तूल पकड़ा तो मंत्री ने सफाई दी और कहा कि वे तहसीलदार की कुर्सी पर नहीं बैठे, बल्कि कम्प्यूटर वाले की कुर्सी पर बैठे थे. वे किसी से मिलने भी जाते हैं, तो उसकी कुर्सी पर कभी नहीं बैठते.
दरअसल राज्य के राजस्व मंत्री गोविंद राजपूत ने राजधानी भोपाल से सटे जिले सीहोर मुख्यालय पहुंचकर तहसील कार्यालय का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान वे तहसीलदार के डायस पर पहुंचे और कुर्सी पर बैठ गए. मंत्री ने राजस्व मामलों से संबंधित फाईलें भी देखी और उनका स्पाट मूल्यांकन भी किया. काम में लापरवाही को देखते हुए उन्होंने तहसीलदार विनोद कुशवाह को निलंबित कर दिया.
जांच के दौरान मंत्री तहसील कार्यालय में संधारित की जा रही पंजियों, सूचना का अधिकार, लोक सेवा गारंटी, दायरा पंजी एवं शिकायत पंजी का निरीक्षण किया. इस दौरान नामांतरण के 595 प्रकरणों में से 224 प्रकरण लंबित पाए गए. मात्र 371 प्रकरणों का ही निपटारा किया गया. शिकायत पंजी भी संधारित नहीं पाई गई. सूचना के अधिकार के तहत वर्ष 2018 में कोई शिकायत दर्ज नहीं पाई गई. जांच में आरआरसी (शासकीय राशि की वसूली) पंजी बी-4 का संधारण नहीं किया गया. भूमि संबंधी प्रकरणों की पंजी बी-4 पर कलेक्टर का अनुमोदन नहीं मिला. सीमांकन के 191 प्रकरण लंबित पाए गए. अतिक्रमण के 17 प्रकरणों में से मात्र 4 प्रकरणों का ही निपटारा किया गया. शेष 13 प्रकरणों पर कोई कार्यवाही की गई. एक साल से अधिक समय से नामांकन के 6 प्रकरण लंबित पाए गए. इन सब को कार्य में लापरवाही पाते हुए मंत्री ने तहसीलदार के निलंबन के निर्देश दिए.
मंत्री के द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद राजस्व अधिकारी संघ खफा हो गया है. संघ ने हड़ताल की चेतावनी दी है. राजस्व अधिकारी संघ ने निलंबन की कार्रवाई को एक तरफा बताया है. संघ का यह भी कहना है कि मंत्री राजपूत डायस पर पहुंच कुर्सी पर बैठे थे. तहसील आफिस न्यायालय व्यवस्था का हिस्सा होता है. मंत्री के आचरण से न्यायालय के काम में बाधा पहुंची.
विवाद बढ़ा तो मंत्री ने दी सफाई
राजस्व अधिकारी संघ द्वारा जब मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोला और हड़ताल की चेतावनी दी गई, तो मंत्री गोविंद राजपूत ने इस मामले को लेकर सफाई दी. उन्होंने कहा कि वे तहसीलदार की कुर्सी पर नहीं बैठे थे, बल्कि कम्प्यूटर वाले की कुर्सी पर बैठे थे. उन्होंने कहा कि मैं अगर किसी से मिलने भी जाता हूं तो इस बात का ध्यान रखता हूं, कभी भी उसकी कुर्सी पर नहीं बैठता. मंत्री ने कहा कि तहसील कार्यालय में किसानों के काम न होने की शिकायतें मिल रही थी, इसे देखते हुए वे औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे.
कलेक्टर ने कहा मैं नहीं दे सकता निलंबन के आदेश
राजस्व मंत्री गोविंद राजपूत ने सीहोर कलेक्टर अजय गुप्ता को तहसीलदार के निलंबन के आदेश दिए थे, मगर कलेक्टर ने साफ मना कर दिया कि वे तहसीलदार के निलंबन के आदेश नहीं दे सकते. उन्होंने कहा कि तहसीलदार को निलंबित करने अधिकार शासन को है. अगर राजस्व मंत्री को तहसीलदार को निलंबित करना है तो वे प्रमुख सचिव को राजस्व को कार्यवाही के लिए लिख सकते हैं.
प्रभारी मंत्री को सौंपा ज्ञापन
राजधानी में सीहोर जिले के प्रभारी मंत्री आरिफ अकील को ज्ञापन सौंंंपा. ज्ञापन में कहा गया कि 25 जून को राजस्व मंत्री द्वारा अपने सहयोगियों के साथ तहसील सीहोर में तहसीलदार न्यायालय का औचक निरक्षण किया. निरीक्षण के दौरान मंत्री राजपूत न्यायालय की गरिमा के विपरीत तहसीलदार न्यायालय के डायस पर स्वत: बैठ गए एवं अन्य अनाधिकृत, गैर न्यायायिक अधिकारी एवं अन्य व्यक्ति भी न्यायालय के डायस पर बैठकर राजस्व न्यायालय की गरिमा को आहत किया है. सार्वजनिक तौर पर राजस्व मंत्री ने तहसीलदार पद को भ्रष्ट कहा. यह तहसीलदार संस्था के सम्मान, स्वाभिमान और गरिमा पर गंभीर आघात है.
मध्यप्रदेश के राजस्व मंत्री डायस पर पहुंचे और तहसीलदार की कुर्सी पर बैठ गए. मामले को लेकर राजस्व अधिकारी संघ खफा हो गया और मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. संघ ने मंत्री के इस व्यवहार को अदालत का अपमान बताया और हड़ताल तक की चेतावनी दे दी. बाद में मामले ने जब तूल पकड़ा तो मंत्री ने सफाई दी और कहा कि वे तहसीलदार की कुर्सी पर नहीं बैठे, बल्कि कम्प्यूटर वाले की कुर्सी पर बैठे थे. वे किसी से मिलने भी जाते हैं, तो उसकी कुर्सी पर कभी नहीं बैठते.
दरअसल राज्य के राजस्व मंत्री गोविंद राजपूत ने राजधानी भोपाल से सटे जिले सीहोर मुख्यालय पहुंचकर तहसील कार्यालय का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान वे तहसीलदार के डायस पर पहुंचे और कुर्सी पर बैठ गए. मंत्री ने राजस्व मामलों से संबंधित फाईलें भी देखी और उनका स्पाट मूल्यांकन भी किया. काम में लापरवाही को देखते हुए उन्होंने तहसीलदार विनोद कुशवाह को निलंबित कर दिया.
जांच के दौरान मंत्री तहसील कार्यालय में संधारित की जा रही पंजियों, सूचना का अधिकार, लोक सेवा गारंटी, दायरा पंजी एवं शिकायत पंजी का निरीक्षण किया. इस दौरान नामांतरण के 595 प्रकरणों में से 224 प्रकरण लंबित पाए गए. मात्र 371 प्रकरणों का ही निपटारा किया गया. शिकायत पंजी भी संधारित नहीं पाई गई. सूचना के अधिकार के तहत वर्ष 2018 में कोई शिकायत दर्ज नहीं पाई गई. जांच में आरआरसी (शासकीय राशि की वसूली) पंजी बी-4 का संधारण नहीं किया गया. भूमि संबंधी प्रकरणों की पंजी बी-4 पर कलेक्टर का अनुमोदन नहीं मिला. सीमांकन के 191 प्रकरण लंबित पाए गए. अतिक्रमण के 17 प्रकरणों में से मात्र 4 प्रकरणों का ही निपटारा किया गया. शेष 13 प्रकरणों पर कोई कार्यवाही की गई. एक साल से अधिक समय से नामांकन के 6 प्रकरण लंबित पाए गए. इन सब को कार्य में लापरवाही पाते हुए मंत्री ने तहसीलदार के निलंबन के निर्देश दिए.
मंत्री के द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद राजस्व अधिकारी संघ खफा हो गया है. संघ ने हड़ताल की चेतावनी दी है. राजस्व अधिकारी संघ ने निलंबन की कार्रवाई को एक तरफा बताया है. संघ का यह भी कहना है कि मंत्री राजपूत डायस पर पहुंच कुर्सी पर बैठे थे. तहसील आफिस न्यायालय व्यवस्था का हिस्सा होता है. मंत्री के आचरण से न्यायालय के काम में बाधा पहुंची.
विवाद बढ़ा तो मंत्री ने दी सफाई
राजस्व अधिकारी संघ द्वारा जब मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोला और हड़ताल की चेतावनी दी गई, तो मंत्री गोविंद राजपूत ने इस मामले को लेकर सफाई दी. उन्होंने कहा कि वे तहसीलदार की कुर्सी पर नहीं बैठे थे, बल्कि कम्प्यूटर वाले की कुर्सी पर बैठे थे. उन्होंने कहा कि मैं अगर किसी से मिलने भी जाता हूं तो इस बात का ध्यान रखता हूं, कभी भी उसकी कुर्सी पर नहीं बैठता. मंत्री ने कहा कि तहसील कार्यालय में किसानों के काम न होने की शिकायतें मिल रही थी, इसे देखते हुए वे औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे.
कलेक्टर ने कहा मैं नहीं दे सकता निलंबन के आदेश
राजस्व मंत्री गोविंद राजपूत ने सीहोर कलेक्टर अजय गुप्ता को तहसीलदार के निलंबन के आदेश दिए थे, मगर कलेक्टर ने साफ मना कर दिया कि वे तहसीलदार के निलंबन के आदेश नहीं दे सकते. उन्होंने कहा कि तहसीलदार को निलंबित करने अधिकार शासन को है. अगर राजस्व मंत्री को तहसीलदार को निलंबित करना है तो वे प्रमुख सचिव को राजस्व को कार्यवाही के लिए लिख सकते हैं.
प्रभारी मंत्री को सौंपा ज्ञापन
राजधानी में सीहोर जिले के प्रभारी मंत्री आरिफ अकील को ज्ञापन सौंंंपा. ज्ञापन में कहा गया कि 25 जून को राजस्व मंत्री द्वारा अपने सहयोगियों के साथ तहसील सीहोर में तहसीलदार न्यायालय का औचक निरक्षण किया. निरीक्षण के दौरान मंत्री राजपूत न्यायालय की गरिमा के विपरीत तहसीलदार न्यायालय के डायस पर स्वत: बैठ गए एवं अन्य अनाधिकृत, गैर न्यायायिक अधिकारी एवं अन्य व्यक्ति भी न्यायालय के डायस पर बैठकर राजस्व न्यायालय की गरिमा को आहत किया है. सार्वजनिक तौर पर राजस्व मंत्री ने तहसीलदार पद को भ्रष्ट कहा. यह तहसीलदार संस्था के सम्मान, स्वाभिमान और गरिमा पर गंभीर आघात है.
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