मंगलवार, 18 जून 2019

19 साल पुराने मामले में दिग्विजय और पटेरिया को मिली क्लीनचिट



पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व मंत्री राजा पटेरिया और अन्य आरोपियों को 19 साल पुराने मामले में ईओरडब्ल्यू (अपराध अनुसंधान ब्यूरो) ने क्लीनचिट दे दी है. ईओडब्ल्यू ने इस  प्रकरण में खात्मा लगा दिया है. 
दिग्विजय सिंह के शासनकाल में आरकेडीएफ इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में 12 छात्रों को गलत तरीके से दाखिला दिलाने का मामले ने जोर पकड़ा था. इस बीच भाजपा सरकार में इस पर जांच और आरोप- प्रत्यारोप चलते रहे. कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में अब इस मामले में ईओडब्ल्यू ने खात्मा रिपोर्ट पेश कर दी है. ईओडब्ल्यू ने खात्मा लगाने के तीन आधार बताए हैं, जिसमें तत्कालीन प्राचार्य का निधन होना. उनके निधन से गवाही का न हो पाना है. इसके अलावा जिन 12 छात्रों को लाभ दिए जाने की शिकायत की गई थी, उनकी सूची का न मिलना. तीसरा आधार यह बताया गया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को यह अधिकार था कि वे विद्यार्थियों की फीस को घटा या फिर माफ कर सकते थे.इस वजह से दिग्विजय सिंह एवं राजा पटैरिया के खिलाफ गलत तरीके से फीस माफ करने के आरोप खारिज कर दिए गए.  वहीं ईओडब्ल्यू का मानना है कि तकनीकी शिक्षा विभाग, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को उसी समय छात्रों के प्रवेश निरस्त करना चाहिए थे, जो नहीं किए गए. अब छात्र पढ़-लिखकर डिग्री ले चुके हैं इस वजह से अपराध नहीं होना पाया गया है.
 यह था मामला
आरकेडीएफ इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड टेक्नोलाजी, भोपाल ने 2000-2001 और 2001-2002 में 12 छात्रों को अनाधिकृत  तौर पर प्रवेश दिया था. तकनीकी शिक्षा विभाग ने गलत प्रवेश देने पर कालेज पर 24 लाख रुपए के जुर्माने का प्रस्ताव दिया था. तत्कालीन तकनीकी शिक्षा एवं जनशक्ति नियोजन मंत्री राजा पटैरिया ने प्रस्तावित जुर्माने को 24 लाख से घटाकर 5 लाख रुपए करने का प्रस्ताव तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भेजा था, जिसे उन्होंने अनुमोदित कर कालेज को लाभ पहुंचाया था.

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