मध्यप्रदेश में विधानसभा परिषद के गठन की कवायद तेज हो गई है. वचनपत्र में किए वादे को पूरा करने के लिए कमलनाथ सरकार ने इसका मसौदा बनाकर विधि विभाग को परीक्षण के लिए भेज दिया है. परीक्षण के बाद राज्यपाल की अधिसूचना से इस परिषद का गठन किया जा सकेगा.
मध्यप्रदेश में कांग्रेस द्वारा सरकार बनने पर राज्य में विधान परिषद के गठन का वादा किया था. इस वादे को पूरा करने के लिए अब सरकार ने सक्रियता दिखानी तेज कर दी है. सरकार ने इसके गठन के लिए एक मसौदा तैयार किया है और उसे विधि विभाग को भेज दिया है. जानकारों का मानना है कि विधान परिषद के गठन का प्रावधान प्रदेश में है, इसलिए इसमें केन्द्र सरकार के अनुमादन की जरुरत नहीं पड़ेगी. इसका गठन कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद राज्यपाल की अधिसूचना जारी किए जाने के साथ हो जाएगा. बताया जाता है कि संसदीय कार्य विभाग ने विधान परिषद के गठन का मसौदा तैयार किया है और उसे विधि विभाग को परीक्षण के लिए भेजा है.
वैसे प्रदेश में विधान परिषद के गठन का प्रावधान पहले से ही है. विधानसभा परिसर में परिषद की बैठक की अलग से व्यवस्था है और अन्य इंतजाम भी है. इसके गठन के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरुरी है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधेयक पारित करके राज्यपाल को भेजा जाएगा. इसके बाद राज्यपाल द्वारा विधान परिषद के गठन की अधिसूचना जारी की जा सकती है. इस मामले को लेकर संसदीय कार्यमंत्री डा. गोविंद सिंह का कहना है कि विधान परिषद के गठन को लेकर कानूनी पहलुओं पर हम परीक्षण करा रहे हैं. इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. वैसे विधान परिषद गठन को लेकर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम साहित कुछ कानून में संशोधन करना होगा, जो केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा.
यहां उल्लेखनीय है कि संसदीय कार्य विभाग द्वारा यह मसौदा विधि विभाग को पहले भी भेजा गया था. मगर तब विधि विभाग ने इसे यह कहकर वापस लौटा दिया था कि इसके लिए केन्द्र सरकार की अनुमति लगेगी. इसके बाद संसदीय कार्यविभाग ने मसौदे पर विधि विशेषज्ञों की राय ली, इसके बाद फिर दोबारा यह मसौदा विधि विभाग को भेजा है. विभाग ने इस बात का उल्लेख किया है कि मध्यप्रदेश में इसका प्रावधान पहले से ही है.
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