मंगलवार, 25 जून 2019

पेंशन न मिलने से नाराज हो रहे मिसाबंदी


मध्यप्रदेश में 34 जिलों के मीसाबंदियों को 6 माह से पेंशन नहीं  मिल रही है. इससे मीसाबंदियों की नाराजगी बढ़ती जा रही है. लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक ने कहा कि सरकार को जल्द ही मीसाबंदियों की पेंशन शुरु करना चाहिए.
राज्य में सरकार बदलने के साथ ही मीसाबंदियों की पेंशन बंद करने की बात सामने आई थी, जब मीसाबंदियों ने इसका विरोध किया तो सरकार ने तर्क दिया था कि मीसा बंदी पेंशन को बंद नहीं किया गया है, बल्कि इस योजना के तहत कई अपात्रों को भी पेंशन का लाभ मिल रहा है, जिनका सत्यापन किए जाने के बाद पेंशन देना शुरु कर दी जाएगी. सरकार की इस बात के बाद राज्य के 18 जिलों में तो मीसाबंदियों का सत्यापन किया गया, मगर 34 जिलों में अब भी सत्यापन नहीं हो पाया. राज्य के जिन 18 जिलों में मीसाबंदियों का सत्यापन हुआ है, वहां पर पेंशन शुरु कर दी गई है, मगर शेष जिलों के मीसाबंदियों को अब भी पेंशन का इंतजार है. 
लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक ने बताया कि सरकार ने बदले नियमों के तहत 18 जिलों में तो मीसाबंदियों का सत्यापन कर लिया, मगर अब भी 34 जिलों के मीसाबंदियों का सत्यापन नहीं हुआ है, जिसके चलते वहां के मीसाबंदियों को पेंशन नहीं मिल पा रही है. भौमिक का कहना है कि  होशंगाबाद, सीहोर, हरदा, सिवनी,  उज्जैन, रतलाम सहित 34 जिलों में मीसाबंदियों का अब तक सत्यापन नहीं हुआ है, जिसके कारण उन्हें पेंशन नहीं मिल पा रही है. सरकार को जल्द ही शेष जिलों में सत्यापन कराकर पेंशन शुरु करना चाहिए.
यहां उल्लेखनीय है कि शिवराज सरकार के कार्यकाल में मीसाबंदी योजना की शुरुआत हुई थी. इस योजना के तहत 2 हजार से ज्यादा लोगों को 25 हजार रुपए मासिक पेंशन दी जाती थी. योजना के शुरुआती दौर में यह पेंशन 3 हजार रुपए प्रतिमाह दी जा रही थी, मगर 2017 में इस बढ़ाकर 25 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया था.

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