कमलनाथ समर्थक बचते रहे बोलने से, संगठन की बढ़ती रही बैचेनी
भोपाल। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के भाजपा में शामिल होने की अटकलों के बीच कांग्रेस कार्यालय में आज सन्नाटा पसरा रहा। यहां तक की कांग्रेस कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लटका रहा। कमलनाथ समर्थक नेताओं के अलावा कांग्रेस नेताओं की आवाजाही भी आज प्रदेश कार्यालय में नजर नहीं आई।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ के भाजपा में शामिल होने की अटकलों के बाद राजधानी में खासकर कांग्रेस नेताओं में भूचाल सा आ गया है। कल शनिवार तक प्रदेश कार्यालय गुलजार नजर आ रहा था, वही प्रदेश कार्यालय आज सूना नजर आया। कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। कार्यालय परिसर में ताला लटका रहा। प्रतिदिन पहुंचने वाले कांग्रेस नेता भी आज कार्यालय नहीं पहुंचे। वहीं कार्यकर्ता की भी दूरी कार्यालय से बनी रही। कमलनाथ समर्थक विधायकों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से मिलने और बात करने से दूरी बना ली है। पटवारी ने कमलनाथ मामले में मीडिया से दूरी बनाई है और सवालों से बच रहे है। हालांकि एक दिन पहले पटवारी ने कमलनाथ के पार्टी छोड़ने की बातों से इनकार किया था।
दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कांग्रेस विधायकों के अलावा अन्य नेताओं जिनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें चल रही है, उन पर नजरें गढ़ा दी है। इन नेताओं और विधायकों पर कांग्रेस नेताओं की नजरें लगी हुई है।
राम के रंग में रंगने लगे कमलनाथ के करीबी
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार दिल्ली पहुंचे है। सिंघार के अलावा पूर्व मंत्री और कमलनाथ के करीबी सज्जन सिंह वर्मा दिल्ली पहुंचे। दिल्ली पहुंचने के बाद सज्जन सिंह वर्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा- है तेरे राम, मेरे राम, तुझमें भी राम, मुझ में भी राम, जय श्री राम। आपको बता दें कि कल सज्जन वर्मा ने अपनी बायो बदली थी। वहीं दूसरी और विधायक बाला बच्चन ने भी अपने बायो से कांग्रेस हटा दिया है।
कमलनाथ पर ईडी का दबाव, लेकिन चरित्र दबाव में आने वाला नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मीडिया से चर्चा करते हुए साफ कहा है कि वह लगातार कमलनाथ से संपर्क में है। वह कांग्रेस छोड़कर नहीं जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेरी कमलनाथ से लगातार चर्चा हो रही है, कांग्रेस नेतृत्व की लगातार उनसे चर्चा हो रही है। उनके जैसा व्यक्ति, जिन्होंने कांग्रेस से शुरुआत की, जिन्हें हम सब इंदिरा गांधी का तीसरा बेटा मानते है, उन्होंने हमेशा कांग्रेस का साथ दिया है, वे कांग्रेस के स्तंभ रहे हैं। उन्हें कौन सा पद नहीं मिला? केंद्र में मंत्रिमंडल, एआईसीसी में महामंत्री, प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री। उन्हें सभी पद मिले हैं। मुझे नहीं लगता कि वे पार्टी छोड़ेंगे। सिंह ने कहा कि ईडी, आईटी, सीबीआई का दबाव जो सब पर है, वह उन पर भी है, लेकिन कमलनाथ का चरित्र दबाव में आने वाला नहीं है। वे और कैसे इसका खंडन करेंगे न उन्होंने इस्तीफा दिया है और न ही वे भाजपा में शामिल हुए हैं।
उत्तराधिकार की राजनीति करना न्यायपूर्ण नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई व कांग्रेस के पूर्व विधायक लक्ष्मण सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा है कि 2024 में “उत्तराधिकार” की राजनीति करना “न्यायपूर्ण” नहीं है। हम इसके परिणाम भी देख रहे हैं। ऐसा करने से कई राजनीतिक दल और उनके समर्पित कार्यकर्ता निराश होकर घर बैठने पर मजबूर हैं, जो प्रजातंत्र और उन दलों और कार्यकर्ताओं के लिए घातक है।

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