पथ विक्रेताओं के बनेंगे पहचान पत्र, पचास हजार लौटाने पर मिलेगा एक लाख का ऋण
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में पथ विक्रेता कल्याण बोर्ड का गठन किया जाएगा। साथ ही गांवों और ष्शहरों में सड़कों पर सामान बेचने वाले पथ विक्रेताओं के पहचान पत्र बनाए जाएंगे। इन विक्रेताओं से तहबाजारी की वसूली नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह बात आज राजधानी में आयोजित पथ विक्रेताओं की महापंचायत को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि पथ विक्रेताओं की समस्याओं के समाधान और उनके कल्याण के लिए प्रदेश में पथ विक्रेता कल्याण बोर्ड का गठन किया जाएगा। गांव और शहरों में सड़क पर सामान बेचने वाले पथ विक्रेताओं के पहचान पत्र बनाए जाएंगे, उनसे कहीं भी तहबाजारी की वसूली नहीं की जाएगी। उपयुक्त स्थानों पर स्थान चिन्हित कर हाकर्स कार्नर विकसित होंगे। पचास हजार रुपए का बैंक ऋण लौटाने पर पथ विक्रेताओं को एक लाख रूपए का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वे अपने कार्य का निंरतर विस्तार कर सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर योजना में 10 हजार रुपए का लोन बैंक द्वारा उपलब्ध कराया जाता है और उसकी गारंटी राज्य सरकार देती है। दस हजार रुपए वापस करने पर 20 हजार रुपए और 20 हजार रुपए वापस करने पर 50 हजार रुपए का ऋण मिलने की सुविधा है। यह हमें लगातार आगे बढ़ने की सुविधा और सामर्थ प्रदान करती है।
मंगोड़ी और साबूदाना खिचड़ी का लिया स्वाद
महापंचायत में प्रदर्शनी स्थल पर लगे पथ विक्रेताओं के स्टाल पर जाकर मुख्यमंत्री ने उनसे चर्चा की, व्यंजनों का स्वाद लिया तथा उनके उत्पादों के बारे में जानकारी प्राप्त की। पर्वत सिंह राजपूत ग्यारह नं. मार्केट के पास अपनी बेटी यशस्वी के नाम से संचालित यशस्वी टी स्टॉल चलाते हैं, मुख्यमंत्री ने लाल परेड ग्राउंड में लगे उनके स्टॉल पर जाकर चाय पी उसका डिजीटल भुगतान कराया और चाय के स्वाद की सराहना की। मुख्यमंत्री ने जेके रोड पर श्रीराम साबूदाना खिचड़ी सेंटर चलाने वाली प्रीति पटेल के स्टाल पर साबूदाना खिचड़ी और नेहरू नगर में ऋषिका मंगोड़ी सेंटर चलाने वाले रवि बगवानिया के स्टाल पर मंगोड़ी का स्वाद लिया।
रीवा में होगी रामानुजाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना
विंध्य क्षेत्र से आये आचार्यों को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में संबोधित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि रीवा में रामानुजाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। साथ ही संस्कृत विद्यालयों में कर्मकांड की शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था भी की जायेगी। उन्होंने कहा कि राज्य शासन विकास और जनकल्याण के कार्य तो करता ही है पर इसके साथ ही प्रदेशवासियों का जीवन सही दिशा में चले इसकी चिंता करना भी सरकार का दायित्व है। इस दायित्व निर्वहन में आचार्य महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। प्रदेश में महाकाल महालोक का निर्माण, आदि गुरू शंकराचार्य की प्रतिमा की स्थापना से प्रदेश में अद्भुत अलौकिक वातावरण निर्मित हुआ है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें