प्रियंका गांधी अब मालवा अंचल में होंगी सक्रिय, मोहनखेड़ा में सभा 5 को
भोपाल। विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस का मैदानी अभियान अब तेज हो चला है। कांग्रेस ने बड़े नेताओं को फोकस करके कार्यक्रम आयोजित करना शुरू कर दिया है। इसके चलते कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का महाकौशल, ग्वालियर-चंबल अंचल के बाद मालवा का कार्यक्रम तय किया गया है। प्रियंका गांधी की धार जिले के मोहनखेड़ा में 5 अक्टूबर को बड़ी सभा करना तय किया गया है। इस सभा के जरिए प्रियंका गांधी आदिवासी मतदाताओं को साधने का काम करेंगी।
विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा के बड़े नेताओं के दौरे और सभाएं अब तक प्रदेश में हो रही थी। वहीं कांग्रेस नेताओं की सभाओं की संख्या सीमित थी। इसे देख अब कांग्रेस ने अपने बड़े नेताओं को चुनावी मैदान में उतारकर मतदाता को साधने का प्रयास तेज कर दिया है। इसके चलते कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की एक बड़ी सभा प्रदेश के मालवा अंचल में आयोजित किए जाने की तैयारी कर ली है। 5 अक्टूबर मालवा के धार जिले के मोहनखेड़ा में प्रियंका गांधी की एक बड़ी सभा आयोजित करने की तैयारी कांग्रेस ने की है। मालवा के पहले कांग्रेस प्रियंका गांधी की सभा महाकौशल के जबलपुर और ग्वालियर-चंबल अंचल के ग्वालियर में करा चुकी है। इसके बाद अब प्रियंका जैन तीर्थ स्थल मोहनखेड़ा में रैली को संबोधित करने वाली है। धार जिले में आने वाला मोहनखेड़ा धार और झाबुआ जिले के बीच में स्थित है। ये दोनों जिले आदिवासी बहुल हैं। इस क्षेत्र में संघ का भी खासा प्रभाव है। इसे देखते हुए कांग्रेस ने रणनीति के तहत प्रियंका गांधी का कार्यक्रम तय किया है। मोहनखेड़ा से कांग्रेस आदिवासी मतदाताओं को साधने का प्रयास करेगी।
गौरतलब है कि आदिवासी बहुल धार जिले से 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा था। पार्टी आदिवासी बहुल क्षेत्र में फिर वहीं प्रदर्शन दोहराने की तैयारी में जुटी गई है। वहीं पिछले महीने आदिवासी स्वाभिमान यात्रा निकाली गई थी। अब झाबुआ में आदिवासी महासम्मेलन करने की तैयारी है, इसलिए धार में प्रियंका वाड्रा की जनसभा कराने की निर्णय लिया है।
क्षेत्र में रहें या जनआक्रोश यात्रा निकालें
कांग्रेस ने भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा के जवाब में 15 सिंतबर से जन आक्रोश यात्रा निकालने का फैसला लिया है। यह यात्रा सात स्थानों से सात अलग-अलग नेताओं के नेतृत्व में निकाली जाएगी। जिन नेताओं के नेतृत्व में यह यात्रा निकाली जानी है वे यात्रा को लेकर िंचतित है। इन नेताओं को चिंता इस बात की सता रही है कि चुनावी समय में वे क्षेत्र में रहें या फिर जन आक्रोश का नेतृत्व करते हुए यात्रा निकालें। यात्रा का नेतृत्व करने वाले अधिकांश नेता खुद चुनाव मैदान में ताल ठोकने वाले हैं। इसके चलते वे असमंजस की स्थिति में हैं।

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