कार्यसमिति सदस्य और पार्शदों ने दिए इस्तीफे
भोपाल। भाजपा की दूसरी सूची जारी होते ही पार्टी में फिर नाराजगी दिखाई देने लगी है। सीधी से सांसद रीति पाठक को प्रत्याशी बनाए जाने के विरोध में प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य राजेश मिश्र ने आज इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दिया है। वहीं नागदा के खाचरोद विधानसभा क्षेत्र से पार्शदों ने इस्तीफे दिए हैं।
भाजपा में विधानसभा चुनाव को लेकर जारी की दूसरी सूची के बाद एक बार फिर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की नाराजगी नजर आ रही है। सीधी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के लगातार विधायक रहे केदारनाथ शुक्ला का टिकट काटते हुए भाजपा ने सीधी संसदीय क्षेत्र की सांसद रीती पाठक को टिकट दिया है, जिससे नाराज होकर प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य राजेश मिश्र आज मंगलवार को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। राजेश खुद इस सीट से अपनी दावेदारी कर रहे थे। उन्होंने टिकट न मिलने से नाराजगी के चलते इस्तीफा दिया है। वहीं नागदा के खाचरौद से डा तेजबहादुर सिंह को प्रत्याशी बनाया गया है। इससे ओबीसी मोर्चा के कार्यकारी सदस्य लोकेन्द्र मेहता और उनके समर्थक खासे नाराज है। मेहता ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने की घोशणा कर दी है। मेहता के अलावा यहां पर पूर्व विधायक दिलीप सिंह के समर्थक भी दिलीप सिंह को टिकट न मिलने से नाराज है। सिंह के समर्थन में करीब 17 पार्शदों ने इस्तीफा पार्टी को भेज दिया है। हालांकि अभी इनके इस्तीफे को लेकर संगठन ने कोई कदम नहीं उठाया है।
वहीं सतना से गणेश सिंह को टिकट दिए जाने से नाराज रत्नाकर चतुर्वेदी ने एक वीडियो जारी कर कहा कि कोरोना काल में कोई मैदान में नहीं आया, उन्होंने लोगों की सेवा की। रत्नाकर चतुवेर्दी ने दुख जताते हुए कहा, ‘मेरी मेहनत का पार्टी ने मुझे ये फल दिया है, उसका तहे दिल से शुक्रिया। अगर जनता की इच्छा होगी तो मैं निर्दलीय चुनाव लड़ूंगा।
तो क्या विधायक सरपंच का लड़ेंगे चुनाव
मैहर विधानसभा सीट से विधायक नारायण त्रिपाठी का टिकट काट दिया गया है। इसे लेकर उनकी नाराजगी भी सामने आई है। त्रिपाठी ने एक वीडियो जारी कर कहा कि मैं न इस रेस में था और न ही दावेदार था, क्योंकि मैं विंध्य प्रदेश के पुर्ननिर्माण की लड़ाई लड़ रहा हूं। इसलिए विंध्य प्रदेश बनने तक यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने तंज सकते हुए कहा कि इतने बुजुर्ग सांसद, नेता, मंत्रियों को अगर भाजपा चुनाव लड़ा सकती है तो फिर मुरली मनोहर जोशी और लालकृष्ण आडवाणी को किनारे क्यों कर दिया गया था। अब अगर सांसद विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे तो क्या विधायक सरपंच का चुनाव लड़ेंगे। युवा राष्ट्र की कल्पना करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने अपने बुजुर्ग नेताओं को विधानसभा का प्रत्याशी बनाया है।

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