गुरुवार, 28 सितंबर 2023

प्रत्याशियों के परिजनों ने संभाला मैदानी मोर्चा

महिला और युवा एवं नए मतदाताओं को साधने का प्रयास

भोपाल। भाजपा के घोशित प्रत्याशियों के परिजनों ने अब मैदानी कमान संभाल ली है। परिजनों ने मैदान में उतरकर घर-घर पैठ जमाना शुरू कर दिया है। राजधानी भोपाल की दो सीटें जो भाजपा के लिए चुनौती बनी है। वहां पर एक प्रत्याशी की पत्नी
तो दूसरे के बेटे ने अलग-अलग तरीके से चुनाव प्रचार की कमान संभाली है। 

राजधानी भोपाल की दो सीटें भोपाल उत्तर और भोपाल मध्य भाजपा के लिए चुनौती बनी हुई है। भोपाल उत्तर में तो लंबे समय से कांग्रेस विधायक आरिफ अकील का कब्जा है, मगर उनके अस्वस्थ होने के चलते भाजपा इस बार यहां पर कब्जा जमाने के लिए आतुर है। माना जा रहा है कि अकील के परिजनों को यहां पर कांग्रेस मैदान में उतार सकती है, इसके चलते भाजपा को उम्मीद है कि यह मौका हाथ से निकलना नहीं चाहिए। यही वजह है ि कइस सीट पर भाजपा ने पहली ही सूची में पूर्व महापौर आलोक ष्शर्मा को प्रत्याशी बना दिया है। अब उनकी पत्नी डॉली शर्मा ने मैदानी मोर्चा संभाला है। वे प्रतिदिन उत्तर विधानसभा सीट के मतदाताओं के घर पहुंच रही है। खासकर उनका फोकस महिला मतदाता पर है। वे महिलाओं के साथ बैठती हैं और बातचीत करते हुए उन्हें मतदान करने के लिए उत्साहित कर रही है। डाली सिर्फ महिलाओं को इस बात के लिए तैयार कर रही है कि वे मतदान वाले दिन मतदान करने पहुंचे। वे यह नहीं कर रही कि किसके पक्ष में मतदान करना है। भाजपा की रणनीति है कि इस विधानसभा क्षेत्र में खासकर हिन्दू महिला मतदाता का मतदान करने का प्रतिशत कम रहा है। यही वजह है कि वे महिला मतदाताओं को मतदान केन्द्र तक पहुंचाना चाह रही है। 

दूसरी तरफ भाजपा के भोपाल मध्य सीट से घोशित प्रत्याशी ध्रुव नारायण सिंह के बेटे आदित्य सक्रिय हुए हैं। उन्होंने अपने पिता के चुनाव प्रचार की कमान संभाली है। आदित्य युवा और नए मतदाताओं के बीच अपनी पैठ जमा रहे हैं। वे प्रतिदिन नए मतदाताओं से मिलकर मतदान सूची में नाम है या नहीं इस बात पर फोकस कर रहे हैं। साथ ही नए और युवा मतदाताओं को मतदान करने जरूर जाना है इस बात को लेकर आग्रह कर रहे हैं। जबकि खुद धु्रव नारायण सिंह व्यक्तिगत रूप से मिलने निकल जाते हैं। उनका मानना है कि अभी समय मिला है तो वाहनों का उपयोग न करके क्षेत्र में पहुंचकर हर घर पर वे पहुंचे। इस दौरान वे लोगों के साथ बैठकें भी करते हैं और चाय पर बात भी करना उन्होंने ष्शुरू कर दिया है। 


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