प्रशासनिक सर्जरी के बाद शिकायतों का दौर भी हुआ शुरू
भोपाल। प्रदेश में इन दिनों नौकरशाहों को लेकर शिकायतें का दौर तेज हो चला है। शिकायतों को लेकर खुद नौकरशाह भी चिंतित हैं, मगर हाल ही में जब बड़ी प्रशासनिक सर्जरी हुई तो इस तरह की शिकायतों की संख्या भी बढ़ने लगी है। हाल ही में हुई दो शिकायतों के बाद माना जा रहा है कि इस तरह की शिकायतों का दौर आगे और तेज हो सकता है। शिकायतों के पीछे नौकरशाहों का आपसी टकराव नजर आ रहा है।
राज्य में भले ही कोई राजनीतिक उथल-पुथल न हो, लेकिन राज्य की नौकरशाही में उथल-पुथल मची हुई है। अधिकारी एक-दूसरे के खिलाफ साजिश रचते हुए शिकवे-शिकायतें करने से नहीं चूक रह हैं। शिकायतों का दौर तब शुरू हुआ जब राज्य की मुख्य सचिव वीरा राणा को प्रभारी मुख्य सचिव से मुख्य सचिव बना दिया गया। इस आशय का आदेश निकले कुछ समय ही बीता था कि माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड के एक घोटाले की शिकायत लोकायुक्त तक पहुंची। कम्प्यूटर खरीदी घोटाले की शिकायत जो लोकायुक्त में की गई, उस वक्त मुख्य सचिव वीरा राणा माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड की अध्यक्ष थी। 23 जनवरी को दर्ज की गई शिकायत में सहकारिता विभाग द्वारा खरीदे गए कंप्यूटर के रेट की तुलना की गई थी। लोकायुक्त में की गई शिकायत में सहकारिता विभाग द्वारा खरीदे गए कंप्यूटरों की दरों की बोर्ड कार्यालय से तुलना करते हुए कहा गया कि बोर्ड कार्यालय द्वारा भुगतान की गई कीमतें सहकारिता विभाग की तुलना में अधिक हैं। आरोप था कि खरीदारी में 50 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। 30 जनवरी को सहकारिता विभाग में कंप्यूटर खरीद को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई गई थी और आरोप लगाया गया था कि विभाग ने कंप्यूटर खरीदने के लिए 27 करोड़ रुपये अधिक दिये। यह शिकायत मुख्य सचिव के खिलाफ दायर शिकायत के समान है। इन दोनों शिकायतों के अलावा नौकरशाह एक दूसरे की खामियां ढूंढने में लगे हुए हैं। कुछ दिन पहले अधिकारियों के तबादले की दूसरी सूची आने के बाद ऐसी शिकायतों की संख्या बढ़ गई। सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में गड़बड़ी करने से जुड़े कागजात सामने आ सकते हैं। आने वाले दिनों में नौकरशाहों के खिलाफ जांच एजेंसियों को भेजी जाने वाली शिकायतों की संख्या बढ़ सकती है।

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