सत्ता में आते ही कांग्रेस सरकार चला रही तबादला उद्योगप्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही तबादला उद्योग शुरू कर दिया था, जो लगातार चालू है. इस उद्योग में भ्रष्टाचार का खुला खेल चल रहा है. एक-एक अफसर का चार-चार बार तबादला करके कांग्रेस सरकार के मंत्रियों ने अपनी जेबें भरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. अब सरकार ने जो नई तबादला नीति बनाई है, यह तबादलों के नाम पर चल रही लूट-खसोट और काली कमाई के कारोबार को और बढ़ावा देगी.
यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता उमेश शर्मा ने कमलनाथ सरकार की नई तबादला नीति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही. शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही अपने मंत्रियों और कांग्रेस नेताओं की जेबें भरने के लिए तबादला उद्योग शुरू कर दिया था. इस उद्योग के दौरान हजारों अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले किए जा चुके हैं और करोड़ों का लेनदेन हो चुका है. शर्मा ने कहा कि जब बिना किसी नीति के यह सरकार पहले ही हजारों तबादले कर चुकी है, तो अब नीति बनाने का औचित्य क्या है? उन्होंने कहा कि तबादला नीति के माध्यम से सरकार ने तबादला उद्योग को कुछ व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए जो नियम बनाए हैं, उनसे बंदरबांट के इस खेल में भागीदार बढ़ेंगे और भ्रष्टाचार को और ज्यादा बढ़ावा मिलेगा. शर्मा ने कहा कि तबादला नीति घोषित होने के पहले ही प्रदेश की कांग्रेस सरकार इतने बड़े पैमाने पर तबादले कर चुकी है, वह तबादला नीति बनने के बाद क्या करेगी? शर्मा कमलनाथ सरकार ने सत्ता में आते ही प्रदेश की आर्थिक स्थिति को कमजोर बताते हुए भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई जनहितैषी योजनाओं को बंद कर दिया. लेकिन सरकार तबादलों पर जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपए फूंक रही है.
15 हजार से अधिक अधिकारियों के हुए तबादले
उन्होंने कहा कि खजाना खाली होने का रोना रोने वाली इस सरकार ने 6 माह के भीतर आईएएस, आईपीएस संवर्ग के अधिकारियों के जो तबादले किए हैं, उन पर भत्तों के रूप में ही 30 करोड़ से अधिक रुपए खर्च कर दिए. सभी संवर्गों के मिलाकर 15 हजार से अधिक अधिकारियों के तबादले हुए हैं. यदि उनके तबादले पर खर्च हुई सरकारी राशि को जोड़ लिया जाए, तो यह खर्च सैकड़ों करोड़ रुपए का होगा. शर्मा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से सवाल किया कि जब किसानों की कर्जमाफी के लिए पैसे नहीं हैं, गरीबों के इलाज के लिए पैसे नहीं हैं, बच्चों की फीस के पैसे नहीं हैं, प्रसूता बहनों के लड्डू के लिए पैसे नहीं हैं, गरीबों के अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं हैं, तो फिर इन हजारों तबादलों के लिए पैसा कहां से आ रहा है.
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