भाजपा का आरोप मुख्यमंत्री में प्रशासनिक कुशलता की कमी
मध्यप्रदेश में बिजली कटौती को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बिजली कटौती तो लेकर पूर्ववर्ती भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है, तो भाजपा इसके लिए सीधे तौर पर कमलनाथ सरकार को जिम्मेदार बता रही है. भाजपा ने आरोप लगाया है कि बिजली कटौती मुख्यमंत्री की प्रशासनिक कुशलता की कमी को दर्शा रहा है.
मध्यप्रदेश में बिजली कटौती को लेकर उठा विवाद अब भी थम नहीं रहा है. भाजपा द्वारा लगातार इसे लेकर कांग्रेस पर कटघरे में खड़ा किया जा रहा है. वहीं अब कांग्रेस ने भी आक्रामक रुख अपनाया और भाजपा के हमलों का जवाब देना तेज कर दिया है. मुख्यमंत्री कमलनाथ के अलावा राज्य के मंत्रियों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने अब पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर सीधे तौर पर आरोप लगाते हुए उपकरणों की खरीदी में घोटाले की बात कही है. जनसंपर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा है कि भाजपा ने बिजली के घटिया उपकरण खरीदे थे, जिसके चलते अब बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने भाजपा पर बिजली उपकरण खरीदी में घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा है कि इसकी जांच कराई जाएगी. इसके साथ ही शर्मा ने शिवराज सरकार में ट्रांसफार्मर और दूसरे विद्युत उपकरण खरीदी में बड़े स्तर पर घोटाले की आशंका जताई है.
वहीं भाजपा नेता गोविंद मालू ने कहा है कि बेचारी सरकार, इससे तो सर्कस अच्छा. मुख्यमंत्री की अधिकारी सुनते नहीं है. सरकार चलेगी, इसका विज्ञापन देना पड़ रहा है. यही तो वक्त है बदलाव का. भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने अपने ट्विटर पर बिजली कटौती के मामले में मुख्यमंत्री के पत्र में उनकी लाचारगी और प्रशासनिक कुशलता की कमी बताई है. उन्होंने कहा कि इसमें नागरिकों को कोरे व थोथे आश्वासन ही नजर आते हैं. अग्रवाल ने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया पर आक्षेप लगाने से पहले यह जान लें कि जाने-माने शायर, पत्रकार और कलाकार अपनी पीड़ा जता रहे हैं तो क्या ये अफवाह फैलाने वाले लोग हैं.
विज्ञापन के जरिए भाजपा पर कमलनाथ ने साधा निशाना
मुख्यमंत्री कमलनाथ विपक्ष के निशाने पर हैं. इस पर पलटवार करते हुए कमलनाथ ने स्थानीय अखबारों में विज्ञापन देकर इस समस्या के लिए परोक्ष रूप से पूर्ववर्ती भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने विज्ञापन के माध्यम से कहा कि अभी पिछले कुछ दिनों से सामने आई बिजली की समस्या के पीछे बिजली की कमी कारण नहीं है, अपितु सालों से व्यवस्था में सुधार नहीं करना और उपभोक्ताओं तक सतत पूर्ति में मानव जनित बाधाएं उत्पन्न करना है. तात्कालिक रूप से पैदा की गई समस्या का निदान आने वाले दिनों में शीघ्र हो जाएगा जबकि व्यवस्थागत समस्याओं के समाधान में थोड़ा वक्त लगेगा. इसके साथ ही कमलनाथ सरकार ने भरोसा देते हुए कहा है कि प्रदेश में बिजली संकट नहीं है. शिवराज सरकार के दौरान लाइन की मेंटेनेंस ना होने के कारण बार-बार बत्ती गुल हो रही है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसके साथ ही यह अपील भी की है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहें. उन्होंने कहा कि मुझ पर विश्वास रखें, मैं जो बोलता हूं उसे पूरा करता हूंङ्घ मैं और मेरी सरकार पूरे 5 साल आपकी सेवा में तत्पर है.
मध्यप्रदेश में बिजली कटौती को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बिजली कटौती तो लेकर पूर्ववर्ती भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है, तो भाजपा इसके लिए सीधे तौर पर कमलनाथ सरकार को जिम्मेदार बता रही है. भाजपा ने आरोप लगाया है कि बिजली कटौती मुख्यमंत्री की प्रशासनिक कुशलता की कमी को दर्शा रहा है.
मध्यप्रदेश में बिजली कटौती को लेकर उठा विवाद अब भी थम नहीं रहा है. भाजपा द्वारा लगातार इसे लेकर कांग्रेस पर कटघरे में खड़ा किया जा रहा है. वहीं अब कांग्रेस ने भी आक्रामक रुख अपनाया और भाजपा के हमलों का जवाब देना तेज कर दिया है. मुख्यमंत्री कमलनाथ के अलावा राज्य के मंत्रियों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने अब पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर सीधे तौर पर आरोप लगाते हुए उपकरणों की खरीदी में घोटाले की बात कही है. जनसंपर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा है कि भाजपा ने बिजली के घटिया उपकरण खरीदे थे, जिसके चलते अब बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने भाजपा पर बिजली उपकरण खरीदी में घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा है कि इसकी जांच कराई जाएगी. इसके साथ ही शर्मा ने शिवराज सरकार में ट्रांसफार्मर और दूसरे विद्युत उपकरण खरीदी में बड़े स्तर पर घोटाले की आशंका जताई है.
वहीं भाजपा नेता गोविंद मालू ने कहा है कि बेचारी सरकार, इससे तो सर्कस अच्छा. मुख्यमंत्री की अधिकारी सुनते नहीं है. सरकार चलेगी, इसका विज्ञापन देना पड़ रहा है. यही तो वक्त है बदलाव का. भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने अपने ट्विटर पर बिजली कटौती के मामले में मुख्यमंत्री के पत्र में उनकी लाचारगी और प्रशासनिक कुशलता की कमी बताई है. उन्होंने कहा कि इसमें नागरिकों को कोरे व थोथे आश्वासन ही नजर आते हैं. अग्रवाल ने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया पर आक्षेप लगाने से पहले यह जान लें कि जाने-माने शायर, पत्रकार और कलाकार अपनी पीड़ा जता रहे हैं तो क्या ये अफवाह फैलाने वाले लोग हैं.
विज्ञापन के जरिए भाजपा पर कमलनाथ ने साधा निशाना
मुख्यमंत्री कमलनाथ विपक्ष के निशाने पर हैं. इस पर पलटवार करते हुए कमलनाथ ने स्थानीय अखबारों में विज्ञापन देकर इस समस्या के लिए परोक्ष रूप से पूर्ववर्ती भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने विज्ञापन के माध्यम से कहा कि अभी पिछले कुछ दिनों से सामने आई बिजली की समस्या के पीछे बिजली की कमी कारण नहीं है, अपितु सालों से व्यवस्था में सुधार नहीं करना और उपभोक्ताओं तक सतत पूर्ति में मानव जनित बाधाएं उत्पन्न करना है. तात्कालिक रूप से पैदा की गई समस्या का निदान आने वाले दिनों में शीघ्र हो जाएगा जबकि व्यवस्थागत समस्याओं के समाधान में थोड़ा वक्त लगेगा. इसके साथ ही कमलनाथ सरकार ने भरोसा देते हुए कहा है कि प्रदेश में बिजली संकट नहीं है. शिवराज सरकार के दौरान लाइन की मेंटेनेंस ना होने के कारण बार-बार बत्ती गुल हो रही है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसके साथ ही यह अपील भी की है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहें. उन्होंने कहा कि मुझ पर विश्वास रखें, मैं जो बोलता हूं उसे पूरा करता हूंङ्घ मैं और मेरी सरकार पूरे 5 साल आपकी सेवा में तत्पर है.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें