बुधवार, 24 जनवरी 2024

दल-बदल कानून को और कड़ा बनाएं, ईवीएम पर भी उठाए सवाल

गोंगपा के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम ने लिखा राष्ट्रपति को पत्र


भोपाल।  गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्यप्रदेश के प्रभारी श्याम सिंह मरकाम ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की ओर से भारत के राष्ट्रपति और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर ईवीएम व्यवस्था तथा दल बदल कानून को कड़ा करने की मांग की है। 

दोनों विषयों को अत्यंत गंभीर बताते हुए राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम ने कहा है कि देश की वर्तमान चुनाव प्रणाली में मतदान हेतु प्रयोग की जा रही ईवीएम एवं वीवीपेट मशीन पर विभिन्न दलों एवं संस्थाओं के द्वारा लगाए जा रहे गंभीर आरोपों और चुनावों के दौरान ईवीएम मशीनों वीवीपेट में गड़बड़ियों को लेकर बड़ी संख्या में गंभीर और प्रमाणिक शिकायतें सामने आने लगी है, इन शिकायतों के कारण ईवीएम मशीन वीवीपीएटी संदेह के दायरे में आ गए हैं तथा उनकी विश्वसनीयता पूरी तरह से संदिग्ध दिखाई पड़ती है। श्याम सिंह ने कहा ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतों के चलते आम आदमी के मन में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता को लेकर अनेकों सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रजातांत्रिक व्यवस्था का संदेह के दायरे में आना भारतीय प्रजातंत्र के लिए गंभीर चुनौती है और देश के प्रजातंत्र की मजबूत पारदर्शिता, निष्पक्षता के लिए आवश्यक है की चुनाव प्रक्रिया को शक और संदेह से पूर्णतः मुक्त रखा जाए। अतः आपसे अनुरोध है कि आगामी चुनाव में मतदान हेतु ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर का उपयोग किया जाए ताकि आममतदाताओं के मन में चुनावी प्रक्रिया को लेकर जो संदेह है उसे समाप्त किया जा सके देश की प्रजातांत्रिक व्यवस्था में सत्ता के लिए खरीद फरोख्त के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। इस चलन को रोकने की दिशा में भी गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है क्योंकि पार्टी के संगठन, सहयोग और विचारधारा पर चुनाव जीतकर निर्वाचित होने वाले प्रतिनिधियों का अन्य दलों में अपने निजी स्वार्थों के लिए चला जाना मतदाताओं के साथ विश्वास घात एवं अन्याय है।

प्रजातांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है दल-बदल 

ष्श्याम सिंह ने कहा कि  दल बदल से देश की स्वस्थ प्रजातांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है। इस खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए उचित प्रावधान किए जाने चाहिए दल बदल करने वाले जनप्रतिनिधियों का निर्वाचन शून्य करने एवं भविष्य में उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाने जैसे प्रावधान कठोरता से लागू कराए जाने की आवश्यकता है। इस तरह के दल बदल से सर्वाधिक क्षति छोटे-छोटे राजनीतिक दलों को उठानी पड़ती है जिससे वास्तविक जमीनी प्रजातंत्र आहत होता है और नागरिकों के जनादेश का अपमान किया जाता है यही वजह है कि देश में आजादी के इतने वर्षों के बाद भी छोटे दल कमजोर स्थिति में जिससे इन दलों से जुड़े छोटे-छोटे क्षेत्र समाज और समुदायों को उनके राजनीतिक अधिकार या सरकार में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है साथ ही साथ खरीद फरोख्त की राजनीति और उठा पटक के तरीकों से देश की छवि पूरे विश्व में प्रभावित हो रही है। गोंगपा के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम ने विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के द्वारा इस परिवर्तन लिए चलाएं जा रहें आंदोलनों की सराहना करते हुए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के समर्थन और सहयोग की घोषणा भी की है।


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