शिवराज ने कहा लोगों का प्यार मेरे साथ, बेटे ने कहा वादे पूरा कराने लड़ना पड़ा तो लड़ूंगा
भोपाल। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में भाजपा को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मिली बड़ी जीत के बाद उन्हें जब भाजपा ने मुख्यमंत्री नहीं बनाया तो उसके बाद से लगातार उनकी नाराजगी नजर आ रही है। शिवराज सिंह खुलकर एक तरह से मोर्चा खोले हुए हैं, वहीं अब उनके बेटे कार्तिकेय चौहान ने भी मैदानी मोर्चा संभाल लिया है। दो पिता-पुत्र अपने-अपने तरीके से अपनी बात रखते हैं। दोनों की भाषा संयमित है, मगर शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री ना बनने का दर्द भी उनके बयानों पर छलक रहा है।
प्रदेश में विधानसभा चुनाव में जब भाजपा को भारी बहुमत मिला तो करीब 18 साल तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान को भरोसा था कि उन्हें पार्टी फिर से एक बार मुख्यमंत्री बनाएगी। मगर चुनाव के दौरान जिस तरह से केन्द्रीय नेतृत्व और उनके बीच चली खींचतान को देखते हुए कहीं ना कहीं उन्हें इस बात का अंदाजा भी था ि कइस बार उनके मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने में मशक्कत करनी पड़ेगी। हुआ भी वही जो सोचा जा रहा था। परिणाम आने के बाद केन्द्रीय नेतृत्व पूरी तरह हॉवी नजर आया और शिवराज सिंह के बजाय प्रदेश की कमान डा मोहन यादव को सौंप दी। केन्द्र का यह फैसला शिवराज के अलावा पार्टी के दूसरे वरिश्ठ नेताओं के भी गले नहीं उतरा, मगर सब ने मौन साधे रहा। शिवराज सिंह मौन रहने के बजाय दिल्ली से दूरी बनाते हुए अनुशासित तरीके से मुखर होते दिखे। मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने के बाद से प्रदेश में वे अपने लोकप्रियता को भुनाने से भी नहीं चुके। जहां गए, वहां मामा और भैया की छवि को लेकर खूब वाह-वाही लूटी। साथ ही पार्टी को एक तरह से संकेत दिया कि उनकी छवि मुख्यमंत्री ना होने के बाद आज भी वैसी ही है, जिस तरह से मुख्यमंत्री रहते थी। मगर उनका दर्द तो उनके बयानों में छलक रहा था। मध्यप्रदेश से लेकर तेलंगाना और महाराश्ट में भी वे अपनी मामा की छवि को लेकर लोगों के बीच चर्चा में रहे और मौका पाते ही उन्होंने केन्द्र तक को संकेत दिए ि कवे अब भी लोगों के बीच लोकप्रियता में कम नहीं है।
मैं नहीं हूं रिजेक्टेड मुख्यमंत्री
वैसे तो मुख्यमंत्री ना बनने के बाद वे लगातार किसी ना किसी तरह से अपनी बात जनता के बीच रखकर चर्चा में बने रहते हैं। लोकप्रियता को शिवराज सिंह कम नहीं होने दे रहे है। अब हाल ही में वे महाराश्ट के पुणे ष्शहर में एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां भी उन्होंने जो बात कही उससे साफ छलक रहा है कि उनका दर्द अब भी कम नहीं हुआ है। पुणे में आयोजित छात्र संसद को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं रिजेक्टेड मुख्यमंत्री नहीं हूँ, लोगों का प्यार मेरे साथ है। इस कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने छात्रों के समक्ष अपने प्रारंभिक राजनीतिक जीवन पर चर्चा की। शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम में कहा, “लोग मुझे पूर्व मुख्यमंत्री कहते हैं, लेकिन मैं नकारा (रिजेक्टेड) गया मुख्यमंत्री नहीं हूं...लोगों का प्यार ही मेरी असली पूंजी है। मैंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया है, लेकिन यह इसका मतलब यह नहीं कि मैं राजनीति में सक्रिय नहीं रहूँगा। उन्होंने कहा कि, राजनीति में दो तरह के लोग होते हैं। एक तो वो जो देश-प्रदेश और समाज के लिए कुछ करना है और इसलिए राजनीति में आते है। दूसरे वो नेता जो राजनीति को ही अपना करियर बना लेते हैं, कुर्ता - पजामा पहन कर सतही राजनीति करते हैं। कई लोग सोचते हैं राजनीति खराब काम है लेकिन ऐसा नहीं है। यह मानसिकता गलत है।
बेटे ने भी खोला मोर्चा
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान भेरूंदा में आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे। उस सभा का यह वीडियो बताया जा रहा है। कार्तिकेय वीडियो में यह कहते सुने जा रहे हैं कि मैं कोई नेता नहीं हूं, कुर्ता पहनकर जरूर आया हूं, लेकिन अभी राजनीति में आने का मन नहीं है। आपके बीच इसलिए आ रहा हूं, क्योंकि वोट मांगने मैं ही आया था। उन्होंने कहा कि वोट मांगने के लिए आपके बीच मैं ही आया था। आप लोगों ने मुझ पर विश्वास कर वोट दिया था। अब पिता जी (शिवराज सिंह चौहान) मुख्यमंत्री नहीं रहे, इसलिए मैंने जो वादे आपसे उस समय किए थे, उसे ही निभाने के लिए आया हूं। कार्तिकेय ने कहा कि आपसे किए हुए वादे निभाने के लिए मैं किसी भी हद तक जा सकता हूं। वैसे तो लड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, क्यों कि अपनी ही सरकार है। लेकिन अगर लड़ना पड़ा, नौबत आएगी तो उसके लिए भी कार्तिकेय तैयार हैं।


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