भोपाल। मध्यप्रदेश की राज्यसभा की पांच सीटों के लिए फरवरी में होने वाले चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल प्रत्याशी चयन में लोकसभा चुनाव को प्राथमिकता देते नजर आएंगे। दोनों ही दलों द्वारा जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कवायद इन सीटों के जरिए की जाएगी।
राज्यसभा की रिक्त होने वाली प्रदेश की पांच सीटों के लिए आज चुनाव आयोग ने मतदान की तारीख तय कर दी है। इसके साथ ही प्रत्याशियों को लेकर कयास भी लगाए जाने लगे हैं। भाजपा को चार और कांग्रेस को एक सीट के लिए प्रत्याशी तय करना है। भाजपा के लिए बडा संकट दिल्ली के नेताओं के नाम को लेकर है। संगठन चाहकर भी दिल्ली की बात को टाल नहीं सकता। लिहाजा माना जा रहा है कि कम से कम दो सीटों पर तो दिल्ली के नेताओं के नाम सामने आएंगे। इसके बाद दो सीटों पर प्रदेश के नेताओं को स्थान मिल सकता है। फिलहाल इस बात की अटकलें संगठन में हैं। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव को देखते हुए ही पार्टी राज्यसभा का प्रत्याशी चयन करेगी। वहीं कांग्रेस को एक सीट पर प्रत्याशी का चयन करना है। इसके लिए कांग्रेस की ओर से प्रदेश के किसी एक नेता का नाम ही तय किया जा सकता है। फिलहाल अटकलें इस बात की है कि कांग्रेस के कुछ नेता पहले से ही इस बार एससी वर्ग को महत्व देने की बात कह रहे हैं। वैसे पार्टी की ओर से रिक्त होने वाली इस सीट पर वर्तमान में ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व रहा है। इसके चलते माना जा रहा है कि कांग्रेस फिर से ओबीसी वर्ग के किसी नेता का नाम राज्यसभा के लिए तय कर दे। सूत्रों की माने तो कांग्रेस में अंदरूनी तौर पर दो नाम ओबीसी वर्ग से चल रहे हैं। कहा जा रहा है कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरूण यादव को कांग्रेस प्रत्याशी बना सकती है। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि खंडवा-बुरहानपुर संसदीय सीट पर लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी चयन में किसी तरह की बाधा ना हो। इस सीट पर उपचुनाव के दौरान अरूण यादव की नाराजगी को देखते हुए पार्टी उन्हें प्रत्याशी बना सकती है।
पांचों सीटों पर प्रत्याशी चयन को लेकर दोनों ही दलों का जोर लोकसभा चुनाव को देखते हुए ही रहेगा। माना जा रहा है कि दोनों ही दल प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को बैठाने का काम करेंगे।
गौरतलब है क राज्य विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। 5 पांच सीटों के लिए चुनाव होने हैं। फार्मूले के अनुसार 39 विधायक एक सदस्य को चुनेंगे। वर्तमान में भाजपा के पास 163 विधायक हैं। विधानसभा में दोनों दलों के सदस्यों की संख्या के आधार पर इनमें चार सीटें भाजपा और एक कांग्रेस को मिलेंगी। इन सीटों के लिए चुनाव फरवरी में होंगे।
इनकी सीटें हो रही खाली
राज्यसभा सदस्यों में भाजपा की ओर से अजय प्रताप, कैलाश सोनी, धर्मेन्द्र प्रधान, एल.मुरुगन और कांग्रेस की ओर से राजमणि पटेल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य राजमणि पटेल ओबीसी वर्ग से आते हैं। इस लिहाज से कांग्रेस इसी वर्ग को फिर से साधने का प्रयास करेगी। वहीं भाजपा की ओर से फिलहाल दिल्ली के निर्देशों का इंतजार है। माना जा रहा है कि दिल्ली से कितने नाम तय होते हैं, उसके बाद ही प्रदेश के नेताओं के नाम पर विचार किया जाएगा।
राज्यसभा की रिक्त होने वाली प्रदेश की पांच सीटों के लिए आज चुनाव आयोग ने मतदान की तारीख तय कर दी है। इसके साथ ही प्रत्याशियों को लेकर कयास भी लगाए जाने लगे हैं। भाजपा को चार और कांग्रेस को एक सीट के लिए प्रत्याशी तय करना है। भाजपा के लिए बडा संकट दिल्ली के नेताओं के नाम को लेकर है। संगठन चाहकर भी दिल्ली की बात को टाल नहीं सकता। लिहाजा माना जा रहा है कि कम से कम दो सीटों पर तो दिल्ली के नेताओं के नाम सामने आएंगे। इसके बाद दो सीटों पर प्रदेश के नेताओं को स्थान मिल सकता है। फिलहाल इस बात की अटकलें संगठन में हैं। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव को देखते हुए ही पार्टी राज्यसभा का प्रत्याशी चयन करेगी। वहीं कांग्रेस को एक सीट पर प्रत्याशी का चयन करना है। इसके लिए कांग्रेस की ओर से प्रदेश के किसी एक नेता का नाम ही तय किया जा सकता है। फिलहाल अटकलें इस बात की है कि कांग्रेस के कुछ नेता पहले से ही इस बार एससी वर्ग को महत्व देने की बात कह रहे हैं। वैसे पार्टी की ओर से रिक्त होने वाली इस सीट पर वर्तमान में ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व रहा है। इसके चलते माना जा रहा है कि कांग्रेस फिर से ओबीसी वर्ग के किसी नेता का नाम राज्यसभा के लिए तय कर दे। सूत्रों की माने तो कांग्रेस में अंदरूनी तौर पर दो नाम ओबीसी वर्ग से चल रहे हैं। कहा जा रहा है कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरूण यादव को कांग्रेस प्रत्याशी बना सकती है। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि खंडवा-बुरहानपुर संसदीय सीट पर लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी चयन में किसी तरह की बाधा ना हो। इस सीट पर उपचुनाव के दौरान अरूण यादव की नाराजगी को देखते हुए पार्टी उन्हें प्रत्याशी बना सकती है।
पांचों सीटों पर प्रत्याशी चयन को लेकर दोनों ही दलों का जोर लोकसभा चुनाव को देखते हुए ही रहेगा। माना जा रहा है कि दोनों ही दल प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को बैठाने का काम करेंगे।
गौरतलब है क राज्य विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। 5 पांच सीटों के लिए चुनाव होने हैं। फार्मूले के अनुसार 39 विधायक एक सदस्य को चुनेंगे। वर्तमान में भाजपा के पास 163 विधायक हैं। विधानसभा में दोनों दलों के सदस्यों की संख्या के आधार पर इनमें चार सीटें भाजपा और एक कांग्रेस को मिलेंगी। इन सीटों के लिए चुनाव फरवरी में होंगे।
इनकी सीटें हो रही खाली
राज्यसभा सदस्यों में भाजपा की ओर से अजय प्रताप, कैलाश सोनी, धर्मेन्द्र प्रधान, एल.मुरुगन और कांग्रेस की ओर से राजमणि पटेल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य राजमणि पटेल ओबीसी वर्ग से आते हैं। इस लिहाज से कांग्रेस इसी वर्ग को फिर से साधने का प्रयास करेगी। वहीं भाजपा की ओर से फिलहाल दिल्ली के निर्देशों का इंतजार है। माना जा रहा है कि दिल्ली से कितने नाम तय होते हैं, उसके बाद ही प्रदेश के नेताओं के नाम पर विचार किया जाएगा।

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