रविवार, 10 दिसंबर 2023

प्रदेश को सोमवार को मिल जाएगा अगला मुख्यमंत्री

विधायक दल की बैठक में लगेगी मोहर, दिनभर लगते रहे कयास


भोपाल। मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर कल सोमवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में किसी एक नाम पर मोहर लग जाएगी। प्रदेश भाजपा कार्यालय में नियुक्त किए पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में भाजपा के विधायक इस नाम पर मोहर लगाएंगे। बैठक को लेकर भाजपा में आज सभी तैयारियां पूरी हो गई है। अधिकांश विधायक भी भोपाल पहुंच गए हैं।
जानकारी के अनुसार कल सोमवार सुबह 11 बजे भाजपा के तीनों पर्यवेक्षक पार्टी कार्यालय पहुंचेंगे। पर्यवेक्षकों के आने के बाद शाम को चार बजे बैठक में सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री का नाम तय होगा। बैठक में पर्यवेक्षकों के अलावा केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, अश्विनी वैष्णव समेत प्रदेश के पदाधिकारी भी शामिल होंगे। कल की बैठक में भाजपा मिशन 2024 का आगाज भी करेगी। दिल्ली से नियुक्त केंद्रीय पर्यवेक्षक हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, भाजपा ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष के लक्ष्मण और सचिव आशा लाकड़ा विधायकों से वन टू वन चर्चा भी करेंगे। बैठक के पहले सामूहिक लंच और फोटो सेशन होगा। इसके माध्यम से विधायक एकजुटता दिखाएंगे।   नवनिर्वाचित विधायकों की पर्यवेक्षक के साथ बैठक से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने विधायकों से बातचीत की है। वर्चुअली इस बातचीत में विधायकों को कई अहम निर्देश दिए गए हैं।  इस बातचीत के बाद प्रदेश में सियासी पारा भी चढ़ गया है।
वहीं दूसरी ओर भोपाल पहुंचे भाजपा विधायकों में से अधिकांश ने भाजपा कार्यालय से दूरी बनाए रखी, बल्कि वे अपने नेताओं के संपर्क में रहे हैं। इससे यह संदेश भी दिया जा रहा है कि कौन विधायक किस नेता के पक्ष में हैं। वैसे अधिकांश विधायक भोपाल पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मुलाकात करते रहे हैं।
इन नामों की चर्चा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर, प्रहलाद पटेल, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सामने आ रहा है।
20 साल से प्रदेश को मिल रहा है ओबीसी मुख्यमंत्री
पिछले 20 साल से मध्य प्रदेश में ओबीसी मुख्यमंत्री ही चुनकर आते रहे हैं। 2003 में उमा भारती जो लोधी जाति से आती हैं, वे ओबीसी मुख्यमंत्री बनी थीं। उनके पद छोड़ देने के बाद बाबूलाल गोर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे जो ओबीसी जाति से आते हैं. उनके जाने के बाद शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाया गया और 18 साल तक वे मुख्यमंत्री रहे और वे ओबीसी में आने वाली किरार जाति से आते हैं। उमा भारती से पहले मध्य प्रदेश में क्षत्रिय वर्ग से आने वाले दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। इस प्रकार 20 साल से भाजपा ने मध्यप्रदेश को ओबीसी वर्ग का ही मुख्यमंत्री दिया है।
 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें