पर्यवेक्षकों को दिए मैदान में सक्रिय होने के निर्देश
भोपाल। विधानसभा चुनाव में मिली हार को भुलाकर अब कांग्रेस लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट रही है। कांग्रेस ने एक बार फिर कार्यकर्ताओं में जोश भरने की रणनीति पर काम करेगी। लोकसभावार नियुक्त किए गए पर्यवेक्षकों को मैदान में उतरने के निर्देश प्रदेश कांग्रेस ने दिए हैं।
मध्यप्रदेश में लोकसभा की 29 सीटों में से एक सीट पर वर्तमान में कांग्रेस का कब्जा है। बाकी सभी 28 सीटें भाजपा के पक्ष में है। विधानसभा में मिली करारी हार के बाद अब कांग्रेस लोकसभा सीटों पर जीत की संख्या को बढ़ाना चाहती है। दिल्ली में हुई बैठक के बाद वरिश्ठ नेताओं का पूरा फोकस अब प्रदेश में लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कार्यकर्ता को सक्रिय करने का है। इसके लिए लोकसभा वार नियुक्त किए गए पर्यवेक्षकों को सक्रिय किया जा रहा है। कांग्रेस का फोकस अन्य सीटों के साथ-साथ अजा वर्ग की आरक्षित विधानसभा सीटों पर ज्यादा है। इस वर्ग की आरक्षित विधानसभा की 35 सीटों में से कांग्रेस के पक्ष में मात्र 9 सीटें ही आई है। इसके चलते कांग्रेस को 26 विधानसभा क्षेत्रों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। वहीं आदिवसी वर्ग की आरक्षित 47 सीटों में से कांग्रेस को 22 सीटें हासिल हुई है। हालांकि पिछले 2018 के विधानसभा चुनाव की अपेक्षा इस वर्ग की सीटें भी घटी है। कांग्रेस को मालवा और महाकौशल में तो इस वर्ग की आरक्षित सीटों पर अच्छा फायदा हुआ है। मगर विंध्य और निमाड़ अंचल की इस वर्ग की आरक्षित सीटों पर उसे नुकसान हुआ है। अजा और अजजा वर्ग की इन सीटों पर हुए कांग्रेस को नुकसान को देखते हुए अब कांग्रेस नेता इस वर्ग को साधते हुए लोकसभा चुनाव की मैदानी तैयारियों में जुटे हैं।
निराश कार्यकर्ता में जोश भरेंगे पर्यवेक्षक
बता दें की 15 दिसंबर के बाद लोकसभावार बनाए गए पर्यवेक्षक आएंगे और निराश कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे। दिल्ली से आने वाले सभी पर्यवेक्षक बूथ स्तर पर बैठक करेंगे। इसी के साथ कार्यकर्ताओं की बैठक में पर्यवेक्षक उनकी कमियों को दूर करेंगे और प्रदेश के सभी जिलों में कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक की रिपोर्ट वरिष्ठ नेतृत्व को देंगे। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मध्य प्रदेश में 29 सीटों में से सिर्फ एक सीट मिली थी। इसलिए पिछली बार हुई हार से सबक लेते हुए पार्टी इस बार बहुत पहले ही लोकसभा की तैयारी में जुट गई है।

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