शुक्रवार, 15 दिसंबर 2023

मंत्रिमंडल गठन को लेकर शुरू हुआ मंथन

नए चेहरों को शामिल करने की कवायद, सांसदों पर संशय


भोपाल। प्रदेश में नए मंत्रिमंडल गठन को लेकर मंथन ष्शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस संबंध में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी ष्शर्मा, संगठन महामंत्री हितानंद ष्शर्मा के साथ बैठक कर चर्चा की है। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल में अधिकांश नए चेहरों को मौका मिल सकता है। हालांकि पुराने चेहरे भी ष्शामिल किए जाएंगे, जिससे नए और पुरानों के बीच सामंजस्य बना रहे। फिलहाल यह चर्चा प्रदेश स्तर पर हुई है। इसके बाद किसे मंत्रिमंडल में ष्शामिल किया जाए और किसे नहीं उसका  चयन दिल्ली में होगा। 

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ष्मुख्यमंत्री पद की ष्शपथ लेने के बाद सरकार के कामों को गति देना ष्शुरू कर दिया है। साथ ही नए मंत्रिमंडल गठन को लेकर भी मंथन तेज हुआ है। उन्होंने मंत्रिमंडल गठन को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के साथ बैठक कर नामों पर चर्चा की है। हालांकि मंत्रिमंडल में किसे जगह मिलेगी, यह तो दिल्ली से तय होगा। मंत्रियों के चयन में केंद्रीय नेतृत्व कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता है। संभावना है कि अगर गुजरात फॉर्मूला लागू हुआ तो सीनियर नेताओं की जगह नए चेहरों को मौका मिलेगा। माना जा रहा है कि जिस तरह से मुख्यमंत्री के चयन में मोदी-शाह ने चौंकाया है। उसी तरह मंत्री मंडल में नए चेहरों को मौका देकर चौंका सकते हैं। एक या दो बार के विधायकों को भी मंत्री बनाया जा सकता है। 

मंत्री मंडल विस्तार में 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री बने जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल के चयन में भी ब्राह्मण-दलित कार्ड खेला गया है। 

विधायक बने पूर्व सांसदों को भी मिल सकता है मौका

विधायक बने तीन पूर्व सांसद राकेश सिंह, रावउदय प्रताप सिंह और रीति पाठक को मंत्रिमंडल में जगह मिलने को लेकर कयास लगाए जा रहे है। वहीं राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल मंत्री बनेंगे या नहीं, इसको लेकर सवाल है। जानकारों की मानें तो भाजपा ने इन दोनों नेताओं से जूनियर को मुख्यंत्री और उप मुख्यमंत्री बना दिया। ऐसे में दोनों नेता मंत्री बनना पसंद करेंगे, इसकी संभावना नहीं है।

विस में उपाध्यक्ष पद अपने पास रखेगी भाजपा!

विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नरेन्द्र सिंह तोमर का नाम पहले ही तय हो गया है। इसके बाद उपाध्यक्ष पद के लिए कयास लगाए जा रहे हैं। कमलनाथ सरकार गिरने के बाद से शिवराज सरकार में यह पद रिक्त रहा है। इसके पहले कांग्रेस सरकार ने अध्यक्ष के साथ-साथ उपाध्यक्ष पद भी अपने ही दल के नेता को दिया था। इसके चलते एक बार फिर उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव की स्थिति बनती नजर आ रही है। वैसे पूर्व में परंपरा यह रही है कि सत्ता पक्ष उपाध्यक्ष पद पर विपक्षी दल के नेता को आसीन करता रहा। मगर कमलनाथ सरकार में टूटी इस परंपरा को देख भाजपा पहले से ही नाराज चल रही है। इसे देखते हुए माना जा रहा है कि भाजपा अपने किसी वरिश्ठ विधायक को इस पद पर नियुक्ति करा दे। 


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