नामों पर फिर से हो रहा मंथन, वरिष्ठों को नाराज नहीं करना चाहती भाजपा
भोपाल। प्रदेश में मुख्यमंत्री और दो उप मुख्यमंत्रियों के ष्शपथ लेने के बाद से मंत्रिमंडल गठन को लेकर भाजपा उलझ गई है। दिल्ली में नेताओं के बीच जातीय और क्षेत्रीय समीकरण नहीं बैठ पा रहे है, जिसके चलते मामला उलझा गया है। लोकसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने वरिष्ठ विधायकों की अनदेखी भी नहीं करना चाहते, जिसके चलते अब विधानसभा स़त्र के खत्म होने के बाद ही प्रदेश में मंत्रीमंडल का गठन होने के आसार नजर आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री डा मोहन यादव के मंत्रिमंडल गठन को लेकर यह उम्मीद थी कि आज 19 दिसंबर को उनके मंत्री ष्शपथ ले लेंगे,मगर सोमवार से यह मामला उलझ गया। पहले तो पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दिल्ली बुलाकर उनकी राय भी लेना उचित समझा और फिर मामला जाति और क्षेत्रीय संतुलन के चलते उलझ गया। सूत्रों की माने तो पहले दिल्ली के नेता सभी 29 संसदीय क्षेत्रों से एक-एक मंत्री बनाना चाह रहे थे, मगर इसमें वरिश्ठ विधायकों खासकर सांसद से विधायक बने नेताओं की उपेक्षा होती नजर आई, इसके चलते मामला अटक गया। अब बताया जा रहा है कि पार्टी ने तय किया है कि फिलहाल 15 से 21 मंत्रियों को ही ष्शपथ दिलाई जाए और ष्शेश स्थानों पर लोकसभा चुनाव के बाद विस्तार कर विधायकों को मंत्री बनाया जाए। साथ ही लोकसभा चुनाव को देखते हुए मंत्रिमंडल का गठन किया जाए, ताकि सभी 29 सीटों पर मंत्रिमंडल गठन का प्रभाव नजर आए।
सूत्रों की माने तो सांसद से विधायक बने विधायकों को भी वरिश्ठ नेता मंत्री बनाना चाहते हैं। खासकर प्रहलाद पटेल को मंत्रिमंडल में स्थान देना चाहते हैं, मगर पटेल खुद इससे दूरी बनाते नजर आ रहे थे। वे वरिश्ठता के चलते मंत्रिमंडल में स्थान नहीं चाह रहे थे। ठीक इसी तरह आकाश विजयवर्गीय का टिकट काटकर कैलाश विजयवर्गीय को चुनाव मैदान में उतारा था, उन्हें भी मंत्री बनाने के पक्ष में दिल्ली के नेता नजर आ रहे हैं, मगर विजयवर्गीय भी मंत्री नहीं बनना चाह रहे हैं। इसके चलते अब इस बात पर फिर से मंथन किया जा रहा है। वैसे दिल्ली में नेताओं ने साफ कर दिया है कि इन दो नामों पर किसी तरह विचार नहीं किया जाए, बल्कि इन्हें उचित स्थान देकर मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए।
वरिष्ठ विधायकों, पूर्व मंत्री के बीच भी पेंच
मंत्रिमंडल में वरिष्ठ विधायकों खासकर तीन बार से ज्यादा विधायक रहे, लेकिन मंत्री नहीं बने ऐसे विधायकों और पूर्व मंत्रियों को लेकर भी पेंच उलझा हुआ है। संगठन और वरिष्ठ नेता तय नहीं कर पा रहे हैं कि इनमें से कितनों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। खासकर पूर्व मंत्रियों में कुछ मंत्री वरिश्ठता के चलते मंत्री बनने की चाहत रखते हैं, ऐसे में उन्हें किस तरह दूर रखा जाए। इन सब बातों को लेकर एक बार फिर दिल्ली में नेता मंथन में जुटे हैं, ताकि किसी को नाराज ना किया जाए। नेताओं की चिंता लोकसभा चुनाव को देखते हुए है। वे किसी भी अंचल के वरिश्ठ नेता तो नाराज नहीं करना चाहते हैं।

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