भोपाल। प्रदेश में नए साल में हर जिले में साइबर तहसी
ल होगी। इस व्यवस्था का ष्शुभारंभ 1 जनवरी को खरगोन जिले से किया जाएगा। साइबर तहसील होने से राजस्व विभाग के प्रकरणों का निराकरण जल्द होगा। वर्तमान में यह परियोजना राज्य के 12 जिलों में चल रही है।
प्रदेश में राजस्व प्रकरणों का निराकरण अत्यंत कम समय में हो जाएगा। भू-अभिलेखों में अमल के बाद सभी भू-अभिलेखों एवं आदेशों की सत्यापित प्रतिलिपि सम्बंधित पक्षकार को मिल सकेगी। अब अनावश्यक रूप से लंबित रहने वाले प्रकरणों का कम से कम समय में गुणवत्तापूर्ण निराकरण हो सकेगा। साइबर तहसीलों में औसत 15 से 17 दिनों का समय लग रहा है, जो पुरानी मैन्युअल प्रक्रिया में लगने वाले 60 दिनों की तुलना में बेहद कम है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रदेश में हर साल नामांतरण के लगभग 14 लाख प्रकरण पंजीबद्ध होते हैं। इनमें से विक्रय विलेखों के निष्पादन के बाद नामांतरण के लिए दर्ज होने वाले प्रकरणों की संख्या 8 लाख होती है। इसमें संपूर्ण खसरा के क्रय-विक्रय से संबंधित लगभग 2 लाख अविवादित नामांतरण प्रकरण पंजीबद्ध किये जाते हैं। इस प्रकार के प्रकरणों में 15 दिन की समय-सीमा में बिना आवेदन दिए, पेपरलेस, फ़ेसलेस, ऑनलाइन नामांतरण और भू अभिलेखों को अपडेट करने के लिए साइबर तहसील स्थापित की गयी है।
गौरतलब है कि साइबर तहसील परियोजना फिलहाल प्रदेश के 12 जिलों सीहोर, दतिया, इंदौर, सागर, डिण्डौरी, हरदा, ग्वालियर, आगर-मालवा, श्योपुर, बैतूल, विदिशा एवं उमरिया में चल रही है।

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