
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि देश के अलग-अलग राज्यों में रह रहे दूसरे राज्यों के छात्रों और मजदूरों को पहले यह भरोसा दिलाएं कि वे जहां हैं, वहां सुरक्षित हैं. उनके रहने और खाने की व्यवस्था की जाए.
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में छात्रों और मजदूरों की लाक डाउन के चलते हो रही परेशानी की ओर ध्यान आकर्षित किया है. कमलनाथ ने पत्र में लिखा है कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों में हम आपके साथ हैं तथा अपनी पूरी क्षमताओं के साथ इस विभीषिक के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार हैं. इसी संदर्भ में मैं आपके संज्ञान में यह बात लाना चाहता हूं कि इस वक्त मध्यप्रदेश सहित समूचे भारत के विभिन्न राज्यों में पलायन करने वाले मजदूरों एवं छात्रों के सामने भीषण संकट खड़ा हुआ है. ये जहां रहते हैं या काम करते हैं वहां उन्हें जीवन की बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही है, ही कोई उनहें भरोसा दिलाने वाला है. इन प्रवासी मजदूरों और छात्रों को पहले तो यह भरोसा दिलाएं कि वे जहां हैं उन्हेंं उस शहर या राज्य में रहने में किसी तरह की तकलीफ नहीं होगी, उनके खाने और रहने के इंतजाम किया जाएगा.
पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा कि राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करके सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रहने और उनके खाने के लिए स्कूलों और धर्मशालाओं का प्रबंध किया जाए. अपने घर जाने वाले लोगों के लिए तीन माह का राशन और 7500 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से दो माह के पैसे दिए जाएं. इस पहल को आधार, बीपीएल कार्ड या किसी श्रमिक पंजीयन से न जोड़ा जाए. उन्होंने पत्र में लिखा है कि एक सक्रिय नियंत्रण कक्ष हर राज्य में खाद्य असुरक्षा, भुखमरी और पलायन के प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए बनाया जाए. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कि इस आपात स्थिति के लिए देश तैयार नहीं था, इसलिए हम इन मजदूरों, छात्रों को बेसहारा नहीं छोड़ सकते, हर हाल में उनकी मदद करनी होगी.
ताली थाली के लिए 3 दिन, लाक डाउन के लिए 3 घंटे
मध्यप्रदेश कांग्रेस ने ट्वीट कर लाक डाउन करने के पहले समय न देने पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस द्वारा ट्वीट कर कहा है कि हमें एक दिन के कर्फ्यू और 5 मिनट के ताली, थाली के लिए 3 दिन दिए गए हैं, और 21 दिन के लाकडाउन के लिए केवल 3 घंटे. आखिर ये जनता को क्या समझते हैं. 16 तारीख को कोरोना बीजेपी के लिये डरोना था, जब 23 तारीख को मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बन गई तब कोरोना के लिये फुर्सत मिली, पर तब तक देर हो चुकी थी.


















