नाराज राज्यपाल देरी से पहुंचे विधानसभा, नहीं पढ़ा पूरा अभिभाषण
फ्लोर टेस्ट को लेकर मचे घमासान के बीच आज राज्य विधानसभा का बजट सत्र शुरु होने के ठीक पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र लिखकर कहा कि आज फ्लोर टेस्ट कराना अलोकतांत्रिक है. उनका कहना था कि जब तक बंदी विधायक वापस नहीं आते तब तक विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का मतलब नहीं बनता है. मुख्यमंत्री का पत्र मिलने के बाद राज्यपाल लालजी टंडन नाराज भी हुए और उन्होंने विधि विशेषज्ञों से राय ली, इसके बाद वे विधानसभा पहुंचे थे. राज्यपाल तय समय से विधानसभा भी नहीं पहुंचे और पूरा अभिभाषण भी उन्होंने नहीं पढ़ा था.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 6 पेज के अपने पत्र में लिखा कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा कांग्रेस पार्टी के कई विधायकों को बंदी बनाकर कर्नाटक पुलिस के नियंत्रण में रखा गया है और उन्हें विभिन्न प्रकार के बयान देने के लिए मजबूर किया जा रहा है. कमलनाथ ने लिखा है कि ऐसी परिस्थितियों में किसी भी फ्लोर टेस्ट का कोई भी औचित्य नहीं होगा और ऐसा करना पूर्ण रूप से अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक होगा. कमलनाथ ने लिखा है कि फ्लोर टेस्ट का औचित्य तभी है जब सभी विधायक बंदिश से बाहर हों और पूर्ण पूर से दबावमुक्तहों.
कमलनाथ ने अपने पत्र में लिखा कि राज्यपाल विधानसभा अध्यक्ष का मार्गदर्शक या परामर्शदाता नहीं है. राज्यपाल विधानसभा अध्यय से यह अपेक्षा नहीं कर सकता कि अध्यक्ष उस तरीके से सदन में कार्य करें जो राज्यपाल संवैधानिक दृष्टि से उचित समझता है. कमलनाथ ने लिखा है कि राज्यपाल तथा विधानसभा अध्यक्ष दोनों के अपने-अपने स्वतंत्र संवैधानिक जिम्मेदारियां हैं. मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को लिखा है कि विधानसभा राज्यपाल के नीचे काम नहीं करती और कुल मिलाकर राज्यपाल विधानसभा के लोकपाल की तरह काम नहीं कर सकते.
इससे पहले राज्यपाल ने रविवार की रात करीब 12 बजे मुख्यमंत्री कमलनाथ को तलब किया था और सोमवार को ही फ्लोर टेस्ट कराये जाने का निर्देश दिए थे. तब कमलनाथ ने कहा था कि सदन में वोटिंग किस तरह से और कब होगी, यह सब स्पीकर तय करेंगे और मैं फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हूं. उन्होंने कहा था कि जब तक बेंगलुरू से बंधक विधायक लौटकर नहीं आयेंगे, फ्लोर टेस्ट नहीं हो सकेगा. इसके अलावा राज्यपाल की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए दूसरे पत्र में निर्देश दिए गए थे कि सरकार बहुमत साबित करने के लिए विधायकों के हाथ उठवाएं. राज्यपाल ने कहा था कि विधानसभा का इलेक्ट्रानिक वोटिंग सिस्टम पूरी तरह से दुरुस्त नहीं है और ऐसे में निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान की प्रक्रिया विधायकों के हाथ उठवाकर ही पूरी कराई जाए.
पत्र के बाद राज्यपाल ने ली विशेषज्ञों से सलाह
मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा राज्यपाल को पत्र लिखने के बाद राज्यपाल लालजी टंडन खफा नजर आए. वे विधानसभा में अभिभाषण के लिए भी देर से पहुंचे. इस बीच उन्होंने विधि विशेषज्ञों की सलाह ली और वे विधानसभा पहुंचे. विधानसभा में भी उन्होंने अपना अभिभाषण पूरा नहीं पड़ा और खत्म कर दिया. इसके बाद वे सीधे राजभवन लौट आए.
भाजपा लाए अविश्वास प्रस्ताव हम साबित करेंगे बहुमत
विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण के बाद कोरोना वायरस के चलते सदन की कार्रवाई 26 मार्च तक स्थगित कर दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा को लगता है कि उसके पास बहुमत है, तो वह अविश्वास प्रस्ताव लाए, उन्हें किसी ने रोका नहीं है. हम अपना बहुमत साबित करेंगे. उन्होंने कहा कि भाजपा ने उनके विधायकों को बंदी बनाया है और सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की है. उन्होंने फिर भरोसा जताया कि अगर फ्लोर टेस्ट होता है तो वे अपना बहुमत साबित करेंगे.
भाजपा प्रधानमंत्री की बात से सहमत है या नहीं
मध्यप्रदेश विधानसभा 26 मार्च तक स्थगित किए जाने के बाद बयानबाजी का दौर तेज हो गया है. राज्य के वित्त मंत्री ने भाजपा पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि कोरोना वायरस को लेकर एहतियात बरती जाए.इसको लेकर केन्द्र ने गाइड लाइन भी जारी की है. इस स्थिति में सियासत करना उचित नहीं है.
कड़ी सुरक्षा के बीच बसों से विधानसभा पहुंचे विधायक
राज्य विधानसभा के बजट सत्र के शुरु होने के पहले आज सुबह भाजपा और कांग्रेस के विधायक कड़ी सुरक्षा के बीच दो-दो बसों से विधानसभा परिसर पहुंचे. कोरोना को देखते हुए विधायक अपने मुंह पर मास्क लगाए हुए थे. भाजपा विधायकों के साथ एक बस में स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और दूसरी बस में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पहुंचे थे, जहां नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने विधायकों का स्वागत किया. वहीं कांग्रेस विधायकों के साथ मंत्री जयवर्धन सिंह और सचिन यादव बसों से विधानसभा पहुंचे थे.
फ्लोर टेस्ट को लेकर मचे घमासान के बीच आज राज्य विधानसभा का बजट सत्र शुरु होने के ठीक पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र लिखकर कहा कि आज फ्लोर टेस्ट कराना अलोकतांत्रिक है. उनका कहना था कि जब तक बंदी विधायक वापस नहीं आते तब तक विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का मतलब नहीं बनता है. मुख्यमंत्री का पत्र मिलने के बाद राज्यपाल लालजी टंडन नाराज भी हुए और उन्होंने विधि विशेषज्ञों से राय ली, इसके बाद वे विधानसभा पहुंचे थे. राज्यपाल तय समय से विधानसभा भी नहीं पहुंचे और पूरा अभिभाषण भी उन्होंने नहीं पढ़ा था.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 6 पेज के अपने पत्र में लिखा कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा कांग्रेस पार्टी के कई विधायकों को बंदी बनाकर कर्नाटक पुलिस के नियंत्रण में रखा गया है और उन्हें विभिन्न प्रकार के बयान देने के लिए मजबूर किया जा रहा है. कमलनाथ ने लिखा है कि ऐसी परिस्थितियों में किसी भी फ्लोर टेस्ट का कोई भी औचित्य नहीं होगा और ऐसा करना पूर्ण रूप से अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक होगा. कमलनाथ ने लिखा है कि फ्लोर टेस्ट का औचित्य तभी है जब सभी विधायक बंदिश से बाहर हों और पूर्ण पूर से दबावमुक्तहों.
कमलनाथ ने अपने पत्र में लिखा कि राज्यपाल विधानसभा अध्यक्ष का मार्गदर्शक या परामर्शदाता नहीं है. राज्यपाल विधानसभा अध्यय से यह अपेक्षा नहीं कर सकता कि अध्यक्ष उस तरीके से सदन में कार्य करें जो राज्यपाल संवैधानिक दृष्टि से उचित समझता है. कमलनाथ ने लिखा है कि राज्यपाल तथा विधानसभा अध्यक्ष दोनों के अपने-अपने स्वतंत्र संवैधानिक जिम्मेदारियां हैं. मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को लिखा है कि विधानसभा राज्यपाल के नीचे काम नहीं करती और कुल मिलाकर राज्यपाल विधानसभा के लोकपाल की तरह काम नहीं कर सकते.
इससे पहले राज्यपाल ने रविवार की रात करीब 12 बजे मुख्यमंत्री कमलनाथ को तलब किया था और सोमवार को ही फ्लोर टेस्ट कराये जाने का निर्देश दिए थे. तब कमलनाथ ने कहा था कि सदन में वोटिंग किस तरह से और कब होगी, यह सब स्पीकर तय करेंगे और मैं फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हूं. उन्होंने कहा था कि जब तक बेंगलुरू से बंधक विधायक लौटकर नहीं आयेंगे, फ्लोर टेस्ट नहीं हो सकेगा. इसके अलावा राज्यपाल की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए दूसरे पत्र में निर्देश दिए गए थे कि सरकार बहुमत साबित करने के लिए विधायकों के हाथ उठवाएं. राज्यपाल ने कहा था कि विधानसभा का इलेक्ट्रानिक वोटिंग सिस्टम पूरी तरह से दुरुस्त नहीं है और ऐसे में निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान की प्रक्रिया विधायकों के हाथ उठवाकर ही पूरी कराई जाए.
पत्र के बाद राज्यपाल ने ली विशेषज्ञों से सलाह
मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा राज्यपाल को पत्र लिखने के बाद राज्यपाल लालजी टंडन खफा नजर आए. वे विधानसभा में अभिभाषण के लिए भी देर से पहुंचे. इस बीच उन्होंने विधि विशेषज्ञों की सलाह ली और वे विधानसभा पहुंचे. विधानसभा में भी उन्होंने अपना अभिभाषण पूरा नहीं पड़ा और खत्म कर दिया. इसके बाद वे सीधे राजभवन लौट आए.
भाजपा लाए अविश्वास प्रस्ताव हम साबित करेंगे बहुमत
विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण के बाद कोरोना वायरस के चलते सदन की कार्रवाई 26 मार्च तक स्थगित कर दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा को लगता है कि उसके पास बहुमत है, तो वह अविश्वास प्रस्ताव लाए, उन्हें किसी ने रोका नहीं है. हम अपना बहुमत साबित करेंगे. उन्होंने कहा कि भाजपा ने उनके विधायकों को बंदी बनाया है और सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की है. उन्होंने फिर भरोसा जताया कि अगर फ्लोर टेस्ट होता है तो वे अपना बहुमत साबित करेंगे.
भाजपा प्रधानमंत्री की बात से सहमत है या नहीं
मध्यप्रदेश विधानसभा 26 मार्च तक स्थगित किए जाने के बाद बयानबाजी का दौर तेज हो गया है. राज्य के वित्त मंत्री ने भाजपा पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि कोरोना वायरस को लेकर एहतियात बरती जाए.इसको लेकर केन्द्र ने गाइड लाइन भी जारी की है. इस स्थिति में सियासत करना उचित नहीं है.
राज्य विधानसभा के बजट सत्र के शुरु होने के पहले आज सुबह भाजपा और कांग्रेस के विधायक कड़ी सुरक्षा के बीच दो-दो बसों से विधानसभा परिसर पहुंचे. कोरोना को देखते हुए विधायक अपने मुंह पर मास्क लगाए हुए थे. भाजपा विधायकों के साथ एक बस में स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और दूसरी बस में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पहुंचे थे, जहां नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने विधायकों का स्वागत किया. वहीं कांग्रेस विधायकों के साथ मंत्री जयवर्धन सिंह और सचिन यादव बसों से विधानसभा पहुंचे थे.

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