रविवार, 29 मार्च 2020

क्वारेंटाइन आइसोलेशन से मना किया तो दर्ज होगी एफआईआर


कोरोना वायरस के संदिग्ध या फिर पाजीटिव मरीज ने क्वारेंटाइन आइसोलेशन से मना किया तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी. जिला कलेक्टर को इसके अधिकार दिए गए हैं. इसके तहत संस्था, परिसर या मकान मालिक क्वारेंटाइन आइसोलेशन से मना नहीं कर सकेगा. अगर ऐसा किया गया तो उसके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी.
प्रदेश में कोरोना वायरस से निपटने के सरकार पूरी तरह से मुस्तैद है. इसके तहत मध्यप्रदेश डिसीसिस एक्ट 2020 में प्रावधान किए गए हैं, जिसके तहत नियम भी बनाए गए हैं, जिसे लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया है. यह नोटिफिकेशन अगले साल तक के लिए लागू होगा. नोटिफिकेशन में उल्लेखित प्रावधानों के उल्लंघन पर आईपीसी की धाराओं के तहत संबंधित के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. एक्ट में कई प्रावधान किए गए हैं.
इन प्रावधानों में कोई भी नर्सिंग होम क्लीनिक और अन्य केंद्रों को कोविड-19 का संदिग्ध और पाजिटिव प्रकरण की सूचना आते ही जिले की एकीकृत बीमारी सतर्कता एकता इकाई को देना होगी. कोविड-19 को लेकर भारत सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी मध्यप्रदेश में भी लागू मानी जाएगी. इसके अलावा कलेक्टर की अध्यक्षता में इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए जिला आपदा प्रबंधन समिति बनेगी. कलेक्टर आपदा प्रबंधन के लिए विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगा सकेंगे.
स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त, डीएमई, कलेक्टर की अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति या संस्था कोविड-19 के प्रचार-प्रसार के लिए प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में जानकारी नहीं देगा. सभी क्षेत्र के सभी विभागों के कर्मचारी रोकथाम के लिए कलेक्टर, एसडीएम और स्वास्थ्य विभाग द्वारा तय अधिकारी की सेवा में रहेंगे.

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