शुक्रवार, 13 मार्च 2020

मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को लिखे पत्र में कही यह बात


मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात कर उन्हें तीन पेज का पत्र सौंपा है. इस पत्र में उन्होंने कहा है कि मैं  भाजपा के अनैतिक, कदाचार और गैरकानूनी कृत्य की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने पर बाध्य हूं. अपने पहले  प्रयास में  विधायकों को जबरदस्ती बेंगलुरु ले जाने का नाटक 3 और 4 मार्च  की  आधी रात को शुरू हुआ था, जो सार्वजनिक है. कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने विधायकों को लालच और बलपूर्वक  बंधक बनाकर रखने के प्रयास को विफल कर दिया.
मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा है कि पहले प्रयास  की असफलता के बाद भाजपा ने 8 मार्च को कांग्रेस पार्टी के 19 विधायकों को बेंगलुरु ले जाने के लिए  तीन विशेष हवाई जहाजों का इंतजाम किया तब से 19 विधायक जिसमें से 6 कैबिनेट मंत्री हैं उनसे कोई संपर्क नहीं है और वे भाजपा द्वारा प्रबंध किए गए एक रिसॉर्ट में बंधक है. उनसे किसी को मिलने नहीं दिया गया और न ही उन बंधक 19 विधायकों  के साथ किसी प्रकार का संपर्क हो पाया है.
उन्होंने पत्र में लिखा है कि आश्चर्यजनक रुप से भाजपा के नेता होली के दिन 10 मार्च  को शाम 5 बजे विधानसभा अध्यक्ष के निवास पर पहुंचे और 19 विधायकों के त्याग पत्र उन्हें सौंपा जो जो कांग्रेस के विधायक हैं. इन 19 विधायकों में से कोई भी विधानसभा अध्यक्ष के निवास पर  व्यक्तिगत रुप से त्यागपत्र देने प्रस्तुत नहीं हुआ. असामान्य तौर पर से और व्यवहार में 19 कांग्रेस विधायकों के त्यागपत्र भाजपा के नेताओं द्वारा प्रस्तुत किए गए ना कि स्वयं विधायकों द्वारा. इससे  इस पूरे षडयंत्र और गैरकानूनी कृत्य में भाजपा नेताओं की संलिप्तता प्रदर्शित होती है. इससे संवैधानिक औचित्य  और विधायी प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं. 
राज्यपाल को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा है कि 12 मार्च  को मध्य प्रदेश के दो कैबिनेट मंत्री  जीतू पटवारी और लाखन सिंह यादव,  नारायण सिंह चौधरी के साथ जो कांग्रेस के विधायक  मनोज चौधरी के पिता हैं बंधक विधायकों से से एक  मनोज चौधरी  से मिलने बेंगलुरु पहुंचे. वहां इन तीनों  के साथ भाजपा के गुंडों और कर्नाटक पुलिस बल के सदस्यों द्वारा छीना झपटी की गई और उन्हें गैरकानूनी रुप से हिरासत में ले लिया गया. यह कानून के शासन का मजाक है जब  भाजपा के नेताओं ने षड्यंत्र करके कांग्रेस के विधायकों को बंधक बनाया और चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने के लिए यह  कृत्य किया. इस घटना की कई तस्वीरें और वीडियो उपलब्ध है. इस व्यथित करने वाले वाली परिस्थितियों में प्रजातंत्र की इमारत खतरे में है. पारदर्शी प्रजातांत्रिक प्रक्रिया से विश्वास खो चुका है. इसमें पूरी तरह से जांच पड़ताल और अनुसंधान की जरुरत है ताकि वे लोग जो प्रजातांत्रिक संस्थागत प्रक्रिया का उल्लंघन करने के लिए जिम्मेदार है उजागर हो सके और उन्हें दंडित किया जा सके.
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रजातांत्रिक संस्थागत प्रक्रिया   के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटल है. हम बंधक बनाए हुए कांग्रेस विधायकों के भाजपा द्वारा प्रस्तुत त्यागपत्रों के संबंध में विस्तृत जांच और अनुसंधान की अपेक्षा करते हैं. यह जांच  जल्दी से जल्दी की जाना चाहिए और इस पर कार्रवाई होना चाहिए. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के जिम्मेदार नेता के रूप में मैं विधान सभा में फ्लोर टेस्ट आमंत्रित  करता हूं और 16 मार्च से प्रारंभ हो रहे विधानसभा सत्र में इसका स्वागत करूंगा जो  पहले ही विधानसभा अध्यक्ष द्वारा निश्चित की गई तिथि में अधिसूचित है. यही  पहल है जो इस वर्तमान अशांत परिदृश्य का हल निकालने के लिए संवैधानिक अथारिटी कर सकती  है.
मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को लिखे पत्र में आग्रह किया है कि हम मध्य प्रदेश की जनता को आश्वस्त करते हैं हम प्रजातंत्र और विधायी प्रक्रिया की विजय  और संविधान में उल्लेखित संवैधानिक मूल्यों  की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. हम आपसे (राज्यपाल) निवेदन करते हैं कि वे राज्य के संविधान प्रमुख होने के नाते अपने आफिस का उपयोग कर केंद्रीय गृहमंत्री से बेंगलुरु में बंधक बनाए गए विधायकों को मुक्त करने के लिए कहें.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें