शुक्रवार, 6 मार्च 2020

आर्थिक बदहाली पर पर्दा डालने के लिए नफरत फैला रही भाजपा



केंद्र की भाजपा सरकार ने देश को आर्थिक बदहाली की कगार पर ला खड़ा किया है. आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि देश की जीडीपी में लगातार सात तिमाही से गिरावट दर्ज की गई हो. भारत सरकार द्वारा हाल ही में जारी की गई अक्तूबर-दिसंबर 2019 तिमाही की विकास दर मात्र 4.7 प्रतिशत पर आ गई है. 
यह बात अखिल भारतीय कांग्रेस के प्रवक्ता संजय झा ने आज राजधानी में मीडिया से चर्चा करते हुए कही. उन्होंने कहा कि  बेरोजगारी की वजह से भारत को बहुत बड़ी कीमत सामाजिक संदर्भों में चुकानी पड़ी है. भारत के युवाओं को देश की सरकार अपने कुटिल उद्देश्यों के लिए दिग्भ्रिमित कर देश में अराजकता की स्थिति पैदा कर रही है. एक तरफ समूचा विश्व कोरोना वायरस की परेशानियों से जूझ रहा है तो वहीं भारत की सरकार नियोजित रूप से नफरत का वायरस देश में फैला रही है. आर्थिक प्रगति की अनिवार्य शर्त है सामाजिक सौहार्द. भारत को बांट कर, दंगे कराकर, दलितों पर हमला कर, भारत के प्रबुद्धजनों और युवा छात्रों पर आक्रमण कर देश को आर्थिक प्रगति के पथ पर आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. भाजपा यह भूल जाती है कि हम सिर्फ अर्थव्यवस्था में नहीं रहते, पहले हम एक सामाजिक व्यवस्था में रहते हैं.
 झा ने बताया कि मेन्युफेक्चरिंग सेक्टर पिछले दो क्वाटर से लगातार सिकुड़ता जा रहा है, जबकि कंस्ट्रक्शन और रियल स्टेट सेक्टर मुर्झा रहा है. एनडीए सरकार एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने में नाकामयाब रही है और भारत को एक गंभीर आर्थिक संकट में डाल दिया गया है.  उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार विनाशकारी आर्थिक स्थिति को महत्वहीन बताकर इसे साइक्लिक समस्या बता रही है. जबकि केंद्र सरकार असफलता के मूल मुद्दे को पहचानने में ही असमर्थ है, विशेष रूप से बड़ी डिफाल्टिंग कंपनियों की ट्वीन बैलेंस शीट समस्या और पीएसयू बैंकों का बढ़ता एनपीए. 
आने वाला समय होगा कठिनाईयों से भरा
झा कहा कि मोदी सरकार को चाहिए कि वे अपना ध्यान भारत के निर्यात को बढ़ाने, कृषि क्षेत्र की उत्पादकता को बढ़ाने, रोजगार के नये अवसर सृजित करने, निवेश को लाने, शिक्षा-स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर केंद्रित करें.  उन्होंने कहा कि हम इस आर्थिक वर्ष की समाप्ति तक बहुत बड़ा हुआ राजकोषीय घाटा देखेंगे, क्योंकि मोदी सरकार ने रेवेन्यु स्टीमेट को बढ़ा चढ़ाकर बताया है जो कि जीडीपी ग्रोथ के साथ समरसता नहीं रखता.  झा ने आगाह करते हुए कहा कि अगर कोरोना वायरस की महामारी और अधिक बुरी अवस्था में पहुंचती है तथा तेल की कीमत बढ़ती है तो आने वाला समय भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत कठिनाईयों से भरा होगा.

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