मध्यप्रदेश के किसानों को पिछले साढ़े तीन महीनों में ही कांग्रेस सरकार की कथनी और करनी का फर्क नजर आ गया है. उन्हें यह अहसास हो गया है कि इस सरकार ने कर्जमाफी के नाम पर उन्हें ठगा है और किसानों तक उनके लिए चल रही योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचने नहीं दिया जा रहा है. प्रदेश के किसान उनके साथ हुए इस धोखे और अपमान आक्रोशित हैं और वे इसका बदला आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से लेंगे.यह बात आज मंगलवार को भारतीय जनता किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रणवीरसिंह रावत ने मीडिया से चर्चा के दौरान कही. रावत ने कहा कि उन्होंने प्रदेश के कई जिलों का दौरा किया है. इसमें सामने आया है कि सरकार ने जो कर्ज माफ किए हैं, वे छोटे कर्ज थे. इसके बावजूद जिन किसानों को कर्जमाफी का प्रमाण-पत्र जारी किया जा चुका है, उन्हें बैंकों से बकाया भुगतान करने के नोटिस मिल रहे हैं. इसके चलते किसान सदमें में हैं और आत्महत्या कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आचार संहिता के चलते हुए ही अधिकारियों पर यह दबाव बना रही है कि जिन किसानों की कर्जमाफी के प्रमाण पत्र जारी नहीं हुए हैं, उन्हें कोई ऐसा कागज भेजा जाए, जिसमें कर्जमाफी का आश्वासन हो. रावत ने कहा कि ऐसे में मुख्यमंत्री कमलनाथ का 50 लाख किसानों की कर्जमाफी का दावा अपने आप झूठा साबित हो जाता है.
वादा निभाने में असफल रही कांग्रेस सरकार
किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि किसान यह महसूस करने लगे हैं कि सरकार अपने वादे निभाने में असफल रही है और इसीलिए अब प्रदेश के किसानों का इस सरकार से विश्वास उठ गया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने किसानों को उपज का भुगतान तीन दिन के भीतर करने की बात कही थी, लेकिन सिर पर बेटी की शादी की जिम्मेदारी होने के बावजूद किसानों को भुगतान नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि गांवों में किसानों को 24 घंटे बिजली भी नहीं मिल पा रही है. रावत ने कहा कि प्रदेश सरकार केंद्र सरकार की किसान निधि सम्मान योजना में भी पात्र किसानों की सूची न भेजकर अड़ंगे लगा रही है, जिसके कारण प्रदेश के किसानों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
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