सोमवार, 8 अप्रैल 2019

भगत निर्दलीय लड़ेंगे, ज्ञानसिंह पैसों की कमी के चलते हटे मैदान से

 बालाघाट, शहडोल में थम नहीं रहा विरोध

मध्यप्रदेश में टिकट कटने से नाराज चल रहे बालाघाट के सांसद बोधसिंह भगत ने बगावती तेवर दिखा दिए हैं. भगत ने साफ कर दिया कि वे पार्टी छोड़ देंगे, मगर मैदान नहीं. वे 9 तारीख तक इंतजार करेंगे, प्रत्याशी नहीं बदला तो निर्दलीय के रुप में नामांकन भर देंगे. वहीं शहडोल से सांसद ज्ञानसिंह को भाजपा के नेता मनाने में कामयाब तो नहीं हुए, मगर पैसों के अभाव के चलते उन्होंने मैदान से हटने की बात कही है. सिंह ने चेतावनी भी दी है कि वे भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट नहीं मांगेंगे. 
मध्यप्रदेश भाजपा में टिकट कटने के बाद से सांसदों की नाराजगी कम नहीं हो रही है. बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद बोधसिंह भगत ने भाजपा संगठन की चिंता को बढ़ा दिया है. भगत टिकट कटने से नाराज है. उन्हें मनाने की हरसंभव कोशिश की गई, मगर भाजपा को अब तक सफलता हासिल नहीं हुई है. भाजपा नेताओं द्वारा मनाने के किए जा रहे प्रयासों को उस वक्त झटका लगा, जब भगत ने साफ संकेत दिए कि वे चुनाव मैदान में उतरेंगे. उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा प्रत्याशी बदलने को लेकर कोई चर्चा नहीं की जा रही है, बल्कि उन्हें मनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. भगत ने साफतौर पर कह दिया है कि अगर 9 अप्रैल तक पार्टी विचार नहीं करती है तो वे अपना नामांकन भर देंगे. उन्होंने चेतावनी दी है कि वे अकेले 100 के बराबर हैं, मैदान नहीं छोड़ेंगे, पार्टी छोड़कर चुनाव लड़ेंगे.
मोदी ने भी नहीं सुनी बात
बोधसिंह भगत को इस बात का मलाल है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी इस मुद्दे पर वे चर्चा कर चुके हैं, मगर उन्होंने भी उनकी बात पर अब तक ध्यान नहीं दिया है. बीते दिनों गोंदिया में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर बोधसिंह भगत ने अपनी पीड़ा उन्हें सुनाई थी, मगर अब तक उनकी सुनी  नहीं गई है. इसके अलावा प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा और पूर्व मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा भी भगत से चर्चा कर चुके हैं. मगर भगत की नाराजगी दूर नहीं हो रही है.
ज्ञानसिंंह ने कहा पैसों का अभाव, नहीं लडूंगा चुनाव
शहडोल से सांसद ज्ञानसिंंह भी टिकट कटने से खफा हैं, मगर अब वे मैदान से हटने की बात कह रहे हैं. ज्ञानसिंंह ने कहा कि पैसों के अभाव के चलते वे चुनाव तो नहीं लड़ेंगे, मगर भाजपा प्रत्याशी हिमाद्री सिंह के पक्ष में चुनाव प्रचार भी नहीं करेंगे. सिंह ने कहा कि उन्होंने नामांकन फार्म खरीद लिया था, इसके बाद चुनाव लड़ने के लिए संसदीय क्षेत्र में दौरा करके कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं से आर्थिक मदद भी मांगी थी, मगर पर्याप्त सहयोग नहीं मिला है. इसके चलते उन्होंने चुनाव मैदान से हटने का फैसला किया है. सिंह ने साफ कहा कि वे भाजपा प्रत्याशी हिमाद्री सिंह का समर्थन नहीं करेंगे,  ही उनके लिए क्षेत्र में वोट मांगने जाएंगे.

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