भाजपा ने घोषित किए चार प्रत्याशी, सक्रिय हुई प्रज्ञा, शिवराज के साथ विधायकों से की चर्चामध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने आज चार प्रत्याशियों की घोषणा कर दी. भोपाल से दिग्विजय सिंह के खिलाफ प्रज्ञा सिंह ठाकुर को मैदान में उतारा है, जबकि इंदौर पर अब भी मंथन जारी है. इस सीट पर फैसला नहीं हुआ है.
लंबे समय से भोपाल संसदीय क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी को लेकर चल रहा संशय आज खत्म हो गया. भाजपा कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह को घेरने के लिए हिन्दू कार्ड खेला और संघ की प्रज्ञा सिंह ठाकुर को मैदान में उतार दिया है. प्रज्ञा के अलावा भाजपा ने विदिशा से रमाकांत भार्गव, गुना से डा. के.पी.यादव और सागर से राज बहादुर सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है. वहीं इंदौर सीट पर अभी फैसला नहीं हो पाया. इंदौर सीट पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के चुनाव न लड़ने के बाद आज कैलाश विजयवर्गीय ने भी चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया. उन्होंने ट्वीट कर अपना फैसला सुनाया है.
उल्लेखनीय है कि इंदौर में सुमित्रा महाजन अपने समर्थक को टिकट दिलाना चाहती थी, जबकि कैलाश विजयवर्गीय भी यहां से मैदान में उतारना चाह रहे थे, जब दोनों के बीच मामला गर्माया और प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में विलंब होता नजर आया तो ताई के बाद आज कैलाश विजयवर्गीय ने भी चुनाव लड़ने से मना कर दिया.
घोषणा से पहले ली सदस्यता
प्रज्ञा सिंह ठाकुर वैसे तो भोपाल से अपने नाम की घोषणा को लेकर कल मंगलवार से आश्वस्त थी. इसके चलते आज सुबह वे प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंची. उनके साथ उनके समर्थक भी थे. भाजपा कार्यालय में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान, प्रभात झा, जयभान सिंह पवैया, नरोत्तम मिश्रा सहित अन्य नेताओं ने मुलाकात की. इस दौरान प्रज्ञा ठाकुर ने भाजपा की सदस्यता ली.
अब शुरु हुआ धर्मयुद्ध
भाजपा कार्यालय पहुंची प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि अब राजनीति में धर्मयुद्ध शुरु हुआ है. वे भाजपा के साथ मिलकर राष्ट्र के विरूद्ध जो षडयंत्र रचने का काम करे रहे हैं, उनके खिलाफ एकजुट होकर काम करेंगी.
कौन है प्रज्ञा सिंह ठाकुर
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर मध्यप्रदेश के भिंड में जन्मी थी. उनके पिता आयुर्वेद चिकित्सक थे. वे संघ से जुड़े थे. पिता की वजह से प्रज्ञा का संघ के प्रति बचपन से ही जुड़ाव रहा. वे एबीवीपी और दुगार्वाहिनी जैसे भाजपा के अनुषांगिक संगठनों से जुड़ी रह चुकी हैं और उनकी छवि कट्टर हिंदवादी के तौर पर रही है. वे शुरु से ही अपनी तेज तर्रार शैली के लिए पहचानी जाती थी. छात्र राजनीति से जुड़े रहते हुए उन्होंने दिग्विजय सिंह पर जमकर हमला बोलती रही हैं. वे पहली बार तब चर्चा में आई, जब साल 2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में वो 9 साल जेल में बंद रहीं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं. जमानत पर बाहर आने के बाद साध्वी ने कई इंटरव्यू में पूछताछ के दौरान दी गई यातनाओं का जिक्र किया था. साध्वी प्रज्ञा ने उस वक्त तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम के खिलाफ ये आरोप लगाया था कि उन्होंने देश में 'हिंदू आतंकवाद' का जुमला गढ़ा और इसे साबित करने के लिए उन्हें झूठे केस में फंसाया था.
चलता रहा बैठकों का दौर
प्रज्ञा ठाकुर के नाम की घोषणा होते ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में बैठकों का दौर शुरु कर दिया. इस बैठक में खुद प्रज्ञा ठाकुर भी शामिल हुई. बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा के अलावा भोपाल के सभी भाजपा विधायक कृष्णा गौर, रामेश्वर शर्मा, महापौर आलोक शर्मा और भाजपा पदाधिकारी उपस्थित रहे. बैठक में चुनाव को लेकर रणनीति तय की जाती रही. साथ ही विधायकों को उनके विधानसभा क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाने को कहा गया.
एक नजर भोपाल संसदीय क्षेत्र पर
* भोपाल संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभाएं भोपाल उत्तर, भोपाल दक्षिण, भोपाल मध्य, हुजूर, नरेला, गोविंदपुरा, बैरसिया और सीहोर आती हैं.
* वर्तमान में हुजूर, नरेला, बैरसिया, सीहोर और गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र पर भाजपा का कब्जा है.
* 1989 के बाद से भोपाल संसदीय क्षेत्र पर भाजपा का कब्जा है. 1989 में इस सीट पर सुशील चंद वर्मा जीते थे. इसके बाद वे लगातार 1998 जीतते रहे. इसके बाद 1999 के लोकसभा चुनाव में उमा भारती यहां से मैदान में उतरी और जीती. इसके बाद 2004 से 2014 तक कैलाश जोशी यहां से सांसद रहे. 2014 में इस सीट पर आलोक संजर को भाजपा ने मैदान में उतारा और संजर इस सीट विजय पाने में सफल रहे थे.
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