रविवार, 21 अप्रैल 2019

तोमर को टक्कर देंगे हरियाणा के पूर्व मंत्री भड़ाना

 बसपा ने खेला दाव, जातिगत समीकरणों ने बना देगा त्रिकोणीय मुकाबला
मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव में  बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने गठबंधन के तहत मुरैना संसदीय क्षेत्र में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को चुनौती देने के लिए हरियाणा के पूर्व मंत्री करतार सिंह भड़ाना को मैदान में उतारा है. भड़ाना के मुरैना से चुनाव मैदान में उतरने से यहां त्रिकाणीय मुकाबला होने की पूरी संभावना है.
 दूसरे राज्य से आकर मध्यप्रदेश में चुनाव लड़ने का सिलसिला भाजपा द्वारा शुरु किया गया, जिसे अब बसपा ने आगे बढ़ाया है. प्रदेश की विदिशा संसदीय सीट पर भाजपा द्वारा कई बार चुनाव में बाहरी प्रत्याशी को उतारा जाता रहा है, इसके पीछे यह कारण है कि यह सीट भाजपा का गढ़ रही है. इसी परंपरा को अब बसपा ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्र मुरैरा संसदीय क्षेत्र में आगे बढ़ाया है. बसपा ने यहां पर पूर्व घोषित प्रत्याशी डा. रामलखन सिंह के स्थान पर हरियाणा के पूर्व मंत्री करतार सिंह भड़ाना को मैदान में उतारने का फैसला लिया है. भड़ाना कल सोमवार को अपना नामांकन भरेंगे. उनके मैदान में उतरने से यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है. भाजपा ने यहां केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता रामनिवास रावत को प्रत्याशी बनाया है. बसपा ने यहां जातिगत गणित के तहत गुर्जर समाज के भड़ाना को मैदान में उतारा है. मुरैना में अजा, अजजा वर्ग के करीब साढ़े चार लाख मतदाता है, इसके अलवा गुर्जर समाज के मतदाताओें की संख्या डेढ़ लाख है. इस लिहाज से जातिगत समीकरण बैठाते हुए बसपा ने डा. रामलखन सिंह जो की ठाकुर समाज से आते थे, उन्हें हटाकर भड़ाना को मैदान में उतारा है. अब यहां पर मुकाबला रोचक हो गया है. भड़ाना पूरी ताकत और अपनी टीम के साथ मुरैना पहुंच गए हैं. वे कल सोमवार को नामांकन भरेंगे.
न मतदाता जानते न ही चेहरा देखा
करतार सिंह भड़ाना को बसपा ने अपने संगठन के भरोसे मैदान में उतारा है, मगर वे मतदाता के बीच अनजान चेहरा साबित होंगे. यहां के मतदाता न तो उन्हें पहचानते हैं और न ही उनका चेहरा ही देखा है. मगर बसपा पदाधिकारी कहते हैं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. भड़ाना के लिए प्रदेश और मुरैना संसदीय क्षेत्र के बसपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी काम कर रहे हैं, इसके अलावा सपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उनके समर्थन में मैदान में होंगे. बसपा और सपा का जो वोट बैंक है उसके अलावा भड़ाना को गुर्जर समाज का खासा समर्थन मिलेगा, जिससे केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है.

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