ई-टेंडरिंग घोटाले में आस्मो कंपनी पहुंची ईओडब्ल्यू की टीम, भाजपा हुई हमलावर
मध्यप्रदेश में आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) द्वारा ई-टेंडरिंग घोटाले में एफआईआर दर्ज करने के बाद कार्रवाई तेज हो गई है. ईओडब्ल्यू की एक टीम आज राजधानी स्थित आस्मो कंपनी के कार्यालय भी पहुंची और वहां पर जांच शुरु कर दी. वहीं इस कार्रवाई को लेकर भाजपा हमलावर हो गई है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने सरकार की इस कार्रवाई को द्वेषपूर्ण बताया और उसका स्वागत भी किया. वहीं पूर्व मंत्री कुसुम महदेले ने अपने को बचाते हुए पूरे मामले के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दोषी करार दिया है.
आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) द्वारा ई-टेंडरिंग घोटाले में बुधवार को एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद राजनीति गर्मा गई है. ईओडब्ल्यू ने इस मामले में कार्रवाई तेज कर दी है. सूत्रों के अनुसार आज घोटाले के 3 आरोपियों को हिरासत में भी लिया गया है. बताया जाता है कि तीनों ने पूछताछ में यह कबूला है कि ई-टेंडर में टेम्परिंग की गई थी. तीनों ने बताया कि बंगलुरू की गेटवे से ये टेम्परिंग की गई थी. आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, जल्द ही इन और भी जानकारी हासिल होने की बात कही जा रही है. ईओडब्ल्यू की एक टीम आज मानसरोवर काम्प्लेक्स स्थित आस्मो कंपनी के कार्यालय पहुंची. टीम ने यहां आस्मो कंपनी के कार्यालय में कंपनी के ई-टेंडरिंंग से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई.
शिवराज ने दी थी मंजूरी
ई-टेंडरिंग घोटाले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर पूर्व मंत्री कुसुम महदेले ने भी हमला किया है. उन्होंने इस घोटाले को लेकर कहा कि उन्होंने यह मंजूरी नहीं दी थी, बल्कि इस फाईल को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंजूरी दी थी. उन्होंने कहा कि यह टेंडर पीएचई विभाग से नहीं,बल्कि जल निगम से जारी हुआ था. उन्होंने कहा कि जल निगम के अध्यक्ष शिवराज सिंह थे और उन्होंने पीएचई, ग्रामीण विकास मंत्री और एक अन्य मंत्री को निगम का उपाध्यक्ष बनाया था. उन्होंने कहा कि जल निगम की किसी भी फाइल पर उनके हस्ताक्षर नहीं है.
द्वेषपूर्ण है कार्रवाई
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि सरकार की इस कार्रवाई का हम स्वागत करते हैं, लेकिन सरकार को इससे कुछ हासिल होने वाला नहीं है. सरकार ने यह कार्रवाई द्वेषपूर्ण तरीके से की है. उन्होंने कहा कि पिछले दिनों मध्य प्रदेश में पड़े आयकर छापों पर राकेश सिंह का कहना है कि आयकर विभाग ने अपने इनपुट के आधार पर कार्रवाई की और जगह-जगह छापा मारा, उन छापों में काफी कुछ बरामद भी हुआ.
ये केवल दबाव की राजनीति
पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि ये केवल बदले और दवाब की राजनीति है. प्रदेश में हाल ही में पड़े आयकर के छापे में जो कुछ हुआ वो सबके सामने है. आयकर छापों के बदले में ई टेंडर मामला उछाला जा रहा है. उन्होंने कहा कमलनाथ सरकार सबसे पहले घोटाले शब्द की व्याख्या करे. यहां जब पैसे का कोई लेनदेने ही नहीं हुआ तो घोटाला किस बात का. मिश्रा के अलावा अन्य नेताओं ने बयान जारी कर सरकार पर द्वेषपूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाया है.
मध्यप्रदेश में आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) द्वारा ई-टेंडरिंग घोटाले में एफआईआर दर्ज करने के बाद कार्रवाई तेज हो गई है. ईओडब्ल्यू की एक टीम आज राजधानी स्थित आस्मो कंपनी के कार्यालय भी पहुंची और वहां पर जांच शुरु कर दी. वहीं इस कार्रवाई को लेकर भाजपा हमलावर हो गई है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने सरकार की इस कार्रवाई को द्वेषपूर्ण बताया और उसका स्वागत भी किया. वहीं पूर्व मंत्री कुसुम महदेले ने अपने को बचाते हुए पूरे मामले के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दोषी करार दिया है.
आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) द्वारा ई-टेंडरिंग घोटाले में बुधवार को एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद राजनीति गर्मा गई है. ईओडब्ल्यू ने इस मामले में कार्रवाई तेज कर दी है. सूत्रों के अनुसार आज घोटाले के 3 आरोपियों को हिरासत में भी लिया गया है. बताया जाता है कि तीनों ने पूछताछ में यह कबूला है कि ई-टेंडर में टेम्परिंग की गई थी. तीनों ने बताया कि बंगलुरू की गेटवे से ये टेम्परिंग की गई थी. आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, जल्द ही इन और भी जानकारी हासिल होने की बात कही जा रही है. ईओडब्ल्यू की एक टीम आज मानसरोवर काम्प्लेक्स स्थित आस्मो कंपनी के कार्यालय पहुंची. टीम ने यहां आस्मो कंपनी के कार्यालय में कंपनी के ई-टेंडरिंंग से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई.
शिवराज ने दी थी मंजूरी
ई-टेंडरिंग घोटाले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर पूर्व मंत्री कुसुम महदेले ने भी हमला किया है. उन्होंने इस घोटाले को लेकर कहा कि उन्होंने यह मंजूरी नहीं दी थी, बल्कि इस फाईल को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंजूरी दी थी. उन्होंने कहा कि यह टेंडर पीएचई विभाग से नहीं,बल्कि जल निगम से जारी हुआ था. उन्होंने कहा कि जल निगम के अध्यक्ष शिवराज सिंह थे और उन्होंने पीएचई, ग्रामीण विकास मंत्री और एक अन्य मंत्री को निगम का उपाध्यक्ष बनाया था. उन्होंने कहा कि जल निगम की किसी भी फाइल पर उनके हस्ताक्षर नहीं है.
द्वेषपूर्ण है कार्रवाई
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि सरकार की इस कार्रवाई का हम स्वागत करते हैं, लेकिन सरकार को इससे कुछ हासिल होने वाला नहीं है. सरकार ने यह कार्रवाई द्वेषपूर्ण तरीके से की है. उन्होंने कहा कि पिछले दिनों मध्य प्रदेश में पड़े आयकर छापों पर राकेश सिंह का कहना है कि आयकर विभाग ने अपने इनपुट के आधार पर कार्रवाई की और जगह-जगह छापा मारा, उन छापों में काफी कुछ बरामद भी हुआ.
ये केवल दबाव की राजनीति
पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि ये केवल बदले और दवाब की राजनीति है. प्रदेश में हाल ही में पड़े आयकर के छापे में जो कुछ हुआ वो सबके सामने है. आयकर छापों के बदले में ई टेंडर मामला उछाला जा रहा है. उन्होंने कहा कमलनाथ सरकार सबसे पहले घोटाले शब्द की व्याख्या करे. यहां जब पैसे का कोई लेनदेने ही नहीं हुआ तो घोटाला किस बात का. मिश्रा के अलावा अन्य नेताओं ने बयान जारी कर सरकार पर द्वेषपूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाया है.
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